Skip to main content

NEWS अब तक

अनंगपुर गाँव को उजाड़ने के खिलाफ उठी जन आवाज़, 13 जुलाई को ऐतिहासिक महापंचायत का आयोजन – आम आदमी पार्टी और गुर्जर समाज ने संभाला मोर्चा 

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित 1300 वर्ष से भी अधिक पुराना ऐतिहासिक अनंगपुर गाँव आज सरकारी बुलडोज़र की चपेट में है। राज्यसरकार की ओर से चल रही तोड़फोड़ की कार्रवाई ने न केवल स्थानीय निवासियों को संकट में डाल दिया है, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत औरऐतिहासिक पहचान पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस कार्रवाई के विरोध में 13 जुलाई 2025 को अनंगपुर गाँव में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें आम आदमी पार्टीका एक प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा। यह महापंचायत केवल इमारतों की रक्षा नहीं, बल्कि पूर्वजों की धरोहर, आत्मसम्मान और पीढ़ियों कीपहचान को बचाने का संकल्प है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह कोई सामान्य गाँव नहीं, बल्कि इतिहास की जीती-जागती मिसाल है, जिसे मिटानेकी कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, सरकार ने जिस प्रकार से बुलडोज़र चलाकर इस गाँव को मिटाने की योजना बनाई है, वह लोकतंत्र, इतिहासऔर इंसानियत तीनों के खिलाफ है। उन्होंने दिल्ली और आसपास के 300 से अधिक गाँवों के युवाओं से अपील की कि वे इस महापंचायत मेंशामिल होकर पूर्वजों के सम्मान और भविष्य की रक्षा के लिए एकजुट हों। यह समय खामोश रहने का नहीं, बल्कि अपने हक़ और इतिहास की रक्षाके लिए खड़े होने का है, उन्होंने कहा। महापंचायत में देशभर से गुर्जर समाज के लोग भाग लेंगे। गुर्जर समाज का भारत के इतिहास में अहम योगदान रहा है। अनेक वीरों ने सीमा पर प्राणन्योछावर किए, और आज उसी समाज के लोगों को उनके बसे-बसाए गाँवों से उजाड़ा जा रहा है। यह सिर्फ एक वर्ग नहीं, बल्कि पूरे देश केआत्मसम्मान पर आघात है। सौरभ भारद्वाज ने प्रधानमंत्री की उम्र को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार 60 वर्ष की आयु के बाद कर्मचारी सेवानिवृत्तहो जाते हैं, तो फिर प्रधानमंत्री को भी 75 की उम्र पार करने के बाद पद छोड़ देना चाहिए, जैसा स्वयं सरकार की पार्टी के आंतरिक दिशा-निर्देशों मेंउल्लेख है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, प्रधानमंत्री जी को अब अपने ही बनाए हुए नियमों का पालन करना चाहिए और देश को नई सोच, नई पीढ़ी और नए नेतृत्वके लिए मार्ग देना चाहिए।अनंगपुर की महापंचायत केवल एक गाँव की रक्षा नहीं, बल्कि संविधान, संस्कृति और नागरिक अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बन रही है। यह स्पष्ट हैकि अब लोग खामोश नहीं बैठेंगे। आने वाली 13 जुलाई को अनंगपुर में होने वाली यह महापंचायत एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संदेश देनेजा रही है – कि विरासत मिटाने की हर कोशिश का जवाब एकजुट जनशक्ति देगी।

भ्रष्टाचार और दलित विरोध की सच्चाई उजागर जलभराव और पदोन्नति में फेल हुई बीजेपी और निगम प्रशासन- अंकुश नरंग

भाजपा सरकार और नगर निगम के शिक्षा विभाग की नीतियों और कामकाज को लेकर आम जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एक ओर दिल्ली मेंचारों ओर जलभराव से जनता बेहाल रही, वहीं दूसरी ओर दलित कर्मचारियों के साथ हो रहा भेदभाव एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।आम आदमी पार्टी नेता अंकुश नरंग ने दोनों मुद्दों पर कड़ा हमला करते हुए कहा कि भाजपा और उसके विभाग मिलकर न केवल भ्रष्टाचार कर रहे हैं, बल्कि दलित समाज के अधिकारों का भी खुला हनन कर रहे हैं। दलित कर्मचारियों को बराबरी से वंचित कर रहा है शिक्षा विभाग – अंकुश नरंग ने कहा कि नगर निगम के शिक्षा विभाग ने पहले वरिष्ठता सूची(सीनियॉरिटी सूची) में भारी गड़बड़ी की, और अब पदोन्नति सूची में भी दलित कर्मचारियों के साथ खुला भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने आरोपलगाया कि दलितों को जानबूझकर पदोन्नति से वंचित रखा जा रहा है, ताकि उन्हें आगे बढ़ने का अधिकार न मिले। उन्होंने यह भी याद दिलाया किभाजपा सरकार पहले भी दलित सफाई कर्मचारियों को नियमित नहीं कर रही थी, अब वही अन्याय शिक्षा विभाग में भी दोहराया जा रहा है। यह रवैयास्पष्ट रूप से दिखाता है कि भाजपा के शासन में दलितों के अधिकार सुरक्षित नहीं हैं। दिल्ली की सड़कों पर फैला पानी, दावे रह गए कागज़ों में, दूसरी ओर, मानसून की पहली ही बारिश में दिल्ली की सड़कों पर जलभराव ने सरकार कीतैयारी की पोल खोल दी। अंकुश नरंग ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री और मेयर ने मानसून से पहले बड़े-बड़े दावे किए थे मुख्यमंत्री ने कहा किमानसून को लेकर सभी आवश्यक कदम उठा लिए गए हैं. लोक निर्माण विभाग मंत्री ने कहा कि 400 स्थानों की पहचान कर अधिकारियों की ज़िम्मेदारी तय कर दी गई है और मेयर ने तो यहाँ तक कहा किदिल्लीवासी मानसून का आनंद लेंगे लेकिन हकीकत यह रही कि पूरी दिल्ली जल में डूबी रही। सड़कों पर गाड़ियाँ फंसी रहीं, नालियाँ उफनती रहीं, लोग परेशान होते रहे। अंकुश नरंग ने सवाल किया कि जब सरकार के मंत्री खुद कहते हैं कि जलभराव हुआ तो अधिकारी निलंबित होंगे, तो अब किसअधिकारी को निलंबित किया गया? उन्होंने कहा, पूरा प्रशासन नाकाम साबित हुआ और जनता को फिर से परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिनजिम्मेदार कोई नहीं ठहरा।भाजपा सरकार केवल झूठे वादे करती है – अंकुश नरंग ने कहा कि अब दिल्ली की जनता को अच्छी तरह समझ में आ गया है कि भाजपा केवल झूठेवादों की राजनीति करती है, ज़मीनी स्तर पर न तो कोई तैयारी होती है, न कोई जवाबदेही। उन्होंने जनता से अपील की कि अपने अधिकारों के लिएसजग रहें और ऐसी सरकार से सवाल करें, जो सिर्फ दिखावे की राजनीति करती है और जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती।

शहरीकरण चुनौती नहीं, देश को आगे ले जाने का अवसर है -दुर्गा शंकर मिश्रा, ASSOCHAM रियल एस्टेट सम्मेलन 2025 में

देश की राजधानी में ASSOCHAM (एसोचैम) द्वारा आयोजित रियल एस्टेट सम्मेलन 2025 में रियल एस्टेट क्षेत्र में व्यापार को आसान बनानाविषय पर आयोजित कार्यक्रम में श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, पूर्व सचिव – आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकारऔर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मुख्य सचिव) ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आने वाले समय में भारत की शहरी आबादी मेंजबरदस्त वृद्धि होने वाली है। विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुसार वर्ष 2047 तक देश की शहरी आबादी लगभग 88 करोड़ तक पहुंचनेकी संभावना है। ऐसे में यह जरूरी है कि हम आज ही से दूरदर्शिता के साथ शहरी योजनाओं पर कार्य करना शुरू करें। श्री मिश्रा ने कहा कि आज रियल एस्टेट क्षेत्र न केवल रोज़गार और आर्थिक विकास का एक प्रमुख माध्यम है, बल्कि यह लोगों के जीवन को बेहतरबनाने की दिशा में भी बहुत अहम भूमिका निभा रहा है। इस क्षेत्र का देश की कुल अर्थव्यवस्था में लगभग 13 प्रतिशत योगदान है। वहीं, सस्ते आवासऔर बुनियादी ढांचे के विकास की दर लगभग 10 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, शहरीकरण को हमें समस्या नहीं, बल्कि एक अवसरके रूप में देखना चाहिए। यह अवसर है हमारे शहरों को ऐसे केंद्रों में बदलने का, जहां हर नागरिक को जीवन की मूलभूत सुविधाएं, रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन स्तर मिले। श्री मिश्रा का मानना है कि अगर हम नवीन सोच, तकनीकी नवाचार, सटीक नीति और सरकारी-निजी भागीदारी के साथ आगे बढ़ें, तो भारत के शहरसशक्त, सुंदर और सतत विकास वाले बन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमें सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि समावेशी और टिकाऊ शहरी व्यवस्थाबनानी है जो सबके लिए लाभकारी हो। उन्होंने सरकार, उद्योग, नीति निर्माताओं और नागरिकों से मिलकर काम करने की अपील की, ताकि हम ऐसाशहरी भविष्य बना सकें जो न सिर्फ आर्थिक दृष्टि से मजबूत हो, बल्कि सामाजिक रूप से भी न्यायपूर्ण हो।इस सम्मेलन में देश भर से सरकारी अधिकारी, रियल एस्टेट उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ, योजनाकार, और नीति निर्माता शामिल हुए। सम्मेलन में नीतिगतसुधारों, निवेश के अवसरों, नई तकनीकों के उपयोग और व्यापार में सरलता जैसे विषयों पर चर्चा हुई। सभी वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया किअगर शहरीकरण को सही दिशा दी जाए, तो यह देश को एक नई ऊंचाई तक पहुंचा सकता है।कार्यक्रम का आयोजन ASSOCHAM द्वारा किया गया था, जिसका उद्देश्य था रियल एस्टेट क्षेत्र को मजबूत करना, नीतियों को सरल बनाना, औरएक बेहतर भारत के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाना।

मोहन भागवत का बड़ा बयान 75 की उम्र में नेताओं को ले लेना चाहिए संन्यास, क्या पीएम मोदी के लिए है इशारा?”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने फिर से कहा है कि नेताओं को 75 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए. उन्होंनेनागपुर में एक कार्यक्रम में कहा कि जब आपको कोई 75 साल का होने पर बधाई देता है. तो इसका मतलब है कि आपको रुक जाना चाहिए। दूसरोंको काम करने का मौका देना चाहिए. संघ प्रमुख भागवत ने यह टिप्पणी उस समारोह में की जहां मोरोपंत पिंगले की स्मृति में एक किताब कालोकार्पण किया गया. भागवत ने आपातकाल (1975) के बाद राजनीतिक बदलाव के दौरान पिंगले की भविष्यवाणियों का जिक्र किया. उपलब्धियों का नहीं है कोई जिक्रउन्होंने कहा, जब चुनाव की चर्चा हुई, मोरोपंत ने कहा था कि अगर सभी विपक्षी दल एक साथ आएं तो करीब 276 सीटों पर जीत जाएंगे और जबपरिणाम आए, तो 276 सीटों पर ही जीत हुई. हालांकि वे चुनाव परिणाम के दौरान इन चर्चाओं से दूर रहे पिंगले ने कभी अपनी उपलब्धियों का जिक्रनहीं किया. वह अपनी मुस्कुराहट से विषयों को बदल देते थे और किसी भी सम्मान समारोह में जाने से भी बचते थे.दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीसितंबर में 75 साल के होने वाले हैं. ऐसे में भागवत के इस बयान से बहस छिड़ गई है शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राउत ने कहा कि संघ प्रमुख नेप्रधानमंत्री मोदी को यह संदेश दिया है हालांकि पांच साल पहले भागवत ने 75 की उम्र में सेवानिवृत्ति के अपने इस बयान पर मोदी को अपवादबताया था.यह भी दिलचस्प है कि पिछले साल मई में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि पीएम मोदी 75 साल के होने के बाद भी सक्रियराजनीति से सेवानिवृत्त नहीं होने वाले हैं. भाजपा के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. शाह ने की टिप्पणीशाह ने यह टिप्पणी उस समय की थी जब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोकसभाचुनाव 2024 की सियासी सरगर्मियों के बीच 75 साल में रिटायरमेंट का शिगूफा छेड़ा था. केजरीवाल ने मई, 2024 में ही मोदी के उत्तराधिकारी कोलेकर सवाल किया था। उन्हें जवाब देते हुए शाह ने कहा था कि पीएम मोदी नेतृत्व करते रहेंगे.बावनकुले ने कहा था कि भारतीय संविधान भी इस तरहका कोई प्रावधान नहीं करता है. उन्होंने कहा, ‘पूर्व भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी 79 वर्ष की आयु तक प्रधानमंत्री रहे. जबकि मोरारजी देसाई(83) और डॉ. मनमोहन सिंह (81) भी 75 वर्ष की आयु के बाद भी प्रधानमंत्री रहे. मोहन भागवत नागपुर में मोरोपंत पिंगले की स्मृति में आयोजितएक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शामिल हुए थे.इसी दौरान उन्होंने पिंगले की सादगी और भविष्यवाणी क्षमता की सराहना की और राजनीति में सेल्फरिटायरमेंट कल्चर की ओर इशारा किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संघ की ओर से भाजपा को संकेत हो सकता है कि अब नेतृत्वबदलाव की दिशा में सोचना चाहिए.

केरल में थरूर सबसे लोकप्रिय, लेकिन कांग्रेस नेताओं को नहीं मंजूर, मुरलीधरन बोले पहले तय करें वो किस पार्टी में हैं

हाल ही में केरल में एक सर्वे हुआ जिसमें बताया गया कि अगर केरल में अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन कीसरकार बनती हो तो गठबंधन की तरफ से शशि थरूर पहली पसंद हैं. शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर इस सर्वे को लेकर एक पोस्ट साझा की इसपोस्ट पर कांग्रेस नेताओं ने ही थरूर को निशाने पर ले लिया है. थरूर को पोस्ट पर तंज कसते हुए केरल कांग्रेस के शीर्ष नेता के मुरलीधरन ने कहा किपहले थरूर को तय करना चाहिए कि वे किस पार्टी में हैं.के मुरलीधरन ने कहा कि ‘पहले उन्हें तय करना चाहिए कि वे किस पार्टी में हैं भले ही कोई सर्वेमें आगे भी चल रहा है लेकिन अगर यूडीएफ 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री यूडीएफ से होगा. कांग्रेस में है कई वरिष्ठ नेताकांग्रेस नेता ने कहा कि ‘हमारा लक्ष्य चुनाव जीतना है और हम इस बेकार के विवाद में नहीं पड़ना चाहते. मुरलीधरन के अनुसार केरल कांग्रेस में कईवरिष्ठ नेता हैं. जिनके नाम पर सीएम पद के लिए विचार हो सकता है और किसी सर्वे से कोई फर्क नहीं पड़ता है पार्टी का एक तरीका है नियम हैंजिनके आधार पर तय किया जाता है कि अगला सीएम कौन होगा. कथित तौर पर एक निजी एजेंसी द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि 28.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि थरूर केरल का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त हैं. थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सर्वेक्षण केबारे में एक समाचार पोस्ट साझा किया था. जिसके जवाब में उन्होंने हाथ जोड़ने वाला इमोजी भी जोड़ा था. केरल में अगले साल अप्रैल में विधानसभाचुनाव होने हैं। मुरलीधरन ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद शशि थरूर की प्रतिक्रियाओं और थरूर और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच बढ़ती दरार केबीच उन पर कटाक्ष किया. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक लेख में आपातकाल की भी आलोचना की. माणिकम टैगोर ने की टिप्पणीथरूर ने लेख में लिखा कि आपातकाल को सिर्फ भारतीय इतिहास के काले अध्याय के रूप में ही याद नहीं किया जाना चाहिए. बल्कि इससे सबकलेना जरूरी है उन्होंने नसबंदी अभियान को मनमाना और क्रूर फैसला बताया. थरूर के इस लेख पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने तीखीटिप्पणी की. टैगोर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘जब कोई सहयोगी भाजपा की बातों को शब्दशः दोहराने लगे तो आपने सोचने लगते हैं किचिड़िया, तोता बन रही है. नकल, पक्षियों में अच्छी लगती है, राजनीति में नहीं. मुरलीधरन ने शशि थरूर पर यह तंज ऐसे समय कसा है जब थरूर नेहाल के दिनों में कई ऐसे बयान दिए हैं. जिनके चलते थरूर को कांग्रेस पार्टी में आलोचना का सामना करना पड़ा है. हाल ही में एक लेख में थरूर नेआपातकाल की भी आलोचना कर पार्टी के कई नेताओं को नाराज कर दिया है. शशि थरूर ने इस सर्वेक्षण को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व मेंट्विटर) पर साझा किया और हाथ जोड़ने वाला इमोजी पोस्ट कर प्रतिक्रिया दी. लेकिन इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन नेसीधे तौर पर थरूर पर निशाना साधा. उन्होंने कहा “उन्हें पहले यह तय करना चाहिए कि वे किस पार्टी में हैं अगर यूडीएफ सत्ता में आता है तो मुख्यमंत्रीउसी के वरिष्ठ नेता होंगे कोई भी सर्वे इसका फैसला नहीं कर सकता.

पश्चिम बंगाल में भाजपा की रणनीति में बड़ा बदलाव, 2026 चुनाव से पहले नरम हिंदुत्व को बनाया चुनावी हथियार

पश्चिम बंगाल में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. समिक भट्टाचार्य के नएअध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद पार्टी ने यहां आक्रामक हिंदुत्व की जगह नरम हिंदुत्व को चुनावी हथियार बनाने का फैसला किया है. लोकसभा के बीते दो और विधानसभा के एक चुनाव में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से पार पाने की कोशिश में नाकाम रहने के बाद पार्टी नेअब राज्य के 30 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं के एकतरफा ध्रुवीकरण की काट की कोशिश में लगी है. आक्रामक हिंदुत्व की रहा थी पकड़ीगौरतलब है कि 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को सियासी अखाड़े मेंचित करने के लिए आक्रामक हिंदुत्व की राह पकड़ी थी. इस रणनीति के कारण भाजपा इस राज्य में नंबर दो की पार्टी का हैसियत तो पा गई. मगरटीएमसी की जगह खुद सत्ता हासिल करने का उसका सपना पूरा नहीं हुआ. नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनआरसी) जैसे मुद्दे पर भाजपा के आक्रामक रुख के कारण राज्य के मुस्लिम मतदाता कांग्रेस, वाम दलों से करीब-करीब पूरी तरह से किनारा कर सत्तारूढ़टीएमसी के पक्ष में गोलबंद हो गए. राष्ट्रीय राजनीति में मोदी युग की 2014 में शुरुआत के बाद पश्चिम बंगाल की सियासी तस्वीर पलटती चली गई. भाजपा के सत्ता में आने के भय से मुस्लिम मतदाता टीएमसी के पक्ष में एकतरफा गोलबंद होते चले गए। मसलन 2015 के विधानसभा चुनाव में 44 सीटें और 12 फीसदी वोट हासिल करने वाली कांग्रेस और 26 सीटें और 20 फीसदी वोट हासिल करने वाले वाम दल 2020 के चुनाव में सियासीपरिदृश्य से लगभग गायब हो गए. 16 फीसदी की आई कमीबीते चुनाव में कांग्रेस और वाम दल एक भी सीट नहीं जीत पाई और इनके वोट प्रतिशत में क्रमश: 10 और 16 फीसदी की कमी आई. भाजपामुसलमानों के नहीं बल्कि कट्टरपंथ के खिलाफ है. हम चाहते हैं कि मुसलमानों के हाथ में पत्थर की जगह किताब रहे. राज्य में राजनीतिक हिंसा केशिकार लोगों में 90 फीसदी मुसलमान हैं. हम राज्य का पुराना सांप्रदायिक सौहार्द वापस लाना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि दुर्गा पूजा और मुहर्रम काजुलूस एक साथ शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो। मुसलमानों के शिक्षा और रोजागर पर भी बात हो. -समिक भट्टाचार्य, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा पश्चिम बंगालमें 2026 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने रणनीति बदली है. समिक भट्टाचार्य के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी अब आक्रामक नहीं, बल्किनरम हिंदुत्व की राह पर चलेगी. मुस्लिम वोटों के टीएमसी के पक्ष में एकतरफा ध्रुवीकरण की काट के लिए यह बदलाव किया गया है.इसी उद्देश्य सेभाजपा अब अपनी छवि एक समावेशी पार्टी की बनाना चाहती है जो “कट्टरपंथ के खिलाफ” है मुसलमानों के खिलाफ नहीं.

भांगर में तृणमूल नेता रज्जाक खान की गोली मारकर हत्या, इलाके में तनाव टीएमसी ने आईएसएफ पर लगाए आरोप जानें क्या है पूरा मामला

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर इलाके में गुरुवार रात एक सनसनीखेज घटना में तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता रज्जाक खान कीगोली मारकर हत्या कर दी गई. रज्जाक खान भांगर इलाके में तृणमूल के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे और स्थानीय स्तर पर उनकी अच्छी-खासी पहचानथी.यह घटना काशीपुर थाना क्षेत्र के भांगर खालपार में हुई जहां अज्ञात हमलावरों ने रज्जाक खान पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। पुलिस के अनुसार, हमले में रज्जाक खान की मौके पर ही मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत वहां पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम केलिए भेज दिया. प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह हमला व्यक्तिगत रंजिश या राजनीतिक हिंसा का परिणाम हो सकता है. नौशाद सिद्दीकी के इशारे पर किया है सबतृणमूल कांग्रेस विधायक सौकत मोल्ला ने आरोप लगाया”रज्जाक खान भांगर विधानसभा क्षेत्र में हमारे सक्रिय और मजबूत कार्यकर्ता और नेता थे. आईएसएफ समर्थित असामाजिक तत्वों ने नौशाद सिद्दीकी के इशारे पर यह सब किया है. भांगर क्षेत्र में आईएसएफ के लिए कोई जगह नहीं हैइसलिए वे इस तरह की हरकतें कर रहे हैं. हमने पुलिस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उन्हें तुरंत गिरफ्तार करने का अनुरोध किया है. उनकी हत्या कीखबर से इलाके में तनाव का माहौल है. स्थानीय लोगों और तृणमूल समर्थकों में आक्रोश देखा जा रहा है वहीं पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ीकर दी है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो. मिली जानकारी के मुताबिक, पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच करेगी ताकि हमलावरों कीपहचान हो सके. तृणमूल के स्थानीय नेताओं ने इस हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे सुनियोजित साजिश करार दिया है. उनका कहना है किरज्जाक खान एक समर्पित कार्यकर्ता थे. हम सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग करते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सख्त सजा दीजाए। आपको बता दें. राजनीतिक हिंसा की घटनाएं आ चुकी है सामनेभांगर और आसपास के इलाकों में पहले भी राजनीतिक हिंसा की घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिसके कारण यह क्षेत्र अक्सर चर्चा में रहता है. पुलिस नेस्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और मामले की जांच का भरोसा दिया है। इस हत्या के बाद भांगर में तनावपूर्ण है और प्रशासनस्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है।तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता रज्जाक खान की गुरुवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई।घटना की सूचना मिलतेही पुलिस तुरंत वहां पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंच कर शव को कब्जे में लिया औरपोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती जांच में पुलिस को व्यक्तिगत रंजिश या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की आशंका है. मामले की गंभीरता कोदेखते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेजखंगालनी शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि हमलावरों की पहचान कर जल्द से जल्द गिरफ्तारी की जाएगी. फिलहाल इलाके में धारा 144 लागूकरने पर भी विचार किया जा रहा है.

सावन की शुरुआत पर सीएम योगी का रुद्राभिषेक, जनता दर्शन में 200 लोगों से की मुलाकात

सावन माह के पहले दिन मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार प्रातः काल रुद्राभिषेक व हवन किया. रुद्राभिषेक का अनुष्ठानपूर्ण कर उन्होंने भगवान भोले शंकर से चराचर जगत के कल्याण और सभी नागरिकों के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की. शुक्रवार प्रातः गोरखनाथ मंदिर केअपने आवास के प्रथम तल स्थित शक्तिपीठ में सीएम योगी ने भगवान भोलेनाथ को विल्व पत्र, दुर्वा, मदार पत्र, कमल पुष्प समेत अनेकानेक पूजनसामग्री अर्पित करने के बाद जल, दूध और ऋतुफल के रस से रुद्राभिषेक किया. मठ के विद्वत आचार्यगण एवं पुरोहितगण ने शुक्ल यजुर्वेद संहिता केरुद्राष्टाध्यायी के महामंत्रों द्वारा रुद्राभिषेक संपन्न कराया. रुद्राभिषेक के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन किया. विधि विधान सेपूर्ण हुए रुद्राभिषेक अनुष्ठान के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के आरोग्यमय, सुखमय, समृद्धमय व शांतिमय जीवन कीमंगलकामना की. मंदिर परिसर में किए जनता दर्शनमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में ‘जनता दर्शन’ किया. इस दौरान उन्होंने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं और कहा कि परेशान मत हों आपकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाएगा. सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को संबंधित मामलों के निस्तारण के निर्देश दिए. जनता दर्शन में एक महिला इलाज के लिए मुख्यमंत्री से गुहारलगाई तो मुख्यमंत्री ने कहा कि इलाज का इस्टीमेट मंगा लीजिए. सरकार भरपूर मदद करेगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार सुबह जनता दर्शन में गोरखनाथ मंदिर परिसर में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक […]

बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सियासत गरम, शाहनवाज हुसैन बोले विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग पर करना चाहिए भरोसा

Bihar Politics: बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद खूब सियासी बयानबाजी हो रही है. विपक्ष ने मतदातासूची पुनरीक्षण पर रोक लगाने की मांग की है इस पर भाजपा ने सवाल उठाए हैं भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा है कि विपक्षी दलों काचुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करना बेहद दुखद है उनको सुप्रीम कोर्ट और आयोग दोनों पर भरोसा करना चाहिए.भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैनने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ विपक्षी दल के नेता सुप्रीम कोर्ट गए थे. खासकर मनोज झा उन्होंने कोर्ट से स्टे मांगा लेकिन कोई स्टेनहीं लगा. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सुझाव दिए हैं जो ठीक हैं. आखिरी सुनवाई में फैसला आएगा विपक्षी नेताओं को सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा करना चाहिए. मगर वे उस पर भी बयानबाजी करते हैं उन्होंने कहा कि जब विपक्षी दल किसी राज्य में चुनाव जीत जाते हैं तो चुनाव आयोग अच्छा हो जाता है औरजब हारते हैं तो चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं.चुनाव आयोग से नहीं है कोई दिक्कतविपक्षी दलों का ऐसा करना सही नहीं है. भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि जब राहुल गांधी की पार्टी ने रायबरेली, वायनाड, कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल और तमिलनाडु में जीत हासिल की, तब उनको चुनाव आयोग से कोई दिक्कत नहीं हुई. मगर, जब वह महाराष्ट्र, हरियाणा औरदिल्ली में चुनाव हार गए. तो उन्होंने चुनाव आयोग को दोषी ठहराया अब उन्हें पता है कि बिहार में भी उन्हें जीरो मिलेगा इसलिए वह सारा दोष चुनावआयोग पर डाल रहे हैं. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बिहार में प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गए थे. राहुल गांधी वहां बैग टांगकर विरोध करने गए थेलेकिन तेजस्वी यादव ने अपने नेताओं को टांग दिया. न तो पप्पू यादव और न ही कन्हैया कुमार को ट्रक पर चढ़ने दिया गया भले ही वह चुनाव हारजाते हों. लेकिन उन्हें ट्रक पर तो चढ़ने दिया जाता. भाजपा नेता ने कहा कि बिहार में कानून का राज है और जनता को कोई परेशानी नहीं है गोपालखेमका हत्याकांड मामले में आरोपी पकड़े गए हैं और उनका एनकाउंटर भी किया गया है कोई भी हत्या या अपराध से जुड़ी हुई घटनाएं होंगी तोआरोपी बख्शे नहीं जाएंगे नीतीश कुमार अपराध और अपराधियों से कोई समझौता नहीं करते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सुनायाइसलिए उन्हें जेल भेजा जाएगा.इससे पहले गुरुवार को बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग की तरफ से वोटर लिस्ट की विशेष जांच कराने के एलानपर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि बिहार में वोटर लिस्ट की विशेष जांच जारी रहेगी. कोर्ट ने चुनाव आयोग (ईसीआई) से कहा है कि वो इस प्रक्रिया में आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड को पहचान पत्र के रूप में माननेपर विचार करे. साथ ही तीन मुद्दों पर जवाब दाखिल करे. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की अगली तारीख 28 जुलाई तय की. बता दें कि चुनाव आयोग के इस फैसले को विपक्षी दलों ने चुनौती दी थी. क्योंकि उन्हें डर था कि इससे कई वैध वोटरों को वोट देनेके अधिकार से वंचित किया जा सकता है. बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्ष ने पुनरीक्षण पर रोक लगाने की मांग की है। इस पर भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि विपक्षी नेताओं को सुप्रीम कोर्ट और चुनावआयोग पर भरोसा करना चाहिए.

उदयपुर फाइल्स की रिलीज़ पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, केंद्र सरकार को दी फिल्म की समीक्षा की जिम्मेदारी

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल तेली की हत्या पर आधारित फिल्म ”उदयपुर फाइल्स” की रिलीज पर रोक लगा दी. यहआदेश तब तक लागू रहेगा जब तक केंद्र सरकार फिल्म की सामग्री पर अंतिम निर्णय नहीं ले लेती. यह निर्णय जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्षमौलाना अरशद मदनी सहित तीन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया. जिन्होंने फिल्म पर मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने का आरोप लगातेहुए प्रतिबंध की मांग की थी. मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति अनीश दयाल की खंडपीठ ने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 6 केतहत केंद्र सरकार को अपने संशोधन अधिकारों का उपयोग कर फिल्म की जांच करने का निर्देश दिया. फिल्म की रिलीज शुक्रवार, 11 जुलाई कोप्रस्तावित थी. प्रमाणन के खिलाफ कर सकते है कार्रवाईखंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार स्वतः संज्ञान लेने या किसी शिकायतकर्ता के आवेदन पर फिल्म के प्रमाणन के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. कोर्टने नोट किया कि याचिकाकर्ताओं ने इस कानूनी उपाय का उपयोग नहीं किया था. हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद226 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग कर हस्तक्षेप कर सकता है. लेकिन याचिकाकर्ताओं को पहले केंद्र सरकार से संपर्क करनाचाहिए कोर्ट ने आदेश दिया, हम याचिकाकर्ता को दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार से संपर्क करने की अनुमति देते हैं. यदि याचिकाकर्ता केंद्र सरकार सेसंपर्क करते हैं. तो वे अंतरिम उपायों के लिए भी अनुरोध कर सकते हैं. यदि याचिकाकर्ता संशोधन याचिका दायर करते हैं. तो केंद्र सरकार को निर्माताको सुनवाई का अवसर देने के बाद एक सप्ताह के भीतर इसका निर्णय करना होगा।.कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि फिल्म के खिलाफ अंतरिम राहतके अनुरोध पर भी विचार किया जाए। तब तक, फिल्म की रिलीज पर रोक रहेगी. फिल्म की रिलीज पर लगेगी रोकखंडपीठ ने कहा चूंकि हम याचिकाकर्ता को धारा 6 के तहत संशोधन उपाय का उपयोग करने के लिए कह रहे हैं, हम आदेश देते हैं कि फिल्म कीरिलीज पर रोक रहेगी. सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने बुधवार को कोर्ट को सूचित किया था कि फिल्म के कुछ आपत्तिजनकहिस्सों को हटा दिया गया है. कोर्ट ने निर्माता को फिल्म और उसके ट्रेलर की स्क्रीनिंग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था. जिसमें याचिकाकर्ता केवकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल और सीबीएफसी के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा मौजूद थे मौलाना अरशद मदनी ने अपनीयाचिका में दावा किया कि फिल्म मुस्लिम समुदाय को बदनाम करती है और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है. याचिकाकर्ताओं नेफिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की थी. जिसके जवाब में कोर्ट ने केंद्र सरकार को सामग्री की जांच करने का निर्देश दिया. कोर्ट को बताया गया किसेंसर बोर्ड (CBFC) ने पहले ही फिल्म के कुछ आपत्तिजनक दृश्य हटा दिए हैं. कोर्ट के निर्देश पर एक स्क्रीनिंग आयोजित की गई, जिसमें वरिष्ठअधिवक्ता कपिल सिब्बल, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा, और याचिकाकर्ताओं के वकील मौजूद रहे.