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राज्यसभा के सांसद कपिल सिब्बल ने रविवार को भाजपा के चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा उन राज्यों में, जहां वह सत्ता में नहीं है या बहुमत में नहीं है, वहां अपनी राजनीति के तहत दूसरे राजनीतिक दलों से गठबंधन करती है, सत्ता में आती है और फिर उन गठबंधन सहयोगियों को कमजोर कर देती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में सिब्बल ने भाजपा की राजनीति और रणनीति पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जिन राज्यों में वे सत्ता में नहीं होते या बहुमत में नहीं होते, वहां अन्य दलों से गठबंधन कर सत्ता में आते हैं और फिर उन्हें हाशिए पर डाल देते हैं। सिब्बल ने यह भी कहा कि यह रणनीति बिहार में सफल रही थी और अब महाराष्ट्र में भी इसका पालन किया जा रहा है।

89 सीटें जीतकर उद्धव ठाकरे के परिवार की तीन दशकों पुरानी सत्ता को चुनौती
कपिल सिब्बल का आरोप है कि भाजपा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अपने गठबंधन सहयोगियों को कमजोर कर देती है। इसका उदाहरण बिहार और अब महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है, जहां भाजपा ने गठबंधन के बाद धीरे-धीरे अपने सहयोगियों को हाशिये पर डाल दिया। बता दें कि महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 29 निगमों पर 15 जनवरी को मतदान हुए, जिसमें भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में भाजपा ने 227 सीटों में से 89 सीटें जीतकर उद्धव ठाकरे के परिवार की तीन दशकों पुरानी सत्ता को चुनौती दी। वहीं, शिवसेना के सहयोगी दल, शिवसेना (शिंदे गुट) ने 29 सीटें जीतीं।

छोटे दलों ने भी कुछ सीटों पर विजय प्राप्त
इसके अलावा, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) को 65 सीटें मिलीं। इतना ही नहीं महाराष्ट्र के अन्य नगर निगमों में भी भाजपा ने जोरदार प्रदर्शन किया। नवी मुंबई में भाजपा ने 65 सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं पुणे में उसे 119 सीटें मिलीं, नागपुर में 102, और ठाणे में भी भाजपा ने बहुमत प्राप्त किया। कांग्रेस पार्टी ने चुनावी दौड़ में थोड़ी सुस्ती दिखाई, लेकिन फिर भी कुछ क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनायी। पार्टी ने भिवंडी में 30 सीटें, चंद्रपुर में 27 सीटें और लातूर में 43 सीटें जीतीं। इसी तरह, एनसीपी (अजीत पवार गुट) ने पुणे में 27 सीटें जीतीं, जबकि अन्य छोटे दलों ने भी कुछ सीटों पर विजय प्राप्त की।

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