
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि आदिशंकराचार्य ने भारतीय पहचान स्थापित की और सनातन ध्वज चारों दिशाओं में बुलंद किया। शाह ने यह बात आदिशंकराचार्य की ‘ग्रंथावली’ (गुजराती में प्रकाशित) लॉन्च करने के बाद की सभा में कही। उन्होंने कहा कि यह 15 खंडों में प्रकाशित ग्रंथावली गुजरात के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और उनके जीवन और कार्य पर गहरा प्रभाव डालेगी। अमित शाह ने कहा इन ग्रंथों में आप उस समय के समाज में उठ रहे सभी प्रश्नों के समाधान पाएंगे। उन्होंने आदिशंकराचार्य की यात्रा और योगदान को याद करते हुए कहा कि बहुत कम लोग इतने कम जीवन में इतना बड़ा योगदान दे पाते हैं। आदिशंकराचार्य पैदल पूरे देश में घूमे और उन्हें चलती-फिरती विश्वविद्यालय कहा जा सकता है।
शंकराचार्य ने भारतीय पहचान की स्थापना की
शाह ने बताया कि उन्होंने केवल यात्रा ही नहीं की, बल्कि चारों दिशाओं में मठ स्थापित किए, ज्ञान केंद्र बनाए और सनातन धर्म का झंडा ऊंचा रखा। उन्होंने कहा कि आदिशंकराचार्य के मठ सिर्फ धार्मिक केंद्र नहीं बने, बल्कि उन्होंने वेदों का वितरण और संरक्षण सुनिश्चित किया, ताकि ज्ञान की परंपरा स्थायी रूप से संरक्षित और प्रसारित हो। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारतीय पहचान की स्थापना की, और सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म का ध्वज चारों दिशाओं में ऊंचा लहराए।
संपादन गौतम पटेल ने किया
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि अपने जीवनकाल में आदिशंकराचार्य ने बौद्ध, जैन, कपालिक और तांत्रिक परंपराओं के उदय के बीच सनातन धर्म से जुड़े प्रश्नों और शंकाओं का तार्किक उत्तर दिया। शाह ने आगे कहा आदिशंकराचार्य ने केवल विचार नहीं दिए, बल्कि भारत को विचारों का संलयन, ज्ञान का स्वरूप और मोक्ष का मार्ग भी दिखाया। इस ग्रंथावली का प्रकाशन सास्तु साहित्य मुद्रालय ट्रस्ट द्वारा किया गया है और संपादन गौतम पटेल ने किया है।