CM रेखा गुप्ता का माया महल, जनता बेहाल!- AAP विधायक अनिल झा का करारा प्रहार

दिल्ली की सियासत में बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी के विधायक अनिल झा ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं।उन्होंने कहा कि जब दिल्ली के गरीब नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब मुख्यमंत्री खुद के लिए शाही बंगले बनवा रही हैं।दो बंगले, 30 कमरे और शाही रेनोवेशन:- विधायक अनिल झा ने खुलासा किया कि रेखा गुप्ता को दो बड़े बंगले अलॉट किए गए हैं, जिनमें कुल 30 कमरे हैं। इन बंगलों में महंगे जनरेटर, एसी, खूबसूरत पेंटिंग और लग्ज़री सुविधाओं का इंतजाम किया जा रहा है। जनता बिजली कटौती झेल रही है,और मुख्यमंत्री के बंगलों में पावर बैकअप की तैयारी हो रही हैIसुरक्षा और काफिले पर भारी खर्च- अनिल झा ने कहा कि अब मुख्यमंत्री के काफिले में 13 गाड़ियां चल रही हैं और 45 सिक्योरिटी गार्ड्स तैनात हैं।उन्होंने सवाल किया कि पहले सादगी की बात करने वाली मुख्यमंत्री को अब इतनी सुरक्षा और शानो-शौकत की ज़रूरत क्यों पड़ गई? गरीबों की अनदेखी, सुविधाओं की राजनीति:- विधायक ने लाजपत नगर और सरोजिनी नगर का हवाला देते हुए कहा कि जहां गरीब व्यापारी अपनेबच्चों का पेट भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं सरकार मुख्यमंत्री के बंगले पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।जो पार्टी कल तक सादगी और सेवा की बात करती थी, आज वही सत्ता में आकर शाही ठाठ दिखा रही है-अनिल झा महिला नेतृत्व के नाम पर ढोंग? अनिल झा ने कहा कि महिला मुख्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने जनता को दिखावा बेचने का काम किया है। “सत्ता मिलने के बाद जनता की समस्याएं भूलजाना, यही है बीजेपी का असली चेहरा,” उन्होंने कहा।“AAP रखेगी पैनी नजर”-अनिल झा ने कहा कि आम आदमी पार्टी इस तरह के फिजूलखर्ची पर पूरी निगरानी रखेगी। “जनता का पैसा नेताओं केऐशो-आराम पर नहीं, जनता की भलाई पर खर्च होना चाहिए,” उन्होंने दो टूक कहा। रेखा गुप्ता के महंगे बंगलों को लेकर दिल्ली की जनता में नाराजगी है। अनिल झा ने जो सवाल उठाए हैं, वो सीधे तौर पर जनता से जुड़े है- बिजली, पानी, रहन-सहन और जवाबदेही। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि बीजेपी और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इन आरोपों का जवाब कैसे देती हैं।
विजय माल्या बोले: भगोड़ा कहो लेकिन चोर नहीं, किंगफिशर संकट का कारण था वैश्विक मंदी

राज शमानी के पॉडकास्ट में विजय माल्या ने स्पष्ट किया कि वे खुद को ‘चोर’ कहे जाने को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने कहा कि मार्च 2016 के बाद वेभारत नहीं लौटे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे देश से भाग गए। माल्या के अनुसार, वे एक पूर्व निर्धारित यात्रा पर भारत से बाहर गए थे औरपरिस्थितियों के कारण वापस नहीं लौटे। उन्होंने कहा, “अगर आप मुझे भगोड़ा कहना चाहते हैं, तो कहिए, लेकिन मैं चोर नहीं हूं। मैंने कोई चोरी नहींकी।” भारत में निष्पक्षता की गारंटी मिले तो लौटने पर विचारयूके में रह रहे विजय माल्या ने कहा कि अगर उन्हें भारत में निष्पक्ष सुनवाई और सम्मानजनक जीवन का भरोसा मिलता है, तो वे वापसी पर गंभीरता सेविचार कर सकते हैं। उन्होंने एक ब्रिटिश कोर्ट के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि भारत में जेल की स्थितियां यूरोपीय मानवाधिकारसंधि के अनुच्छेद 3 का उल्लंघन करती हैं। इसलिए उन्हें प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता। वैश्विक वित्तीय संकट ने किंगफिशर को डुबोयाकिंगफिशर एयरलाइंस के संकट पर बोलते हुए माल्या ने 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी को मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि उस समय पूरीदुनिया प्रभावित थी और भारत भी इससे अछूता नहीं था। “क्या आपने लेहमैन ब्रदर्स के बारे में सुना है?” माल्या ने पूछा और कहा कि मंदी के चलतेबाजार में तरलता समाप्त हो गई, और हर उद्योग पर असर पड़ा। प्रणब मुखर्जी से की थी मुलाकातमाल्या ने बताया कि उन्होंने उस समय के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर किंगफिशर की स्थिति से अवगत कराया था। उन्होंने कहा किएयरलाइन को छोटा करने, विमानों की संख्या घटाने और कर्मचारियों की छंटनी की योजना बनाई गई थी, लेकिन उन्हें ऐसा न करने की सलाह दीगई। उन्हें आश्वासन दिया गया कि बैंक उनकी मदद करेंगे। बैंकों के भरोसे शुरू हुआ पतनमाल्या ने दावा किया कि सरकार और बैंकों के समर्थन के वादों के आधार पर उन्होंने किंगफिशर को उसी रूप में चलाना जारी रखा। लेकिन समय केसाथ स्थिति बिगड़ती गई और अंत में एयरलाइन को सभी उड़ानें बंद करनी पड़ीं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जब ऋण लिया गया था, उस समयकंपनी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था।
राहुल गांधी का नालंदा से प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला, “उन्हें सरेंडर करने की आदत है”

संविधान सुरक्षा सम्मेलन में OBC अधिकारों की जोरदार वकालत2025 में पांचवीं बार बिहार पहुंचे कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नालंदा में आयोजित संविधान सुरक्षा सम्मेलन(ओबीसी सम्मेलन) को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री को“सरेंडर करने की आदत है” और वह “दबाव पड़ते ही दो मिनट में चिट्ठी लिखने लगते हैं”। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतिडोनाल्ड ट्रंप के सामने भी आत्मसमर्पण कर दिया था। लोकसभा में जाति जनगणना पर हुई थी सीधी बातराहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने लोकसभा में मोदी की आंखों में आंख डालकर कहा था कि जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझे पता था कि थोड़ी सी राजनीतिक दबाव में मोदी जी सरेंडर कर देंगे।” लेकिन उन्होंने आशंका जताई कि केंद्र सरकार सही तरीके से जातिगतजनगणना नहीं कराएगी, क्योंकि ऐसा होने पर उनकी राजनीति खतरे में पड़ जाएगी। 90 प्रतिशत आबादी के साथ हो रहा अन्यायराहुल गांधी ने देश की सामाजिक संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की 90 प्रतिशत आबादी को अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य औरनौकरशाही जैसे क्षेत्रों में हिस्सेदारी नहीं मिलती। उन्होंने कहा, “देश की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्ग के लोगों का नप्रतिनिधित्व है, न वे मैनेजमेंट में हैं। इन वर्गों के लोग डॉक्टर नहीं बन पा रहे, न ही स्कूलों और विश्वविद्यालयों में प्रमुख पदों पर पहुंच रहे हैं।” असमानता की संरचना को बदलने की अपीलराहुल गांधी ने यह भी कहा कि गरीबों का कर्ज माफ नहीं किया जाता, जबकि बड़े उद्योगपतियों को सरकारी बजट में कानून बनाकर राहत दी जाती है।उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश की 90 प्रतिशत आबादी रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य से वंचित है, तो असल नियंत्रण कुछ प्रतिशत लोगों के पासक्यों है? जाति आधारित जनगणना को बताया आंदोलन का लक्ष्यराहुल गांधी ने कहा कि “जातिगत जनगणना” देश में सामाजिक न्याय की दिशा में पहला बड़ा कदम है। उन्होंने सम्मेलन के जरिए जनता से अपील कीकि वे यह जानने के लिए संगठित हों कि “देश में किसकी कितनी भागीदारी है”, ताकि 90 प्रतिशत आबादी को उनका हक मिल सके।
क्या पाकिस्तान के आगे झुकी मोदी सरकार? – सुप्रिया श्रीनेत का बड़ा हमला

कांग्रेस पार्टी की तेजतर्रार प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आज एक जोरदार प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोपलगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की चुप्पी अब सिर्फ चौंकाने वाली नहीं, बल्कि देश की विदेश नीति के लिएखतरनाक साबित हो रही है। सुप्रिया ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत औरपाकिस्तान के बीच सीजफायर उन्होंने करवाया था — और भारत ने इसके लिए सहमति दी थी। क्या ट्रंप सच बोल रहे हैं, या देश से कुछ छिपाया जा रहा है? :- सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि अगर ट्रंप का दावा झूठा है तो भारत सरकार उसका खंडनक्यों नहीं करती? और अगर वह सच बोल रहे हैं, तो यह देश के साथ धोखा नहीं तो और क्या है? उन्होंने कहा, “11 बार ट्रंप ने दुनिया के सामने कहाकि उन्होंने भारत से बात करके पाकिस्तान के साथ सीजफायर कराया। क्या यह सच है? अगर नहीं, तो प्रधानमंत्री मोदी क्यों चुप हैं?” कश्मीर दौरे पर मोदी की ‘चुप्पी’ पर सवाल:- प्रधानमंत्री के हालिया कश्मीर दौरे को लेकर भी सुप्रिया ने निशाना साधा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री वहांजाकर सिर्फ इवेंट कर आए। न आतंकवाद पर कोई बयान, न पाकिस्तान पर कोई सख्त संदेश। क्या सिंधु जल समझौते पर बातचीत ट्रंप औरपाकिस्तान के साथ चुपचाप चल रही है? क्या देश को अंधेरे में रखा जा रहा है?” पाकिस्तान को मिल रही अंतरराष्ट्रीय बढ़त- प्रवक्ता ने चिंता जताई कि पाकिस्तान को जहां अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन और आर्थिक मदद मिल रहीहै, वहीं भारत बार-बार चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा, “आज पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की समितियों में चेयर बन रहा है, चीन के साथ मिलकर हमारेखिलाफ साजिश रच रहा है और अमेरिका उसकी पीठ थपथपा रहा है। क्या यह मोदी सरकार की सफल विदेश नीति है? मोदी सरकार की विदेश नीति पर कटाक्ष:- सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार की विदेश नीति को ‘फोटो खिंचवाओ और चुप रहो नीति’ बताया। उन्होंनेकहा कि प्रधानमंत्री को मंच पर भाषण देना आता है, लेकिन जब देश संकट में होता है, तो वह जवाब देने के लिए सामने नहीं आते। उन्होंने तीखासवाल दागा- “क्या हमारी माताओं, बहनों और वीर जवानों की शहादत की कीमत पर सिंधु का सौदा हो गया?”संसद में जवाब मांगा गया:- प्रेस वार्ता के अंत में कांग्रेस की ओर से मांग की गई कि मोदी सरकार को संसद में आकर स्पष्ट करना चाहिए कि-1. क्या भारत ने पाकिस्तान से सीजफायर के लिए सहमति दी?2. क्या ट्रंप का बयान झूठा है? यदि हां, तो आधिकारिक खंडन क्यों नहीं किया गया?3. क्या सिंधु जल संधि में कोई बदलाव हुआ है या उस पर गुप्त बातचीत चल रही है? देश को जानने का हक है:- सुप्रिया श्रीनेत का यह कहना बिलकुल स्पष्ट था — देश की जनता जानना चाहती है कि उसके नाम पर क्या-क्या सौदेकिए जा रहे हैं। क्या मोदी सरकार की चुप्पी पाकिस्तान और अमेरिका के साथ किसी गुप्त समझौते की ओर इशारा करती है?भारत की जनता को जवाब चाहिए और यह जवाब सिर्फ भाषणों से नहीं, संसद में खुलकर देना होगा।