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पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ लेने वालों को वापस करने होगें पैसे,सरकार ने दिया सख्त आदेश” जानें क्या है खास बजह

PM Kisan Yojana: पीएम किसान सम्मन निधि की सोमवार को 19वीं किस्त जारी कर दी गई. इस जारी लिस्ट में जिन किसानों को शुरू से लेकरअब तक इसका लाभ मिल रहा है. अब बारी है उन्हें चुकाने की. दरअसल जिन किसानों को 3800 रुपए महिने मिल चुके हैं.अब उनको चुकाना होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के भागलपुर से डीबीटी के माध्यम से बटन दबाकर इसकी शुरुआत की. जिसका सभी जिलों में लाइव प्रसारण कियागया. पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिला लेकिन इस योजना का लाभ लेने वाले पति-पत्नी के लिए अब बुरी खबर है. जो भी किसानखासकर पती पत्नी उनमें से केवल अब एक को ही इस योजना का लाभ दिया जाएगा. दूसरे को सरकार की तरफ से ली गयी सम्मान निधि राशि कोवापस करना होगा. विभाग के सत्यापन में करीब 5733 ऐसी दंपति हैं. सरकार की तरफ से दिए गए सख्त आदेशसरकार के द्धारा चलाए जा रहे किसान सम्मान निधि योजना का लाभ किसान पति व पत्नी भी ले रहे हैं. लेकिन अभ इसको लेकर सरकार ने आदेशदिए हैं. कि ऐसे लोगों पर कार्यवाही की जाए. फिलहाल अभी 1600 किसानों ने तो खुद सम्मान निधि की राशि कृषि विभाग को लौटा दी है. जिसकोसरकारी विभार के खातों में स्थानांतरित कर दिया गया है. दरअसल पीएम किसान सम्मन निधि के लिए 8लाख30,000 ऐसे लाभार्थी हैं. जो इसयोजना का लाभ ले रहे हैं. योजना का लाभ लेने के लिए खेत के अभिलेख के साथ जन सेवा केंद्र से आवेदन करना होता है. और विभाग सिस्टम मेंसम्मान निधि स्वीकृत होकर ₹6000 प्रतिवर्ष इससे किसानों के खातों में आना शुरू हो जाता है. पति या पत्नी में से एक को मिलेगा लाभकिसान विभागीय नियमों के अनुसार पति-पत्नी में केवल एक को ही योजना का लाभ मिलना चाहिए. लेकिन इस योजना का लाभ पति और पत्नीदोनो उठा रहे है. जिसको लेकर अब सरकार कार्यवाही करेगी. इस योजना के दौरान पता चला कि इस योजना में ऐसे भी लाभार्थी हैं. जो दोनों इससम्मान निधि का लाभ उठा रहे हैं. विभाग ने अभिलेखों का सत्यापन कराया तो करीब 5733 पति पत्नी ऐसे निकले जो दोनों सम्मान निधि योजना कालाभ ले रहे हैं. लाभ लेने वाले दंपत्ति को विभाग की तरफ से नोटिस सारी किया गया. उनसे धनराशि को बसूलने ने की बात कही गई है. लगभग1600 भारतीय किसानों में से किसी में पति तो किसी में पत्नी ने धनराशि वापस लौटा दी है. और इस प्रक्रिया को अभी जारी रखा गया है जिसकोलेकर सरकार कार्यवाही कर रही है.

अमेरिका को भी झटके की तैयारी, रुस की कीमत पर यूरोप के साथ क्यो बढ़ा रहा चीन से दोस्ती

अमेरिका और रूस अब एक साथ आ गए हैं. और दोनों देश यूक्रेन से जंग खत्म करने के लिए अब पूरी तरह से सहमत . इसको लेकर अमेरिका और रूसकी बात चल रही है. इसी बीच चीन ने एक अलग ही दाव चल दिया. उसका कहना कि यूक्रेन शांति वार्ता में यूरोप के देशों को भी शामिल करनाचाहिए.दरअसल वैश्नविक कूटनीति इन दिनों बदलावों के दौर से गुजर रही है और इनके बीच उथल-पुथल बीच जारी है. एक तरफ संयुक्त राष्ट्रअमेरिका और रूस साथ आ चुके हैं. तो दूसरी तरफ यूक्रेन के मामले में यूरोपियन यूनियन अलग अलग पड़ चुके हैं. इसको लेकर उलट फेर के बीच एकबड़ा बदलाव आ चुका है. कि अमेरिका से यूरोपीय देशों की करार का फायदा उठाने में चीन जुट गया है. अमेरिका और रूस साथ आ गए हैं. और दोनोंदेश यूक्रेन से जंग खत्म करने पर सहमत है. इसको लेकर अमेरिका और रूस की बात भी चल रही है इसी बीच तीन से अलग ही तव चल दिया औरयूक्रेन शांति वार्ता में यूरोप के देशों को भी शामिल करना चाहिए इस जंग का उन पर असर हुआ है. शांति के लिए किए जा रहे प्रयास करते है हम स्वागत- फु कॅान्गइस बीच उन्होनें कहा कि हमारे लिए कोई भी फैसला मायने रखेगी. इसके लिए यूरोपियन यूनियन को इसमें शामिल करने की जरूरत है. संयुक्त राष्ट्रसंघ में चीन की राजदूत फु कॅान्ग ने कहा शांति के लिए किए जा रहे प्रत्येक प्रयास का चीन स्वागत करता है. अमेरिका और रूस के बीच जो समझौताहुआ है. उसका भी चीन समर्थन करता है. इसके बाद चीन ने एक और बात जोड़ दी. जो रुस और अमेरिका को चुभने लगी है. लेकिन यूरोप के लोगोंको अच्छी लगी है. उन्होंने कहा कि चीन को उम्मीद है कि यूक्रेन संकट से जुड़े हर पक्ष को शांति वार्ता में शामिल किया जाएगा. यह विवाद यूरोप कीजमीन पर ही शुरू हुआ था. इसलिए किसी भी हाल पर पहुंचने में यूरोपियन यूनियन को भी साथ लेना चाहिए. यह बात रुस की स्टैंड से अलग है रूसलगातार कहता है कि वह यूक्रेन के मसले का हल निकालेगा. इसके लिए अमेरिका से भी बात की जाएगी.

विधानसभा में पेश की गई दिल्ली शराब को लेकर CAG रिपोर्ट, करीब 2 हजार करोड़ के नुकसान का किया दावा

Delhi CAG Report: कैग रिपोर्ट को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है. इसमें दावा यह किया गया है. कि आबकारी नीति से तत्कालीनआप सरकार को भारी वित्तीय नुकसान हुआ था. नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG)की ताजा रिपोर्ट में दिल्ली की आबकारी नीति और शराबआपूर्ति से जुड़े नियमों के कार्यान्वन में गंभीर खामियों को उजागर किया गया है. इस रिपोर्ट में जारी किया गया है. कि आबकारी विभाग की नीतियोंऔर उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी रही है. जिसको लेकर सरकार को लगभग 2,026.91 करोड़ का नुकसान हुआ है. दिल्ली सरकार कीलगभग कुल राजस्व का लगभग 14 प्रतिशत योगदान आबकारी विभाग का आता है. यह विभाग शराब और नशीली पदार्थों के व्यापार को नियंत्रणऔर विनियमित करता है. इसके साथ ही शराब की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी को बखूबी से निभाता है.1 जुलाई 2017 से जीएसटीलागू होने के बाद मानव उपभोग के लिए शराब ही एकमात्र ऐसा उत्पाद था. जिस पर उत्पाद शुल्क लागू रहा. इसलिए आबकारी विभाग का मुख्यराजस्व शराब की बिक्री से आता है. कैग रिपोर्ट में बताया गया है. कि शराब नीति में कई अनियमिताएं और लापरवाह भी फैसले लिए गए हैं. जिससेदिल्ली सरकार को बड़ा नुकसान हुआ था.आप सरकार में 941.53 करोड़ का नुकसान है. 890 करोड़ का घाटा सरेंडर किए गए लाइसेंस को दोबारानीलाम करने में सरकार नाकाम रही थी.144 करोड़ की छूट कोविड-19 का बहाना बनाकर शराब कारोबारी को दे दिया गया था. शराब की आपूर्तिप्रणाली में कई पक्ष शामिल होते हैं. आबकारी विभाग ने जारी किए लाइसेंसदिल्ली में स्थित गोदामों सरकारी व निजी शराब की दुकानों होटलों, क्लब और रेस्तरां से होते हुए आखिरकार उपभोक्ताओं तक शराब को पहुंचायाजाता है. आबकारी विभाग विभिन्न पदों से राजस्व एकत्र करता है. उत्पाद शुल्क, लाइसेंस शुल्क, परमिट शुल्क, आयात निर्यात शुल्क, कैग रिपोर्ट मेंपाया गया की आबकारी विभाग ने लाइसेंस जारी करने के दौरान नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया. जिसको लेकर दिल्ली आबकारी नियम2010 के नियम 35 के अनुसार एक ही व्यक्ति या कंपनी को अलग-अलग प्रकार के लाइसेंस को खुदरा, होटल रेस्टोरेंट नहीं दिया जा सकते. लेकिनजांच में पाया गया कि कुछ कंपनियों को एक साथ कई प्रकार के लाइसेंस दिए गए हैं. इसको लेकर आबकारी विभाग ने बिना जरूरी चार्ट किएलाइसेंस को जारी करवा दिया. इसमें वित्तीय स्थिरता बिक्री और कीमतों से जुड़े दस्तावेजों तथा राज्यों में घोषित कीमतें और आबकारी विभाग केआपराधिक रिकार्ड की जांच महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल थी. प्रोक्सी मालिकाना हक का लिया सहाराकुछ कंपनियों ने शराब व्यापार में कार्टेल बनाने और ब्रांड प्रमोशन के लिए अपनी हिस्सेदारी को छुपाने के लिए प्रोक्सी मालिकाना हक का सहारा भीलिया था. विक्रेताओं को शराब से फैक्ट्री से निकलने वाली कीमत तय करने की स्वतंत्रता दी गई थी. जिससे कीमतों में हेयर फेल किया गया था. जांच में पाया गया कि एक ही कंपनी द्वारा विभिन्न राज्यों में भेजे जाने वाली शराब की कीमत अलग-अलग थी. इसी मनचाही ढंग से तय की गईकीमतों के कारण कुछ ब्रांडों की विकृति घटी. और सरकार को उत्पाद शुल्क के रूप में नुकसान हुआ. सरकार ने कंपनियों से लागत मूल की जांच नहींकरवाई. जिस मुनाफाखोरी और कर चोरी की संभावना बनी रही. इसको लेकर बीजेपी पार्टी ने अब पूरी तरीके से खुलासा कर दिया है. बीजेपी पार्टी नेरिपोर्ट विधानसभा में पेश की जिसमें लगभग 2 करोड़ रुपए के नुकसान होने का मुद्दा बाकी है.

यूपी सरकार ने लिया सख्त फैसला, कर्मचारियों की बढ़ सकती है मुश्किलें “मार्च महिने में रोका जाएगा वेतन

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार अब ऐसे राज्य कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है. जिन्हेंनों अब तक अपनी चल अचल संपत्ति काव्योरा राज्य मानव संपदा पोर्टल पर नहीं दिया है. उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के ये निर्देश कई कर्मचारियों पर भारी पड़ते जा रहे है. दरअसल ये वोकर्मचारी हैं. जिन्हें कई बार सख्त निर्देश दिए जाने के बाद भी तक अपनी चल अचल संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर नहीं दिया है. प्रदेश मेंलगभग ऐसे डेढ़ लाख सरकारी कर्मचारी अभी बाकी है. अब तक इन कर्मचारियों के वेतन को रोकने के लिए सरकार पूरी तरीके से तैयार है. 28 फरवरीतक यूपी सरकार के सभी राज्य कर्मचारियों को अपनी चला चल संपत्ति का ब्योरा देने की अंतिम तारीख है. अगर अभी भी इन कर्मचारियों दिसंबर2025 तक अपनी संपत्ति की जानकारी मानव संपदा पोर्टल पर नहीं दी. मार्च के महिने में रोक दिया जाएगा कर्मचारियों का वेतनसरकार की तरफ से कहा गया है कि जो सरकारी कर्मचारियों ने अपनी चल अचल संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया उन कर्मचारियों के वेतन को मार्च महीनेसे सरकार की तरफ से रोक दिया जाएगा. दरअसल उत्तर प्रदेश राज्य में कुल 8,33510 कर्मचारी हैं. यूपी सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली केतहत प्रदेश में सभी श्रेणियां के राज्य कर्मचारियों को 15 फरवरी तक अपनी चल अचल संपत्ति का ब्योरा देना था. लेकिन अब तक लगभग6,89,826 कर्मचारियों ने ही अपनी संपत्ति का ब्योरा सरकार को सौपा है. जो कुल कर्मचारियों का 83% है. लेकिन 1,43,684 कर्मचारियों ने अबतक मानव संपदा पोर्टल पर इसकी जानकारी नहीं दी है. यूपी में इतनी बड़ी संख्या में राज्य कर्मचारियों द्वारा अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिए जाने परमुख्य सचिव मनोज सिन्हा ने नाराजगी जाहिर की. इसके बाद सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि जितने भी ऐसे कर्मचारी हैं. राज्य सरकार ने दिए सख्त आदेशराज्य के कर्मचारियों को सरकार की तरफ से सख्त आदेश दिए है सरकार की तरफ से ऐलान कर दिया गया है.28 फरवरी तक अपनी संपत्ति का ब्योराहर हाल में दे दें. नहीं तो ऐसे कर्मचारियों को मार्च महीने से वेतन नहीं दिया जाएगा. उनके वेतन को पूरी तरीके से रोक दिया जाएगा. मुख्य सचिव सभीविभाग के लोगों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है. इन कर्मचारियों को 28 फरवरी तक अंतिम तारीख दे दी गई है. अभी भी राज्य कर्मचारियोंने अपनी संपत्ति की जानकारी नहीं दी. इसको लेकर सरकार सख्त कार्रवाई की तैयारी को लेकर पूरी तरीके से तैयार है. इन लोगों के मार्च महीने केदौरान वेतन को पूरे तरीके से रोक दिया जाएगा.