केंद्रीय कैबिनेट बैठक में लिए गए पांच बड़े फैसले, सरकार ने दी किसानों को सौगात

केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में पांच बड़े फैसले लिए गए हैं सरकार ने किसानों को सौगात देते हुए, एमएसपी में 50 फीसदी की बढ़ोत्तरीकी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, किसानों के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। पिछले 10-11 वर्षों में खरीफ फसलों के लिए एमएसपीमें भारी बढ़ोतरी की गई है. खरीफ विपणन सीजन 2025-26 के लिए एमएसपी को कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई है कुल राशि लगभग 2,07,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. सरकार ने बुधवार को 2025-26 खरीफ विपणन सत्र के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 3 प्रतिशतबढ़ाकर 2,369 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इस संबंधमें निर्णय लिया. 1.5 गुना के स्तर पर तय करने की बातआगामी फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के खरीफ सत्र के लिए सामान्य और ए ग्रेड धान की किस्मों का समर्थन मूल्य 69 रुपये प्रति क्विंटलबढ़ाकर क्रमश: 2,369 रुपये और 2,389 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. दालों में अरहर का समर्थन मूल्य 450 रुपये बढ़ाकर 8,000 रुपयेप्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि उड़द का एमएसपी 400 रुपये बढ़ाकर 7,800 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग का एमएसपी 86 रुपये बढ़ाकर8768 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार ने 2025-26 के लिएखरीफ फसलों के एमएसपी में वृद्धि की है, ताकि उत्पादकों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके. पिछले वर्ष की तुलनामें एमएसपी में सबसे अधिक वृद्धि नाइजरसीड के लिए की गई है, इसके बाद रागी, कपास और तिल का स्थान आता है. 2025-26 के लिए खरीफफसलों के समर्थन मूल्य में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है, जिसमें एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादनलागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर तय करने की बात कही गई है. संशोधित ब्याज सहायता योजना को दी मंजूरीसरकार ने बुधवार को संशोधित ब्याज सहायता योजना (एमआईएसएस) को 2025-26 के लिए जारी रखने को मंजूरी दे दी, जिसके तहत किसानोंको किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से सस्ती दर पर अल्पकालिक ऋण मिलता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया किमौजूदा 1.5 प्रतिशत ब्याज सहायता के साथ वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एमआईएसएस को जारी रखने का निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लियागया. इस योजना को जारी रखने से सरकारी खजाने पर 15,640 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. एमआईएसएस एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जिसकाउद्देश्य केसीसी के माध्यम से किसानों को सस्ती ब्याज दर पर अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। एमआईएसएस के तहत, किसानोंको केसीसी के माध्यम से 7 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का अल्पकालिक ऋण मिलता है, जिसमें पात्र ऋण देने वालीसंस्थाओं को 1.5 प्रतिशत ब्याज सहायता प्रदान की जाती है. इसके अतिरिक्त, समय पर ऋण चुकाने वाले किसान शीघ्र पुनर्भुगतान प्रोत्साहन(पीआरआई) के रूप में 3 प्रतिशत तक के प्रोत्साहन के पात्र होते हैं, जिससे केसीसी ऋण पर उनकी ब्याज दर प्रभावी रूप से 4 प्रतिशत तक कम होजाती है.
कांग्रेस पार्टी के नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने पार्टी के सांसद शशि थरूर पर तीखा हमला बोला, शशि थरूर है केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न देशों के दौरों पर भेजे गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा

कांग्रेस पार्टी में सबकुछ सही नहीं चल रहा है इसका संकेत बुधवार को मिला, जब कांग्रेस पार्टी के नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने अपनी ही पार्टीके सांसद शशि थरूर पर तीखा हमला बोला और उन्हें भाजपा का सुपर प्रवक्ता बता दिया. शशि थरूर केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न देशों के दौरों पर भेजेगए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं और एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं. शशि थरूर के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल फिलहाल पनामामें मौजूद है पनामा में ही शशि थरूर के एक बयान से नाराज होकर उदित राज ने टिप्पणी की. शशि थरूर ने पनामा में दिए अपने एक भाषण में कहाकि ‘भारत सरकार ने हाल के वर्षों में अपनी सोच में बदलाव किया है. जिसके बाद आतंकियों को भी ये अहसास हो गया है कि उन्हें भारत में हमले कीकीमत चुकानी पड़ेगी. थरुर ने की टिप्पणीथरूर की इस टिप्पणी ने उनकी ही पार्टी के नेताओं को नाराज कर दिया. उदित राज ने कहा कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर भाजपा के सुपर प्रवक्ता बनगए हैं. जो भाजपा नेता नहीं कह रहे हैं, वो शशि थरूर, पीएम मोदी और सरकार के बारे में कह रहे हैं. क्या उन्हें (थरूर) पता भी है कि पिछली सरकारोंने क्या किया? वे (केंद्र सरकार) भारतीय सशस्त्र बलों का श्रेय ले रहे हैं। शशि थरूर भाजपा के प्रचार विभाग के प्रवक्ता बने हुए हैं. पनामा में दिएअपने भाषण में शशि थरूर ने सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट स्ट्राइक का जिक्र किया और कहा कि ‘हाल के वर्षों में भारत की सोच में बदलाव आयाहै. अब आतंकियों को पता है कि उन्हें कीमत चुकानी होगी इस पर कोई शक नहीं है पहली बार भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक के समय एलओसी पार करआतंकी ठिकानों पर हमले किए. यहां तक की कारगिल की लड़ाई में भी हमने सीमापार नहीं की थी इस बार न सिर्फ हमने सीमा पार की है बल्किअंतरराष्ट्रीय सीमा भी पार की है. हमने पाकिस्तान के मध्य में स्थित पंजाब में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया.
फ्रांस के निचले सदन नेशनल असेंबली ने ऐतिहासिक विधेयक को दी मंजूरी, फ्रांस में लाइलाज बीमारियों से ग्रस्त व्यस्क लोगों को मौत चुनने का मिलेगा अधिकार

फ्रांस के निचले सदन नेशनल असेंबली ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी दे दी. इस विधेयक के तहत फ्रांस में लाइलाज बीमारियोंसे ग्रस्त व्यस्क लोगों को मौत चुनने का अधिकार मिलेगा. यूरोप में लंबे समय से मौत चुनने के अधिकार को कानूनी करने की मांग उठ रही हैं. फ्रांस मेंभी लंबे समय से ऐसी मांग की जा रही है और महीनों से इस पर संसद में चर्चा में चल रही है. लंबी चर्चा के बाद मंगलवार को नेशनल असेंबली नेइसकी मंजूरी दे दी. अब इस विधेयक को उच्च सदन सीनेट में पेश किया जाएगा. प्रस्तावित विधेयक में जहां गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को मौतका विकल्प चुनने की मंजूरी दी गई है, वहीं इसके साथ कड़ी शर्तें भी लगाई गई हैं. शर्तों के तहत लाइलाज बीमारी होने पर मरीज को खुद ही जहरलेना होगा, लेकिन अगर वह खुद इस स्थिति में नहीं है कि खुद अपनी जान ले सके तो उस स्थिति में डॉक्टर या नर्स की मदद से व्यक्ति को जहर दियाजा सकेगा. 18 साल का होना जरुरीविधेयक के तहत मौत का विकल्प चुनने के लिए मरीज का कम से कम 18 साल का होना जरूरी है. साथ ही उसका फ्रांस का नागरिक होना भी जरूरीहै. मौत का विकल्प चुनने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम यह सत्यापित करेगी कि व्यक्ति लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है और उसका कोई इलाजनहीं है. साथ ही मरीज असहनीय पीड़ा से गुजर रहा है इस सत्यापन के बाद ही मौत चुनने का विकल्प मिलेगा. मानसिक रोगियों को मौत चुनने केविकल्प से बाहर रखा गया है. विधेयक के तहत बीमार व्यक्ति को अगर जान देने की अनुमति मिल जाती है तो वह अपने घर, नर्सिंग होम या स्वास्थ्यकेंद्र में जानलेवा दवाई या जहर ले सकेगा. मौत का विकल्प चुनने का अधिकार देने की जा रही मांगफ्रांस में बीते 20 वर्षों से मौत का विकल्प चुनने का अधिकार देने की मांग की जा रही है. बीते महीने राष्ट्रपति मैक्रों ने सुझाव दिया था कि अगर यहविधेयक संसद में फंसा रहता है और इसे मंजूरी नहीं मिल पाती है तो वे फ्रांस के मतदाताओं से पूछकर एक जनमत के जरिए भी इस विधेयक को मंजूरकर सकते हैं. हालांकि विधेयक का विरोध भी हो रहा है फ्रांस के धार्मिक नेताओं के संगठन द कॉन्फ्रेंस ऑफ रिलीजियस लीडर्स इन फ्रांस ने इसविधेयक का विरोध किया है. इस संगठन में कैथोलिक, ऑर्थोडॉक्स, प्रोटेस्टेंट, यहूदी, मुस्लिम और बौद्ध समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हैं. संगठन कादावा है कि इस विधेयक के बाद बुजुर्गों, बीमार और अक्षम लोगों पर भी दबाव बढ़ेगा. उल्लेखनीय है कि फ्रांस की तरह ही ब्रिटेन में भी ऐसे हीविधेयक पर चर्चा चल रही है. अभी स्विट्जरलैंड, कई अमेरिकी राज्यों, नीदरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, कोलंबिया, बेल्जियम, लक्जमबर्ग में भी कुछ शर्तों के साथ मौत चुनने का विकल्प मौजूद है.