जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना में बड़ा घोटाला दिल्ली की पूर्व आम आदमी पार्टी सरकार पर लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप – मंत्री आशीष सूद ने किया पर्दाफाश

दिल्ली की पूर्व आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा चलाई गई जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना अब बड़े विवाद के घेरे में आ गई है। दिल्लीसरकार के मंत्री श्री आशीष सूद ने इस योजना में करोड़ों रुपये के गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में अनेक प्रमाण औरआँकड़े प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि यह योजना घोटाले का केंद्र बन चुकी थी। योजना का उद्देश्य और लक्षित वर्गइस योजना का उद्देश्य था कि अनुसूचित जाति (दलित), अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के प्रतिभाशालीविद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, बैंक, अभियान्त्रिकी, चिकित्सकीय, विधि और अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं कीतैयारी हेतु निशुल्क कोचिंग प्रदान की जाए। सरकार की ओर से इन विद्यार्थियों को वर्ष भर के लिए एक लाख से ढाई लाख रुपये तक की सहायताराशि दी जाती थी ताकि वे महंगी कोचिंग ले सकें। मंत्री आशीष सूद के प्रमुख आरोपसूद ने इस योजना में भारी अनियमितताओं का खुलासा करते हुए निम्नलिखित आरोप लगाएइस योजना के अंतर्गत पंद्रह हज़ार से अधिक फर्जी नामों पर सरकारी राशि जारी की गई।योजना में दर्ज कई “विद्यार्थियों” की आयु 30 वर्ष से अधिक थी, जबकि योजना केवल विद्यार्थियों के लिए थी।कई कोचिंग संस्थानों ने विद्यार्थियों को नामांकित किए बिना ही सरकार से भुगतान प्राप्त कर लिया।कुछ कोचिंग संस्थानों ने कक्षा में उपस्थिति के फर्जी आँकड़े सरकारी पोर्टल पर दर्ज कर दिए।बड़ी संख्या में फर्जी जाति प्रमाण पत्र, झूठे आधार कार्ड, और नकली अंक पत्र अपलोड किए गए।योजना की निगरानी, सत्यापन और लेखा परीक्षा की कोई सुदृढ़ व्यवस्था नहीं थी, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। जांच और कार्रवाई की घोषणाआशीष सूद ने इस पूरे मामले की केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या आर्थिक अपराध शाखा से निष्पक्ष जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहाकिदलित विद्यार्थियों के नाम पर करोड़ों रुपये की लूट एक अमानवीय अपराध है। हम इसके दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शेंगे नहीं। जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना एक सराहनीय और जनहितैषी प्रयास था, जिसका उद्देश्य समाज के पिछड़े, दलित और निर्धन वर्ग केयुवाओं को मुख्यधारा में लाना था। किंतु यदि इसमें भ्रष्टाचार हुआ है, तो यह न केवल सरकारी कोष की लूट है, बल्कि उन हज़ारों प्रतिभाशालीविद्यार्थियों के सपनों और भविष्य की हत्या है, जो इस योजना पर आश्रित थे।
21 जुलाई से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र, पेश होंगे 8 नए विधेयक मणिपुर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने पर भी विचार

संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है इस मानसून सत्र में सरकार आठ नए विधेयक पेश करेगी. इनमें मणिपुर में राष्ट्रपति शासन से जुड़ाविधेयक भी शामिल है सरकार मणिपुर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने पर विचार कर रही है इससे साफ है कि सरकार की इस उत्तर पूर्वी राज्य में फिलहालराष्ट्रपति शासन हटाने की कोई योजना नहीं है. मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था. राष्ट्रपति शासन के लिए सरकार को हरछह महीने में संसद की मंजूरी लेनी होती है फिलहाल राज्य में राष्ट्रपति शासन की समयसीमा 13 अगस्त है. संसद के आगामी सत्र में सरकार मणिपुरवस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2025, जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय संस्थान प्रबंधन (संशोधन) विधेयक2025, कराधान विधि (संशोधन) विधेयक 2025, भू-विरासत स्थल एवं भू-अवशेष (संरक्षण एवं रखरखाव) विधेयक 2025, खान एवं खान(विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक 2025 कोलोकसभा में पेश और पारित करा सकती है.सत्र के दौरान हुआ था काफी हंगामासाथ ही गोवा राज्य के विधानसभा क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधित्व का पुनर्समायोजन विधेयक 2024, मर्चेंट शिपिंग विधेयक 2024, भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025 और आयकर विधेयक 2025 को भी लोकसभा में पारित किए जाने की उम्मीद है. बता दें कि बीते अप्रैल माह मेंखत्म हुए संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता लगभग 18 फीसदी रही थी. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक राज्यसभामें भी भरपूर कामकाज हुआ और इस सदन की उत्पादकता 119 फीसदी रही. संसद के दोनों सदनों में 16 विधेयक पारित किए गए. इस सत्र के दौरानकाफी हंगामा भी हुआ. लेकिन संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद, वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित कियागया. बीते अप्रैल माह में खत्म हुए संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता लगभग 18 फीसदी रही थी. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजूके मुताबिक राज्यसभा में भी भरपूर कामकाज हुआ और इस सदन की उत्पादकता 119 फीसदी रही. गौरतलब है कि मणिपुर में 13 फरवरी 2025 कोराष्ट्रपति शासन लागू किया गया था. राष्ट्रपति शासन की लेनी होती है मंजूरीजिसकी वैधता 13 अगस्त तक है. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सरकार को हर छह महीने में संसद से राष्ट्रपति शासन की मंजूरी लेनी होती है. ऐसेमें यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार फिलहाल मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को हटाने के पक्ष में नहीं है. पिछले बजट सत्र (अप्रैल 2025 में समाप्त) केदौरान लोकसभा की उत्पादकता केवल 18 फीसदी रही थी. इसके विपरीत, राज्यसभा में उल्लेखनीय रूप से 119 फीसदी उत्पादकता दर्ज की गई. इस सत्र में कुल 16 विधेयक पारित किए गए. जिनमें वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 भी शामिल है. हालाँकि, विपक्ष के विरोध और हंगामों केकारण कई बार कार्यवाही बाधित भी हुई। इस मानसून सत्र में सरकार की प्राथमिकता मणिपुर में जारी राष्ट्रपति शासन को बढ़ाने, जीएसटी मेंसंशोधन, खेल प्रशासन में सुधार, और कराधान कानूनों के आधुनिकीकरण पर रहेगी। साथ ही, राज्यसभा और लोकसभा दोनों में विधेयकों को पारितकराने को लेकर सरकार अपनी रणनीति को धार देने में जुटी है.
कांग्रेस ने फिर घेरा केंद्र, ट्रंप के संघर्ष विराम दावे पर पीएम मोदी से लोकसभा में जवाब की मांग जानें “क्या है पूरा मामला”

कांग्रेस ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के दावे को लेकर केंद्र पर हमला बोला है. कांग्रेस नेकहा कि मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा में पीएम मोदी को इस मुद्दे पर जवाब देना होगा. कांग्रेस पिछले कई दिनों से इस मुद्दे को लेकरसरकार को घेर रही है. ट्रंप के नए पोस्ट को साझा करते हुए कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा कि आज स्कोर 66 दिन, 23 पुनरावृत्तियों का है. ट्रंप के संघर्ष विराम के दावे को लेकर उन्होंने कहा कि संसद 21 जुलाई से फिर से शुरू होगी। इससे पहले स्थिति निश्चित रूप सेबदल जाएगी. लेकिन प्रधानमंत्री को लोकसभा और राज्यसभा में स्पष्ट रूप से जवाब देना होगा. मारे गए थे 26 नागरिकदेश जानना चाहता है. ट्रंप ने कहा कि हमने इंडोनेशिया के साथ समझौता किया है. मैंने उनके राष्ट्रपति से बात की और हमने समझौता कर लिया हमेंइंडोनेशिया तक हर चीज तक पूरी पहुंच है. इंडोनेशिया तांबे के मामले में बहुत मजबूत है. लेकिन हमें हर चीज तक पूरी पहुंच है. हम कोई शुल्क नहींदेंगे. वे हमें इंडोनेशिया में प्रवेश दे रहे हैं जो हमें पहले कभी नहीं मिला. शायद यही इस समझौते का सबसे बड़ा हिस्सा है. ट्रंप ने कहा कि भारत केसाथ भी बातचीत उसी दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा, ‘भारत भी वैसा ही कर रहा है अब हमें भारत तक भी पूरी पहुंच मिल रही है. पहले हमें इनदेशों में ऐसी पहुंच नहीं थी अब हमारी टैरिफ नीति के कारण हम यह हासिल कर रहे हैं.’10 मई के बाद से ट्रंप ने कई बार अपना दावा दोहराया है किउन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में मदद की है और उन्होंने परमाणु हथियार संपन्न दक्षिण एशियाई पड़ोसियों से कहा है कियदि वे संघर्ष बंद कर दें तो अमेरिका उनके साथ खूब व्यापार करेगा. हालांकि भारत इसका लगातार खंडन कर रहा है. पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे. 7 मई को किया गया ऑपरेशन सिंदूरइसके जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शरू किया. भारत ने पाकिस्तान और पीओजेके में आतंकी ठिकानों पर हमला किया. इसके बाददोनों देशों के बीच संघर्ष शुरू हो गया. दोनों देशों ने 10 मई को संघर्ष विराम करने का फैसला किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिरभारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का दावा किया. इस पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला. कांग्रेस ने पीएम मोदी से इस मुद्दे परजवाब मांगा है. आज स्कोर 66 दिन और 23 बार दोहराया गया दावा है संसद 21 जुलाई से शुरू हो रही है उससे पहले यह स्थिति शायद बदल जाए. लेकिन प्रधानमंत्री को संसद में जवाब देना होगा। देश जानना चाहता है. “हमने इंडोनेशिया के साथ एक व्यापार समझौता किया है जिससे हमें वहांबिना शुल्क के पूरी पहुंच मिली है। अब भारत के साथ भी बातचीत उसी दिशा में आगे बढ़ रही है. पहले हमें इन देशों में ऐसी पहुंच नहीं मिलती थीलेकिन अब टैरिफ नीति के कारण हम यह हासिल कर पा रहे हैं. हमने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में मदद की है और दोनों देशोंसे कहा कि यदि वे संघर्ष बंद करें तो अमेरिका उनके साथ बड़े व्यापार सौदे करेगा.
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी को पत्र लिखकर सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का आग्रह किया. उन्होंने लिखा’हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह संसदके आगामी मानसून सत्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए विधेयक लाए. इसके अलावा हम सरकार से अनुरोधकरते हैं कि वह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए भी विधेयक लाए. उन्होंने पत्र में लिखा’माननीयप्रधानमंत्री जी, पिछले पांच वर्षों से जम्मू-कश्मीर के लोग पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं. यह मांग जायज होने के साथ-साथउनका संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार भी है. यह समझना जरूरी है कि जहां अतीत में केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य का दर्जा दिए जाने केउदाहरण रहे हैं वहीं जम्मू-कश्मीर का मामला आजाद भारत में कुछ अलग ही रहा है यह पहली बार है. राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदमजब किसी पूर्ण राज्य को उसके विभाजन के बाद केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया है. पत्र में आगे लिखा गया ‘आपने स्वयं कई मौकों पर राज्यका दर्जा बहाल करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई है. 19 मई 2024 को भुवनेश्वर में दिए अपने साक्षात्कार में आपने कहा था कि राज्य कादर्जा बहाल करना हमारा वादा है. हम इस पर कायम हैं। 19 सितंबर 2024 को श्रीनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए आपने फिर से दोहराया थाकि हमने संसद में कहा है कि हम इस क्षेत्र का राज्य का दर्जा बहाल करेंगे. इसके अलावा केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के मामले में सर्वोच्च न्यायालयके सामने भी इसी तरह का आश्वासन दिया. जिसमें कहा गया कि राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा. राहुल और खरगे ने पत्र मेंलिखा’हम सरकार से अपील करते हैं कि वह संसद के आगामी मानसून सत्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिएएक विधेयक पेश करे. इसके अलावा हम सरकार से मांग करते हैं कि वह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने केलिए एक विधेयक भी लाए. यह लद्दाख के लोगों की सांस्कृतिक, विकासात्मक और राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्णकदम होगा. कांग्रेस ने लिखा पीएम मोदी को पत्रइसके साथ ही यह उनके अधिकारों, भूमि और पहचान की रक्षा भी करेगा. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी नेप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए संसद के मानसून सत्र में कानून लानेका आग्रह किया. उन्होंने सरकार से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए कानून लाने की भी मांग की. कांग्रेस का यह पत्रसिर्फ एक औपचारिक आग्रह नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है कि आगामी मानसून सत्र में विपक्ष सरकार से इन विषयों पर जवाबदेही औरविधायी कार्रवाई की मांग करेगा. जम्मू-कश्मीर की स्थिति, अनुच्छेद 370 की बहाली के बाद की राजनीति, और लद्दाख की सांस्कृतिक स्वायत्तता कामुद्दा आने वाले सत्र में गरमा सकता है ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार कांग्रेस के इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देती है. और क्या इन मांगोंको लेकर संसद में विधेयक पेश होता है या नहीं.
मेघालय की बेटी रिफिनीस वारजरी ने रचा इतिहास, एवरेस्ट फतह कर दिखाई उड़ान फिर भी मां की चाय दुकान पर करती हैं काम

सड़क किनारे चाय और नूडल्स परोसने से लेकर सभी सातों महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने का सपना, मेघालय की रिफिनीस वारजरीकी कहानी हौसलों की ऊंची उड़ान की कहानी है. 20 साल की पर्वतारोही वारजरी ने हाल ही में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़करकीर्तिमान रच दिया है. इसके साथ ही वारजरी मेघालय की सबसे युवा पर्वतारोही बन गई हैं जो माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुकी हैंरिफिनीस अपनी इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं. लेकिन साथ ही उन्होंने अपने पैरों को जमीन पर ही रखा है. न केवल शारीरिक सहनशक्ति औरमानसिक ताकत, बल्कि उनकी विनम्रता और गर्मजोशी भरे स्वभाव ने भी कई लोगों का दिल जीत लिया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ बातचीत मेंरिफिनीस ने उम्मीद जताई कि उनकी यात्रा कई लोगों को प्रेरित करेगी. साधारण परिवार से रखती है ताल्लुकखासकर उन महिलाओं को जो छोटे शहरों या पिछड़े परिवारों से आती हैं और बड़े सपनों का पीछा कर रही हैं रिफिनीस का जन्म मेघालय के ईस्टखासी हिल्स जिले के नॉन्गथिमाई इलाके में हुआ था. लेकिन अब रिफिनीस और उनका परिवार शिलॉन्ग के बाहरी इलाके में रहता है. रिफिनीस एकसाधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनकी मां सड़क किनारे चाय और नूडल्स की दुकान चलाती हैं वहीं उनके पिता चिकन बेचते हैं. माउंटएवरेस्ट नापने के बाद रिफिनीस को कई सम्मान और पहचान मिल चुकी है. लेकिन अभी भी रिफिनीस ने अपने आप को विनम्र बनाए रखा है और वेअभी भी अपनी मां की दुकान पर काम करती हैं. जहां वे टेबल साफ करने से लेकर लोगों को चाय परोसने जैसे काम करती हैं रिफिनीस ने कहा कि’पहाड़ हमें विनम्र रहना सिखाते हैं. जब मैं माउंट एवरेस्ट पर खड़ी थी तो मुझे अहसास हुआ कि हम कितने छोटे और महत्वहीन हैं ये एक सबक है जिसेमैं साथ लेकर आई हूं और इसे सभी के साथ साझा कर रही हूं. रिफिनीस की सफलता पर उसके परिजन भी बेहद खुश और गौरवान्वित हैं उन्होंने उम्मीदजताई की रिफिनीस को कोई सरकारी नौकरी मिल जाए ताकि वह अपने परिवार की मदद कर सके. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि वे नहीं चाहते किरिफिनीस अब सपने देखना बंद कर दे. बहन ने जताई खुशीरिफिनीस की बहन उसकी सफलता से बेहद खुश है. वंचित परिवारों के बच्चों के लिए अपने संदेश में रिफिनीस ने कहा कि ‘आपकी पृष्ठभूमि आपकीमहत्वाकांक्षा को कभी सीमित नहीं करनी चाहिए. खुद पर विश्वास रखें और आगे बढ़ते रहें. रिफिनीस की सफलता पर मेघालय के सीएम कोनराडसंगमा ने उन्हें सम्मानित किया. साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बधाई दी और रिफिनीस को भारत की युवा पीढ़ी के जुझारूपन का उदाहरणबताया। कई सरकारी विभाग भी रिफिनीस को सम्मानित कर चुके हैं. रिफिनीस का जन्म ईस्ट खासी हिल्स जिले के नॉन्गथिमाई गाँव में हुआ। वर्तमानमें उनका परिवार शिलॉन्ग के बाहरी इलाके में रहता है उनकी मां सड़क किनारे चाय और नूडल्स की दुकान चलाती हैं. जबकि उनके पिता चिकनविक्रेता हैं बचपन से ही कठिनाइयों के बीच पली-बढ़ीं रिफिनीस ने कभी हार नहीं मानी. रिफिनीस की बहन और परिजन बेहद खुश हैं। परिवार चाहताहै कि उन्हें सरकारी नौकरी मिले, जिससे वह अपने माता-पिता की मदद कर सकें. लेकिन वे यह भी नहीं चाहते कि रिफिनीस अपने सपनों का पीछाकरना छोड़ दे.
कर्नाटक सरकार ने रोका एयरोस्पेस पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण, नारा लोकेश ने दिया आंध्र प्रदेश में निवेश का न्योता

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने एयरोस्पेस पार्क के लिए बंगलूरू के नजदीक देवनहल्ली इलाके में भूमि अधिग्रहण का काम रोक दिया है. दरअसलकिसान और सामाजिक संगठन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ कई महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. अब इसे लेकर आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्री औरसीएम चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश ने तीखा तंज कसा है और एयरोस्पेस उद्योग से अपील की है कि वे आंध्र प्रदेश में निवेश करें. जैसे हीकर्नाटक सरकार ने भूमि अधिग्रहण रोकने का आदेश जारी किया. वैसे ही आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करएयरोस्पेस उद्योग से जुड़े लोगों को आंध्र प्रदेश में निवेश करने की पेशकश कर दी, नारा लोकेश ने लिखा कि ‘प्रिय एयरोस्पेस उद्योग, इसके बारे मेंसुनकर दुख हुआ. आपके लिए है बेहतर उपायलेकिन मेरे पास आपके लिए एक बेहतर उपाय है. आप आंध्र प्रदेश में निवेश क्यों नहीं करते? हमारी एयरोस्पेस नीति काफी लुभावनी है और हमबेहतर इनसेंटिव दे सकते हैं. साथ ही हमारे पास 8000 एकड़ तैयार जमीन है वो भी बंगलूरू के बिल्कुल बाहर। मुझे उम्मीद है कि आप जल्द हीबातचीत की मेज पर दिखेंगे. ‘गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार ने किसानों और अन्य संगठनों के 1200 दिन चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद बंगलूरूके नजदीक देवनहल्ली तालुक में 1777 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का फैसला वापस ले लिया. सीएम सिद्धारमैया ने मंगलवार को इसका एलानकिया और कहा कि सरकार ने पीछे हटने का फैसला किया है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि अगर किसान भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति जताते हैं तोसरकार उनसे सही दाम पर जमीन खरीदने के लिए तैयार है। सीएम ने कहा कि ‘यह जमीन बंगलूरू के पास है. जहां अच्छी खेती होती है और यह कईकिसानों की आजीविका का साधन है. इसलिए हमने अधिग्रहण रद्द करने का फैसला किया है. चूंकि यह जमीन हवाई अड्डे के पास हरित पट्टी में है. इसलिए किसानों ने सरकार से इसे अधिग्रहित न करने का आग्रह किया था और इस योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए थे. छूट दी जा रही है जमीन के लिएहालांकि सीएम ने साफ किया कि यह छूट सिर्फ इस जमीन के लिए दी जा रही है और कहीं और ये छूट नहीं मिलेगी. कर्नाटक सरकार ने किसानों औरअन्य संगठनों के 1200 दिन चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद बंगलूरू के नजदीक देवनहल्ली तालुक में 1777 एकड़ जमीन के अधिग्रहण का फैसलावापस ले लिया. जैसे ही कर्नाटक सरकार ने भूमि अधिग्रहण रोकने की घोषणा की. वैसे ही आंध्र प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के बेटेनारा लोकेश ने इसे लेकर एक राजनीतिक और व्यावसायिक तंज कस दिया. कर्नाटक सरकार का यह फैसला जहां किसान हितों की जीत के रूप मेंदेखा जा रहा है. वहीं आंध्र प्रदेश इसे औद्योगिक अवसर के रूप में भुनाना चाहता है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि राज्यों के बीच औद्योगिकनिवेश आकर्षित करने की होड़ और भी तेज़ हो सकती है. कर्नाटक में भूमि अधिग्रहण रोकने का फैसला सामाजिक दृष्टि से सराहनीय है. लेकिन इससेऔद्योगिक नीति और प्रतिस्पर्धा में एक नया अध्याय जुड़ गया है. अब देखना होगा कि क्या एयरोस्पेस सेक्टर आंध्र प्रदेश की पेशकश को स्वीकारकरता है या कर्नाटक कोई नई रणनीति अपनाता है.
भाषा विवाद के बीच चंद्रबाबू नायडू की नसीहत, पीवी नरसिम्हा राव ने 17 भाषाएं थी सीखी “वो थे एक बहुभाषाविद नेता”

भाषा विवाद के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव हिंदी समेत 17 भाषाएंजानते थे.’पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का जीवन और विरासत’ विषय पर व्याख्यान देते हुए मुख्यमंत्री नायडू ने उन्हें एक महान राजनेता औरदूरदर्शी व्यक्ति के रूप में याद किया. उन्होंने कहा कि पूरे तेलुगु समुदाय को उन पर गर्व है. नायडू ने कहा कि उनके और नरसिम्हा राव के बीच बहुतअच्छे संबंध थे. राव का जिक्र करते हुए नायडू ने कहा, ‘वह एक छात्र नेता, एक स्वतंत्रता सेनानी और 17 भाषाओं में पारंगत विद्वान थे. उन्होंने कहा, ‘अब हम सब सोच रहे हैं कि आपको हिंदी क्यों सीखनी चाहिए? उन्होंने न केवल हिंदी सीखी, बल्कि 17 भाषाएं भी सीखीं. इस तरह वह एक महानव्यक्ति बन गए. कर्नाटक जैसे राज्यों में विरोधआंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की साथी पार्टी के मुखिया की यह टिप्पणी भाषा विवाद के बीच आई है. राष्ट्रीय शिक्षा नीतिके तहत त्रि-भाषा फॉर्मूले का तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में विरोध हुआ है. महाराष्ट्र में तो भाजपा नीत सरकार को हिंदी को तीसरीभाषा बनाने का फैसला वापस तक लेना पड़ा था. दक्षिणी राज्यों के कई नेताओं ने भी केंद्र पर ‘हिंदी थोपने’ का आरोप लगाया है. आंध्र प्रदेश केमुख्यमंत्री की यह टिप्पणी भाषा विवाद के बीच आई है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत त्रि-भाषा फॉर्मूले का तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्योंमें विरोध हुआ है. मुख्यमंत्री नायडू ने अमरावती में ‘पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का जीवन और विरासत’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में बोलतेहुए कहा कि राव का जीवन यह साबित करता है कि भाषा सीखना विभाजन का कारण नहीं, बल्कि समावेश और विकास का माध्यम है. केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोपयह बयान ऐसे समय आया है जब कई दक्षिणी राज्य, विशेष रूप से तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र, केंद्र सरकार पर “हिंदी थोपने” का आरोप लगाचुके हैं. भले ही तेलुगु देशम पार्टी (TDP) केंद्र में एनडीए की सहयोगी है लेकिन चंद्रबाबू नायडू ने इस मुद्दे पर सीधा टकराव नहीं, बल्कि इतिहास सेउदाहरण पेश करते हुए एक विचारोत्तेजक सन्देश दिया. उन्होंने कहा कि भारत में भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचानऔर राजनीतिक विमर्श का भी मुद्दा बन चुकी है। इस बीच चंद्रबाबू नायडू की नरसिम्हा राव को श्रद्धांजलि और उनकी बहुभाषिकता का उल्लेख एकसुलझे हुए दृष्टिकोण का परिचायक है जहाँ भाषाएं सीखना विवाद नहीं संवाद का माध्यम बन सकती हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीयशिक्षा नीति (NEP) में प्रस्तावित त्रि-भाषा फॉर्मूले को लेकर दक्षिणी राज्यों समेत कई हिस्सों में तीखा विरोध हो रहा है. नायडू की यह टिप्पणी इसमुद्दे को लेकर एक संतुलित और प्रेरणात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है.
ISS मिशन में भारतीय वैज्ञानिक शुभांशु शुक्ला की बड़ी उपलब्धि, माइक्रो ग्रैविटी में किए 7 अनोखे प्रयोग

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर अपने मिशन के दौरान भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने जो वैज्ञानिक प्रयोग किए. वे न केवलभारत के लिए बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान समुदाय के लिए भी नई दिशा के संकेत हैं. शुभांशु ने आईएसएस में माइक्रो ग्रैविटी पर भारत के नेतृत्ववाले सात प्रयोग किए. इनमें मूंग और मेथी के बीज का अंकुरण (रविकुमार होसमणि और सुधीर सिद्धापुरेडी के नेतृत्व में), साइनोबैक्टीरिया और सूक्ष्मशैवाल पर शोध और स्टेम सेल अनुसंधान शामिल थे. नासा के अनुसार, अंतरिक्ष में मानव शरीर की प्रतिक्रियाएं कोशिकाओं की जैविक क्रिया औरस्वचालित स्वास्थ्य निगरानी जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रयोग किए गए थे. ये प्रयोग भविष्य में चंद्रमा, मंगल और लंबे स्पेस अभियानों के लिए नींव तैयार करसकते हैं. इन प्रमुख प्रयोगों में शुभांशु की अग्रणी भूमिका रही शुभांशु ने एक्सिओम की मुख्य वैज्ञानिक लुसी लो के साथ बातचीत में इसरो के सहयोगसे हुए शोध पर गर्व व्यक्त किया. उन्होंने छात्रों और स्टेम समुदायों के साथ भी बातचीत की. मजाक में खुद को कहा वाटर बेंडरशुभांशु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इसरो केंद्रों से शौकिया रेडियो के माध्यम से भी जुड़े. उन्होंने पानी के साथ एक शून्य-गुरुत्वाकर्षण प्रदर्शन भी किया. जिसमें एक तैरता हुआ पानी का बुलबुला बनाया और मजाक में खुद को वाटर बेंडर कहा. स्टेम सेल डिफरेंशिएशन इन माइक्रो ग्रेविटी प्रयोग केअंतर्गत शुभांशु ने अंतरिक्ष में मानव स्टेम सेल को विशिष्ट ऊतकों जैसे हृदय और मस्तिष्क कोशिकाओं में बदलने की प्रक्रिया का अध्ययन किया. माइक्रो ग्रेविटी में जैविक विभेदन की इस क्षमता का उपयोग भविष्य में कैंसर और न्यूरो संबंधी रोगों के इलाज में हो सकता है. शुभांशु ने बताया था किअंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होने से मांसपेशियों का क्षरण होता है. हमारा प्रयोग है कि क्या कोई सप्लीमेंट देकर इसे रोका जा सकता है। इसकाफायदा पृथ्वी पर रहने वाले उन लोगों को भी होगा, जिनमें उम्र बढ़ने की वजह से मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं. आईएसएस पर विशुद्ध प्रोटीनअणुओं को क्रिस्टल के रूप में जमाकर यह परीक्षण किया गया कि उनकी संरचना अंतरिक्ष में कैसे अधिक स्थिर होती है. यह दवाओं के विकास वसटीक फार्मास्युटिकल डिजाइन के क्षेत्र में बड़ी छलांग माना जा रहा है. यह विशेष रूप से भारत प्रायोजित प्रयोग था जिसमें भारतीय मूल के आंतों केजीवाणु (माइक्रोबायोम) को माइक्रो ग्रैविटी में रखकर यह देखा गया कि उनकी प्रतिरक्षा क्षमता और संरचना पर क्या असर होता है. संकेतो को करता है रियल टाइम को रिकॅार्डमिशन के दौरान शुभांशु ने एक ऑटोमेटेड मेडिकल स्कैनिंग सिस्टम का प्रयोग किया जो धड़कन, तापमान, और रक्तचाप जैसे संकेतों को रियल टाइममें रिकॉर्ड करता था. यह अंतरिक्ष में डॉक्टर की अनुपस्थिति में स्वास्थ्य प्रबंधन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. स्पेस हाइड्रोपोनिक्स पर आधारितइस प्रयोग में शुभांशु ने आईएसएस के ‘वेजी लैब’ में पौधों की वृद्धि और प्रकाश संश्लेषण की दर की निगरानी की। इसका लक्ष्य भविष्य में स्पेसफार्मिंग और मंगल कृषि की व्यावहारिकता को परखना था. शुभांशु के साथ अमेरिका के पेगी वेटसन ने हड्डियों के घनत्व पर गुरुत्वहीनता के प्रभाव परविश्लेषण किया. पोलैंड के स्लावोस उजनास्की ने अंतरिक्ष विकिरण से कोशिका क्षति और डीएनए रिपेयर मॉड्यूल पर शोध किया। हंगरी के तिबोरकपू ने हार्ट रेट वेरिएबिलिटी व ऑक्सीजन के पैटर्न का अध्ययन किया. जो हृदय व रक्तवाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ. अंतरिक्ष में ईईजी कैप और ब्रेनवेव रिकॉर्डिंग सिस्टम का उपयोग कर शुभांशु और उनके साथियों ने मस्तिष्क की तरंगों और नींद चक्र पर पड़ने वालेप्रभावों का विश्लेषण किया. यह अध्ययन दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य मॉडल के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है.
राज ठाकरे ने मनसे कार्यकर्ताओं से बोले, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के साथ गठबंधन का फैसला सही होगा सही समय पर “राजनीतिक समीकरण शिवसेना-मनसे एक साथ?

महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की गठबंधन की अटकलें तेज है. ऐसे में मनसे के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मंगलवारको पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वह शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के साथ गठबंधन पर फैसला उचित समय पर लेंगे. बता दें कि राज ठाकरे नेये बात नासिक जिले के इगतपुरी में 14 से 16 जुलाई तक चल रही मनसे पार्टी की तीन दिवसीय सम्मेलन में कही। पार्टी के इस बैठक में भविष्य कीरणनीति, आगामी स्थानीय निकाय चुनाव और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हो रही है. बता दें कि हाल ही में पांच जुलाई को राज ठाकरे औरउनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे एक राजनीतिक मंच पर साथ नजर आए थे. यह मौका था भाजपा सरकार द्वारा स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी भाषाअनिवार्य करने के आदेश को वापस लेने का जश्न मनाने का. इस मंच साझा करने के बाद से अटकलें तेज हो गई हैं कि दोनों दलों के बीच पुरानीदूरियां अब खत्म हो सकती हैं. शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भी गठबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि राज ठाकरे औरउद्धव ठाकरे दोनों के बयान सकारात्मक हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं को भी गठबंधन की उम्मीद है. राजनीतिक हल्कों में चर्चा गर्मउद्धव गुट के साथ गठबंधन को लेकर राज ठाकरे के रुख पर मनसे पार्टी के पदाधिकारी ने जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं सेकहा कि शिवसेना (यूबीटी) के साथ गठबंधन को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. वे सही समय पर इस पर फैसला लेंगे।गौरतलब हैकि मुंबई नगर निगम चुनावों से पहले शिवसेना (यूबीटी) और एमएनएस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा गर्म है. हालांकि राज ठाकरे ने अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन उनके हाल के कदम और मुलाकातें इस ओर इशारा कर रही हैं कि भविष्य मेंमहाराष्ट्र की राजनीति में कुछ नया देखने को मिल सकता है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने मंगलवार को पार्टी कार्यकर्ताओं सेकहा कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के साथ संभावित गठबंधन पर वह सही समय पर फैसला लेंगे. यह बयान पार्टी के नासिक जिले के इगतपुरी मेंचल रहे तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान आया. हालांकि उद्धव ठाकरे गठबंधन के पक्ष में संकेत दे चुके हैं. लेकिन राज ठाकरे ने अभी तक स्पष्ट रुखनहीं अपनाया है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब पिछले कुछ दिनों में राज ठाकरे और उनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे कई राजनीतिक मंचों पर एकसाथ नजर आए हैं. चुनावी रणनीति कर सकती है तैयारखासतौर पर 5 जुलाई को दोनों नेताओं की साझा उपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में इस संभावना को और बल दिया है कि दोनों पार्टियां पुरानी दूरियांभुलाकर मिलकर चुनावी रणनीति तैयार कर सकती हैं. 14 से 16 जुलाई तक चल रहे मनसे के इस तीन दिवसीय सम्मेलन में आगामी स्थानीय निकायचुनाव की रणनीति, संगठन को मजबूत करने के कदम और भविष्य की राजनीतिक दिशा पर विस्तार से चर्चा की गई. राज ठाकरे ने कार्यकर्ताओं कोस्पष्ट किया कि अभी गठबंधन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. लेकिन वे पूरी गंभीरता से इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं और सही समय परइसका फैसला पार्टी के सामने रखेंगे. राज ठाकरे के इस बयान से साफ है कि मनसे शिवसेना (उद्धव गुट) के साथ गठबंधन को पूरी गंभीरता से देख रहीहै लेकिन फिलहाल अंतिम निर्णय वक्त आने पर ही लिया जाएगा. आगामी महीनों में महाराष्ट्र की राजनीतिक पटल पर इस गठबंधन से जुड़े नएघटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं. जो राज्य के चुनावी समीकरणों को बदल सकते हैं.
कांग्रेस मानसून सत्र में करेगी बड़ा हमला, पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर, एसआईआर और जम्मूकश्मीर का मुद्दा रहेगा प्रमुख एजेंडा

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने मंगलवार की सुबह की बैठक में तय किया कि वे आगामी मानसून सत्र (21 जुलाई से शुरू) में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चाकरेंगे. इनमें पहलगाम आतंकी हमला, बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, देश की सुरक्षा और अहमदाबाद में एअर इंडिया का विमान हादसा शामिल हैं. कांग्रेस संसदीय दल की बैठक सोनिया गांधी की अध्यक्षता में 10 जनपथ निवास पर हुई। इसमें पार्टी के नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रमोदतिवारी, जयराम रमेश, के सुरेश और मणिकम टैगोर जैसे नेता शामिल हुए. बैठक के बाद प्रमोद तिवारी ने बताया कि पहलगाम हमले में 26 लोग मारेगए और पार्टी प्रधानमंत्री से इस मामले पर जवाब मांगेगी. उन्होंने कहा कि हमला सुरक्षा की कमी और त्वरित प्रतिक्रिया टीम न होने की वजह से संभवहुआ. सरकार से जवाब मांगने का लिया फैसलाकांग्रेस यह सवाल उठाएगी कि जब हमारी सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया (जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कहा गया), तो उसीसमय अचानक भारत और पाकिस्तान के संघर्षविराम क्यों हुआ? बिहार एसआईआर को प्रमोद तिवारी ने लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और कहा किइस पर चर्चा जरूर होगी. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का मुद्दा भी उठाएंगे. महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा, बेरोज़गारी, महंगाई और अमेरिकी टैरिफ जैसे मुद्दे भी सत्र में शामिल होंगे. अमेरिका में जज यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग नोटिस पर भी कांग्रेसअन्य पार्टियों से बात करके सत्र में स्थिति स्पष्ट करेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि गैर‑भाजपा शासित राज्यों के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं हो रहा हैऔर यह मुद्दा भी संसद में उठाया जाएगा. संसद का मानसून सत्र इस बार 21 जुलाई से शुरू होकर 21 अगस्त तक चलेगा। कांग्रेस एसआईआर कोअसांविधानिक बताकर इसे रद्द कराने की मांग करेगी और पहलगाम हमला तथा ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में बहस छेड़ेगी. कांग्रेस ने संसद के मानसूनसत्र में पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अचानक हुए संघर्षविराम और बिहार में जारी एसआईआर जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाबमांगने का फैसला लिया है. आर्थिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर तीखी बहसपार्टी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, महिलाओं पर अत्याचार, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और अमेरिकी टैरिफ जैसे मामलों को भीमानसून सत्र में उठाएगी. बैठक में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, मणिकम टैगोर और के. सुरेश जैसे वरिष्ठ नेताशामिल हुए. कांग्रेस संसदीय दल की इस अहम बैठक में यह फैसला हुआ कि पार्टी संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतंत्र, सामाजिक न्यायऔर आर्थिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर तीखी बहस छेड़ेगी. प्रमोद तिवारी ने बताया कि पार्टी इस हमले में मारे गए 26 नागरिकों की मौत के लिए सुरक्षामें चूक और त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT) की कमी को जिम्मेदार ठहराएगी। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि जब भारत ने पाकिस्तान पर ‘ऑपरेशनसिंदूर’ के तहत जवाबी कार्रवाई की उसी समय संघर्षविराम क्यों और कैसे हुआ? कांग्रेस ने इसे संविधान विरोधी और लोकतंत्र के लिए खतरनाककरार दिया है. पार्टी की मांग है कि इस प्रक्रिया को अविलंब रद्द किया जाए.