सरिता साहनी
29 दिसम्बर, 2025
देहरादून की घटना पर कांग्रेस ने जताया गहरा शोक
देहरादून में नस्लीय हमले में त्रिपुरा के 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की हत्या को लेकर कांग्रेस ने गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। पार्टी ने इस जघन्य घटना को मानवता और भारतीय मूल्यों पर हमला बताते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ एक छात्र की हत्या नहीं है, बल्कि देश की एकता और विविधता पर चोट है।
नॉर्थ ईस्ट के लोग भारतीय हैं, चीनी नहीं
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता और असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने इस घटना पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने एंजेल चकमा के अंतिम शब्दों को याद करते हुए कहा, मैं भारतीय हूं, मैं चीन से नहीं आया हूं। गौरव गोगोई ने साफ शब्दों में कहा कि नॉर्थ ईस्ट के लोग भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्हें बार-बार अपनी भारतीयता साबित करने के लिए मजबूर करना बेहद शर्मनाक और दुखद है।
पढ़ाई के लिए गया था छात्र, वापस लौटी लाश
गौरव गोगोई ने बताया कि 9 दिसंबर को एंजेल चकमा अपने भाई के साथ देहरादून के एक बाजार में गया था। वहां कुछ लोगों ने उसे ‘चीनी’ कहकर अपमानित किया। जब एंजेल ने विरोध करते हुए कहा कि वह भारतीय है और चीनी नहीं है, तो पीछे से पांच लोगों ने उस पर हमला कर दिया। एंजेल ने 14 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया, लेकिन आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। गोगोई ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट के युवा देश के अलग-अलग हिस्सों में पढ़ाई करने जाते हैं, ताकि आगे बढ़ सकें। एंजेल भी इसी सपने के साथ देहरादून गया था, लेकिन उसे अपनी जान गंवानी पड़ी।
एफआईआर में देरी और आरोपी की फरारी पर सवाल
कांग्रेस नेता ने इस मामले में स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने एंजेल चकमा के परिजनों के हवाले से कहा कि घटना के करीब 12 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई। छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद ही प्रशासन हरकत में आया।
उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी अब भी फरार है, जबकि चार अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई है। कांग्रेस की मांग है कि मुख्य आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
व्यवस्था और सोच पर मंथन जरूरी
गौरव गोगोई ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी एक राज्य या समाज को दोष देने का नहीं है। यह हमारी व्यवस्था और सामाजिक सोच पर आत्ममंथन करने का समय है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश के अलग-अलग हिस्सों में नॉर्थ ईस्ट के युवाओं के साथ पुलिस थानों में भी इसी तरह का व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सोचना जरूरी है कि क्या हम अपने बच्चों को भारत की विविधता और एकता का सही अर्थ समझा पा रहे हैं या नहीं।
वन इंडिया की बात, लेकिन विविधता पर चुप्पी मोदी सरकार पर हमला
मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए गौरव गोगोई ने कहा कि मौजूदा सरकार वन इंडिया की बात तो करती है, लेकिन भारत की विविधताओं पर चुप्पी साध लेती है। उन्होंने असम के कारबी आंगलोंग क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के मूल निवासियों को भी बाहरी कहा जा रहा है। यह सोच देश को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रही है।
नॉर्थ ईस्ट को समझने और जानने की जरूरत
गौरव गोगोई ने सुझाव दिया कि देश के बाकी हिस्सों के लोगों को नॉर्थ ईस्ट के इतिहास, संस्कृति और पर्यटन से परिचित कराया जाना चाहिए। उन्होंने त्रिपुरा के ऊनाकोटी में स्थित प्राचीन शिव मंदिरों और असम की वीरांगना शहीद कनकलता बरुआ का उदाहरण देते हुए कहा कि नॉर्थ ईस्ट भारत की संस्कृति और इतिहास का अहम हिस्सा है।
न्याय और सम्मान की मांग पर अडिग कांग्रेस
कांग्रेस ने साफ कहा कि एंजेल चकमा को न्याय दिलाना और नॉर्थ ईस्ट के युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। पार्टी ने मांग की कि दोषियों को सख्त सजा मिले, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। कांग्रेस का कहना है कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में है और हर भारतीय, चाहे वह किसी भी राज्य या क्षेत्र से हो, सम्मान और सुरक्षा का हकदार है।