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भागलपुर भाजपा विधायक का विवादित बयान: मुसलमानों का वोट नहीं चाहिए

भागलपुर के बिहपुर विधानसभा से भाजपा विधायक इंजीनियर शैलेंद्र ने अपने विवादित बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंनेकहा कि “हम हारना पसंद करेंगे, लेकिन मुस्लिम का वोट नहीं चाहिए।” यह बयान खासकर मुसलमानों के प्रति उनके रुख को लेकर चर्चा का विषयबन गया है। विधायक का आरोप: काम करने के बावजूद नहीं मिलता वोटशैलेंद्र ने यह भी कहा कि, “हमने दस साल में ट्रांसफार्मर और सड़कें दीं, लेकिन मुसलमानों ने हमें दस वोट तक नहीं दिए।” उनका आरोप है कि वहजितना भी काम करें, मुसलमानों से वोट नहीं मिलता। इसलिए, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “हमें मुसलमानों का वोट नहीं चाहिए।” जनसंख्या नियंत्रण पर भी टिप्पणीबीजेपी विधायक ने जनसंख्या को लेकर भी एक विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा, “हिंदू एक बच्चा पैदा करता है, जबकि मुसलमान 20 बच्चें पैदाकरते हैं। उन्हें जनसंख्या पर नियंत्रण करना चाहिए।” राजद और विपक्ष पर निशानाविधायक शैलेंद्र ने अपने बयान में राजद पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि “राजद को नष्ट करना है, क्योंकि वो राजद नहीं बल्कि मियाँ हैं।” इसकेअलावा, शैलेंद्र ने दावा किया कि 2025 में ओबीसी और हिंदू समाज ही विपक्ष को हराएगा और एनडीए की सरकार फिर से बनेगी। 2025 के चुनावों का संकेतविधायक ने यह भी कहा कि 2025 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष को धूल चटाते हुए एनडीए की सरकार बनेगी। बिहार में 2025 में विधानसभाचुनाव होंगे, और सभी राजनीतिक दल अब से ही जनता के बीच जाकर अपना जनाधार बढ़ाने में जुट गए हैं।

दिल्ली चुनाव: केजरीवाल के ताबड़तोड़ बड़े बड़े कस्मे वादे, भाजपा की बढ़ा दी चिंता ?

दिल्ली विधानसभा चुनाव फरवरी में होने की संभावना है, और इससे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जनता को लुभाने के लिएकई बड़े एलान किए हैं। चुनावी माहौल गर्म हो चुका है, और सभी पार्टियाँ अपनी तैयारियों को तेज कर रही हैं। वहीं, केजरीवाल लगातार बड़े फैसलेऔर घोषणाएँ कर रहे हैं, जिससे वह दिल्लीवासियों को आकर्षित करने की कोशिश में हैं। आम आदमी पार्टी के लिए अहम चुनावयह विधानसभा चुनाव आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल के लिए कई मायनों में खास है। केजरीवाल, जो लंबे समय से दिल्ली कीसत्ता संभाल रहे हैं, हर हाल में अपनी जीत को बरकरार रखना चाहते हैं। इस चुनाव में उनकी पार्टी की प्रतिष्ठा दांव पर है, और वह इसे लेकर पूरी तरहसे गंभीर हैं। केजरीवाल के बड़े ऐलान और बीजेपी-कांग्रेस की चिंतापिछले कुछ दिनों में, केजरीवाल ने दिल्लीवासियों के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं, जो चुनावी अभियान में उनकी ताकत को दिखाते हैं। इनघोषणाओं के बाद बीजेपी और कांग्रेस के लिए केजरीवाल की बढ़ती लोकप्रियता एक चुनौती बन सकती है। उनके तेवर और चुनावी रणनीति कोदेखकर यह साफ है कि वह इस बार दिल्ली में अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। चुनाव से पहले केजरीवाल के बड़े फैसले और घोषणाएँ उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं, और दिल्ली का आगामीचुनाव एक दिलचस्प मुकाबला बन सकता है।

भारत के किस राज्य के CM सबसे अमीर हैं? संपत्ति जानकर उड़ जाएंगे होश I

भारत के मुख्यमंत्री अपनी संपत्ति के हिसाब से काफी भिन्न हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) द्वारा जारी रिपोर्ट में बताया गया है किदेश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू हैं, जिनके पास 931 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। इसके बाद अरुणाचलप्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू आते हैं, जिनकी संपत्ति 332 करोड़ रुपये से अधिक है। कर्नाटका के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया तीसरे स्थान पर हैं, जिनकेपास 51 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है। वहीं, अगर सबसे गरीब मुख्यमंत्री की बात करें, तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सबसे कमसंपत्ति वाली हैं, जिनके पास केवल 15 लाख रुपये की संपत्ति है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला 55 लाख रुपये की संपत्ति के साथदूसरे स्थान पर हैं, जबकि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन 1.18 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर आते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक मुख्यमंत्री की औसत संपत्ति 52.59 करोड़ रुपये है, जो भारत की औसत प्रति व्यक्ति आय (1,85,854 रुपये) से काफीअधिक है। एक मुख्यमंत्री की औसत आय 13,64,310 रुपये है, जो देश की औसत आय का लगभग 7.3 गुना है। देश के 31 मुख्यमंत्रियों की कुलसंपत्ति 1,630 करोड़ रुपये है, और इनमें से कुछ के पास देनदारियां भी हैं। उदाहरण के लिए, खांडू पर 180 करोड़ रुपये, सिद्धारमैया पर 23 करोड़रुपये, और नायडू पर 10 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 13 मुख्यमंत्री (42 प्रतिशत) ने अपनेखिलाफ आपराधिक मामलों का खुलासा किया है, जिनमें हत्या के प्रयास, अपहरण, रिश्वतखोरी और आपराधिक धमकी जैसे गंभीर मामले शामिलहैं। इसके अलावा, भारत के 31 मुख्यमंत्रियों में केवल दो महिलाएं हैं: ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल) और अतिशी (दिल्ली)।