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बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही बांग्लादेश में हिंसा और अराजकता का माहौल है। हाल ही में छात्र नेता उस्मानहादी की मौत के बाद बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और अल्पसंख्यकों पर हमले की घटनाएं भी बढ़ीं। बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर भारतके पूर्व राजदूत सुरेश के गोयल ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि बांग्लादेश में कट्टरपंथ का उभार हालात को बेहद मुश्किल बना रहा है.

मोहम्मद यूनुस की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक छवि
पूर्व राजदूत ने कहा, ‘मुझे लगा था कि मोहम्मद यूनुस की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक छवि है और वे बांग्लादेश की राजनीति को बेहतर तरीके से नियंत्रितकरेंगे। लेकिन साफ है कि उनके फैसले दूसरों से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं। ये बाहरी तत्व, जिहादी तत्वों का बढ़ता प्रभाव है, जो बांग्लादेश कीराजनीति को जटिल बना रहा है। बांग्लादेश में हालात और बिगड़ रहे हैं और जितना हमने सोचा था, उससे भी ज्यादा जटिल हो रहे हैं।’ तारिक रहमानके बांग्लादेश लौटने पर पूर्व राजदूत ने कहा, ‘यह एक अच्छी बात है क्योंकि अगर बीएनपी चुनावों में हिस्सा लेती है, तो यह साबित होगा कि चुनावदेश में लोकतांत्रिक शासन की वापसी की एक सच्ची कोशिश है। लेकिन साथ ही, उन्होंने अवामी लीग पर सिर्फ इसलिए प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि वे शेख हसीना को वापस नहीं आने देना चाहते। मुझे उम्मीद है कि चुनाव मजाक नहीं बनेंगे।

राजनीतिक तनाव बढ़ गया
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान ने शनिवार को ढाका यूनिवर्सिटी का दौरा किया और भारी सुरक्षा के बीच मारेगए छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की कब्र पर दुआ की। 60 वर्षीय बीएनपी नेता ने ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल मस्जिद के पास स्थित बांग्लादेश केराष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र पर भी दुआ की। हादी को 20 दिसंबर को नजरुल इस्लाम की कब्र के बगल में दफनाया गया था। रहमानने इंकलाब मंच के प्रवक्ता हादी की कब्र पर श्रद्धांजलि दी, जिनकी इस महीने की शुरुआत में एक हमले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसघटना से फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। रहमान गुरुवार को लंदन से बांग्लादेश लौटे, जिससे 2008 में शुरूहुआ उनका लंबा स्व-निर्वासन खत्म हो गया।

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