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नई दिल्ली, 7 मार्च 2026

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित टेक्नोपार्क में आईटी पेशेवरों और उद्यमियों के साथ संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि भारत का डेटा दुनिया में सबसे कीमती संपत्तियों में से एक है, लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार इसे व्यापार समझौतों के माध्यम से अमेरिका को सौंपने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर बातचीत करते समय अपनी ताकत और संसाधनों को समझना चाहिए और उसी के आधार पर मजबूत नीतियां बनानी चाहिए। अगर देश सही नीतियों और दूरदृष्टि के साथ आगे बढ़े तो भारत चीन जैसे बड़े आर्थिक शक्ति से भी मुकाबला कर सकता है।

भारत के पास प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं
संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में से है जहां प्रतिभाशाली युवाओं की बहुत बड़ी संख्या है। देश के पास मजबूत इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा व्यवस्था है, जो विश्व स्तर पर भी अपनी पहचान रखती है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता भी उसकी सबसे बड़ी ताकत है। अलग-अलग संस्कृतियों, भाषाओं और विचारों के बावजूद देश एक साथ आगे बढ़ रहा है। अगर इन ताकतों का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो भारत दुनिया में एक मजबूत औद्योगिक और आर्थिक शक्ति बन सकता है।

सही नीतियों से भारत चीन का मुकाबला कर सकता है
राहुल गांधी ने कहा कि आज दुनिया की अर्थव्यवस्था में चीन का बड़ा प्रभाव है। कई बड़े उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्रों में चीन का दबदबा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत उसके साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अगर भारत सही नीतियां अपनाए, उद्योगों को बढ़ावा दे और युवाओं को अवसर दे, तो आने वाले समय में भारत चीन के साथ बराबरी का मुकाबला कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि सरकार दीर्घकालिक सोच और स्पष्ट रणनीति के साथ काम करे।

देश की अर्थव्यवस्था कुछ बड़े उद्योग समूहों तक सीमित हो रही है
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि मौजूदा समय में देश की अर्थव्यवस्था कुछ बड़े व्यापारिक समूहों के हाथों में सिमटती जा रही है। उन्होंने कहा कि जब अर्थव्यवस्था में केवल कुछ ही बड़े उद्योगों का वर्चस्व होता है तो छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। इससे प्रतिस्पर्धा कम होती है और रोजगार के अवसर भी घटते हैं। उनके अनुसार कई बड़े उद्योगपति मुख्य रूप से विदेशी उत्पादों को बेचने का काम कर रहे हैं, जिससे देश के भीतर उत्पादन करने वाले छोटे उद्योगों को नुकसान हो रहा है।

जीएसटी को बताया उत्पादन विरोधी
राहुल गांधी ने वस्तु एवं सेवा कर यानी Goods and Services Tax (India) को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा जीएसटी व्यवस्था उत्पादन आधारित उद्योगों के लिए अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में रोजगार का बड़ा हिस्सा छोटे और मध्यम उद्योगों से आता है, लेकिन जीएसटी व्यवस्था के कारण इन उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। उनके अनुसार यह कर प्रणाली उन राज्यों को नुकसान पहुंचाती है जहां ज्यादा उत्पादन होता है, जबकि उन राज्यों को अपेक्षाकृत लाभ मिलता है जहां उपभोग ज्यादा है।

रोजगार उत्पादन से पैदा होते हैं, केवल उपभोग से नहीं
राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि असली और टिकाऊ रोजगार उत्पादन से पैदा होते हैं। अगर कोई देश केवल उपभोग पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाता है तो लंबे समय में रोजगार के अवसर सीमित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि आईटी क्षेत्र निश्चित रूप से नए अवसर पैदा करता है, लेकिन भारत जैसे बड़े देश में करोड़ों लोगों को रोजगार देने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत बनाना जरूरी है।

ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और जहाज निर्माण में बड़ी संभावनाएं
संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कई ऐसे उद्योगों का भी जिक्र किया जिनमें बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में लाखों लोगों को रोजगार देने की संभावना है। अगर सरकार इन क्षेत्रों को सही नीति और समर्थन दे तो भारत में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में फिलहाल चीन का औद्योगिक प्रभाव काफी मजबूत है।

दुनिया में तकनीकी प्रतिस्पर्धा का नया दौर
राहुल गांधी ने कहा कि दुनिया में औद्योगिक शक्ति का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है। पहले ब्रिटेन ने स्टीम इंजन और कोयले के जरिए औद्योगिक शक्ति हासिल की थी। इसके बाद अमेरिका ने पेट्रोलियम के जरिए वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाई। अब दुनिया में तकनीकी प्रतिस्पर्धा का केंद्र इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और ऑप्टिक्स जैसी नई तकनीकों पर आ गया है। इन क्षेत्रों में चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है।

रोजगार की कमी से समाज में बढ़ सकता है असंतोष
राहुल गांधी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर देश में पर्याप्त रोजगार नहीं पैदा होंगे तो समाज में असंतोष और टकराव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह होती है कि वह अपने नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करे। जब लोगों को काम और सम्मानजनक जीवन मिलता है तो समाज में संतुलन बना रहता है।

गरीबों की मदद को रेवड़ी कहना गलत
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अक्सर गरीबों को मिलने वाली सहायता योजनाओं को “रेवड़ी” कहकर आलोचना की जाती है। उन्होंने कहा कि जब गरीबों को सहायता दी जाती है तो उसे गलत बताया जाता है, लेकिन जब बड़े उद्योगपतियों को सस्ती जमीन, कर में छूट या कर्ज माफी दी जाती है तो उसे विकास का नाम दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक ही देश में अलग-अलग वर्गों के लिए अलग मानदंड क्यों अपनाए जाते हैं।

अगर राजनीति में नहीं होते तो एयरोस्पेस में काम करते
संवाद के दौरान एक दिलचस्प सवाल का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अगर वे राजनीति में नहीं होते तो शायद एयरोस्पेस क्षेत्र में कोई उद्यम शुरू करते। उन्होंने बताया कि वे अपने पिता और चाचा की तरह पायलट हैं और विमानन से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। उनके परिवार में उड़ान और विमानन की परंपरा भी रही है।

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