Skip to main content

NEWS अब तक

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर नेशनल सिटिजन पार्टी का हमला ‘लोकतंत्र की राह धीमी, लेकिन जरूरी सुधार अभी बाकी’

बांग्लादेश की नई राजनीतिक पार्टी ने अंतरिम सरकार पर हमला बोला है नेशनल सिटिजन पार्टी की संयुक्त संयोजक ताजनुवा जबीन ने कहा किमोहम्मद यूनुस की सरकार पिछले एक साल में कानून व्यवस्था कायम करने में नाकाम रही है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल कोलेकर भी बात की साथ ही भारत के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए कहा. नेशनल सिटिजन पार्टी की संयुक्त संयोजक ताजनुवा जबीन ने कहा किपिछले एक साल में सरकार की एक नाकामी यह है कि वे कानून प्रवर्तन ढांचे को फिर से स्थापित करने के लिए कानूनी बल को नियंत्रित या स्थापितनहीं कर पाए. जुलाई के विद्रोह के दौरान पुलिस, विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने ही आम लोगों पर, छात्रों पर, हत्याओं को लेकर सामूहिकनरसंहार में हिस्सा लिया था इसलिए अंतरिम सरकार की प्राथमिकता पुलिस, आरएबी, डीबी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सभी बलों को फिर से स्थापितकरना होना चाहिए. वे ऐसा नहीं कर पाए. मैं कह सकती हूं कि यह इस सरकार की दुर्भाग्यपूर्ण नाकामियों में से एक है. फर्जी मुकदमे फर्जी आरोपइस भीड़तंत्र में आपने जो भी कहा वही हुआ एक ही मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं. ये मुकदमे फर्जी हैं फर्जी मुकदमे और फर्जीआरोप. इसलिए ये सही बात नहीं है. उन्होंने कहा कि जुलाई विद्रोह को एक साल हो गया है. हमें निरंकुश फासीवादी शेख हसीना से छुटकारा मिलगया है लगभग 15 साल तक निरंकुशता कायम रही. इसलिए सारी कानून प्रवर्तन एजेंसियां, नौकरशाही, पूरा प्रशासन फासीवादी शासन के अधीनथा. हम रातोंरात निरंकुशता से लोकतंत्र में बदलाव की उम्मीद नहीं कर सकते. लेकिन एक साल बाद हम हर चीज पर बात कर सकते हैं. हम अपनीअंतरिम सरकार से उनके द्वारा उठाए जा रहे कदमों और लोकतांत्रिक परिवर्तन के पक्ष में जिन सुधारों पर हम चर्चा कर रहे हैं उनके बारे में पूछ सकते हैंहर कोई बातचीत, संवाद और सेमिनारों में भाग ले रहा है हर कोई देश के लिए खुला है. उन्होंने कहा कि पिछले 15 साल हमने कोई बातचीत नहीं कीसरकार के खिलाफ बात करने का कोई मौका नहीं मिला। हमारी आवाज दबाने के लिए एक कानून था. जबरन गायबियां, न्यायेतर हत्याएं और सभीनिजी बैंकों की लूट हुई. निरंकुशता का साम्राज्य था। लेकिन पिछले साल यह रुक गया और हमने फिर से शुरू कर दिया है. स्तंभ होने चाहिए स्वतंत्रलोकतंत्र में तब्दील होने की प्रक्रिया धीमी है इसलिए मुझे लगता है कि यह वैसी नहीं है जैसी हमने एक साल पहले उम्मीद की थी. लेकिन यह हो रहाहै. प्रगति हो रही है. नेशनल सिटिजन पार्टी की संयुक्त संयोजक ताजनुवा जबीन ने कहा कि हमें उम्मीद है क्योंकि चुनाव की तारीख अंतरिम सरकार केकार्यकाल की शुरुआत में ही घोषित कर दी गई थी. दिसंबर से जुलाई 2026 तक का समय है इसलिए यह संभवतः फरवरी या अप्रैल में होगा. अंतरिम सरकार के प्रेस सचिव, हमारे मुख्य सलाहकार, ने कल कहा कि चुनाव एक दिन के लिए भी स्थगित नहीं होंगे. राष्ट्रीय सहमति आयोग में सभीराजनीतिक दलों ने बातचीत में हिस्सा लिया। उन्होंने सभी सुधार प्रस्तावों पर चर्चा की, बातचीत की और वे एक आम सहमति पर पहुंचे। हमें जुलाईचार्टर मिलने की उम्मीद है. जुलाई के बाद हमें राष्ट्रीय चुनाव की तारीख तय होने की उम्मीद है. हम मूलभूत सुधार चाहते हैं. सांविधानिक संस्था जोकार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो. कार्यपालिका, न्यायपालिका और संसद ये तीनों स्तंभ स्वतंत्र होने चाहिए.

राहुल गांधी का चुनावी सिस्टम पर बड़ा हमला: ‘2014 से थी गड़बड़ी , अब हमारे पास है सबूत

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने देश के चुनावों में होने वाली कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर लगातार आक्रामक हैं. उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित वार्षिक लीगल कॉन्क्लेव- 2025 में कहा, ‘मैं आज-कल देश की चुनाव प्रणाली के बारे में बोल रहा हूं।मुझे हमेशा से संदेह था कि 2014 से ही कुछ गड़बड़ है. मुझे गुजरात विधानसभा चुनावों में पहले से ही संदेह था. उन्होंने चुनाव प्रणाली की आलोचनाके अलावा प्रधानमंत्री मोदी को 2024 के चुनाव में मिले बहुमत पर गंभीर सवाल भी खड़े किए. राहुल गांधी ने भाजपा को बीते लगभग 12 साल केदौरान मिले प्रचंड बहुमत की तरफ संकेत करते हुए कहा, लगातार कई चुनावों में इस तरह की बड़ी जीत हासिल करने की क्षमता हैरान करने वाली थी. कांग्रेस पार्टी को राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात में एक भी सीट नहीं मिलती, यह और आश्चर्यजनक था. बकौल राहुल गांधी, ‘जब भी हम चुनाव केबारे में बोलते थे, लोग कहते थे, सबूत कहां है? फिर, महाराष्ट्र में कुछ हुआ.1.5 लाख मतदाता फर्जीलोकसभा सीटों पर हम चुनाव जीत गए केवल चार महीने बाद, हम न केवल हारे, बल्कि हमारा सफाया हो गया. तीन ऐसे दल अचानक गायब हो गए, जिनका जनाधार मजबूत है। इसके बाद हमने चुनावी कदाचार पर और गंभीरता से मंथन शुरू किया. हमें महाराष्ट्र में पता चला कि लोकसभा औरविधानसभा चुनाव के बीच एक करोड़ नए मतदाता सूची में शामिल हुए. इनमें से अधिकांश वोट भाजपा को गए. इसलिए अब मैं बिना किसी संदेह केकहता हूं कि हमारे पास सबूत हैं. राहुल ने दावा किया, हमारे पास ऐसे सबूत हैं जो पूरे देश को दिखा देंगे कि चुनाव आयोग जैसी संस्था मौजूद ही नहींहै। यह गायब हो चुकी है. इस सबूत को खोजने में हमें 6 महीने लगातार काम करना पड़ा। कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘आप बिना किसी संदेह के देखेंगे किकैसे एक लोकसभा चुनाव चुराया जाता है. 6.5 लाख मतदाता वोट करते हैं और उनमें से 1.5 लाख मतदाता फर्जी होते हैं. सरकार को लिया आड़े हाथोंराहुल गांधी केवल चुनाव आयोग पर हमले तक ही नहीं रुके उन्होंने संविधान से जुड़े मुद्दों पर भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने संविधान कीप्रति दिखाते हुए कहा ‘हम आने वाले कुछ दिनों में साबित कर देंगे कि कैसे लोकसभा चुनाव में धांधली हो सकती है और ऐसा हुआ भी है। उन्होंनेकहा, ‘सच्चाई यह है कि भारत में चुनाव प्रणाली पहले ही खत्म हो चुकी है. भारत के प्रधानमंत्री बहुत कम बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बने. अगर 15 सीटों पर धांधली नहीं हुई होती, तो वे आज भारत के प्रधानमंत्री नहीं होते. राहुल गांधी ने भारत और फ्रांस के बीच हुई डिफेंस डील और लड़ाकूविमानों के सौदे का उल्लेख करते हुए कहा ‘हमारे पास राफेल सौदे पर एक दस्तावेज था. दस्तावेज में साफ-साफ लिखा था कि प्रधानमंत्री कार्यालयऔर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) ने राफेल सौदे में दखलअंदाजी की और राफेल सौदे को नुकसान पहुंचाया. ऐसा दस्तावेज दुनिया के किसी भीदेश की सरकार गिरा सकता था. लेकिन यहां कुछ नहीं हुआ.’ कांग्रेस सांसद ने सवाल किया, ‘क्या आपको पता है कि वह दस्तावेज कहां गया?’ उन्होंने लंबे समय तक सुर्खियों में रहे एक अन्य ज्वलंत मुद्दे- किसान कानून का उल्लेख करते हुए कहा, ‘मुझे याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफलड़ रहा था, तो अरुण जेटली जी को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था. बकौल राहुल गांधी, अरुण जेटली ने उनसे कहा था, ‘अगर आप सरकारका विरोध करते रहे और कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते रहे, तो हमें आपके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी. मैंने उनकी तरफ देखा और कहा, मुझे नहींलगता कि आपको इस बात की सही जानकारी है कि आप किससे बात कर रहे हैं.

‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर घमासान केरल सरकार ने बताया संघ एजेंडा, राज्य का अपमान

द केरल स्टोरी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिए जाने पर सियासी संग्राम तेज हो गया है केरल सरकार के मंत्री और नेता फिल्म को पुरस्कृत किए जाने सेखफा हैं. केरल के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री साजी चेरियन ने कहा कि फिल्म को पुरस्कार देना संघ परिवार के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है. इसफिल्म को शुक्रवार को 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी पुरस्कार मिला. राज्य मंत्री साजी चेरियन ने कहाकि सुदीप्तो सेन की यह फिल्म लोगों को बांटती है समाज में नफरत फैलाती है और पूरे राज्य का अपमान करती है. उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्म कोबिना किसी मानदंड पर खरा उतरे राष्ट्रीय पुरस्कार दे दिया गया. यह गर्व की बात है कि हमारे कलाकारों उर्वशी और विजयराघवन को पुरस्कार मिले हैं।लेकिन इसके साथ ही फिल्म द केरल स्टोरी को मान्यता कैसे दी जा सकती है? इस तरह से पुरस्कार कैसे दिया जा सकता है? मुझे समझ नहीं आ रहाकि किस मापदंड के आधार पर फिल्म को इस सम्मान के लिए चुना गया. केरल का किया गया अपमानचेरियन ने आरोप लगाया कि किसी फिल्म का मूल्य नहीं, बल्कि एक वर्ग विशेष की रुचि पुरस्कार का आधार होती है. संघ परिवार की ऐसी राजनीतिदेश के लोगों में भय पैदा कर रही है घृणा के माहौल को मजबूत करना देश पर शासन करने वाले राजनीतिक दल की जरूरत है इसे हासिल करने केलिए वे हर चीज में हस्तक्षेप करते हैं यहां तक कि छोटी-छोटी चीजों में भी यह पुरस्कार इसी के तहत दिया गया. यह गलत बात है. द केरल स्टोरी कोपुरस्कार दिए जाने पर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा था कि एक ऐसी फिल्म को सम्मानित करना जो केरलकी छवि को धूमिल करने और सांप्रदायिक नफरत फैलाने के इरादे से झूठी जानकारी पर आधारित है, यह भारतीय सिनेमा की भाईचारे और राष्ट्रीयएकता की परंपरा का अपमान है. इस तरह की फिल्मों को राष्ट्रीय पुरस्कार देकर न सिर्फ केरल का अपमान किया गया है. दिया जा रहा राष्ट्रीय फिल्म पुरुस्कारबल्कि यह संघ परिवार के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश है विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारराष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का इस्तेमाल अपने घृणा अभियान के तहत कर रही है. बता दें कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ का निर्देशन सुदीप्तो सेन ने किया हैयह फिल्म 5 मई 2023 को रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई थी. हालांकि, फिल्म को लेकर विवाद भी खड़ा हुआ, क्योंकि इसमें यह दावा किया गया था कि केरल से 32,000 लड़कियों को धर्मांतरण के बाद आतंकी संगठन आईएसआईएस में भेजा गया. विपक्षीनेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने फिल्म पर झूठ फैलाने और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने का आरोप लगाया. इतना ही नहीं पश्चिम बंगालसरकार ने तो इस फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध भी लगाया था. अब इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया जा रहा है.

आम आदमी पार्टी के नेताओं को काम नहीं, सिर्फ़ बोलने की आदत है-भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर

सौरभ भारद्वाज झूठ फैलाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं, अपने कार्यकाल की विफलता को छुपा रहे हैं दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता श्री प्रवीण शंकरकपूर ने आम आदमी पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ‘आप’ नेता सौरभ भारद्वाज झूठ बोलकर और भ्रम फैलाकर जनता को गुमराहकर रहे हैं। अगर उन्होंने सरकार में रहते हुए उतनी मेहनत से काम किया होता, जितनी मेहनत आज वे झूठ बोलने में कर रहे हैं, तो जनता उन्हें नकारतीनहीं। झूठे बयान देने में लगे हैं ‘आप’ नेताप्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि आज सौरभ भारद्वाज सिर्फ़ इसलिए भाजपा सरकार की आलोचना कर रहे हैं, क्योंकि भाजपा ने दिल्ली में जलभराव कीसमस्या को गंभीरता से लिया है और उसका समाधान किया है। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार ने इस बार समय रहते पूरी तैयारी की औरजलनिकासी का जो मास्टर प्लान तैयार किया गया, उसी का नतीजा है कि इस बार बारिश के बावजूद दिल्ली में गंभीर जलभराव नहीं हुआ और किसीकी जान नहीं गई। 2015 से 2024 तक हर साल डूबती रही दिल्लीभाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आम आदमी पार्टी के शासनकाल में 2015 से 2024 के बीच हर मानसून में दिल्ली पानी में डूबी रहती थी। लोग परेशानरहते थे, सड़कें और गलियां झील बन जाती थीं। लेकिन तब ‘आप’ की सरकार कोई ठोस काम नहीं कर सकी। इसके उलट अब जब भाजपा सरकार नेईमानदारी से काम किया है, तो ‘आप’ के नेता सिर्फ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं। इस बार जलभराव से एक भी मौत नहीं–भाजपा की तैयारी का असरप्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि इस साल मानसून के पहले चरण में एक भी व्यक्ति की जलभराव के कारण मौत नहीं हुई। उन्होंने बताया कि जुलाई2024 में, जब सौरभ भारद्वाज दिल्ली सरकार में मंत्री थे, उस समय जलभराव की वजह से 30 लोगों की जान चली गई थी। यह दिखाता है कि जबकाम करने की बारी आई, तब ‘आप’ सरकार पूरी तरह असफल रही। भाजपा बोली–जनता सब समझ चुकी हैभाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अब दिल्ली की जनता सब जान चुकी है। उसे यह समझ आ गया है कि आम आदमी पार्टी के नेता सिर्फ़ मीडिया में दिखनेऔर झूठे वादे करने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जनता की भलाई के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रही है, जबकि ‘आप’ नेताकेवल राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप में लगे हुए हैं। काम से डर गए हैं सौरभ भारद्वाजप्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि सौरभ भारद्वाज भाजपा सरकार के काम से घबरा गए हैं। क्योंकि जब जनता को जमीन पर बदलाव दिखता है, तो उन्हेंझूठी बातों से बहकाना आसान नहीं होता। इसलिए अब ‘आप’ के नेता अपने कार्यकाल की असफलता को छुपाने के लिए भाजपा सरकार पर झूठेआरोप लगा रहे हैं। भाजपा ने साफ कहा है कि आम आदमी पार्टी अब काम करने की बजाय केवल शोर मचाने की पार्टी बन चुकी है। जनता को भी अब समझ आ गया हैकि कौन उसके लिए सही मायनों में काम कर रहा है और कौन सिर्फ़ राजनीति कर रहा है। भाजपा ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी दिल्लीके हर क्षेत्र में ऐसा काम करेगी, जिससे जनता को राहत और भरोसा दोनों मिलेगा।

निजी स्कूलों की मनमानी पर सरकार का नया कानून, अभिभावकों की जेब पर डाका – सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार के स्कूल फीस नियंत्रण विधेयक को बताया शिक्षा माफिया को खुली छूट देने वाला कानून दिल्ली में शिक्षाव्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। ‘आप’ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा है कि भाजपासरकार जो नया स्कूल फीस नियंत्रण कानून ला रही है, वह सीधे-सीधे निजी स्कूलों और शिक्षा माफिया को लाभ पहुंचाने वाला है। इससे दिल्ली केलाखों अभिभावकों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। नया कानून शिक्षा माफिया के पक्ष मेंसौरभ भारद्वाज ने पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर बताया कि भाजपा सरकार का यह नया कानून आम लोगों की नहीं, बल्कि निजी स्कूल संचालकोंकी मदद के लिए बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की पहले से जताई गई आशंकाएं अब सच होती दिखाई दे रही हैं। ऑडिट की व्यवस्था खत्म, शिकायत करना हुआ मुश्किलउन्होंने बताया कि अब तक यदि किसी एक अभिभावक को भी लगता था कि स्कूल ने फीस गलत तरीके से बढ़ाई है, तो वह शिक्षा निदेशक के पासशिकायत कर सकता था। लेकिन नए कानून में यह प्रावधान खत्म कर दिया गया है। अब शिकायत करने के लिए कम से कम 15 प्रतिशतअभिभावकों की सहमति जरूरी होगी। यानी अगर किसी स्कूल में 3000 छात्र हैं तो 450 अभिभावकों को एक साथ शिकायत करनी होगी। उन्होंनेसवाल किया कि आखिर इतने अभिभावकों को कौन ढूंढेगा? फीस निर्धारण समिति भी स्कूल के पक्ष मेंनए कानून के अनुसार, फीस बढ़ाने का निर्णय एक 10 सदस्यीय समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें से 5 सदस्य स्कूल के होंगे और शेष 5 सदस्य भीलॉटरी के माध्यम से स्कूल द्वारा ही चुने जाएंगे। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ऐसे में यह समिति पूरी तरह स्कूल के कब्जे में होगी और फीस बढ़ाने कीखुली छूट देगी। भाजपा सरकार ने खोखले दावे किएसौरभ भारद्वाज ने कहा कि फरवरी में जब भाजपा की सरकार बनी, तभी से निजी स्कूलों ने मनमाने तरीके से फीस में भारी बढ़ोतरी शुरू कर दी थी। कुछस्कूलों ने तो 80-82 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी। इस पर जब अभिभावकों ने विरोध किया तो उन्हें परेशान किया गया, बच्चों को कक्षा में नहीं बैठनेदिया गया, और बाउंसर लगाकर डराया गया। सरकार का दोहरा रवैया उजागरउन्होंने कहा कि पहले भाजपा सरकार ने दावा किया था कि उन्होंने सभी निजी स्कूलों का ऑडिट कराया है और इसकी जानकारी सार्वजनिक कीजाएगी। लेकिन चार महीने बीत जाने के बाद भी वह ऑडिट सार्वजनिक नहीं किया गया है। अब जब कानून लाने की बात आई तो न तो जनता से रायली गई और न ही ऑडिट की कोई व्यवस्था नए कानून में रखी गई। पुराने प्रावधानों को हटाया गया1973 के कानून के अनुसार, जिन स्कूलों को सरकार से जमीन मिली थी, उन्हें फीस बढ़ाने से पहले शिक्षा निदेशक से अनुमति लेनी होती थी। लेकिननए कानून में यह प्रावधान भी खत्म कर दिया गया है। इसका साफ मतलब है कि अब वह स्कूल जिन्हें सरकार से एक रुपये में करोड़ों की जमीन मिली, वो भी मनमर्जी से फीस बढ़ा सकेंगे। सौरभ भारद्वाज ने पूछे कड़े सवालउन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद से सवाल करते हुए पूछा अप्रैल में जिन स्कूलों ने मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई, क्या यह कानून उन स्कूलों से बढ़ी हुई फीस वापस दिलवाएगा? इस कानून में प्रत्येक वर्ष के ऑडिट की व्यवस्था क्यों नहीं रखी गई?शिकायत करने के लिए 15 प्रतिशत अभिभावकों की बाध्यता क्यों रखी गई है? आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह कानून शिक्षा के अधिकार परकुठाराघात है और यह अभिभावकों की आवाज को दबाने की साजिश है। अब न तो कोई पारदर्शिता रहेगी और न ही किसी प्रकार की जवाबदेही।आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि इस कानून को वापस लिया जाए और सभी निजी स्कूलों का वार्षिक ऑडिट अनिवार्य रूप से कराया जाए।

देश के संविधान को बचाने की बड़ी पहल – कांग्रेस ने रखी संविधानिक चुनौतियाँ दृष्टिकोण और रास्ते पर खुली चर्चा

  देश के संविधान को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ी पहल की है। दिल्ली के विज्ञान भवन में आज एक खासकार्यक्रम हुआ, जिसका नाम था – संविधानिक चुनौतियाँ दृष्टिकोण और रास्ते। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने संविधान को बचाने औरउसकी मूल भावना को बनाए रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।यह आयोजन कांग्रेस के कानून, मानवाधिकार और सूचना का अधिकार विभाग द्वारा किया गया। कार्यक्रम में देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री, पूर्वमुख्यमंत्री, सांसद और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। क्यों हुआ यह कार्यक्रम?आज देश के संविधान के सामने कई चुनौतियाँ हैं। कुछ ताकतें ऐसी हैं जो संविधान को बदलना चाहती हैं, उसकी आत्मा को कमजोर करना चाहतीहैं। सरकार की नीतियाँ आम लोगों के अधिकारों को खत्म करने की तरफ बढ़ रही हैं। ऐसे समय में ज़रूरी है कि जनता को संविधान के बारे में जागरूककिया जाए और उसके अधिकारों की रक्षा की जाए। कांग्रेस का यह कार्यक्रम इसी मकसद से हुआ – ताकि लोग समझ सकें कि संविधान सिर्फ एककिताब नहीं, बल्कि देश की आत्मा है। नेताओं ने क्या कहा?राहुल गांधी ने कहा कि संविधान ही देश को जोड़ता है। यह हर गरीब, किसान, महिला, युवा और अल्पसंख्यक की ताकत है। लेकिन आज कुछ लोगइसे बदलने की साजिश कर रहे हैं। हमें सब मिलकर इसकी रक्षा करनी होगी। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर संविधान नहीं रहेगा, तो देश में लोकतंत्र नहीं रहेगा। कांग्रेस पार्टी हमेशा संविधान के साथ खड़ी है और आगे भीइसके लिए लड़ती रहेगी। अभिषेक सिंघवी ने कहा कि यह सिर्फ चर्चा नहीं, संविधान की रक्षा की दिशा में पहला कदम है। जब तक संविधान जिंदा है, देश में हर किसी कोबराबरी का अधिकार मिलेगा।यह कार्यक्रम केवल नेताओं का भाषण नहीं था, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत थी। कांग्रेस ने यह साफ कर दिया कि वह संविधान की रक्षा केलिए पूरे देश में आवाज़ उठाएगी। जनता से भी अपील की गई कि वे अपने अधिकारों को समझें और संविधान को कमजोर करने वाली ताकतों कोपहचानें।

वीरेन्द्र सचदेवा का बयान-रेखा गुप्ता सरकार गरीबों के सपनों को सच कर रही है दिल्ली में झुग्गीवासियों को बिना वैकल्पिक घर दिए नहीं हटाया जाएगा

उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री की अहम बैठक का फैसला1 अगस्त को दिल्ली के उपराज्यपाल श्री वी.के. सक्सेना और मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता की बैठक हुई, जिसके बाद एक बड़ा फैसला लिया गया।अब दिल्ली में किसी भी झुग्गी क्लस्टर को तब तक नहीं हटाया जाएगा, जब तक वहां के निवासियों को पहले वैकल्पिक मकान नहीं दिया जाता। भाजपा सरकार की ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ नीतिदिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा की सरकार झुग्गी में रहने वालों को “जहां झुग्गी, वहांमकान” के वादे के तहत पक्का घर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जो लोग खतरनाक जगहों जैसे नालों के किनारे या रेलवे ट्रैक के पास रहतेहैं, उनके लिए सुरक्षित और बेहतर मकान देना सरकार की जिम्मेदारी है। कांग्रेस और केजरीवाल सरकारों पर निशानावीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि,पिछले 27 सालों में कांग्रेस और केजरीवाल सरकारों ने गरीबों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया। ना उन्हें मकानदिया, ना ही कोई सुविधा। झूठे वादों से गरीबों को सपने दिखाए गए, लेकिन हकीकत में उन्हें नारकीय जीवन जीने पर मजबूर कर दिया गया। भाजपा सरकार गरीबों के लिए कर रही है ईमानदार कामसचदेवा ने कहा कि भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार गरीबों के सपनों को पूरा कर रही है। सरकार की सोच साफ है हर व्यक्ति को सम्मान और सुरक्षा केसाथ रहने का अधिकार है, और इसे देने के लिए भाजपा लगातार काम कर रही है। केजरीवाल सपने बेचते थे, हम सपने सच कर रहे हैंवीरेन्द्र सचदेवा ने तीखा हमला करते हुए कहा, रेखा गुप्ता की सरकार गरीबों के सपनों को साकार कर रही है, जबकि अरविंद केजरीवाल की सरकारसिर्फ सपने बेचकर वोट ठगती थी। उन्होंने कहा कि आज भाजपा की सरकार सिर्फ बात नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर बदलाव ला रही है। दिल्ली मेंझुग्गीवासियों के लिए यह फैसला एक बड़ी राहत है। भाजपा सरकार का यह कदम दिखाता है कि वह गरीबों की चिंता करती है और उन्हें बेहतर जीवनदेने के लिए पूरी ईमानदारी से काम कर रही है। अब झुग्गियों में रहने वाले लोगों को उम्मीद है कि उनका सपना एक पक्के घर का जल्द ही पूरा होगा।