Skip to main content

NEWS अब तक

શાંતનુ સેવા મંડળ, વડોદરા

દ્રારા આયોજીત, પક્ષીઓના જલપાન માટે “જલ-કુંડી વિતરણ” કરવાના આવ્યું*વડોદરાના ડિલક્સ ચાર રસ્તા હનુમાનજી મંદિર પાસે શાંતનુ સેવા મંડળ દ્વારા પક્ષીઓને પાણી પીવડાવવા માટે જલ-કુંડી વિતરણકરવામાં આવ્યું.

उत्तराखण्ड के सीएम पुष्कर सिंह धामी सरकार ने लिया बड़ा फैसला,वरिष्ठ नौकरशाहों के प्रभारों में हो सकता है बदलाव

Uttrakhand Latest News: धामी सरकार में अब इसी माह प्रशासनिक फेरबदल की संभावना है वरिष्ठ नौकरशाह आनंद बर्द्धन के मुख्य सचिवबनने के बाद उनके विभागों का आवंटन अन्य वरिष्ठ नौकरशाहों को दिया जा सकता है. तीन प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, एल फैनई और आर मीनाक्षीसुंदरम शासन में तैनात हैं.प्रशासनिक व्यवस्था के नए मुखिया की तैनाती के बाद अब धामी सरकार में प्रशासनिक फेरबदल की संभावना है. शासन मेंतैनात वरिष्ठ नौकरशाहों के प्रभारों में बदलाव हो सकता है. मुख्यमंत्री इसी महीने प्रशासनिक फेरबदल को अंजाम दे सकते हैं इस फेरबदल में कुछजिलाधिकारियों को भी इधर से उधर किया जा सकता है.नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही धामी सरकार अब प्रशासनिक फेरबदल को अंजामदेगी. वरिष्ठ नौकरशाह आनंद बर्द्धन के मुख्य सचिव बनने के बाद उनके विभागों का आवंटन अन्य वरिष्ठ नौकरशाहों को दिया जा सकता है. तीन प्रमुखसचिव आरके सुधांशु, एल फैनई और आर मीनाक्षी सुंदरम शासन में तैनात हैं. दी जा सकती है नई जिम्मेदारीबर्धन के सीएस बनने से खाली हुए उनके प्रमुख प्रभारों का बंटवारा इन तीनों प्रमुख सचिवों के बीच हो सकता है. इनके अलावा शासन में तैनातसचिवों को भी नई जिम्मेदारी दी जा सकती है. अपर सचिव से सचिव पद पदोन्नत हुए उन नौकरशाहों को कुछ प्रमुख विभाग मिल सकते हैं. जो अभीएक या दो प्रभार देख रहे हैं.अपर सचिव स्तर पर भी कुछ अधिकारियों के प्रभार बदले जा सकते हैं. शासन के अलावा कुछ जिलों में जिलाधिकारियोंको बदले जाने की चर्चाएं गर्म हैं. माना जा रहा है कि गढ़वाल और कुमाऊं के दो-दो जिलों के जिलाधिकारियों को इधर से उधर किया जा सकता है. अगले महीने चूंकि पंचायत चुनाव की घोषणा हो सकती है. इसलिए बड़ा प्रशासनिक फेरबदल पंचायत चुनाव से पहले इसी महीने होने की संभावनाहै.

इस्राइल और ब्रिटेन में बढ़ा तनाव, ब्रिटेन की दो सांसदों को इस्राइल ने एंट्री देने से किया इनकार

ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि ‘यह बिल्कुल अस्वीकार्य और बेहद चिंताजनक है कि संसदीय प्रतिनिधिमंडलमें शामिल दो ब्रिटिश सांसदों को हिरासत में लिया गया. इस्राइली अधिकारियों ने उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया.इस्राइल की सरकार ने ब्रिटेन की दोसांसदों को अपने देश में एंट्री देने से इनकार कर दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया. बाद में दोनों को निर्वासित कर दिया गया. ब्रिटेन के विदेश मंत्रीडेविड लैमी ने इसे अस्वीकार्य और बेहद चिंताजनक बताया है. इस घटना से दोनों देशों में तनाव पैदा हो गया है. हालांकि इस्राइल ने अभी तक सांसदोंको रोकने की वजह नहीं बताई है.इस्राइल ने जिन सांसदों को एंट्री देने से इनकार किया है उनमें युआन यांग और एब्तेसाम मोहम्मद का नाम शामिल है. दोनों सांसद सत्ताधारी लेबर पार्टी की सांसद हैं दोनों लंदन से इस्राइल पहुंचीं थीं लेकिन इस्राइल की सरकार ने उन्हें अपने देश में एंट्री नहीं दी औरदोनों को एयरपोर्ट से ही निर्वासित कर दिया गया. ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने जताई नाराजगीब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि ‘यह बिल्कुल अस्वीकार्य और बेहद चिंताजनक है कि संसदीय प्रतिनिधिमंडलमें शामिल दो ब्रिटिश सांसदों को हिरासत में लिया गया. इस्राइली अधिकारियों ने उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया. मैंने अपने इस्राइली समकक्ष सेसाफ कह दिया है कि ब्रिटिश सांसदों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए. हम दोनों सांसदों के संपर्क में हैं और उनका समर्थन कररहे हैं ब्रिटेन सरकार का फोकस युद्ध विराम कराने रक्तपात रोकने और बंधकों को मुक्त कराने पर है.ब्रिटेन के एक सांसद को बच्चों के यौन शोषण केआरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बताया कि सांसद पर शक है कि उन्होंने एक बच्ची का यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया. आरोप है किसांसद ने साल 2000 में बच्ची का यौन शोषण किया. अब जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है आरोपी सांसद सत्ताधारी लेबर पार्टी के नेता हैंऔर गिरफ्तारी के बाद सांसद को पार्टी ने निलंबित कर दिया है. आरोपी सांसद डैन नोरिस ब्रिटेन के नॉर्थ ईस्ट सोमरसेट से सांसद हैं.

बिहार विधानसभा को बाकी है करीब सात महीने,लालू यादव को लेकर संशकित है कांग्रेस

बिहार विधानसभा चुनाव में अभी करीब सात महीने का समय है लेकिन राजनीतिक आयोजन शुरू हो गए हैं. देश के गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टीके पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह बिहार आकर लौट चुके हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने बिहार आ रहे हैं. लेकिन उससे पहले 7 मार्च कोलोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बिहार आने वाले हैं. कांग्रेस जिले-जिले तक राहुल गांधी के दौरे के लिए भीड़ जुटाने में जुटी हुई है. इस बीचशनिवार को बिहार कांग्रेस के नए प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने दिल्ली एम्स में जाकर राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से उनकाहालचाल लिया। वह भले भलमनसाहत लिए गए हों. लेकिन बिहार की राजनीति और लालू प्रसाद को ठीक से जानने वाले कांग्रेसी राजद अध्यक्ष कोलेकर बुरी तरह सशंकित हैं.राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में जनता दल यूनाईटेड और भारतीय जनता पार्टी के बीच ‘बड़ा भाई-छोटा भाई’ की लड़ाई कामजा लेने वाले महागठबंधन के दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल को पता है कि यहां कौन बड़ा है. बीच में कांग्रेस ने तेवर दिखाने कीकोशिश की थी लेकिन फिर जगह पर आ गई। कांग्रेस नेताओं ने अलग-अलग तरह से बोलकर स्वीकार कर लिया कि बिहार में राजद ही बड़ा है. जनता दल युनाईटेड हुआ अलगखैर परेशानी यहां थी भी नहीं परेशानी यह है कि कांग्रेस के लिए तेजस्वी यादव छोटी परेशानी और लालू प्रसाद तो बाकायदा टेढ़ी खीर हैं. जब 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी दलों का जुटान हुआ था. तब कांग्रेस को तत्कालीन महागठबंधन सरकार में दोऔर मंत्रीपद चाहिए था. तब महागठबंधन के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस को तेजस्वी यादव से डील करने के लिए छोड़ दिया. सरकार चली गईलेकिन कांग्रेस तेजस्वी यादव को मैनेज नहीं कर सकी. फिर लोकसभा चुनाव के पहले महागठबंधन से जनता दल यूनाईटेड अलग हो गया. लोकसभाचुनाव में नामांकन की तारीख आ गई.लेकिन कांग्रेस लालू प्रसाद यादव से डील नहीं कर सकी.कोर्ट में विचाराधीन कुछ मामलों में प्रगति के बीच लालूप्रसाद यादव को कंधे-हाथ पर जख्म, शुगर, बीपी आदि की परेशानी के साथ पटना से दिल्ली ले जाकर एम्स में भर्ती कराया गया है. बिहार के कांग्रसियों को याद आया चुनाववह अभी वहीं हैं क्रिटिकल केयर यूनिट में रहते हुए भी उनका सोशल मीडिया हैंडल एक्टिव रहा और वक्फ बिल को लेकर उनकी तीखी प्रतिक्रिया आईतो बिहार के कांग्रेसियों को लोकसभा चुनाव याद आ गया। यह ऐसा डर है. जिस पर अभी कोई खुलकर बात नहीं कर रहा. हालांकि दिल्ली में बिहारके 40 संगठन जिलो के अध्यक्ष-कार्यकारी अध्यक्ष की बैठक में राहुल गांधी के सामने यह डर इशारों जरूर सामने आया. कई जिलाध्यक्षों ने कहा किकांग्रेस जहां से चुनाव लड़ेगी उसकी जानकारी जल्दी दे दी जाए. दरअसल इस बात ने लोकसभा चुनाव की याद दिला दी जब कांग्रेस देखती रह गईऔर लालू ने अपने हिसाब से सीटों पर राजद प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए सिम्बल दे दिया था.

बीते दिन प्रधानमंत्री मोदी ने मछुआरों को लेकर उठाया था मुद्दा,श्री लंका ने 11 मछुआरों को किया रिहा

भारत ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है. पीएम मोदी के मछुआरों के मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से हल करने की वकालत करने के बाद श्रीलंकाने विवादित मसले का समाधान किया है. प्रधानमंत्री मोदी के भारत लौटने से पहले ही श्रीलंका ने जेल में बंद 11 भारतीय मछुआरों को रिहा करदिया.शनिवार को पीएम मोदी और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच बातचीत के दौरान मछुआरों का मुद्दा प्रमुखता से उठा था. इस मामले को लेकर पीएम मोदी ने कहा था कि हमने मछुआरों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की. हम इस बात पर सहमत हुए कि हमें इसमामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. हमने मछुआरों और उनकी नावों की तत्काल रिहाई पर भी जोर दिया.इसके बाद श्रीलंका ने 11 मछुआरोंको रिहा कर दिया. मछआरों के मुद्दों को लेकर रहा विवाददरअसल श्रीलंका-भारत के बीच मछुआरों के मुद्दे को लेकर हमेशा विवाद रहा है. पहले कई बार श्रीलंकाई नौसेना पाक जलडमरूमध्य में भारतीयमछुआरों के खिलाफ बल प्रयोग कर चुकी है.शनिवार को मीडिया ब्रीफिंग में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था कि मछुआरों के मुद्दे पर दोनों पक्षोंके बीच काफी विस्तार से चर्चा हुई। इन मुद्दों पर सहयोग के लिए मानवीय और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया. येऐसे मुद्दे हैं जो खाड़ी के दोनों किनारों पर मछुआरों की आजीविका को प्रभावित करते हैं.मिस्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यहमछुआरों के लिए एक दैनिक मुद्दा है और हाल के दिनों में की गई कुछ कार्रवाइयों पर पुनर्विचार किया जा सकता है. विदेश सचिव ने कहा था किदोनों पक्षों ने इस मुद्दे पर चर्चाओं को तेज करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. दोनों पक्ष श्रीलंका और भारत के बीच मछुआरों के संघ की वार्ताका अगला दौर आयोजित करने पर विचार कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने रामनाथस्वामी मंदिर में की पूजा अर्चना,देश को सौंपा पहला ‘पंबन’ सी ब्रिज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के रामेश्वरम में भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट समुद्री ब्रिज पंबन का उद्घाटन किया. इसके साथ ही उन्होंने राज्य मेंकई अन्य विकास परियोजनाओं की शुरुआत भी की। समुद्र के ऊपर बना यह रेलवे ब्रिज अतीत और भविष्य को जोड़ता है. इसे राम नवमी के दिनजनता के सामने पेश किया गया. इस दौरान पीएम मोदी के वहां होने से रामेश्वरम में सुरक्षा बढ़ा दी गई.दोपहर करीब 1 बजे प्रधानमंत्री ने नए पंबनरेलवे पुल को जनता को समर्पित किया. उन्होंने रामेश्वरम से तांब्रम (चेन्नई) के बीच एक नई ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई. साथ ही उन्होंने एकतटरक्षक जहाज को भी रवाना किया. यहां से पीएम मोदी रामेश्वरम के प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चनाकी. उन्होंने 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे और सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया.इन परियोजनाओं मेंएनएच-40 के 28 किलोमीटर लंबे वालाजापेट-रानीपेट खंड को चार लेन का बनाने के कार्य का शिलान्यास और एनएच-332 के 29 किलोमीटर लंबेविलुप्पुरम-पुडुचेरी खंड को चार लेन का बनाने का काम, एनएच-32 का 57 किलोमीटर लंबा पूंडियनकुप्पम-सत्तनाथपुरम खंड और एनएच-36 का48 किलोमीटर लंबा चोलापुरम-तंजावुर खंड शामिल हैं. ये सड़कें तीर्थ स्थलों, पर्यटन स्थलों, शहरों, मेडिकल कॉलेजों और बंदरगाहों को बेहतर ढंग सेजोड़ेंगी. किसानों को बाजार तक पहुचनें में करेंगी मददये स्थानीय किसानों को बाजार तक पहुंचने में मदद करेंगी और चमड़ा व लघु उद्योगों को बढ़ावा देंगी.इस पंबन ब्रिज का सांस्कृतिक महत्व भी है. रामायण के अनुसार, भगवान राम की सेना ने राम सेतु का निर्माण रामेश्वरम के नजदीक धनुषकोडी से शुरू किया था. नया पंबन रेलवे ब्रिज रामेश्वरमद्वीप को भारत की मुख्य भूमि से जोड़ता है और यह वैश्विक मंच पर भारतीय इंजीनियरिंग की एक बड़ी उपलब्धि है. इसकी लागत 550 करोड़ रुपये सेअधिक है। यह ब्रिज 2.08 किलोमीटर लंबा है. इसमें 99 स्पैन (खंभों के बीच की दूरी) हैं और इसका लिफ्टिंग हिस्सा 72.5 मीटर लंबा है, जो 17 मीटर ऊंचाई तक उठ सकता है इससे बड़े जहाज आसानी से गुजर सकते हैं और ट्रेन सेवा भी बिना बाधा जारी रह सकती है.पहला पंबन ब्रिज 1914 मेंब्रिटिश इंजीनियरों ने बनाया था यह एक कैंटिलीवर डिजाइन का ब्रिज था. जहाजों को देता था रास्ताइसमें एक शेरजर रोलिंग लिफ्ट हिस्सा था. यह समुद्र में खुलकर जहाजों को रास्ता देता था एक सदी से अधिक वक्त तक यह ब्रिज तीर्थ यात्रियों, पर्यटकों और व्यापारियों के लिए जीवनरेखा की तरह काम करता रहा. लेकिन समुद्री माहौल से नुकसान और बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए सरकार नेफरवरी 2019 में नए तकनीकी और मजबूत पंबन ब्रिज के निर्माण की मंजूरी दी.नए पंबन ब्रिज का निर्माण रेल विकास निगम लिमिटेड(आरवीएनएल) ने किया है. यह रेल मंत्रालय के अधीन एक नवरत्न कंपनी है. ब्रिज निर्माण के दौरान पर्यावरणीय प्रतिबंध, समुद्र की तेज लहरें, तेजहवाएं और खराब मौसम जैसी कई चुनौतियां आईं. यह इलाका चक्रवात और भूकंप के लिए संवेदनशील है. इसलिए इंजीनियरों ने बहुत सोच-समझकर मजबूत डिजाइन तैयार किया.