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डॉ. सैयद ज़फ़र इस्लाम का दावा-2014 में भारत को कहा गया था ‘कमज़ोर’, आज मोदी सरकार में भारत बना दुनिया की शीर्ष चार अर्थव्यवस्थाओं में शामिल 

2014 से पहले भारत की आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर मानी जाती थी। दुनिया के बड़े अर्थशास्त्री और संगठन भारत को “कमज़ोर अर्थव्यवस्था” (फ़्रैजाइल इकॉनॉमी) कहते थे। लेकिन आज, 10 साल बाद भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से आगे बढ़ती और मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में गिना जारहा है।डॉ. सैयद ज़फ़र इस्लाम ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ शब्दों का नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाला बदलाव है। आज भारत को ‘शानदार चार’ (फैबुलस फोर) उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है। यह हर देशवासी के लिए गर्व की बात है। गरीबों को मिली असली ताक़त – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि देश का विकास सिर्फ अमीरों तक न पहुंचे, बल्किहर गरीब, हर पिछड़े वर्ग तक उसका लाभ पहुंचे।डॉ. सैयद ज़फ़र इस्लाम ने बताया – हमारी सरकार ने अब तक 27 करोड़ से ज्यादा लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला है। ये लोग पहले ज़िंदगीकी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी संघर्ष करते थे, लेकिन आज उनका जीवन सम्मान के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्व बैंक ने भी मानी भारत की प्रगति – हाल ही में आई विश्व बैंक की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत आय समानता (इनकम इक्वलिटी) के मामलेमें अब दुनिया में चौथे स्थान पर है। इसका मतलब है कि भारत में अब अमीर और गरीब के बीच की खाई कम हो रही है — जो एक बहुत बड़ी बात है। जन-धन योजना ने खोले नए रास्ते – इससे पहले करोड़ों लोग ऐसे थे जिन्हें बैंक क्या होता है, ये भी नहीं पता था। आज वही लोग अपने बैंक खातों सेसरकारी योजनाओं का पैसा सीधे पा रहे हैं।55 करोड़ से ज्यादा लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। अब किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं, सरकार का पैसा सीधा खाते में आ रहा है।गरीबों को मिल रहा मुफ्त इलाज – आयुष्मान भारत योजना ने लाखों-करोड़ों गरीबों को मुफ्त इलाज का हक़ दिया है। अब कोई गरीब अस्पताल के खर्च से डरता नहीं, उसे पता है कि सरकार उसके साथ है।आत्मनिर्भर और आत्मसम्मान से भर रहा है भारत – आज भारत सिर्फ आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी सम्मान पा रहा है। भारत की बात को अब दुनिया सुनती है, और मानती भी है।यह सब संभव हुआ है प्रधानमंत्री मोदी जी की मजबूत और दूरदर्शी सोच से।डॉ. सैयद ज़फ़र इस्लाम ने कहा कि,आज भारत सिर्फ तेज़ नहीं, न्यायपूर्ण और सबका साथ-सबका विकास की राह पर है। यह बदलाव आंकड़ों कानहीं, बल्कि आम जनता की ज़िंदगी में आया बदलाव है। आज भारत के पास न केवल तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं को आगे ले जाने वाली सरकार है।यह नया भारत है-मजबूत, समान, और गर्व से भरा हुआ।

विदेशी कंपनी ने शेयर बाजार में की लूट, सरकार और सेबी देखती रही!सुप्रिया श्रीनेत का सवाल-क्या मोदी सरकार ने जनता के पैसे की रक्षा करने के बजाय चुप्पी साध ली ? 

आज देश की कई सरकारी संस्थाएं कमजोर पड़ती जा रही हैं। उन्हीं में एक है सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड)। इसका काम है कि शेयरबाजार में गड़बड़ी न हो और आम लोगों का पैसा सुरक्षित रहे। लेकिन जेन स्ट्रीट नाम की एक अमेरिकी कंपनी ने भारत में आकर करोड़ों लोगों की गाढ़ीकमाई लूट ली-और सेबी हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। क्या किया जेन स्ट्रीट ने? – यह कंपनी भारत के डायरेक्ट इक्विटी और फ्यूचर एंड ऑप्शन बाज़ार में काम कर रही थी। यह अपनी मर्जी से बाज़ार कीदिशा तय कर रही थी — यानी किस शेयर का भाव कब कितना होगा, ये वही तय कर रहे थे। इस जानकारी का इस्तेमाल करके वह पीछे से मुनाफा कमाती थी। ऐसा करना भारत के नियमों के खिलाफ है, और इसके लिए सज़ा का प्रावधान है। सेबी की चुप्पी क्यों? फरवरी 2025 में सेबी ने केवल एक चेतावनी पत्र भेजा।मई तक कंपनी काम करती रही और फिर जाकर जुलाई 2025 में रोक लगी।तब तक कंपनी 44,000 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा चुकी थी।सेबी ने केवल 4,844 करोड़ रुपये जब्त किए — यानी कुल मुनाफे का दसवां हिस्सा भी नहीं। आम लोगों का नुकसान 54,000 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान आम निवेशकों को हुआ।17 जनवरी 2025 को कंपनी ने अकेले दिन में 735 करोड़ रुपये कमाए।93 प्रतिशत छोटे निवेशकों का फ्यूचर बाजार में नुकसान हुआ।राहुल गांधी और सुप्रिया श्रीनेत की चेतावनी – कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने बार-बार सरकार को आगाह किया। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा – सरकार और सेबी ने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। जेन स्ट्रीट खुलेआम लूट मचा रही थी, और जनता के लाखों-करोड़ों रुपयेस्वाहा हो गए। अब जब सारा मुनाफा बाहर जा चुका है, तब सरकार कह रही है कि हमने कार्रवाई की! सुप्रिया श्रीनेत के सवाल जेन स्ट्रीट को भारत में घुसने की इजाजत किसने दी?उन्हें पैसा विदेश ले जाने की अनुमति किसने दी?सेबी को कार्रवाई करने में 4 साल क्यों लग गए?ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग क्या कर रहे थे?प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को इस लूट की जानकारी क्यों नहीं थी?क्या जो पैसा बाहर गया है, उसे कभी वापस लाया जाएगा?सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यह सिर्फ एक आर्थिक घोटाला नहीं है, यह सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल है। अगर आम लोगों का पैसा देश मेंसुरक्षित नहीं है, तो फिर सरकार और सेबी का होना ही व्यर्थ है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी का अपमान-कांग्रेस की सोच पर देशभर में सवालगौरव भाटिया बोले -कांग्रेस को न दलितों की इज़्ज़त है, न आदिवासियों का सम्मान

राष्ट्रपति पद पर बैठीं देश की पहली आदिवासी महिला श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा की गई आपत्तिजनकटिप्पणी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए कांग्रेस पार्टी कीसोच को दलित, आदिवासी और महिला विरोधी करार दिया। गौरव भाटिया ने कहा — खड़गे जी ने महामहिम राष्ट्रपति को ‘मुर्मा जी’ कहा और पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी को ‘कोविड’ कहा। क्या ये सिर्फ़बोलचूक है या कांग्रेस की गहरी नफरत का इज़हार? उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के नेताओं ने ऐसे शब्द कहे हों। अधीर रंजनचौधरी ने राष्ट्रपति को ‘राष्ट्रपत्नी’ कहकर अपमानित किया। उदित राज ने राष्ट्रपति पर अमर्यादित टिप्पणी की। अब खड़गे जी ने राष्ट्रपति को “भू-माफिया” कह डाला — यह कहकर कि वे ज़मीन और जंगल छीनने के लिए राष्ट्रपति बनी हैं। भाटिया ने कहा कि यह सिलसिला केवल एक नेता तकसीमित नहीं है। यह कांग्रेस की पुरानी सोच है — जो यह मानती है कि अगर कोई ग़रीब, दलित या आदिवासी देश के सबसे बड़े पद पर पहुंचे, तो उसेअपमानित करना चाहिए। जब कोई महिला, वो भी आदिवासी समाज से, मेहनत करके राष्ट्रपति पद तक पहुंचती है — कांग्रेस के नेताओं को वह सहननहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का नेतृत्व एक ही परिवार की चापलूसी में इतना लिप्त है कि उन्हें संविधान की गरिमा, महिलाओं कासम्मान और समाज के कमजोर वर्गों की प्रतिष्ठा की कोई परवाह नहीं. भाटिया ने कांग्रेस से सवाल किया-क्या मल्लिकार्जुन खड़गे देश से लिखित माफ़ी मांगेंगे? क्या राहुल गांधी इस पर चुप्पी तोड़ेंगे? या कांग्रेस अपनीआदत के अनुसार इस अपमान को भी छिपाने की कोशिश करेगी?पूरा देश कर रहा है निंदागौरव भाटिया ने कहा कि आज भारत का हर नागरिक, खासकर दलित, आदिवासी और महिलाएं, इस टिप्पणी से आहत हैं। देश के लोगों ने स्पष्ट रूपसे कांग्रेस की इस मानसिकता को नकार दिया है।जब कोई ग़रीब, आदिवासी महिला देश के सबसे ऊँचे पद तक पहुंचती है, तो वह भारत के लोकतंत्र की जीत होती है। लेकिन कांग्रेस जैसी पार्टियांउस जीत को अपमानित करके संविधान और समाज दोनों का अपमान कर रही हैं। अब समय आ गया है कि जनता ऐसे बयानों का जवाब लोकतांत्रिकतरीक़े से दे।

दुबे है कौन? मराठी विवाद में उद्धव-संजय राउत का बीजेपी पर तीखा वार, दुबे को कहा ‘लकड़बग्घा’

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के हालिया बयान पर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुखउद्धव ठाकरे के बाद सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उद्धव ठाकने ने विवादित टिप्पणी को लेकर निशिकांत को ‘लकड़बग्घा’ करार दिया. वहीं संजय राउत ने भी कहा, यह दुबे है कौन? मैं यहां के हिंदी भाषी नेताओं से अपील करता हूं कि वे दुबे के बयान की निंदा करें. शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा पहले तो यह बताओ कि यह दुबे है कौन? मैं यहां के हिंदी भाषी नेताओं से अपील करता हूं कि वे दुबे के बयान की निंदाकरें. जब आप ऐसा करेंगे, तभी मैं मानूंगा कि आप महाराष्ट्र से हैं. संजय राउत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनकी कैबिनेट की चुप्पी परसवाल उठाते हुए कहा जब एक बीजेपी सांसद मराठी लोगों के खिलाफ बयान दे रहा है, तब राज्य का मुख्यमंत्री और उसकी पूरी कैबिनेट चुप क्योंहै? यह कैसा मुख्यमंत्री है? नाम लेने का नहीं है कोई अधिकारजिसे छत्रपति शिवाजी महाराज और बालासाहेब ठाकरे का नाम लेने का कोई अधिकार नहीं है.शिवसेना (यूबीटी) नेता ने एकनाथ शिंदे पर तीखाहमला बोलते हुए कहा खुद को डुप्लीकेट शिवसेना का नेता मानने वाले एकनाथ शिंदे को अपनी दाढ़ी कटवा लेनी चाहिए. उन्हें इस्तीफा दे देनाचाहिए। उन्हें जाकर मोदी और शाह से पूछना चाहिए कि महाराष्ट्र में क्या हो रहा है. महाराष्ट्र में हिंदीभाषी लोगों पर कभी हमले नहीं हुए. दुबे को सहीकरना देवेंद्र फडणवीस एकनाथ शिंदे और अजीत पवार की जिम्मेदारी है.इससे पहले उद्धव ठाकरे ने निशिकांत दुबे पर टिप्पणी करते हुए कहा था किछोड़ो दुबे बिबे. ऐसे कई लकड़बग्घे हैं जो विवाद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं हमारे यहां सब खुश हैं इनके पास ध्यान देने की जरूरत नहीं है हमारीमहाराष्ट्र की जनता सब जानती है. ठाकरे ने कहा कि ‘हम हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन कुछ लोग मराठी लोगों की तुलना पहलगाम केआतंकवादियों से कर रहे हैं. असली मराठी विरोधी वही लोग हैं। ये लोग ना तो मराठियों का भला चाहते हैं और ना ही हिंदुओं को बचा सकते हैं येहमेशा उन लोगों के साथ खड़े रहते हैं जो मराठी समाज के साथ अन्याय करते हैं पहले जो असली भाजपा थी. गठबंधन की भाजपा हो गई है खत्मजिसने शिवसेना के साथ गठबंधन किया था अब वो भाजपा खत्म हो गई है. अब हम (विपक्षी दल) एक साथ आ गए हैं और तभी से ये लोग गुस्से मेंहैं. शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी कहा यह दुबे है कौन? मैं यहां के हिंदी भाषी नेताओं से अपील करता हूं कि वे दुबे के बयान की निंदाकरें. इससे पहले उद्धव ठाकने ने विवादित टिप्पणी को लेकर निशिकांत को ‘लकड़बग्घा’ करार दिया था. उन लोगों पर निशाना साधा जो मराठीविरोधी बयान दे रहे हैं और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री आशीष शेलार की उस तुलना का विरोध किया जिसमें मराठी विरोधियों को “पहलगाम केआतंकियों” से जोड़ा गया इस बयान को उद्धव ठाकरे ने कड़ी लहजे में खारिज करते हुए दुबे को “लकड़बग्घा” और “मराठी विरोधी” कहा, साथ ही उनलोगों पर सवाल उठाया जिन्होंने “मराठी लोगों की तुलना पहलगाम के आतंकवादियों से” की.राज्य सरकार के मंत्री आशीष शेलार ने विधानसभा मेंकहा कि “मराठी व्यक्ति की काबिलियत पर सवाल न उठाएं दुबे की टिप्पणी से भाजपा दूरी बनाए.

तेजस्वी यादव का एआई वार मोदी-नीतीश को बताया “कुर्सी बचाने वाले”, बोले बिहार को सता रही है डबल इंजन सरकार

Bihar Poltics: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर से पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला है. अपने पिता लालूप्रसाद की तरह ही उन्होंने भी एआई इमेज का इस्तेमाल कर पीएम मोदी और सीएम नीतीश पर निशाना साधा. तेजस्वी ने इन दोनों नेताओं की तस्वीरशेयर की और लिखा कि प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी दोनों अपनी कुर्सी बचाने के लिए बिहार को बर्बाद कर रहे हैं.तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीशकुमार के हाथ में एक पंपलेट दिखाया. इसमें लिखा है कि लूट, हत्या, चोरी, डकैती और भष्ट्रचार. तेजस्वी यादव का कहना है कि नीतीश सरकार केराज में कानून व्यवस्था का हाल बेहाल है. इनके राज में खुलेआम बलात्कार, हत्या और डकैती हो रही है भ्रष्टाचार चरम पर है. बिहार को रहे है सताइतना ही नहीं तेजस्वी यादव ने पीएम मोदी के हाथ में एक पंपलेट दिखाया. इसमें लिखा है कि केंद्र की सत्ता बचा रहे हैं बिहार को सता रहे हैं. तेजस्वीयादव ने कहा कि केंद्र की सत्ता बचाने के लिए पीएम मोदी बिहार की जनता को सता रहे हैं. दो जुलाई राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद नेएक बार फिर से पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला था. उन्होंने इस बार कृत्रिम मेधा (AI) का इस्तेमाल किया और पीएममोदी और सीएम नीतीश कुमार की तस्वीर बना दी। उन्होंने पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार की डिलीवरी बॉय वाली तस्वीर के साथ लिखा किबिहार की गलियों में दो डिलीवरी बॉय देखे गए हैं। इनमें से एक के बैग में अच्छे दिन और दूसरे के बैग में विशेष राज्य का दर्जा है. उन्होंने तंज कसतेहुए लिखा कि 10 साल से डिलीवरी पेंडिंग है. लेकिन अब ऑर्डर कंफर्म होने की बात कह रहे हैं। लालू प्रसाद ने आगे कहा कि चुनाव के वक्त बिहारकी गलियों में झूठे वादों की फ्री डिलीवरी करने वाले जुमलेबाज अब खूब घूमेंगे. वहीं राजद ने तंज कसते हुए लिखा कि एनडीए सरकार में सड़क केबीचोंबीच पेड़ है. सड़क पर नदी बह रही है। जंक्शन के बाहर सब डूबा है. डबल इंजन की विकास है अजूबाडबल इंजन सरकार का विकास अजूबा है दो जुलाई को राजद सुप्रीमो ने लालू प्रसाद यादव ने कृत्रिम मेधा का प्रयोग कर पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला था. अब ऐसा ही उनके बेटे ने किया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दोनों दिग्गजों पर बड़ा आरोप लगाया है.लालू ने मज़ाक में कहा कि चुनाव के समय “झूठे वादों की फ्री डिलीवरी करने वाले जुमलेबाज़ खूब घूमेंगे और RJD ने डबल-इंजन(NDA) सरकार की नाकामी पर कटाक्ष किया. सड़क पर पेड़, पानी में नदी, जंक्शन डूबा” जैसी व्यंग्यात्मक टिप्पणियाँ करते हुए.उन्होंने लिखा कि“प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी दोनों अपनी कुर्सी बचाने के लिए बिहार को बर्बाद कर रहे हैं. और आरोप लगाया कि नीतीश-राज में “लूट, हत्या, चोरी, डकैती और भ्रष्टाचार” जैसा माहौल बन चुका है. जबकि मोदी पर कहा कि वे “केंद्र की सत्ता बचाने के लिए बिहार की जनता को सता रहे हैं” तेजस्वी यादव की नई चाल न केवल फोटो बल्कि वीडियो का भी इस्तेमाल डबल इंजन’ (PM […]

तेलुगु सिनेमा को बड़ा झटका गीतकार और लेखक शिव शक्ति दत्ता का 92 वर्ष की उम्र में निधन, ‘बाहुबली’ और ‘आर आर आर’ जैसे सुपरहिट गीतों के थे रचयिता

तेलुगु सिनेमा की दुनिया में एक दुखद खबर सामने आई है ऑस्कर विजेता संगीतकार एमएम कीरवानी के पिता और मशहूर गीतकार और लेखक शिवशक्ति दत्ता का सोमवार रात 92 साल की उम्र में निधन हो गया. उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. उनकेनिधन से न सिर्फ कीरावनी का परिवार, बल्कि पूरी दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री शोक में डूब गई है. शिव शक्ति दत्ता न सिर्फ एक गीतकार थे. बल्किउन्होंने अपने अपने लेखन से तेलुगु सिनेमा को अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने ‘बाहुबली’, ‘आरआरआर’, ‘मगधीरा’, ‘राजन्ना’ और ‘श्रीरामदासु’ जैसीब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया। दत्ता जी के लिखे गीतों में पौराणिकता की झलक और गहराई देखने को मिलती थी. दर्शकों की स्मृति में है बसे हुए‘साहोरे बाहुबली’, ‘रामम राघवम’, ‘ममता थल्ली’ और ‘अम्मा अवनी’ जैसे गीत आज भी दर्शकों की स्मृति में बसे हुए हैं. शिव शक्ति दत्ता का परिवारभी भारतीय सिनेमा के स्तंभों में गिना जाता है. उनके बेटे एमएम कीरावनी, भतीजे एसएस राजामौली और भाई वी विजयेंद्र प्रसाद- तीनों ही भारतीयफिल्म जगत में नामचीन हस्तियां हैं. यही नहीं उनके एक और बेटे कल्याणी मलिक भी संगीतकार हैं और भतीजी एमएम श्रीलेखा जानी-मानी गायिकाऔर संगीतकार हैं. दत्ता जी ने सिर्फ गीत लेखन ही नहीं किया बल्कि उन्होंने निर्देशन और पटकथा लेखन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई. ‘चंद्रहास’ जैसीफिल्म का निर्देशन उन्होंने किया था. जबकि नागार्जुन की फिल्म ‘जानकी रामुडु’ की कहानी भी उन्होंने ही लिखी थी. उनके लेखन में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भावनाओं का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है.तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री से लेकर राजनीतिक गलियारों तक शोक की लहर दौड़ गई. अभिनेता और नेता पवन कल्याण ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देतेहुए लिखा, ‘श्री शिव शक्ति दत्ता जी के निधन की खबर से गहरा दुख हुआ. वे कला और साहित्य के सच्चे प्रेमी थे. उनके गीतों में संस्कृत और तेलुगुका अद्भुत समावेश देखने को मिलता है. मेरा दिल से संवेदना कीरवाणी गारू और उनके परिवार के साथ है. पवन कल्याण के अलावा भी कई सेलेब्सने उन्हें अलविदा कहा। उनके निधन पर दुख जताया. शक्ति दत्ता का हुआ निधनतेलुगु इंडस्ट्री के दिग्गज लेखक और गीतकार शिव शक्ति दत्ता का निधन हो गया है. 92 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. कोडुरी सुब्बाराव के नाम से जन्मे शिव शक्ति दत्ता का जन्म 8 अक्टूबर 1932 को आंध्रप्रदेश के कोव्वर में हुआ था. उन्होंने ‘कर्मलेश’ नाम से पेंटिंग भीकी और बाद में नाम बदलकर शिव शक्ति दत्ता रखा. ये जानकारी लोकप्रिय विकीऍप पेज पर भी उपलब्ध है आर्टस के प्रति रुझान के चलते उन्होंनेमुंबई की प्रसिद्ध सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से डिप्लोमा किया और फिर तेलुगु सिनेमा में पंटे बिखेरे । संगीत–संस्कृति के प्रति उनके समर्पण को‘Mamathala Thalli’, ‘Raamam Raghavam’, ‘Nalla Nallani Kalla’ जैसे गीतों से जाना जाता है. कोडुरी सुब्बाराव के नाम से जन्मेशिव शक्ति दत्ता का जन्म 8 अक्टूबर 1932 को आंध्रप्रदेश के कोव्वर में हुआ था. उन्होंने ‘कर्मलेश’ नाम से पेंटिंग भी की और बाद में नाम बदलकरशिव शक्ति दत्ता रखा.

विराट कोहली पहुंचे विंबलडन जोकोविच की जीत पर दी दिल से दाद, बोले ग्लैडिएटर के लिए यह है आम बात

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और ‘किंग’ के नाम से मशहूर विराट कोहली भी सोमवार को नोवाक जोकोविच और एलेक्स डि मिनोर के बीचमुकाबला देखने पहुंचे। इस दौरान कोहली के साथ उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा भी नजर आईं. जोकोविच ने यह मैच 1-6, 6-4, 6-4, 6-4 से जीताऔर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया. सर्बिया का यह दिग्गज खिलाड़ी 63वीं बार किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में खेलेंगे. जोकोविच काखेल देखकर विराट कोहली हैरान रह गए. मैच के बाद कोहली ने इंस्टाग्राम स्टोरी में जोकोविच की तारीफ भी की किंग कोहली ने लिखा, ‘क्या मैच थायह हमेशा की तरह ग्लैडिएटर (जोकोविच) के लिए एक आम बात थी. कोहली ने जो तस्वीर साझा की है उसमें जोकोविच सर्व करते नजर आ रहे हैं. कोहली इन दिनों पत्नी अनुष्का के साथ लंदन में हैं. हालांकि, वह अब तक इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय क्रिकेट टीम का मैच देखने नहीं पहुंचे हैं. कोहली ने एजबेस्टन में टीम इंडिया की जीत के बाद जरूर तारीफ की थी और जीत को ऐतिहासिक बताया था. टेस्ट से ले लिया था सन्यासअब भी तीन टेस्ट बाकी हैं कोहली से 10 जुलाई से लंदन के लॉर्ड्स में शुरू हो रहे टेस्ट में पहुंचने की उम्मीद की जा रही है. कोहली ने हाल ही में टेस्टसे संन्यास लिया था. अब वह टीम इंडिया के लिए सिर्फ वनडे में खेलते दिखाई पड़ेंगे. भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की सीरीज फिलहाल 1-1 से बराबर है. कोहली के अलावा सात बार के विंबलडन चैंपियन जोकोविच का मुकाबला देखने के लिए आठ बार के विंबलडन चैंपियन रोजर फेडररभी रॉयल बॉक्स में मौजूद थे. छठे वरीय जोकोविच पर 2016 से विंबलडन में सबसे जल्दी बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था. लेकिन उन्होंने खराबशुरुआत से उबरकर डि मिनोर को 1-6, 6-4, 6-4, 6-4 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया. 38 साल के जोकोविच की शुरुआत खराब रहीऔर उन्होंने बेहद एकतरफा पहला सेट गंवा दिया. जोकोविच ने इसके बाद वापसी करते हुए अगले दो सेट जीतकर 2-1 की बढ़त बनाई. चौथे सेट मेंडि मिनोर ने एक बार फिर दबदबा बनाते हुए 4-1 की बढ़त बनाई. लेकिन दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी जोकोविच ने आखिरी पांच गेम औरअंतिम 15 में से 14 अंक जीतकर मुकाबला अपने नाम किया. चुनौती कर रहे है पेशआठवें विंबलडन और रिकॉर्ड में सुधार करने वाले 25वें एकल ग्रैंडस्लैम खिताब के लिए चुनौती पेश कर रहे जोकोविच अगले दौर में इटली के 22वेंवरीय खिलाड़ी फ्लावियो कोबोली से भिड़ेंगे. कोबोली ने 2014 के अमेरिकी ओपन चैंपियन मारिन सिलिच को 6-4, 6-4, 6-7, 7-6 से हराकरपहली बार किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के अंतिम आठ में जगह बनाई. जोकोविच 63वीं बार किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में खेलेंगे.भारत केयुकी भांबरी और अमेरिका के उनके जोड़ीदार रॉबर्ट गैलोवे को सोमवार को विंबलडन पुरुष युगल के तीसरे दौर में स्पेन के मार्सेल ग्रानोलर्स औरअर्जेंटीना के होरासियो जेबालोस की जोड़ी के खिलाफ कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा. युकी और गैलोवे की 16वीं वरीयता प्राप्त जोड़ी नेचौथी वरीयता प्राप्त प्रतिद्वंद्वियों को कड़ी टक्कर दी. लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा. उन्हें दो घंटे नौ मिनट तक चले इस रोमांचक मुकाबले में4-6, 6-3, 6-7 (10) से हार मिली. युकी के बाहर होने के साथ विंबलडन में भारतीय चुनौती समाप्त हो गई. मैच के बाद कोहली ने इंस्टाग्राम स्टोरीमें जोकोविच की तारीफ भी की. किंग कोहली ने लिखा, ‘क्या मैच था. यह हमेशा की तरह ग्लैडिएटर (जोकोविच) के लिए एक आम बात थी. कोहली ने जो तस्वीर साझा की है उसमें जोकोविच सर्व करते नजर आ रहे हैं.

बिहार में बेरोजगारी के बीच बड़ी पहल सीएम नीतीश कुमार ने 7468 नवनियुक्त ANM को सौंपे नियुक्ति पत्र, सरकार की नियुक्ति पहल औरहै आगामी चुनावी समीकरण

आगामी बिहार विधान सभा चुनाव को देखते हुए बनता प्रतिपक्ष लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बेरोजगारी, रोजगार और पलायन के मुद्दों परघेरते नजर आते हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बेरोजगारी की समस्या से निबटने के लिए शिक्षक और सिपाही भर्ती के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमारने अब 7468 नवनियुक्त महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एएनएम) को नियुक्ति पत्र प्रदान किया है. नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम का आयोजनमुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ में किया गया था. 7468 नवनियुक्त महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एएनएम) के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम मेंमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सांकेतिक रूप से मोना कुमारी, नीलू कुमारी, अमृता कुमारी, प्रिया सिन्हा और रीमा कुमारी को नियुक्ति पत्र प्रदान किया. मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त ए०एन०एम० को बधाई एवं शुभकामनायें देते हुए कहा कि मेरा विश्वास है कि सभी नवनियुक्त कर्मी पूरी ईमानदारी और निष्ठाके साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगी. पलायन के मुद्दों को रहे है उछालकार्यक्रम में विकास आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हरित पौधा भेंट कर स्वागतकिया.नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जल संसाधन सह संसदीय कार्यमंत्री विजयकुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डे, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा, विकास आयुक्त सह स्वास्थ्यविभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव कुमार रवि, राज्य स्वास्थ्य समिति केकार्यपालक निदेशक सुहर्ष भगत, बिहार स्वास्थ्य सेवायें एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक निलेश देवरे सहित अन्य वरीयअधिकारी एवं नियुक्ति पत्र पानेवालीं ए०एन०एम० उपस्थित थीं. बिहार विधान सभा चुनाव होने में अभी कुछ समय शेष है, इस बीच विपक्ष लगातारबिहार सरकार पर बेरोजगारी और पलायन का आरोप लगा रही है. ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 7468 नवनियुक्त एएनएम को नियुक्ति पत्र बांटेहैं। राज्य स्वास्थ्य समिति, स्वास्थ्य विभाग, और बिहार स्वास्थ्य सेवा एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के सहयोग से यह नियुक्ति की गई. विपक्ष, खासकर राजद और कांग्रेस, लगातार बेरोजगारी, शिक्षा और पलायन के मुद्दों को उछाल रहे हैं. राजनीतिक दृष्टि से भी माना जा रहा अहमबिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले यह निर्णय राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है. ऐसे में यह कदम युवाओं को सरकारी सेवा में जोड़नेकी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। एएनएम की भूमिका गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का टीकाकरण, प्रसव सेवाएं और महिला स्वास्थ्यसे जुड़ी अन्य ज़रूरतों के लिए अहम होती है. ज्यादातर ANM महिलाएं हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा में सुधारहोगा. स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाओं की गुणवत्तापूर्ण डिलीवरी की संभावना बढ़ेगी.सीएम नीतीश कुमार ने कहा कियह नियुक्ति स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार का हिस्सा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एएनएम की कमी दूर होगी जिससे टीकाकरण, प्रसव पूर्व देखभाल एवंमातृ–शिशु स्वास्थ्य में सुधार संभव होगा.उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसका संबंध 30 लाख नौकरियों देने के लक्ष्य से जोड़ा बताया कि यह सरकारके रोजगार सृजन अभियान का हिस्सा है.स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने बताया कि इसके अलावा 6,000 डॉक्टरों व सहायक प्रोफेसरों की नियुक्तिप्रक्रिया चल रही है तथा 4,500 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और आयुष चिकित्सक भी नियुक्त किए जा रहे हैं.

अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ की समयसीमा बढ़ाकर भारत को दी व्यापार समझौते के लिए अतिरिक्त समय,भारतीय निर्यातकों को मिली बड़ी राहत

International Relations: अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ को लेकर दुनियाभर के देशों की चिंता को कुछ दिनों की राहत दी है. राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप ने 2 अप्रैल को घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ की समयसीमा को 1 अगस्त तक बढ़ा दिया है. इस फैसले पर निर्यतकों ने कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ कीसमयसीमा बढ़ाना अमेरिका की अपनी व्यापारिक साझेदारों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने की इच्छा को दर्शाता है. भारतीय निर्यात संगठन महासंघ(फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि यह कदम व्यापारिक वार्ता के लिए अवसर प्रदान करता है। इससे भारत को शेष मुद्दों को सुलझाने केलिए और समय मिला है. उन्होंने कहा कि अगर भारत इस महीने के अंत तक अमेरिका के साथ कम से कम वस्तुओं पर द्विपक्षीय व्यापार समझौता(बीटीए) कर लेता है. तो भारत को अन्य देशों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी लाभ मिल सकता है एक अन्य निर्यातक ने कहा कि इस निर्णय से घरेलूउद्योग को राहत मिलेगी. भारत के लिए रहा राहत भरा कदमभारत को अंतरिम व्यापार समझौते पर अमेरिका के साथ बात करने के लिए 12 से 13 दिन का अतिरिक्त समय मिल गया है. अंतरराष्ट्रीय व्यापारविशेषज्ञ विश्वजीत धर ने इसे भारत के लिए राहत भरा कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया भारत द्वारा कुछ मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाने केकारण आई है. फियो के अध्यक्ष और लुधियना स्थित इंजीनियरिंग निर्यात ने कहा कि हालांकि यह एक छोटी सी राहत है. फिर भी हम उम्मीद लगाएबैठे हैं. मुंबई के निर्यातक और टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज (इंडिया) के संस्थापक शरद कुमार सराफ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुतअप्रत्याशित हैं. भारतीय निर्यातकों को नए बाजार तलाशने चाहिए. भारत और अमेरिका इस साल सितंबर-अक्टूबर तक एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापारसमझौते का पहला चरण पूरा करना चाहते हैं. इससे पहले वे एक अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। वर्ष 2021-22 सेअमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है. 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 131.84 अरबडॉलर का रहा, जिसमें भारत का निर्यात 86.51 अरब डॉलर और आयात 45.33 अरब डॉलर था. भारत को 41.18 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेषप्राप्त हुआ. अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ की समयसीमा को 1 अगस्त का बढ़ा दिया है. सतर्कता होगी बरतनीइस निर्णय पर भारतीय निर्यतकों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया है. उन्होंने कहा है कि इससे कुछ दिनों की राहत जरूर मिली है लेकिन भविष्य के लिएसतर्कता बरतनी होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रत्याशित नीति के कारण निर्यातकों ने नए बाजार तलाशने की सलाह दी है. भारत औरअमेरिका सितंबर-अक्टूबर तक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को पूरा करने की योजना बना रहे हैं। 2024-25 में भारत कोअमेरिका के साथ 41.18 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष रहा. लुधियाना के इंजीनियरिंग निर्यातक और फियो के अध्यक्ष ने कहा कि यह छोटा साराहत पैकेज है. लेकिन निर्यातकों की उम्मीदें अभी भी जिंदा हैं. मुंबई के टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के संस्थापक शरद कुमार सराफ ने कहा कि अमेरिकीराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रत्याशित नीतियों के चलते भारतीय निर्यातकों को नए बाजार तलाशने होंगे. अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ की समयसीमाको 1 अगस्त तक बढ़ा दिया है। इस कदम को लेकर भारतीय निर्यातकों ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी है. वे मानते हैं कि यह कुछ दिनों की राहत तो देता हैलेकिन दीर्घकालिक रणनीति पर भी ध्यान देना जरूरी है ताकि भारत अपनी निर्यात क्षमता को और बढ़ा सके.

यमुना में अवैध रेत खनन से बढ़ा बाढ़ का खतरा, दिल्ली-यूपी सरकारों को मिलकर कदम उठाने की जरूरत “रेखा गुप्ता ने की स्पष्ट मांग”

Dellhi Latest News: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा. उन्होंने अनुरोध किया है किदिल्ली और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे यमुना क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर रोक लगाई जाए, अवैध खनन के चलते यमुना के तटबंध कमजोर हो रहे हैं. जिससे बाढ़ का खतरा भी पैदा होता है. मुख्यमंत्री ने पत्र के माध्यम से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की चिंताओं से भी सीएम योगी को अवगत करायाहै.सीएम रेखा गुप्ता का यह भी कहना है कि अवैध खनन गंभीर पारिस्थितिक क्षति का कारण भी बन रहा है. जो भविष्य में यमुना के लिए गंभीरपरेशानी का कारण बन सकता है. इसके साथ-साथ यमुना के किनारे रहने वाली आबादी भी इस बदलाव से प्रभावित होगी. उनका कहना है कि यहअंतरराज्यीय प्रकृति का मुद्दा है. संयुक्त प्रर्वतन तंत्र की है आवश्यकताइसलिए इस अवैध रेत खनन पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाने के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सरकारों के बीच एक समन्वित और संयुक्त प्रर्वतनतंत्र की आवश्यकता है. मुख्यमंत्री ने यूपी सीएम को जानकारी दी कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भी लगातार यमुना में अवैध रेत खनन पर चिंता व्यक्तकरता रहा है. एनजीटी की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि ये अवैध खनन कई प्रकार के दुष्प्रभाव ला रहा है, इसलिए इस पर रोक लगाना जरूरीहै. उन्होंने योगी से अनुरोध किया है कि अपने अफसरों को इस मसले पर संयुक्त अंतरराज्यीय सीमांकन के आवश्यक दिशा-निर्देश देने की कृपाकरें.दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से यमुना क्षेत्र में अवैध रेत खनन रोकने का अनुरोध किया. खनन से तटबंधकमजोर होने और बाढ़ के खतरे के साथ पारिस्थितिक क्षति की चिंता जताई गई.उन्होंने यूपी सीएम को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की भी याददिलाई जो इस मुद्दे पर लगातार चिंता व्यक्त करता रहा है और अवैध रेत खनन को रोकने के निर्देश जारी करता रहा है. मुख्यमंत्री ने योगी आदित्यनाथसे आग्रह किया है कि वे अपने अधिकारियों को इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दें ताकि संयुक्त सीमांकन और निगरानी की प्रक्रिया को मजबूत कियाजा सके. तटबंध हुए है कमजोरइस मुद्दे पर दिल्ली सरकार का कहना है कि अवैध रेत खनन की वजह से यमुना के तटबंध कमजोर हुए हैं. जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है औरपारिस्थितिक संतुलन भी बिगड़ रहा है. दोनों राज्यों को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना आवश्यक है ताकि यमुना की सुरक्षासुनिश्चित की जा सके.मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यमुना के किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी इस अवैध खनन के कारण खतरे में है. उन्होंनेकहा कि यमुना एक अंतरराज्यीय नदी है इसलिए इस समस्या को हल करने के लिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय औरसंयुक्त निगरानी तंत्र की जरूरत है. चूंकि यमुना कई राज्यों से होकर गुजरती है. इसलिए इसके संरक्षण के लिए केवल एक राज्य की पहल पर्याप्त नहींहै। दिल्ली की मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह समस्या अंतरराज्यीय है इसलिए दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों को मिलकर एक संयुक्त मॉनिटरिंगकमिटी बनानी होगी जो अवैध खनन की लगातार निगरानी करे प्रभावी कानून लागू करे और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे.