
2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपनों में छिड़ी 19-20 की लड़ाई से जूझ रहे हैं। खुद को एक दूसरे से ऊपर रखने की होड़ में शामिल नेताओं ने गुट तक बना लिए हैं। लोकसभा और विधानसभा के टिकट को लेकर शुरू हुई आपसी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। इन नेताओं के सियासी विवाद की चर्चाएं लखनऊ से दिल्ली तक चर्चाओं में है। खास बात यह है कि इस खींचतान को लेकर पार्टी हाईकमान से निर्देश तक जारी हो चुके लेकिन सियासी लड़ाई है कि थमने का नाम ही नहीं ले रही। एसआईआर अभियान के जरिये राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी शुरू कर दी है। सभी दल वोट बनवाने के साथ-साथ नए वोट जोड़ने में जुटे हैं। इसके लिए कमेटियां गठित की गई हैं। इन तैयारियों के बीच राजनीतिक दल अपने नेताओं की आपसी लड़ाई से जूझ रहे हैं।
चुनाव में हार का सामना करना पड़ा
मुरादाबाद में भाजपा में कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह के बीच चल रही सियासी खींचतान को रामवीर सिंह ने जिला पंचायत के टेंडर में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर फिर से हवा दे दी है। वहीं, सपा में सांसद रुचिवीरा और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन के बीच जुबानी जंग जारी है। ऐसे ही अमरोहा से लोकसभा टिकट की दावेदारी को लेकर सामने आए कांग्रेस के पूर्व सांसद दानिश अली और पूर्व प्रदेश महासचिव सचिन चौधरी के बीच विवाद सोशल मीडिया पर चर्चाओं का विषय बना रहा। मुरादाबाद के कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की शुरुआत 2015 में पंचायत चुनाव से हुई थी। जो अब तक जारी है। 2017 के विधानसभा चुनाव में डॉ. शैफाली सिंह ने भी कुंदरकी सीट से टिकट की दावेदारी पेश की थी लेकिन टिकट रामवीर सिंह के हाथ लगा। हालांकि उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
चिवीरा को उम्मीदवार बना दिया
2011 के पंचायत चुनाव में वार्ड 21 से डॉ. शैफाली सिंह और वार्ड 31 से रामवीर सिंह की पत्नी संतोष देवी जिला पंचायत सदस्य बनीं। दोनों ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश की थी। लेकिन यहां टिकट डॉ. शैफाली सिंह के हाथ लगा। पिछले साल जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में दोनों के बीच हुई नोकझोंक मीडिया की सुर्खियां बनी थी। हाल ही में विधायक रामवीर सिंह ने जिला पंचायत के ठेके में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर डॉ. शैफाली सिंह पर निशाना साधने की कोशिश की। सपा सांसद रुचिवीरा और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन एक दूसरे पर सियासी वार का कोई माैका नहीं छोड़ते हैं। दोनों के बीच विवाद की शुरुआत 2024 के लोकसभा चुनाव से हुई थी। 2024 के चुनाव में नामांकन के बाद डॉ. एसटी हसन का टिकट काटकर सपा ने रुचिवीरा को उम्मीदवार बना दिया था। इससे नाराज पूर्व सांसद ने चुनाव से दूरी बना ली थी।