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Book Launch: Lakshya UPSC Chronicles Inspiring Journeys of Young IAS Officers Union Education Minister Dharmendra Pradhan Unveils the Motivational Work by Senior IAS Officer Dr. Sajjan Yadav

New Delhi, April 29, 2025:Amidst the nationwide buzz surrounding UPSC toppers, senior IAS officer and acclaimed author Dr. Sajjan Yadav unveiled his latest book “Lakshya UPSC – Inspiring Stories of Young IAS Officers”. The book launch ceremony was held at Constitution Club, New Delhi, with Union Education Minister Dharmendra Pradhan as the chief guest. The […]

पाकिस्तान ने भारत के संभावित हमलों से बचने के लिए उठाए कड़े कदम

कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के सात दिन बाद, पाकिस्तान अपने सुरक्षा उपायों को और सख्त कर रहा है। इसहमले के बाद भारत की ओर से सैन्य प्रतिक्रिया की आशंका जताई जा रही है, जिससे पाकिस्तान में तनाव और भय का माहौल है। ऐसे में, पाकिस्तानीसेना भारत के किसी भी संभावित हमले से बचने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है।पाकिस्तान का रडार सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयरजानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान ने भारतीय एयरस्ट्राइक की पहचान करने के लिए अपने रडार सिस्टम को सियालकोट सेक्टर में फॉरवर्ड लोकेशनोंपर तैनात करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने फिरोजपुर से सटे क्षेत्रों में भारतीय सेना की गतिविधियों का पता लगाने के लिएइलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी तैनात किया है। यह कदम भारतीय सेना की हरकतों पर निगरानी रखने के लिए उठाए गए हैं। हाल ही में पाकिस्तानने अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 58 किलोमीटर की दूरी पर चोर कंटोनमेंट में TPS-77 रडार तैनात किया था। पाकिस्तान की सीजफायर उल्लंघन की लगातार कोशिशेंपाकिस्तान ने लगातार पांचवें दिन सीजफायर का उल्लंघन किया और एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर फायरिंग की। पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा, बारामूला और अखनूर सेक्टरों में बिना किसी उकसावे के फायरिंग की। हालांकि, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया औरस्थिति को नियंत्रण में रखा। पहलगाम आतंकी हमला और भारत की सख्त कार्रवाई22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 17 लोग घायल हो गए थे।इस हमले में आतंकियों ने जानबूझकर लोगों को निशाना बनाया था। इसके बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेटकमेटी (CCS) की बैठक हुई, जिसमें भारत ने एक बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की। सिंधु जल संधि का स्थगनकैबिनेट कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। यह पहला अवसर थाजब भारत ने इस संधि को स्थगित किया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि यह स्थगन तब तक जारी रहेगा, जब तक पाकिस्तानआतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता।

चीन के लियाओनिंग प्रांत में रेस्टोरेंट में आग, 22 की मौत, 3 घायल

चीन के उत्तर-पूर्वी लियाओनिंग प्रांत के लियाओयांग शहर में मंगलवार, 29 अप्रैल 2025 को एक रेस्टोरेंट में भीषण आग लगने से 22 लोगों की मौतहो गई और 3 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:25 बजे हुई, जब रेस्टोरेंट में अचानक आग लग गई। आग की घटना और बचाव कार्यस्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लियाओयांग के बाइटा जिले में स्थित यह रेस्टोरेंट दो या तीन मंजिला था। आग की लपटें खिड़कियों औरदरवाजों से बाहर निकल रही थीं, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 22 दमकल गाड़ियों और 85 दमकलकर्मियों को मौके पर भेजा। दमकलकर्मियों ने लगभग 18 मिनट में आग पर काबू पा लिया, लेकिन तब तक यह घटना बड़ा रूप ले चुकी थी। मृतकों और घायलों की स्थितिस्थानीय अस्पतालों में भर्ती किए गए घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि उनमें से कुछ की स्थिति अभी भी गंभीर है। मृतकों के परिवारोंको सरकारी मदद की घोषणा की गई है, और उन्हें तत्काल सहायता प्रदान की जा रही है। घटना के तुरंत बाद, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नेस्थानीय अधिकारियों से घायलों का उचित इलाज करने और मृतकों के परिवारों को समर्थन देने का निर्देश दिया।जांच और प्रशासनिक प्रतिक्रियाघटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार, आग रेस्टोरेंट के रसोईघर से शुरू हुई थी। स्थानीय पुलिसने रेस्टोरेंट के मालिक को हिरासत में लिया है और घटना की जांच जारी है। चीनी अधिकारियों ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांचसमिति का गठन किया है। सुरक्षा मानकों पर सवालयह घटना चीन में सार्वजनिक सुरक्षा के उपायों पर एक सवाल खड़ा करती है। पहले भी चीन में कुछ स्थानों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारणइस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना चाहिए। सरकारी निर्देश और भविष्य के उपायचीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने और भविष्य मेंऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, सरकार ने इस बात का आश्वासन दिया है कि इस मामलेमें दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय प्रशासन का आश्वासनलियाओयांग शहर की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के बाद, स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं कोरोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों के पालन में सहयोग करें और किसीभी संदिग्ध गतिविधि की सूचना दें।

सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से किया इनकार, राष्ट्रीय सुरक्षा को बताया प्रमुख कारण

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पेगासस जासूसी मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए तकनीकी समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने सेइनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस रिपोर्ट में राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की संप्रभुता से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ हैं, जिन्हें सार्वजनिक मंचपर लाना उचित नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ऐसी जानकारी का सार्वजनिक खुलासा देश की सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकता है औरयह कदम न्यायोचित नहीं होगा। इस रिपोर्ट को लेकर अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इसके कुछ हिस्सों को ही सीमित रूप में साझा किया जासकता है, लेकिन पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती। पेगासस विवाद वर्ष 2021 में सामने आया था जब एक अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता परियोजना ‘पेगासस प्रोजेक्ट’ के तहत यह खुलासा हुआ कि भारतसहित कई देशों में पेगासस स्पायवेयर का उपयोग पत्रकारों, राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अन्य प्रमुख व्यक्तियों की जासूसी केलिए किया गया। यह स्पायवेयर इज़राइली कंपनी एनएसओ ग्रुप द्वारा विकसित किया गया है और यह मोबाइल फोन में गुप्त रूप से घुसकर कॉल, मैसेज, लोकेशन और अन्य निजी जानकारी तक पहुंच बना सकता है। इस खुलासे के बाद भारत में काफी हंगामा हुआ और कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्टमें दायर की गईं, जिनमें सरकार से जवाब और जांच की मांग की गई। इन याचिकाओं के जवाब में अक्टूबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक स्वतंत्र तकनीकी समिति का गठन किया, जिसे 29 मोबाइल फोनों की जांच काजिम्मा सौंपा गया। समिति ने 2022 में अपनी रिपोर्ट में बताया कि पांच डिवाइसेज़ में ‘मैलवेयर’ जरूर पाया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका किवह पेगासस ही था। इसके अलावा, समिति ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया। इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने को लेकर विपक्षी दलों ने लगातार दबाव बनाया है। कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि मोदीसरकार ने राजनीतिक विरोधियों और पत्रकारों की निगरानी कर लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर‘देशद्रोह’ का आरोप लगाया और गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। वहीं सरकार ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कोई भीनिगरानी कानून के तहत और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में की गई होगी। पेगासस विवाद ने केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी हलचल मचा दी थी। फ्रांस, मैक्सिको, हंगरी और इज़राइल सहित कई देशों में भी इसस्पायवेयर के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई कि ऐसे सॉफ्टवेयर का प्रयोग नागरिक स्वतंत्रता औरगोपनीयता के अधिकारों पर हमला है। इस मामले में संयुक्त राष्ट्र समेत कई संस्थाओं ने भी पारदर्शी जांच की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से देखा जा सकता है, लेकिन यह भी सच है कि इससे पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही कोलेकर जनता में शंका उत्पन्न होती है। पेगासस प्रकरण ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि तकनीक के इस युग में नागरिकों की निजता औरसुरक्षा के बीच संतुलन कैसे साधा जाए। अदालत के इस निर्णय के बाद भी पेगासस से जुड़ा विवाद थमा नहीं है और यह मुद्दा राजनीतिक औरसामाजिक बहस का केंद्र बना हुआ है।

कोलकाता रेप-मर्डर केस: पीड़िता के पिता ने CBI जांच पर उठाए गंभीर सवाल, कहा- अपराधियों को बचा रही है एजेंसी

घटना का विवरण: अस्पताल परिसर में मिली महिला डॉक्टर की लाशकोलकाता के एक प्रमुख अस्पताल में 9 अगस्त 2024 को उस समय हड़कंप मच गया जब वहां एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर की लाश संदिग्धहालात में मिली। वह अस्पताल में ही पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रा के रूप में कार्यरत थीं। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि महिला के साथबलात्कार किया गया और फिर उसकी हत्या की गई। यह मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया और महिला सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। मुख्य आरोपी की पहचान और सजाघटना के सिलसिले में पुलिस ने संजय रॉय नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जो कोलकाता पुलिस में सिविक वॉलंटियर था। अदालत में सुनवाई केबाद उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। लेकिन पीड़िता के परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपराध नहीं था औरइस जघन्य कृत्य में कई अन्य लोग भी शामिल थे। CBI जांच पर उठे सवाल, पिता ने जताई नाराजगीपीड़िता के पिता ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एजेंसी जानबूझकर सच्चाई को छिपा रही है। उनका दावा है किCBI को अपराधियों की पहचान है, लेकिन फिर भी वो उन्हें बचा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटी का मोबाइल फोन घटना के इतने महीनेबाद भी सक्रिय है और किसी के द्वारा उपयोग किया जा रहा है, जिससे जांच पर संदेह और बढ़ जाता है। सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी निशाने परमामले की जांच के दौरान अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और स्थानीय थाने के प्रभारी अभिजीत मंडल पर आरोप लगा कि उन्होंने सबूतों सेछेड़छाड़ की और एफआईआर दर्ज करने में देर की। CBI ने दोनों को गिरफ्तार तो किया, लेकिन समय पर चार्जशीट दाखिल न करने के कारण उन्हेंजमानत मिल गई। इससे पीड़िता के परिवार को और अधिक आघात पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और केंद्रीय बल की तैनातीइस संवेदनशील मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और जांच में लापरवाही को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार, पुलिस प्रशासन और अस्पतालप्रबंधन को आड़े हाथों लिया। न्यायालय ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती का निर्देश भी दिया और CBI सेजांच की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। जनता का आक्रोश और सड़क पर उतरे डॉक्टरघटना के बाद कोलकाता सहित देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए। डॉक्टरों ने हड़ताल की और “Reclaim the Night” जैसे अभियानों के माध्यम सेमहिला सुरक्षा की मांग की। आम नागरिकों और छात्र संगठनों ने भी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद की। न्याय की मांग अभी अधूरीपीड़िता के पिता का कहना है कि जब तक सभी दोषियों को कठोर सजा नहीं मिलती, तब तक उनकी बेटी को इंसाफ नहीं मिलेगा। उनका यह भीकहना है कि जांच एजेंसी पर उनका भरोसा टूट चुका है और वे चाहते हैं कि जांच पारदर्शी ढंग से की जाए।

दिल्ली स्कूल फीस एक्ट को कैबिनेट की मंजूरी: मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगेगी लगाम

दिल्ली सरकार ने अभिभावकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखते हुए स्कूल फीस को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘दिल्ली स्कूल फीस एक्ट’ को मंजूरी दे दी गई है। अब राजधानी के निजी स्कूल मनमाने ढंगसे फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इस निर्णय को लेकर अभिभावकों में काफी राहत और संतोष देखने को मिल रहा है। लंबे समय से फीस वृद्धि पर था विवाददिल्ली के कई निजी स्कूलों द्वारा हर साल फीस में अत्यधिक वृद्धि किए जाने को लेकर अभिभावकों में असंतोष बना हुआ था। अभिभावक संगठन इसमुद्दे को लगातार सरकार के समक्ष उठा रहे थे। शिकायतों के अनुसार, स्कूल मनमर्जी से ट्यूशन फीस के साथ-साथ एडमिशन फीस, डेवलपमेंट चार्जऔर अन्य शुल्कों में भी बेवजह बढ़ोतरी कर रहे थे, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। मुख्यमंत्री ने दिए थे लाइसेंस रद्द करने के निर्देशफीस वृद्धि की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कुछ स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके लाइसेंस रद्दकरने के निर्देश दिए थे। इसके बाद इस मुद्दे पर व्यापक समीक्षा कर दिल्ली स्कूल फीस एक्ट का मसौदा तैयार किया गया और उसे कैबिनेट की मंजूरीमिल गई। नए एक्ट के तहत क्या होंगे बदलाव?इस कानून के अंतर्गत अब दिल्ली के किसी भी निजी स्कूल को फीस बढ़ाने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी। स्कूलों को यह स्पष्ट करना होगाकि वे किस आधार पर फीस वृद्धि कर रहे हैं और उसकी क्या आवश्यकता है। इसके अलावा, फीस संरचना से जुड़ी सभी जानकारियाँ सार्वजनिक रूपसे वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होंगी। नई गाइडलाइंस भी होंगी लागूमुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी के 1677 निजी स्कूलों के लिए जल्द ही नई गाइडलाइंस भी जारी की जाएंगी। इन दिशा-निर्देशों में फीस वृद्धि कीसीमा, अनुमति लेने की प्रक्रिया और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपाय शामिल होंगे। सभी स्कूलों को इन निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा, और उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी।डीएम रिपोर्ट के बाद हुआ अहम फैसलामुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच फीस को लेकर विवाद लगातार सामने आ रहे थे। इसके चलते सरकार नेजिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश देकर स्कूलों का निरीक्षण करवाया था। डीएम द्वारा दी गई विस्तृत रिपोर्ट में फीस वृद्धि की अनियमितताएं सामने आईं, जिसके आधार पर सरकार ने यह कठोर लेकिन आवश्यक कदम उठाया है। अभिभावकों को मिली बड़ी राहतदिल्ली सरकार के इस फैसले से हजारों अभिभावकों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से स्कूलों की फीस नीति को लेकर परेशान थे। यह कानून शिक्षाके अधिकार को सुरक्षित करने और शिक्षा को किफायती बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।