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सरिता साहनी
26 
दिसंबर 2025 ,नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी ने भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम द्वारा स्टैंडिंग कमेटी में पेश किए गए बजट को पूरी तरह कागजी और हवा-हवाई बताते हुएतीखा हमला बोला है। सदन में बजट पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा बजट में बड़ी-बड़ीउपलब्धियों का दावा कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि इस बजट का आम जनता, छात्रों, कर्मचारियों और मरीजों की ज़िंदगी पर कोई ठोस असरनहीं दिख रहा।

छात्रवृत्ति के नाम पर सिर्फ घोषणाएं, पैसा खर्च ही नहीं हुआ
अंकुश नारंग ने कहा कि 2024-25 के बजट में छात्रवृत्ति के लिए प्रावधान किया गया था, लेकिन पूरे साल में एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ। यहबेहद गंभीर मामला है, क्योंकि निगम स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राएं इस सहायता पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं इस बारभी छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति से वंचित न रह जाएं। उन्होंने बताया कि 2025-26 और 2026-27 के लिए फिर से 50 करोड़ रुपये और छात्राओं कीछात्रवृत्ति के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन जब पिछले साल पैसा खर्च ही नहीं हुआ, तो नए प्रावधान का क्या मतलब है।यह बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल बनकर रह गया है।

ढाई लाख बच्चे आज भी यूनिफॉर्म और स्टेशनरी से वंचित
अंकुश नारंग ने कहा कि निगम स्कूलों में कुल 6.58 लाख छात्र पढ़ते हैं, लेकिन अभी तक सिर्फ 4.26 लाख छात्रों को ही यूनिफॉर्म, स्टेशनरी औरस्कूल बैग के लिए डीबीटी के जरिए पैसा मिला है। करीब ढाई लाख बच्चे आज भी इस सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बजटमौजूद है, तो बच्चों तक इसका लाभ क्यों नहीं पहुंच रहा। यह सीधे तौर पर शिक्षा के अधिकार के साथ खिलवाड़ है।

डॉग बाइट की घटनाएं जारी, फिर कैसी उपलब्धि?
अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा शासित एमसीडी 54,623 आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है। लेकिनदिल्ली की सड़कों पर आज भी डॉग बाइट की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर नसबंदी और टीकाकरण सही तरीके से हुआहोता, तो लोगों को आए दिन कुत्तों के काटने की घटनाओं का सामना नहीं करना पड़ता। सिर्फ आंकड़े गिनाने से समस्या खत्म नहीं होती।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर सिर्फ बोर्ड तक सीमित
अंकुश नारंग ने कहा कि दिल्ली में 53 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की बात की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि इनमें न तो नियमित डॉक्टर हैं, नपर्याप्त दवाइयां और न ही जांच की सुविधाएं। उन्होंने कहा कि सिर्फ दीवार पर बोर्ड लगा देने से स्वास्थ्य सेवा मजबूत नहीं हो जाती। जब मरीज कोइलाज के लिए भटकना पड़े, तो ऐसी योजनाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता।

वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट घोषणाएं ज्यादा, काम कम
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नरेला-बवाना, ओखला और गाजीपुर में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स की क्षमता बढ़ाने की बात कही जा रही है, लेकिन सवाल यहहै कि जिन प्लांट्स की आधारशिला पहले रखी गई थी, वे आज तक कितने चालू हुए। उन्होंने कहा कि कूड़े की समस्या जस की तस बनी हुई है औरसरकार सिर्फ नई घोषणाओं में व्यस्त है।

आवारा पशु और स्ट्रीट लाइट की बदहाल स्थिति
अंकुश नारंग ने बताया कि 6,374 मवेशियों को गौशालाओं में भेजने का दावा किया गया है, लेकिन इसके बावजूद सड़कों पर आवारा पशु खुलेआमघूम रहे हैं और दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। वहीं, चार ज़ोन में करीब 3.97 लाख स्ट्रीट लाइटों के संचालन और रख-रखाव पर 592 करोड़ रुपयेखर्च करने की बात कही जा रही है, लेकिन आज भी कई कॉलोनियों और गलियों में महीनों तक स्ट्रीट लाइटें खराब रहती हैं। उन्होंने कहा कि इतनाबड़ा बजट होने के बावजूद अंधेरा कायम है।

महंगी पार्किंग से जनता परेशान
अंकुश नारंग ने कहा कि दिल्ली के लोग आज महंगी पार्किंग और मनमानी वसूली से बेहद परेशान हैं। ग्रेटर कैलाश के एम-ब्लॉक में करोड़ों रुपये सेबनी शटल पार्किंग हो या पंजाबी बाग में बनी मल्टी-लेवल पार्किंग, इनसे न तो जाम कम हुआ और न ही अवैध पार्किंग पर लगाम लगी। उन्होंने पूछाकि भाजपा शासित एमसीडी आखिर लोगों को महंगी पार्किंग से कब राहत देगी।

कर्मचारियों का वेतन देना उपलब्धि नहीं, जिम्मेदारी है
अंकुश नारंग ने कहा कि कर्मचारियों का वेतन और पेंशन हर महीने समय पर देना कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि निगम की बुनियादी जिम्मेदारी है। पिछलेवर्षों में वेतन और पेंशन में देरी के कारण कर्मचारियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। उन्होंने मांग की कि निगम की वित्तीय स्थिति की स्वतंत्र ऑडिटरिपोर्ट स्टैंडिंग कमेटी के सामने रखी जाए और डबल एंट्री सिस्टम की पूरी जांच हो।

संपत्ति कर और भवन विभाग में अव्यवस्था कायम
अंत में अंकुश नारंग ने कहा कि संपत्ति कर विभाग आज भी अव्यवस्था और प्रशासनिक विफलताओं से जूझ रहा है। 30 सितंबर 2025 तक2269.51 करोड़ रुपये कर संग्रह और 30 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया गया है, लेकिन यह साफ किया जाए कि यह वृद्धि नए करदाताओं से आई यापुराने करदाताओं से जबरन वसूली का नतीजा है। उन्होंने मांग की कि भवन विभाग की सभी ऑनलाइन प्रणालियों और नीतियों की स्वतंत्र समीक्षाकराई जाए, ताकि जनता को सही और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।

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