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सरिता साहनी
नई दिल्ली, 12 मार्च 2026

दिल्ली सरकार के समाज कल्याण, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि भिक्षावृत्ति जैसी सामाजिक समस्या को खत्म करने के लिए केवल सरकार के प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक संस्थाओं और समाज के सभी वर्गों का सहयोग भी बहुत जरूरी है। इसी उद्देश्य से दिल्ली सचिवालय में SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise) योजना के अंतर्गत कार्य कर रही विभिन्न गैर-सरकारी संस्थाओं (NGOs) के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। SMILE योजना के कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने उन सभी संस्थाओं के काम की समीक्षा की जो SMILE योजना के तहत भिक्षावृत्ति में शामिल लोगों के पुनर्वास और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही हैं। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि दिल्ली में भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए अब तक क्या-क्या प्रयास किए गए हैं और आगे किन कदमों की जरूरत है। बैठक में शामिल संस्थाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए कामों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में सर्वेक्षण किया गया, जिसमें सैकड़ों ऐसे लोगों से संपर्क किया गया जो भिक्षावृत्ति में लगे हुए थे। इन लोगों से बातचीत कर उनकी काउंसलिंग की गई और उन्हें भिक्षावृत्ति छोड़कर बेहतर जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

लोगों को भिक्षावृत्ति से बाहर लाने के प्रयास
NGOs ने बताया कि कई लोगों को भिक्षावृत्ति से बाहर निकालकर उन्हें पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। कुछ लोगों को शेल्टर होम में रहने की सुविधा दी गई, जबकि कई लोगों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में भी काम किया गया। इससे उन्हें सम्मानजनक तरीके से जीवन जीने का अवसर मिल रहा है। संस्थाओं ने यह भी बताया कि जिन लोगों की मदद की जा रही है उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर उनके आधार कार्ड बनवाना, बैंक खाते खुलवाना, बीमा योजनाओं से जोड़ना, नगर निगम के माध्यम से वेंडर पंजीकरण कराना और राशन कार्ड के लिए आवेदन करना जैसे कार्य किए जा रहे हैं।

बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष प्रयास
बैठक में यह भी बताया गया कि जिन परिवारों के बच्चे भिक्षावृत्ति में शामिल थे, उन्हें स्कूलों में दाखिला दिलाने की कोशिश की जा रही है ताकि उनका भविष्य बेहतर बन सके। कई बच्चों को स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में प्रवेश दिलाया गया है। इसके अलावा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, छोटे व्यवसाय और अन्य काम सीख रही हैं, जिससे वे अपनी आय बढ़ा सकें और अपने परिवार का बेहतर तरीके से पालन-पोषण कर सकें।

सफलता की कहानियाँ भी आई सामने
बैठक के दौरान कई संस्थाओं ने अपने काम की सफलता के उदाहरण भी साझा किए। उन्होंने बताया कि किस तरह कुछ लोग जो पहले सड़कों पर भीख मांगते थे, आज छोटे-छोटे व्यवसाय या स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आय अर्जित कर रहे हैं। इन उदाहरणों ने यह दिखाया कि अगर सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर दिए जाएं तो कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकता है। कई लोग अब सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं और समाज में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर मंत्री का जोर
बैठक के दौरान मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार द्वारा NGOs को जो संसाधन और सहयोग दिया जा रहा है, उसमें पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सभी संस्थाएं पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करें ताकि वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंच सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने सामाजिक संस्थाओं पर विश्वास करते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है और उनसे अपेक्षा है कि वे जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम प्रस्तुत करें।

नियमित समीक्षा और निरीक्षण की व्यवस्था
मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि सरकार इन कार्यों की नियमित समीक्षा करती रहेगी। जरूरत पड़ने पर अधिकारियों द्वारा अचानक निरीक्षण भी किया जा सकता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने NGOs से यह भी कहा कि वे अपने कार्यों की मासिक रिपोर्ट तैयार करें और अपने द्वारा किए गए पुनर्वास के मामलों तथा सफलता की कहानियों को सरकार के साथ साझा करें। इससे योजनाओं को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

देश की छवि से जुड़ा है भिक्षावृत्ति का मुद्दा
मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि भिक्षावृत्ति केवल एक सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि यह देश की छवि से भी जुड़ा हुआ विषय है। जब विदेशी पर्यटक भारत आते हैं और सड़कों पर भिक्षावृत्ति के दृश्य देखते हैं, तो इससे देश की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसलिए इस समस्या का समाधान करना केवल सरकार की ही नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास पर भी ध्यान
बैठक में मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में ट्रांसजेंडर समुदाय के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाज के इस वर्ग को भी सम्मानजनक जीवन जीने का पूरा अधिकार है और सरकार उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए काम करेगी।

पुनर्वासित बच्चों की पेंटिंग्स भेंट
बैठक के दौरान कई संस्थाओं ने अपने सर्वेक्षण और कार्यों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए। इनमें बड़ी संख्या में लोगों की पहचान, काउंसलिंग और पुनर्वास के उदाहरण शामिल थे। कुछ संस्थाओं ने लाभार्थियों की पहले और अब की स्थिति को भी दिखाया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी सहयोग और सामाजिक प्रयासों से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। इस अवसर पर पुनर्वासित बच्चों द्वारा बनाई गई सुंदर पेंटिंग्स भी मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह को भेंट की गईं, जिन्हें उन्होंने बहुत सराहा।

भिक्षामुक्त और संवेदनशील दिल्ली बनाने का लक्ष्य
अंत में मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने सभी सामाजिक संस्थाओं से अपील की कि वे इस कार्य को केवल एक परियोजना के रूप में न देखें, बल्कि इसे समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को सम्मानजनक जीवन देने के एक बड़े मिशन के रूप में आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य केवल भिक्षावृत्ति को कम करना नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर देना है। सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही दिल्ली को भिक्षामुक्त और अधिक संवेदनशील समाज बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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