दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने किया निजामुद्दीन रैन बसेरा का औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं पर जताई नाराज़गी

दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने गुरुवार को निजामुद्दीन स्थित रैन बसेरा (रात्रि आश्रय केंद्र) का औचक निरीक्षण किया। यह रैन बसेरा उनयोजनाओं का हिस्सा है जिन्हें दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के माध्यम से संचालित किया जाता है। इनका उद्देश्य बेघर और आर्थिकरूप से कमजोर नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और मुफ्त रात्रि आश्रय प्रदान करना है। रैन बसेरे में आमतौर पर बिस्तर, कंबल, पीने का पानी, शौचालय और कुछ मामलों में भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। लेकिन मंत्री के निरीक्षण के दौरान इन व्यवस्थाओं की पोलखुलती नजर आई। अव्यवस्थाओं पर मंत्री आशीष सूद ने जताई सख़्त नाराज़गी- निरीक्षण के दौरान मंत्री आशीष सूद ने पाया कि रैन बसेरे की स्थिति बेहद खराब है।सफाई व्यवस्था न के बराबर थी, और मरीजों से ही सफाई का कार्य करवाया जा रहा था। इतना ही नहीं, सरकार द्वारा हर मरीज से ₹6000 रुपएसफाईकर्मी के नाम पर लिए जाने की बात भी सामने आई, जिससे मंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया।मंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा यह अत्यंत शर्मनाक है कि जिन लोगों को सरकार की सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता है, उन्हेंइस प्रकार की बदहाल व्यवस्था में रखा जा रहा है। ऐसे केंद्रों का उद्देश्य बेघरों को सहारा देना है, शोषण करना नहीं। अफगान नागरिक की उपस्थिति पर रखी गई विशेष निगरानी – निरीक्षण के दौरान एक अफगान नागरिक, मोहम्मद सादिक भी रैन बसेरे में पाए गए।बातचीत में उन्होंने बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से भारत में रह रहे हैं, और पिछले तीन वर्षों से इस रैन बसेरे में ठहरे हुए हैं। उनका परिवार अब भीअफगानिस्तान में रहता है। उनकी स्थिति को गंभीर मानते हुए मंत्री आशीष सूद ने अधिकारियों को उन पर विशेष निगरानी रखने और उनके दस्तावेजोंकी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।सरकार से अपेक्षित है त्वरित कार्रवाई – इस पूरे निरीक्षण के बाद मंत्री ने आश्वासन दिया कि रैन बसेरे में पाई गई अव्यवस्थाओं पर जल्द कार्रवाई कीजाएगी। उन्होंने DUSIB को निर्देश दिया कि साफ़-सफ़ाई, भोजन, और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार सुनिश्चित किया जाए और ऐसेकेंद्रों की नियमित निगरानी की जाए। रैन बसेरों का उद्देश्य केवल एक छत देना नहीं है, बल्कि एक गरिमामय जीवन की बुनियादी शुरुआत करना भीहै।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी नहीं, अब नेशनल करप्शन एजेंसी बन चुकी है- शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल- कन्हैया कुमार

देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। विपक्षी दलों, शिक्षा विशेषज्ञों और छात्र संगठनों काआरोप है कि यह संस्था अब “नेशनल करप्शन एजेंसी” बन गई है। हर साल जैसे ही राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा या कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्टजैसी परीक्षाएं होती हैं, किसी न किसी नए घोटाले का खुलासा होता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा पर फिर से उठाविवाद हाल ही में केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी प्रथम सूचना रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस एफआईआर में पैसे लेकरऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन। शीट बदलने की बात कही गई है। दो लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है और तीन लोग अब भी फरार हैं। यह पूरा मामलाभ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (एंटी करप्शन एक्ट) के तहत दर्ज किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस गड़बड़ी में कोई न कोई बड़ा हाथ जरूरहै। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि केंद्रीय जांच ब्यूरोयह दावा कर रही है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी का कोई अधिकारी इसमें शामिल नहीं है। ऐसेमें सवाल उठता है कि जब किसी अधिकारी की भूमिका नहीं है, तो फिर मामला एंटी करप्शन एक्ट के तहत क्यों दर्ज हुआ? स्वास्थ्य सेवा की नींवहिल रही है राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के ज़रिये देशभर के मेडिकल कॉलेजों में दाख़िले होते हैं। यानी इस परीक्षा से ही तय होता है कि देश केभविष्य के डॉक्टर कौन होंगे। ऐसे में अगर इस राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो यह केवल शिक्षा नहीं, बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ को हिला देने वाला मामला है। हर साल विवाद, हर साल चुप्पी पिछले कई वर्षों से परीक्षा हर बार विवादोंमें घिरती है। कभी पेपर लीक, कभी मार्किंग में गड़बड़ी, तो कभी परिणामों की घोषणा में अनियमितता। लेकिन हर बार सरकार की तरफ से सिर्फखानापूर्ति होती है। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। मोदी सरकार के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र की बदहाली- वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही हैशिक्षा बजट में कटौती की जा रही हैकोई भी परीक्षा सही तरीके से आयोजित नहीं हो रहीविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की स्थिति बदतर होती जा रही हैहर परीक्षा में गड़बड़ियों का सिलसिला थम नहीं रहा कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के ज़रिये प्राइवेट कॉलेजों को फायदा – कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट परीक्षा के डेटा लीक की भी खबरें सामने आई हैं।आरोप है कि पेपर होने के बाद प्राइवेट कॉलेजों को छात्र डेटा मिल जाता है, जिससे वे छात्रों के अभिभावकों को कॉल करके एडमिशन के लिए दबावबनाते हैं। साथ ही यह भी देखा गया है कि जानबूझकर सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया में देरी की जाती है, ताकि पहले प्राइवेट कॉलेजोंकी सीटें भर जाएं। इससे यह साफ होता है कि यह एक सुनियोजित व्यापारिक मॉडल बन चुका है, जिसमें शिक्षा का बाजारीकरण हो रहा है। छात्रों में बढ़ता तनाव, आत्महत्याएं चिंताजनकआज देश में हर एक घंटे में दो छात्र आत्महत्या कर रहे हैं। इसके पीछे परीक्षा प्रणाली की अव्यवस्था, मानसिक दबाव, और पारदर्शिता की कमी जैसेकई कारण हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान हीं देना चाहिए? कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता छीनी – देश के 300 से अधिक विश्वविद्यालय अब कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के ज़रियेप्रवेश कराते हैं। पहले जिन विश्वविद्यालयों के पास इन-हाउस प्रवेश प्रणाली थी, उन्हें भी मजबूर किया गया कि वे कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्टअपनाएं। कारण यह है कि यूजीसी का अनुदान (ग्रांट) उन्हीं को मिलेगा, जो कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट के माध्यम से दाखिला करेंगे। इससेविश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और गुणवत्ता पर भी आघात हुआ है। जांच क्यों नहीं? दोषियों को बचाया क्यों जा रहा है? अब जब केंद्रीय जांच ब्यूरोकी प्राथमिकी खुद गड़बड़ियों की पुष्टि कर रही है, तो सरकार को चाहिए कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए. हर साल हो रही अनियमितताओं पर स्थायी समाधान निकाला जाएशिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को राजनीति और व्यापार से बाहर रखा जाएपरीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए प्रधानमंत्री केवल ‘परीक्षा पर चर्चा’ करते हैं, लेकिन ज़रूरत है कि वे ‘परीक्षा पर कार्रवाई’ भी करें। देश का भविष्य बना रही परीक्षा प्रणाली आज संदेह, अविश्वास और भ्रष्टाचार की शिकार हो चुकी है। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया, तो यह देश के शिक्षा और स्वास्थ्य तंत्र कोअपूरणीय क्षति पहुंचा सकती है। अब वक्त है कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी जैसी संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाए और देश के युवाओं को भरोसेमंदव्यवस्था दी जाए।
स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की धोखाधड़ी उजागर इलाज के वक्त नहीं मिला क्लेम, पत्रकार को धमकाने की शर्मनाक हरकत

सिद्धार्थ के पापा की लंबी बीमारी के बाद 20 मई को स्वर्गवास हुआ उसके पापा के इलाज के खर्चे से उसकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई थी। वहअसहाय सा महसूस कर रहा था. पहले कभी ऐसा हुआ नही था. कुछ दिनों बाद अचानक 18 जून की शाम को सीने में जलन सी हुई वो ख्यातिप्राप्तचिकित्सक डा. मधुप बक्षी को दिखाने उनके घर पहुंचा इसीजी के बाद उसे जिले के सबसे बड़े और सुविधाजनक बिरला हास्पिटल में एडमिट करादिया गया. अगले दिन एंजियोग्राफी कराने की सलाह मिलने पर सिद्धार्थ को उदयपुर जीबीएच अमेरिकन हास्पिटल ले जाया गया. डा. डेनी मंगलानीऔर कपिल भागर्व की गिनती मेवाड़ के अच्छे चिकित्सकों में की जाती है. डा. मंगलानी ने एंजियोग्राफी के बाद आई रिपोर्ट की जानकारी दी औरबताया कि सिद्धार्थ को दो स्टेंट और एक बलून लगाया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि यह अभी लगाने जरूरी है अन्यथा कुछ भी हो सकता है. बसयहीं से शुरू हुआ स्टार हेल्थ इंश्योरेंस का खेल सिद्धार्थ पिछले पांच सालों से स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की प्रीमियम भर रहा था. पहले कभी क्लेम नहीकिया था क्यों कि वह स्वस्थ ही था उसे लगा कि जब कभी शारीरिक संकट आएगा तो स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से मदद मिल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीहुआ. सोशल मीडिया पर दी थी स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की धोखाधड़ी की जानकारीराजस्थान मीडिया एक्शन फोरम की टीम ने सोमवार रात्रि 10 बजे स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की धोखाधड़ी की जानकारी सोशल मीडिया पर दी मंगलवारसुबह लगभग 9 बजकर पचास मिनिट पर सिद्धांशु बीकानेरिया नामक व्यक्ति का मोबाइल काल आया और उन्होंने अपने आप को स्टार हेल्थ इंश्योरेंसका सेल्स मैनेजर बताया और मामले की जानकारी ली. जब मरीज की बहन ने उन्हें पूरी बात बताई तो उन्होंने बताया कि पांच साल लगातार प्रीमियमभरने वाले से तीन माह पहले हुई किसी बीमारी का कागज स्टार हेल्थ इंश्योरेंस नही मांग सकता है. अगर उन्होंने मांगा तो गलत है। बाद में उन्होंनेइलाज के बिल लगाने के लिए कहकर अपनी बात खत्म कर दी. स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के सेल्स मेनेजर सिद्धांशु बीकानेरिया से हुई बात की जानकारी भीराजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया पर दी. जिस पर स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के सेल्स मेनेजर सिद्धांशु बीकानेरिया नेउसका नाम हटाने के लिए कहा. राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के टीम के साथ ही फोरम के संस्थापक अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकारअनिल सक्सेना ने भी सोशल मीडिया पर स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की धोखाधड़ी की जानकारी दी थी. गुरूवार को सुबह स्टार हेल्थ इंश्योरेंस मुम्बई के वरिष्ठ सेल्स मेनेजर जीग्नेश गोर ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस की सोशल साइट पर अनिल सक्सेना के कमेंट को टेग करते हुए बदतमीजी से तू-तड़ाक कर धमकाते हुए कहा कि ‘‘सब जगह ललकारने से क्लेम मिल जाएगा तुझे” इसके जवाब में अनिल सक्सेना ने लिखा ‘‘ आपके कहे से मैंडर गया हूं , मानसिक प्रताड़ना पहले से थी कृपया आप मुझे नही धमकाये. धोखाधड़ी को बताया निंदनीयउनके इस कमेंट को एडमिन ने एप्रुव नही किया लेकिन थोड़ी देर बाद ही जीग्नेश का कमेंट भी दिखना बंद हो गया. (वरिष्ठ पत्रकार अनिल सक्सेना नेस्टार हेल्थ इंश्योरेंस मुम्बई के वरिष्ठ सेल्स मेनेजर जीग्नेश गोर के धमकी भरे कमेंट का स्क्रीनशॅाट ले लिया था,राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम केमहासचिव अशोक लोढा ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस मुम्बई के वरिष्ठ सेल्स मेनेजर जीग्नेश गोर के द्वारा वरिष्ठ पत्रकार के साथ की गई बदतमीजी और दीगई धमकी की निंदा की है. उन्होंने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के आला अधिकारियों से गोर को बर्खास्त करने की मांग की है. यूथ मूवमेंट, राजस्थान ने […]
भारत ने यूएन में पाकिस्तान को बच्चों पर अत्याचार आतंकवाद के मुद्दे पर दिया करारा जवाब, नापाक एजेंडा किया बेनकाब

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को करारा जवाब दिया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तानअपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न चर्चाओं में भारत को बदनाम कर रहा है. ऐसा करके पाकिस्तान अपने ही देश में बच्चों के खिलाफकिए जा रहे अत्याचारों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है. भारत ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में पाकिस्तान को कराराजवाब दिया. भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपने क्षेत्र में बच्चों के अत्याचार के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि बच्चों केखिलाफ अत्याचार और आतंकवाद फैलाने वाले पाकिस्तान का संयुक्त राष्ट्र में उपदेश देना घोर पाखंड है. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में बच्चों और सशस्त्रसंघर्ष (सीएएसी) पर वार्षिक खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि मैं पाकिस्तान के प्रतिनिधि की ओरसे की गई राजनीति से प्रेरित टिप्पणियों पर खारिज करता हूं. गलत तरीके से संदेह कर रहे है व्यक्तपाकिस्तान सीएएसी एजेंडे के गंभीर उल्लंघनकर्ताओं में से एक है पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की प्रक्रियाओं पर गलत तरीके से संदेह व्यक्त कर रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न चर्चाओं में भारत को बदनाम कर रहा है. ऐसा करके पाकिस्तान अपनेही देश में बच्चों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है. भारत इसे अस्वीकार करता है. इसके अलावा भारत सीमापार से किए जा रहे बड़े पैमाने पर आतंकवाद को भी अस्वीकार कर रहा है. भारत के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि हमारीदुनिया संघर्षों और आतंकी हमलों में एक खतरनाक वृद्धि देख रही है और बच्चे उनके सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं यूएनएसजी की रिपोर्ट के अनुसारबच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन 25 प्रतिशत बढ़ गए हैं जबकि 2024 में यौन हिंसा 35 प्रतिशत बढ़ गई है यह गंभीर स्थिति तत्काल और निर्णायककार्रवाई की मांग करती है इसलिए आज की चर्चा जरूरी और आवश्यक दोनों है. सामाजिक समर्थन की है आवश्यकताउन्होंने कहा कि बच्चों के समग्र विकास के लिए एक सक्षम वातावरण बनाना बाल संरक्षण के लिए मौलिक है उनकी सुरक्षा, पोषण और शिक्षा कोराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए. संघर्ष और संघर्ष के बाद की स्थितियों में बच्चों को समाज में उनके सफल पुन: एकीकरण केलिए विशेष ध्यान और मनोवैज्ञानिक-सामाजिक समर्थन की आवश्यकता होती है. इन आवश्यक पारिस्थितिकी प्रणालियों के निर्माण के लिए राज्यद्वारा निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि दुनिया 22 अप्रैल 2025 कोपहलगाम में पाकिस्तान और पाकिस्तान द्वारा प्रशिक्षित आतंकवादियों के भारत में 26 पर्यटकों को मार डालने वाले हमलों को नहीं भूली है. सीएएसीपर महासचिव की रिपोर्ट पाकिस्तान में सशस्त्र संघर्ष में बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघनों को उजागर करती है। महासचिव ने स्कूलों, विशेष रूप सेलड़कियों के स्कूलों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ हमलों सहित इस तरह के गंभीर उल्लंघनों में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है.
CM भगवंत मान ने बिक्रम मजीठिया की गिरफ्तारी पर विपक्ष को दिया करारा जवाब, कहा बड़ी मछलियों पर भी होगी कार्रवाई

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अकाली दल के नेता व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई पूरे कागज जुटाकर और पक्केपैरी की गई है. विपक्ष काफी समय से आरोप लगा रहा था कि बड़ी मछलियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है. अब जब वह बड़ी मछलियों केखिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं तो पूरा विपक्ष एकजुट हो गया.उन्होंने कहा कि यह अब मुझे भी नुकसान पहुंचा सकते हैं लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं. आजभी मैंने कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेना है और पहले की तरह ही हिस्सा लेना जारी रखूंगा जिस तरह से विपक्षी नेता इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं. उससे यह स्पष्ट है कि और भी नेता इसमें शामिल हो सकते हैं जिनके खिलाफ जल्द ही कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों और भीबड़े नेता गिरफ्तार होंगे और महत्वपूर्ण बरामदगी की जाएगी. मान ने कहा कि कोई भी नेता जितना भी राजनीतिक रूप से ताकतवर हो लेकिन उसकोछोड़ नहीं जाएगा. लेनदेन के आधार पर की गई कार्यवाईउन्होंने कहा कि एनडीपीएस के पर्चे, पैसे की लेनदेन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है 29 मोबाइल पकड़े गए हैं और चार लैपटॉप बरामद किएगए हैं इतने मोबाइल का किसी ने क्या करना है. इन नेताओं को ऐसा लगता था कि ये कौनसा हमारे पास आयेंगे यही कारण हैं अब कार्रवाई के बादविरोध कर रहे.मान ने कहा कि मामले में ईडी की भी एंट्री हो सकती है. साथ ही और भी बड़े मगरमच्छ पकड़े जा सकते हैं पहले भी ईडी ने कार्रवाई कीथी और वह दोबारा भी एजेंसी कार्रवाई कर सकती है. पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम मजीठिया को बुधवार को उनके अमृतसर निवास से मनी लान्डि्रगमामले में गिरफ्तार किया गया था. लेकिन यह कार्रवाई पूरे सबूतों के साथ की गई है. मान ने साफ किया कि आने वाले दिनों में और भी बड़े नेतागिरफ्तार होंगे और महत्वपूर्ण बरामदगी होगी. इस कार्रवाई में 29 मोबाइल फोन और चार लैपटॉप बरामद किए गए हैं उन्होंने यह भी कहा कि मामलेमें ईडी की भी एंट्री हो सकती है.
संघर्ष विराम के बाद ईरान से 272 भारतीय नागरिक सुरक्षित भारत लौटे, ऑपरेशन सिंधु के तहत कुल 3,426 लोग वापस

इस्राइल-ईरान में संघर्ष विराम के बाद भी भारतीय नागरिकों को वापस देश लाने का सिलसिला जारी है. बुधवार की रात 272 भारतीय और तीननेपाली नागरिकों को सुरक्षित राजधानी दिल्ली लाया गया. ऑपरेशन सिंधु के तहत अब तक कुल 3,426 नागरिकों वापस लाया जा चुका है. ईरान मेंस्थित भारतीय दूतावास ने संघर्ष विराम को देखते हुए निकसी डेस्क को बंद करने की घोषणा की है.पश्चिम एशिया से भारतीय नागरिकों का एक औरखेप बुधवार की रात को राजधानी दिल्ली पहुंचा. संघर्ष प्रभावित ईरान के मशहद में फंसे 272 भारतीय और तीन नेपाली नागरिकों को सुरक्षित वापसलाया गया. भारतीय नागरिकों को लाया गया वापसबता दें कि ऑपरेशन सिंधु के तहत अब तक कुल 3,426 भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है. ऑपरेशन सिंधु ईरान और इस्राइल की बीचबढ़ते संघर्ष को देखते हुए भारत सरकार ने शुरू किया था. दोनों देशों के बीच भले ही संघर्ष विराम की घोषणा हो गई है लेकिन स्थिति अब भी सामान्यनहीं हुई है. तनावपूर्ण ईरान से लौटे लोगों ने भारतीय सरकार, खासकर प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि उन्हें किसी कठिनाई कासामना नहीं करना पड़ा ईरानी और भारतीय दोनों सरकारों ने हमारे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया. ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को बतायाकि दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम को देखते हुए भारतीय नागिरकों को भारत लाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी. सोशल मीडिया पर किया पोस्टदूतावास ने सोशल मीडिया एक्स पर इससे संबंधित पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि दूतवास ने संपर्क डेस्क बंद कर दिया है. जो निकासी के लिए नएनामों को पंजीकृत करने के लिए खोला गया था साथ ही भारत सरकार उभरती स्थिति पर निरंतर नजर रख रही है और ईरान में भारतीय नागरिकों कीसुरक्षा के लिए फिर से खतरा होने की स्थिति में अपनी रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करेगी. इस्राइल और ईरान ने मंगलावर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप की ओर से प्रस्तावित संघर्ष विराम को स्वीकार कर लिया. इससे पश्चिम एशिया में 12 दिनों से चल रहे युद्ध पर विराम लग गया.
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025 की घोषणा, राज्य को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनानेका लक्ष्य

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात की पॉलिसी ड्रिवन स्टेट के रूप में स्थापित हुई इमेज को व्यापक बनाने के लिए एकऔर पॉलिसी ‘गुजरात इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी 2025 (जीईसीएमएस)’ की घोषणा की है. गुजरात को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्समैन्युफैक्चरिंग का पावर हाउस बनाने की मंशा के साथ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषित की गई इस पॉलिसी की विशेषता यह है कि केन्द्र सरकार केइलेक्ट्रॉनिक्स तथा इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा मंजूरी तथा सहायता प्राप्त इकाइयों को गुजरात में भी केन्द्रीय मानदंड केअनुसार 100 प्रतिशत सहायता प्रोत्साहन मिलेगा. सरकार के दोहरे प्रोत्साहन लाभ हो सकेंगें प्राप्तयानी कि गुजरात में स्थापित होने वाले एमईआईटीवाई स्वीकृत प्रोजेक्ट्स को केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार के दोहरे प्रोत्साहन लाभ प्राप्त हो सकेंगे. यह पॉलिसी केन्द्र सरकार की ईसीएमएस पॉलिसी से सुसंगत है और इसके तहत 100 प्रतिशत टॉपअप का अनुकरण कर आसानी से कम से कमसमय में सहायता प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जाएंगे.इतना ही नहीं, एमईआईटीवाई द्वारा एक बार ईसीएमएस अंतर्गत प्रोजेक्ट मंजूर होने के बाद राज्य मेंस्थापित होने वाले प्रोजेक्ट्स स्वतः समान अनुदान – सहायता के पात्र बनेंगे और केन्द्र सरकार द्वारा सहायता का भुगतान किए जाने के बाद 30 दिन मेंराज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन सहायता का भुगतान कर दिया जाएगा. गुजरात देश के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट लैंडस्केप में मैन्युफैक्चरिंग हब. ऑटो हब कीप्रतिष्ठा वाला राज्य बना है. रेजिलिएंस में होगी वृद्धिराज्य में चार सेमीकंडक्टर प्लांट्स भी कार्यरत हैं. ऐसे में अब इस पॉलिसी के परिणामस्वरूप अपस्ट्रीम इंडस्ट्री को भी वेग मिलेगा और इसके चलतेआयात पर निर्भरता घटेगी एवं टेक्नोलॉजिकल रेजिलिएंस में वृद्धि हो सकेगी.इस पॉलिसी द्वारा राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में35 हजार करोड़ रुपए से अधिक के नए निवेश तथा अधिकाधिक हाईस्किल्ड एम्प्लॉयमेंट का लक्ष्य रखा गया है. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा घोषितकी गई इस जीईसीएमएस पॉलिसी के फलस्वरूप राज्य में मल्टीलेयर तथा एचआईडी प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, लिथियम आयन सेल, एसएमडी पैसिवकम्पोनेंट्स, डिसप्ले एवं कैमरा मॉड्यूल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स तथा उसके उत्पादन के लिए आवश्यक मशीनरी आदि जरूरी उद्योगों व इकाइयों कोराज्य में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलने लगेगा.
1960 के सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का भारत का ऐतिहासिक फैसला, पानी नहीं जाएगा कहीं

सिंधु जल संधि पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा यह फैसला भारत सरकार और प्रधानमंत्री का है। संधि स्थगित होने के बारे में कोईअपडेट नहीं है. जो भी फैसला लिया जाएगा उससे देश को ही फायदा होगा. संधि पर बिलावल भुट्टो के कथित बयान पर पाटिल ने कहा, पानी कहींनहीं जाएगा. वह जो कहते हैं वह उनका अपना सवाल है। हम झूठी धमकियों से नहीं डरते. इससे पहले पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टोजरदारी ने बेफिजूल बयान देते हुए कहा था कि यदि भारत सिंधु जल संधि के तहत इस्लामाबाद को पानी का उचित हिस्सा देने से इनकार करता है. 1060 के समझोते को किया गया था स्थगिततो उनका देश युद्ध की ओर बढ़ेगा दरअसल पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के तुरंत बाद भारत ने 1960 के समझौते को स्थगितकर दिया था. इस हमले में 26 लोग मारे गए थे गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले हफ्ते इस ऐतिहासिक समझौते को कभी बहाल न करने की घोषणा कीथी. सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक जल-बंटवारा समझौता था. इसमें विश्व बैंक ने मध्यस्थता की थी।इस समझौते का उद्देश्य सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर दोनों देशों के बीच विवादों को रोकना था. सिंधू व बेसिन को बांटा गया था दो भागों मेंइस संधि के तहत हिमालय के सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों को दो भागों में बांटा गया था. पूर्वी नदियों ब्यास, रावी और सतलुज का पानी भारतको मिलता था. जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का कंट्रोल पाकिस्तान के पास आया था. भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधुजल संधि को स्थगित करने का जो फैसला किया था. उससे पाकिस्तान की आर्थिक कमर टूट गई है दरअसल, समझौता स्थगित होने का यह अर्थ नहींहै कि पाकिस्तान को तत्काल सिंधु नदी का पानी नहीं मिल रहा है. बल्कि इसके तहत भारत पर से अब यह बाध्यता खत्म हो जाएगी कि वहपाकिस्तान को सिंधु के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे. भारत भविष्य में सिंधु नदी पर बांध बनाकर पानी रोकने के लिए स्वतंत्र होगा। ऐसा हुआ तोपाकिस्तान के लिए सही मायनों में संकट पैदा होगा.
अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस पर मंत्री अविनाश गहलोत का युवाओं से आह्वान, बोले नशामुक्त समाज बनाने में हर नागरिक की जिम्मेदारी

अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस के अवसर पर सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि समाज को नशामुक्त रखने कीजिम्मेदारी केवल सरकार या संस्थाओं की नहीं बल्कि समाज के हर नागरिक की है. उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशामुक्त समाज के निर्माणके लिए जागरूकता फैलाने का संकल्प लें. गहलोत गुरुवार को इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में आयोजित एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा नशे की रोकथाम के लिए प्रदेशभर में कई योजनाएं संचालित की जा रहीहैं. वर्ष 2025 के बजट में 10 जिलों में 25-25 बेड वाले नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना की घोषणा की गई थी. सुनिश्चित करने के लिए नियमित निराक्षणदरअसल जो अब संचालित हो चुके हैं मंत्री गहलोत ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश में 85 गैर अनुदानित, 10 राज्य सरकार द्वारा अनुदानित और38 केंद्र भारत सरकार द्वारा अनुदानित नशामुक्ति केंद्र सक्रिय हैं. उन्होंने बताया कि इन केंद्रों पर पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिएनियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं. लापरवाही बरतने पर लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है. इस मौके पर मंत्री अविनाश गहलोत नेउपस्थित लोगों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई और एक युद्ध नशे के विरुद्ध पोस्टर का विमोचन किया. कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नशेके दुष्परिणामों पर भी प्रकाश डाला गया. कार्यक्रम के दौरान कई नेता रहे मौजूदकार्यक्रम में अतिरिक्त निदेशक रीना शर्मा, एनसीबी अधीक्षक अवधेश शर्मा, डॉ. राघव शाह (राजस्थान अस्पताल), हरीश बुढ़ानी सहित कई अधिकारीव स्वयंसेवी संस्थाएं उपस्थित रहीं.सुबह 5 बजे गांधी सर्किल से आरआईसी तक आयोजित मैराथन रन अगेंस्ट ड्रग एब्यूज में हजारों युवाओं नेउत्साहपूर्वक भाग लिया. मंत्री अविनाश गहलोत ने वार्मअप सेशन में भाग लेकर युवाओं को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और नशे से दूर रहने का संदेशदिया. मैराथन में राजस्थान पुलिस की निर्भया स्क्वाड, एनसीसी, स्काउट गाइड कैडेट्स समेत हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया और नशे के खिलाफ शपथली.इस मौके पर गहलोत ने कहा कि यह केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक संकल्प है, एक युद्ध नशे के विरुद्ध, जिसमें हर नागरिक कोभागीदार बनना होगा.अंतरराष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस पर आयोजित सेमिनार में मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि हर युवा नशामुक्ति का वाहक बने।इस मौके पर मैराथन का भी आयोजन किया गया.
30 साल बाद सपा से निष्कासित हुए ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने साधा सपा पर निसाना, बोले ‘सपा विचारधारा से गई हैभटक

30 साल तक समाजवादी पार्टी की अग्रिम पंक्ति का हिस्सा रहे और खांटी नेता की भूमिका अदा करने वाले ऊंचाहार विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेयको सपा से निष्कासित कर दिया गया है. सपा हाईकमान ने दो दिन पहले तीन विधायकों को पार्टी से बाहर किया था. उसमें ऊंचाहार विधायक कानाम भी शामिल था. आरोप लगे हैं कि राज्यसभा के चुनाव में क्रास वोटिंग की गई थी इस पूरे मामले में विधायक डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने कहा किउन्होंने जो भी किया अपनी अंतरात्मा की आवाज पर किया. सपा विचारधारा से भटक गई है और उसमें उन्हें हर दिन घुटन होती थी. आवश्यकताआविष्कार की जननी होती है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि 30 वर्ष का लंबा सफर सपा के साथ रहा है. राजनीति से नहीं कोई समझौताहमने सपा को ताकत देने का काम किया दर्द भी सहन किए एक विचारधारा लेकर हम आगे बढ़े, इसमें सबका का सम्मान, सबका आदर रहा. उसी परहम आगे बढ़ते चले गए. जहां अन्याय और अत्याचार दिखा वहां खुलकर विरोध किया. कभी समझौतावादी राजनीति नहीं की. हर समाज के व्यक्तिको आगे लाने के लिए काम किया। तमाम बार जेल भी जाना पड़ा. इसमें कोई दोराय नहीं है कि सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने उन्हें स्नेह दियानेताजी का स्नेह बना रहा. उनके साथ काम भी किया लेकिन राजनीति विचारधारा पर होती है जब कोई राजनीतिक दल विचारधारा से अलग हो जाएतो दिक्कत होती है. उन्होंने अपरोक्ष रूप से सपा के पूर्व महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य पर निशाना साधा कहते हुए कहा कि यह कैसे हो सकता है किएक व्यक्ति जो चंद दिनों के लिए सपा में आया और उसने श्रीराम के लिए अशोभनीय टिप्पणी करनी शुरू कर दी यही नहीं माता सीता, दुर्गा मां औरगंगा मां पर भी टिप्पणी की. मनोज पांडेय के आना होगा घरवह व्यक्ति जिसे जनता ने धूलधूसरित किया है. यदि किसी को पीडीए देखना है तो उसे मनोज पांडेय के घर आना होगा. मैंने कभी भी जाति काभेदभाव नहीं किया. उन्होंने कहा कि सपा में धर्म के नाम पर आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा था. कोई श्रीराम को गाली देने का काम कर रहा था. हमारी आत्मा को ठेस पहुंचाया जा रहा था। मेरी अंतरात्मा जगी हुई थी, मैंने विरोध किया। हाउस में भी इसी बात को कहा। मैंने सपा के राष्ट्रीय नेतृत्वको भी समझाने का प्रयास किया तो परिणाम क्या हुआ कि उस व्यक्ति को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया और उसके बाद लखनऊ मेंरामचरित मानस की प्रतियां को जलवाने और रौंदने का काम किया गया। उसी व्यक्ति को विधान परिषद का सदस्य बना दिया गया। इसके बाद मुझेलगा कि शायद भावनाओं का ख्याल नहीं किया जा रहा है।