‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने विज्ञान और अकादमिक उपलब्धियों पर जताया गौरव, बोले देश के लिए गर्व की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जुलाई अंक में भारत की वैज्ञानिक और अकादमिक उपलब्धियों पर प्रसन्नताजताई. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।प्रधानमंत्री ने हाल ही में हुए इंटरनेशनल केमिस्ट्रीओलंपियाड में भारतीय छात्रों की शानदार सफलता का जिक्र करते हुए देवेश पंकज, संदीप कुची, देबदत्त प्रियदर्शी और उज्ज्वल केसरी को बधाई दी. जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया. पीएम मोदी ने बताया कि भारत गणित के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थितिदर्ज करा रहा है। इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड में भारतीय छात्रों ने अब तक तीन गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं, जोदेश की अकादमिक प्रतिभा का प्रमाण है. आयोजित होगा सबसे बड़ा आयोजनउन्होंने आगे बताया कि अगले महीने मुंबई में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स ओलंपियाड का आयोजन होने जा रहा है. जो अब तक कासबसे बड़ा आयोजन होगा. पीएम मोदी ने गर्व के साथ कहा, “भारत अब ओलंपिक ही नहीं, ओलंपियाड में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. भारत ने नकेवल विज्ञान बल्कि गणित की दुनिया में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित इंटरनेशनल मैथमेटिकलओलंपियाड (IMO) में भारतीय छात्रों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 स्वर्ण, 2 रजत और 1 कांस्य पदक अपने नाम किए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने‘मन की बात’ में INSPIRE-MANAK अभियान का जिक्र करते हुए बताया कि यह पहल स्कूली बच्चों में नवाचार (Innovation) को प्रोत्साहितकरने के लिए शुरू की गई है. बच्चों का किया जाता है चयनइस योजना के तहत हर स्कूल से पांच बच्चों का चयन किया जाता है जो अपने नए और अनोखे आइडिया पेश करते हैं। अब तक लाखों बच्चे इसअभियान से जुड़ चुके हैं और चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसमें भाग लेने वाले बच्चों की संख्या दोगुनी हो गई है. चंद्रयान‑3 की सफलता के बादइस पहल में शामिल बच्चों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है. इससे युवा वर्ग में विज्ञान और अनुसंधान के प्रति रुचि और उत्साह बढ़ा है. कार्यक्रम मेंपीएम मोदी ने यह उल्लेख किया कि भारत ने 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज पदक प्राप्त किया. इससे यह सिद्ध होता है कि भारत गणित की दुनियामें भी अपनी उन्नत उपस्थिति दर्ज करा रहा है. सुविज्ञ छात्रों — देवेय पंकज भैया (जलगाँव) और संदीप कुची (हैदराबाद) — को गोल्ड, जबकि देबदत्तप्रियदर्शी (भुवनेश्वर) और उज्ज्वल केसरी (नई दिल्ली) को सिल्वर मेडल प्रदान किया गया.
स्टालिन की केंद्र से मांग ₹2,151 करोड़ SSA फंड बिना शर्त तुरंत जारी करें, हम अपनी दो-भाषा नीति पर अडिग

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा योजना (एसएसए) के तहत 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जल्द जारीकरने की मांग की है. यह मांग मुख्यमंत्री की ओर से वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपकर की. मामलेमें तमिलनाडु सरकार ने साफ किया है कि वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तीन-भाषा फार्मूले को स्वीकार नहीं करेगी और तमिल तथाअंग्रेजी की अपनी दो-भाषा नीति को ही जारी रखेगी. ज्ञापन में कहा गया कि केंद्र द्वारा जरूरी फंड जारी न करने से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होरहा है. ज्ञापन सौंपा पीएम कोज्ञापन में मांग की गई कि केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 2,151.59 करोड़ रुपये की राशि और 2025-26 की पहली किस्त बिना पीएमपीएम श्री योजना पर हस्ताक्षर की शर्त के जल्द मंजूर करे। बता दें कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से अस्पताल में भर्तीहैं. उनकी स्वीकृति से यह ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपा गया. पीएम मोदी दो दिन की यात्रा पर तमिलनाडु में हैं.इसके साथ ही तमिलनाडु सरकार की ओर से केंद्र को दिए गए ज्ञापन में कुछ अहम अन्य मांगों पर भी जोर दिया गया है. इसमें कोयंबटूर और मदुरै मेट्रोरेल परियोजनाओं को 50:50 हिस्सेदारी पर मंजूरी देने, चेन्नई में उपनगरीय रेल सेवाओं में बढ़ोतरी. नावों के छुड़वाने की अपीलतमिलनाडु के मछुआरों की गिरफ्तारी के मामलों का स्थायी समाधान के साथ-साथ श्रीलंका की हिरासत में मौजूद मछुआरों और उनकी नावों कोछुड़वाने की अपील की गई है. यह ज्ञापन तमिलनाडु सरकार की राज्य के हितों को लेकर गंभीरता और केंद्र से सहयोग की अपेक्षा को दर्शाता है. तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने केंद्र से समग्र शिक्षा योजना के तहत 2151 करोड़ रुपये बिना शर्त जल्द जारी करने को कहा राज्य ने राष्ट्रीयशिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तीन-भाषा फार्मूले को ठुकराकर तमिल-अंग्रेजी दो-भाषा नीति पर जोर दिया। इसके लिए एक ज्ञापन राज्य सरकार नेपीएम मोदी को सौंपा हैं।केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रद्युम्न का कहना है कि SSA फंड तभी जारी होंगे जब राज्य NEP और PM‑SHRI स्कूलपरियोजनाओं को स्वीकार करे—जो तमिलनाडु ने ठुकरा दिया है.
13 साल बाद मातोश्री पहुंचे राज ठाकरे, उद्धव से मुलाकात ने बढ़ाई गठबंधन की संभावनाएं

महाराष्ट्र की राजनीति में ठाकरे बंधुओं की नजदीकी लगातार बढ़ रही है. इसकी बानगी रविवार को एक बार फिर देखने को मिली जब मनसे प्रमुख राजठाकरे, उद्धव ठाकरे को जन्मदिन की बधाई देने मातोश्री पहुंचे गौरतलब है कि राज ठाकरे करीब 13 साल बाद मातोश्री पहुंचे. शिवसेना यूबीटी प्रमुखउद्धव ठाकरे और पार्टी सांसद संजय राउत ने मातोश्री के द्वार पर आकर राज ठाकरे का स्वागत किया. राज ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को जन्मदिन की बधाईदेते हुए फूलों का गुलदस्ता भी भेंट किया. इससे पहले राज ठाकरे साल 2012 में मातोश्री पहुंचे थे. उस वक्त उद्धव ठाकरे की एंजियोप्लास्टी हुई थी. तब राज ठाकरे ने मातोश्री पहुंचकर शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे का हालचाल जाना था.राज ठाकरे ने साल 2005 में शिवसेना छोड़ी थी और शिवसेना छोड़ने के बाद से आज से पहले तक राज ठाकरे सिर्फ एक ही बार मातोश्री गए थे. यहीवजह है कि जब रविवार को राज ठाकरे मातोश्री पहुंचे तो महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में इसकी खूब चर्चा हो रही है. दोनों भाइयों की इसमुलाकात को रिश्तों में जमी बर्फ के तेजी से पिघलने के तौर पर देखा जा रहा है. दिया सकारात्मक संदेशमहाराष्ट्र में मराठी मानुष और तीन भाषा नीति के मुद्दे पर हुई राजनीति ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के साथ आने की जमीन तैयार की. एक इंटरव्यू मेंराज ठाकरे ने मराठी मानुष के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे के साथ आने के संकेत दिए. जिस पर उद्धव ठाकरे ने भी सकारात्मक जवाब दिया. हालांकि इसकेबाद दोनों पार्टियों की तरफ से हुई बयानबाजी से थोड़ी संशय की स्थिति बनी, लेकिन जैसे ही सरकार ने तीन भाषा नीति के अपने स्टैंड से पीछे हटनेका एलान किया तो शिवसेना यूबीटी और मनसे ने इसे अपनी जीत के तौर पर पेश किया. इसके बाद मनसे और शिवसेना यूबीटी की संयुक्त रैली काएलान किया गया. 5 जुलाई को मुंबई में हुई इस रैली में 20 साल बाद दोनों भाई राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक मंच पर दिखाई दिए थे। संयुक्तरैली में साथ आने के बाद जब ऐसा लग रहा था कि दोनों भाई आगामी निकाय चुनाव में गठबंधन कर सकते हैं. तो तभी हाल ही में उद्धव ठाकरे ने एकबयान से चौंका दिया. दरअसल उन्होंने शिवसेना यूबीटी से गठबंधन के सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की. हालात देखकर किया जाएगा फैसलाउन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में गठबंधन का फैसला हालात देखकर किया जाएगा. अब राज ठाकरे के मातोश्री पहुंचने से दोनों पार्टियों के उनकार्यकर्ताओं और समर्थकों को काफी राहत पहुंची होगी. जो मनसे और शिवसेना के बीच गठबंधन चाहते हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार कोशिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे को उनके जन्मदिन पर बधाई दी और महाराष्ट्र की जनता के लिए उनके साथ मिलकर लड़ने की उम्मीद जताई।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा पोस्ट में लिखा कि ‘शिवसेना अध्यक्ष और इंडी गठबंधन के सहयोगी उद्धव ठाकरे जी को उनकेजन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, ‘आप स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों और हम महाराष्ट्र की जनता के हितोंऔर अधिकारों के लिए मिलकर लड़ेंगे.’ रविवार को राज ठाकरे मातोश्री पहुंचे तो महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में इसकी खूब चर्चा शुरू हो गई. दोनों भाइयों की इस मुलाकात को रिश्तों में जमी बर्फ के तेजी से पिघलने और मनसे और शिवसेना यूबीटी के संभावित गठबंधन से जोड़कर देखा जारहा है.
मायावती का तीखा वार कांग्रेस-एनडीए दोनों ओबीसी समाज के लिए भरोसेमंद नहीं कांग्रेस और “बीजेपी दोनों पर जमकर बरसीं”

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस ओबीसी समाज की विश्वासपात्र पार्टी नहीं है. कांग्रेस केदिल में कुछ है जुबान पर कुछ है उन्होंने कहा कि एनडीए का भी ओबीसी के प्रति यही हाल है. मायावती के बयान को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उसबयान के संदर्भ में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता में रहते हुए जाति जनगणना न करवाना कांग्रेस की गलती थी. आगे उन्होंने ये भीकहा था कि जो काम ओबीसी के लिए अब तक नहीं कर पाया उसे दोगुनी स्पीड से करूंगा. मायावती ने बयान दिया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्षद्वारा यह स्वीकार करना कि देश के विशाल आबादी वाले अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) समाज के लोगों की राजनीतिक व आर्थिक आशा, आकांक्षा वआरक्षण सहित उन्हें उनका संवैधानिक हक़ दिलाने के मामलों में कांग्रेस पार्टी खरी व विश्वासपात्र नहीं रही है कोई नई बात नहीं है बल्कि यह दिल मेंकुछ व जुबान पर कुछ और जैसी स्वार्थ की राजनीति ज्यादा लगती है. रवैया को कौन है भुला सकतावास्तव में उनका यह बयान उसी तरह से जगजाहिर है जैसाकि देश के करोड़ों शोषित, वंचित व उपेक्षित एससी/एसटी समाज के प्रति कांग्रेस पार्टी काऐसा ही दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण रवैया लगातार रहा है और जिस कारण ही इन वर्गों के लोगों को फिर अन्ततः अपने आत्मसम्मान व स्वाभिमान तथा अपनेपैरों पर खड़े होने की ललक के कारण अलग से अपनी पार्टी बहुजन समाज पार्टी बनानी पड़ी है.कुल मिलाकर इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी यूपी सहित देश के प्रमुख राज्यों की सत्ता से लगातार बाहर है और अब सत्ता गंवाने के बाद इन्हें इनवर्गों की याद आने लगी है जिसे इनकी नीयत व नीति में हमेशा खोट रहने की वजह से घड़ियाली आंसू नहीं तो और क्या कहा जाएगा, जबकि वर्तमानहालात में बीजेपी के एनडीए का भी इन वर्गों के प्रति दोहरे चरित्र वाला यही चाल-ढाल लगता है.उन्होंने आगे कहा कि वैसे भी एससी/एसटी वर्गों कोआरक्षण का सही से लाभ व संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को भारतरत्न की उपाधि से सम्मानित नहीं करने तथा देशकी आजादी के बाद लगभग 40 वर्षों तक ओबीसी वर्गों को आरक्षण की सुविधा नहीं देने तथा सरकारी नौकरियों में इनके पदों को नहीं भरकर उनकाभारी बैकलॉग रखने आदि के जातिवादी रवैयों को भला कौन भुला सकता है. वर्गों की रही सच्ची हितैशीजो कि इनका यह अनुचित जातिवादी रवैया अभी भी जारी है इतना ही नहीं बल्कि इन सभी जातिवादी पार्टियों ने आपस में मिलकर एससी, एसटी वओबीसी आरक्षण को किसी ना किसी बहाने से एक प्रकार से निष्क्रिय एवं निष्प्रभावी ही बना दिया है.इस प्रकार दलितों, आदिवासियों व अन्य पिछड़ोंके बहुजन समाज को सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक तौर पर गुलाम व लाचार बनाए रखने के मामलों में सभी जातिवादी पार्टियां हमेशा से एक हीथैली के चट्टे-बट्टे रहे हैं. जबकि अम्बेडकरवादी पार्टी बीएसपी सदा ही इन वर्गों की सच्ची हितैषी रही है और यूपी में चार बार बसपा के नेतृत्व में रहीसरकार में सर्वसमाज के गरीबों, मजलूमों के साथ-साथ बहुजन समाज के सभी लोगों के जानमाल व मजहब की सुरक्षा व सम्मान तथा इनके हित एवंकल्याण की भी पूरी गारंटी रही है। अर्थात् देश के बहुजनों का हित केवल बीएसपी की आयरन गारंटी में ही निहित है. अतः खासकर दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी समाज) के लोग खासकर कांग्रेस, सपा आदि इन विरोधी पार्टियों के किसी भी बहकावे में नहीं आयें यहीउनकी सुख, शान्ति व समृद्धि हेतु बेहतर है.
गांव बनेंगे स्मार्ट, विकास दिखे ज़मीन पर डिप्टी सीएम केशव मौर्य की अधिकारियों को दी चेतावनी

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गांवों के समग्र व संतुलित विकास के लिए अधिकारियों को कागजी घोड़ा दौड़ाने की आदत से बाज आने कीचेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि विकास कार्य धरातल पर दिखने चाहिए। गांवों व ग्रामीणों को हर हाल में सशक्त, स्वावलंबी व आत्मनिर्भर बनाना है. स्मार्ट सिटी की तरह गांवों को भी स्मार्ट बनाने पर जोर देते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि इससे संबंधित कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतीजाए. डिप्टी सीएम शनिवार को राजधानी स्थित योजना भवन में प्रदेश सभी मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के साथ ग्राम्य विकास विभाग केयोजनाओं की समीक्षा कर रहे थे. उन्होंने विभाग के अधिकारियों को निष्क्रिय स्वंय सहायता समूहों को सक्रिय करने प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) के क्रियान्वयन को और अधिक पारदर्शी व निष्पक्ष बनाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने पीएमजीएसवाई की एफडीआर तकनीक से बनाई जा रहीसड़कों की नियमित रूप से निगरानी करने और गांवो के युवा बेरोजगारों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से जोड़ने पर भी फोकस करनेको कहा है. पंजीकृत कराने के भी दिए निर्देशकेशव ने सीडीओ गांवों के विकास कार्यों की जमीनी हकीकत को परखने के साथ ही मनरेगा से कराए गये पुराने कार्यों का ठीक से मरम्मत कराने के भीनिर्देश दिए हैं. साथ ही पीएम आवास योजना के लाभार्थियों को अनुमन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पोर्टल शुरू करने और ग्रामीणों कीसमस्याओं का त्वरित निस्तारण के लिए ग्राम चौपालों के आयोजन में ढिलाई न बरतने को कहा है.डिप्टी सीएम ने ग्रामीणों को खेती के साथ उद्यमों से जोड़ने, गांवों को सड़कों से जोड़ने व गलियां व नालियों के कार्य मनरेगा से कराने और मनरेगा में100 दिन कार्य करने वाले श्रमिकों को बीओसीडब्ल्यू बोर्ड में पंजीकृत कराने के भी निर्देश दिए हैं. पांचवे संस्करण का किया विमोचनबैठक में ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम के अलावा अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य संस्करण विभाग बीएल मीणा, सचिव एवंआयुक्त ग्राम्य विकास विभाग गौरी शंकर प्रियदर्शी, यूपीआरआरडीए के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखंड प्रताप सिंह समेत अन्य अधिकारी भीमौजूद रहे. इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलम) में बेहतर कार्य करने वाले तीन मुख्य मुख्य विकासअधिकारियों (सीडीओ) को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इनमें वाराणसी के सीडीओ प्रथम, अंबेडकर नगर के सीडीओ द्वितीय और बिजनौर सेसीडीओ तीसरे स्थान पर रहे. वहीं, मनरेगा के तहत खेल मैदान बनाने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न जिलों के 11 खंड विकास अधिकारियोंबीडीओ को भी सम्मानित किया गया. इसके अलावा डिप्टी सीएम ने एनआरएलएम डैशबोर्ड का शुभारंभ किया और ग्राम्य विकास विभाग कीत्रैमासिक पत्रिका के पांचवें संस्करण का विमोचन किया.