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पहलगाम हमले पर खड़गे का हमला, “मोदी गंभीर नहीं, सर्वदलीय बैठक में नहीं आए, बिहार में रैली करने में व्यस्त थे”

जम्मू और कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधतेहुए कहा कि प्रधानमंत्री हमले के प्रति गंभीर नहीं हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी हमले के बाद भी सर्वदलीय बैठक में शामिल होने केबजाय बिहार में एक रैली करने में व्यस्त थे। खड़गे ने यह बयान कांग्रेस पार्टी द्वारा आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दिया, जहां उन्होंने सरकार कीआलोचना की और कहा कि प्रधानमंत्री का रुख राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति लापरवाह था। खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ यह आरोप भी लगाया कि जब देश को उनकी आवश्यकता थी, तब वह अपने चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त थे औरउन्होंने राजनीतिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी, जबकि देश में सुरक्षा की स्थिति गंभीर हो चुकी थी। “जब पहलगाम में हमारे सैनिकों पर हमलाहुआ, तब प्रधानमंत्री मोदी देश की सुरक्षा पर ध्यान देने के बजाय बिहार में चुनावी रैलियों में व्यस्त थे। यह एक गंभीर विषय है और प्रधानमंत्री का इसपर कोई ध्यान नहीं है,” खड़गे ने कहा।सर्वदलीय बैठक का मुद्दाखड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि सर्वदलीय बैठक बुलाने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी इसमें शामिल नहीं हुए, जो एक गंभीर औरसंवेदनशील मुद्दा था। खड़गे के अनुसार, मोदी की उपस्थिति की अनुपस्थिति ने इस मुद्दे की गंभीरता को और बढ़ा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि मोदीको एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत देश के सभी राजनीतिक दलों को साथ लेकर निर्णय लेने चाहिए थे, लेकिन उनकी राजनीति मेंइस तरह की “लापरवाही” स्पष्ट रूप से झलकती है। कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि इस बैठक में पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होनी चाहिए थी, क्योंकि यह हमला पाकिस्तान के द्वारा प्रायोजितआतंकवाद का हिस्सा था। खड़गे ने यह सवाल उठाया कि क्यों प्रधानमंत्री मोदी ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर नहीं सोचते।उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री ने सही समय पर इस बैठक में भाग लिया होता, तो इससे देश की एकजुटता और ताकत को और बढ़ावामिलता। पीएम मोदी की रैलियांप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार दौरे और चुनावी रैलियों पर खड़गे ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह समय देश की सुरक्षा के लिए सामूहिक रूप सेएकजुट होने का था, न कि चुनावी कार्यक्रमों में व्यस्त रहने का। खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की प्राथमिकताएं गलत दिशा में हैं और यहदिखाता है कि उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से ज्यादा अपनी राजनीतिक यात्रा की चिंता है। खड़गे ने कहा, “अगर प्रधानमंत्री को इस समय अपनी पार्टी और राज्यकी रैलियों से फुर्सत नहीं मिल रही, तो यह चिंता का विषय है।” खड़गे का प्रधानमंत्री से सवालकांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से यह भी सवाल किया कि जब आतंकवाद की समस्या इतनी गंभीर हो, तो केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को एक कदम आगेबढ़कर इस मामले को न केवल हल करना चाहिए, बल्कि पूरे देश को विश्वास दिलाना चाहिए। “हम प्रधानमंत्री से यह सवाल पूछते हैं कि अगर वोइतना व्यस्त हैं, तो क्या वो देश की सुरक्षा को प्राथमिकता देंगे या चुनावी रैलियों को?” खड़गे ने सवाल किया। कांग्रेस पार्टी का रुखकांग्रेस पार्टी ने हमेशा आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपनी चिंता जताई है और पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियां औरउनका रवैया आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में प्रभावी नहीं रहे हैं। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने कासमर्थन करती है, लेकिन वर्तमान सरकार के रवैये से यह साफ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा उनके एजेंडे का हिस्सा नहीं है। इसके अलावा, खड़गे ने यह भी कहा कि इस प्रकार के हमले केवल कश्मीर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे देश के लिए खतरा हैं और सरकार कोइससे निपटने के लिए एक ठोस रणनीति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी निभाते और सर्वदलीय बैठक में भाग लेते, तो शायद देश को इस संकट से निपटने के लिए एक मजबूत रणनीति मिल सकती थी। सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ:प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ खड़गे का बयान देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक तरफ कुछ राजनीतिक विश्लेषक खड़गे के बयान कोसही ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मोदी के समर्थक इसे राजनीतिक मौके पर निशाना साधने के तौर पर देख रहे हैं। कई ने यह भी कहा कि खड़गे काबयान केवल सरकार की आलोचना करने और राजनीतिक लाभ लेने का एक प्रयास था। सामाजिक मीडिया पर भी इस बयान को लेकर बहस तेज हो गई है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने खड़गे के बयान की निंदा की, जबकि कुछ नेप्रधानमंत्री की रैलियों की आलोचना की और खड़गे के दावे को सही ठहराया। यह मामला अब राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भीचर्चा का विषय बन चुका है।

पहलगाम हमले के बाद सोशल मीडिया पर देशविरोधी पोस्ट, देशभर में बड़ी कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद देश भर में सोशल मीडिया पर भड़काऊ और देश विरोधी पोस्ट डालने वालों केखिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने सात राज्यों में छापेमारी कर 26 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तार लोगों में एकविधायक, एक पत्रकार, एक वकील और 23 छात्र शामिल हैं। इन सभी पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर हमले का समर्थन किया या फिरदेश विरोधी टिप्पणियां कीं, जिससे राष्ट्रीय एकता और शहीदों के सम्मान को ठेस पहुंची। जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में उत्तर प्रदेश के एक क्षेत्रीय विधायक शामिल हैं, जिनके विवादास्पद बयान ने काफी हंगामा खड़ा करदिया। वहीं, दिल्ली से जुड़े एक प्रतिष्ठित अखबार के पत्रकार और एक उच्च न्यायालय के वकील को भी देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने केआरोप में पकड़ा गया है। 23 छात्रों को विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कई ने सोशल मीडिया पर आतंकियोंके समर्थन में पोस्ट साझा किए थे। जांच में सामने आया है कि कई छात्र व्हाट्सएप ग्रुप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए भड़काऊ सामग्री काप्रचार कर रहे थे, और कुछ पोस्ट तो पाकिस्तान समर्थक एजेंडे से प्रेरित नजर आए। गिरफ्तारियां जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल जैसे सात राज्यों से हुई हैं। जम्मू-कश्मीर से सबसे ज्यादादस छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर प्रदेश में विधायक समेत तीन लोगों को, दिल्ली में एक पत्रकार और दो छात्रों को, जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल से भी कुछ छात्रों को पकड़ा गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराएँ लगाई गई हैं, जिनमेंदेशद्रोह (धारा 124A), सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास (धारा 153A), आपराधिक षड्यंत्र (धारा 120B) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियमकी धाराएं शामिल हैं। सरकार ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि देशविरोधी बयानों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गृह मंत्रालय केएक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर नफरत फैलाने की कोशिश करने वालों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। सरकार कासाफ कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश की एकता और अखंडता से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। हालांकि, कुछ छात्र संगठनों ने इन गिरफ्तारियों पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि सभी छात्रों को एक ही तराजू में तौलना ठीक नहीं है। उन्होंनेमांग की है कि जिन छात्रों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं हैं, उन्हें जल्द रिहा किया जाए। दूसरी ओर, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गएसभी व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त डिजिटल सबूत मौजूद हैं और पूरी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है। सरकार ने इस प्रकरण के मद्देनजर फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (अब X) और व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया कंपनियों से संपर्क साधा है। विवादितपोस्टों और अकाउंट्स की जानकारी मांगी गई है ताकि कानूनी कार्रवाई को तेज किया जा सके। अब तक कई अकाउंट्स ब्लॉक कर दिए गए हैं औरअन्य पर नजर रखी जा रही है। सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे देशविरोधी सामग्री तुरंत हटाएं और संबंधित यूजर्स की पूरीजानकारी उपलब्ध कराएं। पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में उमड़े जनाक्रोश के बीच सोशल मीडिया पर देश विरोधी पोस्ट करने वालों के खिलाफ सरकार की सख्तकार्रवाई यह संकेत देती है कि भारत अब इस तरह के कृत्यों को बिल्कुल भी सहन नहीं करेगा। यह मामला एक बार फिर रेखांकित करता है कि सोशलमीडिया की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां और कार्रवाई देखने को मिलसकती हैं।