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कर्नाटक में जानवरों और इंसान के बीच टकराव की खबरें तेजी से सामने आ रही हैं। जिसे लेकर सिद्धारमैया सरकार गंभीर है। राज्य के वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने के लिए उपाय तेज किए गए हैं। आंकड़ों की बात करें तो एक साल के भीतर 14 बाघ और 30 से अधिक लोगों की जान गई है। वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने शुक्रवार (09 जनवरी) को कहा कि राज्य सरकार ने तालमेल वाले एक्शन, टेक्नोलॉजी-आधारित मॉनिटरिंग और तेजी से प्रतिक्रिया वाले तरीकों से इंसान-वन्यजीव संघर्ष, खासकर हाथियों और भेड़ियों से जुड़ी घटनाओं से निपटने के लिए कोशिशें तेज कर दी.

प्रणालियों को मजबूत किया
हक्की हब्बा’ (पक्षी उत्सव) कार्यक्रम के लिए पिलिकुला निसर्गधाम के दौरे आए ईश्वर खंड्रे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वन विभाग संवेदनशील इलाकों में लोगों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक उपाय लागू कर रहा है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि वन्यजीवों से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में कर्नाटक का वन प्रशासन देश में सबसे अधिक सक्रिय है। वन मंत्री ने कहा कि प्राथमिकता इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष को रोकना है। जहां भी बस्तियों के पास जानवर मौजूद हैं, हमने उनकी सुरक्षा के साथ-साथ निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए योजनाएं बनाई हैं। वहीं तटीय और अंदरूनी कर्नाटक के कुछ हिस्सों में हाथियों की बार-बार आवाजाही का जिक्र करते हुए ईश्वर खंड्रे ने कहा कि राज्य ने एक हाथी टास्क फोर्स शुरू की है और जमीनी स्तर पर प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत किया है।

प्रतिनिधियों ने विशिष्ट चिंताएं जताई
उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने विशिष्ट चिंताएं जताई हैं, जिसके चलते लक्षित हस्तक्षेप किए जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि बेंगलुरु में स्थित एक समर्पित हेल्पलाइन और कमांड सेंटर संकटकालीन कॉलों की निगरानी करते हैं और प्रतिक्रियाओं का समन्वय करते हैं। खांड्रे ने कहा, ‘सूचना मिलते ही इसे संबंधित रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर, डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट को भेज दिया जाता है। इसके बाद टीमों को घटनास्थल पर भेजा जाता है ताकि स्थिति का आकलन किया जा सके और उचित कार्रवाई की जा सके।’ मंत्री ने कहा कि कमांड सेंटर प्रतिक्रिया समयसीमा और जवाबदेही की भी समीक्षा करता है। उन्होंने कहा, ‘हम यह पता लगा सकते हैं कि सूचना कब प्राप्त हुई, अधिकारियों ने कितनी जल्दी प्रतिक्रिया दी और क्या कोई चूक हुई थी। इससे पारदर्शिता और सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित होती है।’ खांड्रे ने आगे कहा कि सरकार संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में तैयारियों को बेहतर बनाने के लिए अग्रिम पंक्ति के वन कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाओं की योजना भी बना रही है।

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