अंकुश नारंग ने भाजपा पर साधा निशाना – सिविल लाइन जोन का दौरा कर सफाई अभियान की पोल खोली

दिल्ली नगर निगम (MCD) में आम आदमी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने सिविल लाइन जोन का दौरा किया और वहां की गंदगी देखकरभाजपा की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि मेयर राजा इकबाल सिंह अपने ही इलाके की सफाई नहीं कर पा रहे हैं, तो पूरीदिल्ली को कैसे साफ करेंगे? मेयर के इलाके में गंदगी का अंबारअंकुश नारंग तिमारपुर विधानसभा के वार्ड 11 पहुंचे। यह इलाका मेयर राजा इकबाल सिंह का अपना वार्ड है और यहीं मेयर का सरकारी निवास भीहै। यहां उन्होंने कूड़े के बड़े-बड़े ढेर, जगह-जगह जमा पानी और चारों तरफ फैली गंदगी देखी।नारंग ने कहा जब मेयर अपना घर और वार्ड साफ नहीं रख पा रहे हैं, तो उनसे उम्मीद कैसे की जाए कि वे पूरी दिल्ली को साफ कर देंगे? बीमारियों का बढ़ता खतराअंकुश नारंग ने कहा कि इस समय बरसात का मौसम है और पानी जमा होने से मच्छर तेजी से पनपते हैं। इससे डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसीबीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा यह समय तो सफाई पर ज्यादा ध्यान देने का है, लेकिन यहां तो हालात और खराब हो रहे हैं।सफाई अभियान सिर्फ दिखावाभाजपा ने 1 अगस्त से 31 अगस्त तक सफाई अभियान चलाने की घोषणा की थी। इसकी शुरुआत एमसीडी की सीएम रेखा गुप्ता ने की थी औरमेयर राजा इकबाल सिंह ने बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन अंकुश नारंग का कहना है कि सफाई अभियान सिर्फ कागजों और फोटो खिंचवाने तकसीमित है। उन्होंने कहा मेयर और भाजपा नेता गाड़ी से उतरकर फोटो खिंचवाते हैं, लेकिन असली सफाई का काम जमीन पर कहीं नजर नहीं आता। चार महीने में बढ़ी गंदगीअंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा को एमसीडी की सत्ता में आए चार महीने हो चुके हैं, लेकिन इस दौरान गंदगी और ज्यादा फैल गई है। बुराड़ी, मजलिस पार्क और कई इलाकों में कूड़े के ढेर लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेताओं में सफाई की समस्या को हल करने की इच्छा नहींहै। समाधान पर चर्चा से बच रही भाजपानारंग ने कहा कि भाजपा विपक्ष के साथ बैठकर समाधान पर बात नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कूड़ा हटाना कोई मुश्किल काम नहीं है। अगरभाजपा चाहे तो एक हफ्ते में साफ-सफाई हो सकती है, लेकिन इनके पास न तो योजना है और न ही दिलचस्पी। चार इंजन वाली सरकार, फिर भी नाकामीअंकुश नारंग ने तंज कसते हुए कहा दिल्ली में भाजपा की चार इंजन वाली सरकार है केंद्र में भाजपा, एमसीडी में भाजपा, एलजी भाजपा के नजदीकीऔर मेयर भी भाजपा के। इसके बावजूद दिल्ली की सफाई बद से बदतर होती जा रही है। भाजपा को जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना होगाअंत में अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा को फोटोशूट और कागजी वादों से बाहर निकलकर असली गवर्नेंस करनी होगी। उन्होंने मेयर को चुनौती दी किपहले अपने घर और वार्ड को साफ करें, फिर पूरी दिल्ली को कूड़ा मुक्त बनाने की बात करें।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समर्थन में विजय गोयल की “धन्यवाद यात्रा”

दिल्ली में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों से परेशान लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले में कहा गया हैकि सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें सुरक्षित शेल्टर होम में रखा जाए। इस ऐतिहासिक निर्णय के समर्थन में पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल नेआज दिल्ली की विभिन्न रेज़िडेंट वेलफेयर असोसिएशनों (RWA) के साथ मिलकर “धन्यवाद यात्रा” निकाली। फैसले का स्वागतमंडी हाउस चौक पर सैकड़ों RWA प्रतिनिधियों ने एकत्र होकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को न केवल इंसानों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया, बल्किइसे आवारा कुत्तों के लिए भी फायदेमंद बताया। उनका कहना था कि सड़कों पर बिना देखभाल के घूम रहे कुत्ते अब शेल्टर होम में सुरक्षित रहेंगे औरउनकी उचित देखभाल होगी। विजय गोयल का ‘कुत्ता प्रेमियों’ पर सवालसभा को संबोधित करते हुए विजय गोयल ने तथाकथित “कुत्ता प्रेमियों” पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, अगर ये लोग सच में इन कुत्तों से इतना प्यारकरते हैं, तो इन्हें गोद क्यों नहीं लेते? आज तक किसी एक कुत्ता प्रेमी ने एक भी आवारा कुत्ता गोद नहीं लिया। उन्होंने यह भी कहा कि केवल सड़कोंपर खाना खिलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अगर सच्चा प्रेम है, तो उन्हें शेल्टर होम में जाकर भी देखभाल करनी चाहिए। समस्या कितनी बड़ी है?गोयल ने एक अहम तथ्य बताते हुए कहा कि दिल्ली में इस समय 8 लाख से अधिक आवारा कुत्ते हैं। अगर आज से ही स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशनशुरू भी कर दिया जाए, तब भी लंबे समय तक काटने की घटनाएं जारी रहेंगी। इसलिए, पहला कदम होना चाहिए कि सभी कुत्तों को सड़कों से हटाकरशेल्टर होम में रखा जाए। सरकार से तेज कार्रवाई की मांगगोयल ने कहा कि जैसे कोविड महामारी के समय सरकार ने कुछ ही हफ्तों में अस्पताल, ऑक्सीजन प्लांट और जरूरी इंतजाम कर दिए थे, वैसे हीइच्छा शक्ति दिखाकर 8 हफ्तों में शेल्टर होम बनाए जा सकते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर अच्छे नतीजे आए, तो सुप्रीम कोर्ट आगे भी समयबढ़ा सकता है। RWAs का एकजुट समर्थनगोयल ने दावा किया कि दिल्ली की सभी RWAs इस फैसले के पक्ष में हैं और उन्होंने चुनौती दी कि कोई एक भी RWA यह कहकर सामने आए किसड़कों से कुत्ते नहीं हटाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल्द ही RWA की महासभा बुलाई जाएगी, ताकि आगे की रणनीति तय कीजा सके। विजय गोयल के दमदार बयानयह फैसला इंसान और जानवर – दोनों के लिए फायदेमंद है; सड़कों से कुत्ते हटेंगे और शेल्टर में देखभाल मिलेगी।, कुत्ता प्रेमी अगर सच्चे हैं, तो गोदलें, केवल सड़क पर खाना खिलाकर दिखावा न करें।, सरकार चाहे तो 8 हफ्तों में शेल्टर होम तैयार कर सकती है, जैसे कोविड में अस्पताल बनाए थे। कुत्ता प्रेमियों’ से गोयल के सीधे सवालपहले आपने स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन में रुकावट क्यों डाली?, आपका प्रेम सिर्फ कुत्तों के लिए ही क्यों है?, आपने अब तक कितने कुत्ते गोदलिए हैं?, जो लोग सड़कों पर खाना खिलाते हैं, क्या शेल्टर होम में जाकर भी खिलाएंगे?
दिल्ली में रामलीला मंचन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, मिलेगी सभी सुविधाएं – मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता

नवरात्र के अवसर पर राजधानी में रामलीला के मंचन को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब रामलीला आयोजकों को मंचन के लिएसभी अनुमतियां एक ही जगह से मिलेंगी। इसके लिए जिला स्तर पर सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसव्यवस्था से रामलीला आयोजकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और मंचन बिना किसी परेशानी के हो सकेगा। राजनिवास में हुई बैठक में बड़ा निर्णयराजनिवास में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में हुई विशेष बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली रामलीला महासंघ के पदाधिकारीऔर संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में तय किया गया कि रामलीला मंचन की सभी औपचारिकताएं जिलों में डीएम कार्यालय परपूरी होंगी। इसके अलावा समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष समिति भी बनाई जाएगी। 600 रामलीलाओं का भव्य आयोजनमुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार राजधानी में 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक रामलीलाओं का आयोजन होगा। दिल्ली में लगभग 600 रामलीलाओं कामंचन होता है, जिनमें से 100 रामलीलाएं बड़े और भव्य स्तर पर आयोजित की जाती हैं। दिल्ली के लोग वर्षों से रामलीला देखने में गहरी रुचि रखतेहैं और यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। आयोजकों की समस्याओं का समाधानपिछले कुछ वर्षों से रामलीला आयोजकों को जमीन मिलने में देरी, एनओसी प्राप्त करने में कठिनाई और अन्य विभागीय अड़चनों का सामना करना पड़रहा था। अब सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सभी एनओसी एक ही स्थान से जारी होंगे। भूमि की सिक्योरिटी राशि को 20 रुपये प्रति वर्गमीटर सेघटाकर 15 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दिया गया है। मनोरंजन स्थल का क्षेत्रफल बढ़ारामलीला स्थल पर लगने वाले झूले और खाने-पीने के स्टॉल जैसे मनोरंजन साधनों के लिए मिलने वाले क्षेत्रफल को बढ़ाकर कुल भूमि का 40% करदिया गया है, जो पहले 25% था। इन स्थलों से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए डीडीए के उपनिदेशक और दिल्ली रामलीला महासंघ के दोपदाधिकारियों की समिति बनाई गई है। आपात सुविधाओं का प्रबंधआयोजकों ने सुझाव दिया था कि रामलीला स्थलों पर एक-एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस बार रामलीलामंचन के दौरान आपात स्थिति में मदद के लिए यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सांस्कृतिक विरासत का संरक्षणमुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। रामलीला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि हमारीसांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखती है। यह कदम परंपरा को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी बढ़ाएगा।
अडानी को बचा रही है भाजपा सरकार – सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार उद्योगपति गौतम अडानी को अमेरिका में चल रहे भ्रष्टाचार केकेस से बचाने में लगी है। अमेरिका में केस और समनभारद्वाज ने बताया कि नवंबर 2024 में अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस और यूएस सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन ने गौतम अडानी और उनकेभतीजे सागर अडानी पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया। 21 सितंबर 2024 को अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अडानी को समन भेजा और 21 दिन मेंजवाब देने को कहा। यह समन भारत के लॉ एंड जस्टिस डिपार्टमेंट के जरिए अडानी को देना था, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद भी यह नहीं दियागया। 2,200 करोड़ की रिश्वत का आरोपसौरभ भारद्वाज ने कहा कि अडानी पर आरोप है कि उन्होंने भारत सरकार के कुछ अधिकारियों को 2,200 करोड़ रुपये रिश्वत देने की योजना बनाई, जिसमें कुछ पैसा दे दिया गया और कुछ बाकी था। चूंकि इसमें अमेरिकी निवेशकों का पैसा भी लगा था, इसलिए यह मामला अमेरिकी कानून फॉरेनकरप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट के तहत आता है, जिसमें रिश्वत देना अपराध है। भाजपा का दोहरा रवैयाभारद्वाज ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी के नेताओं पर आरोप लगते हैं, तो भाजपा कहती है कि कोर्ट और जांच एजेंसी के सामने पेश हो। लेकिनअब जब अडानी पर केस है, भाजपा उन्हें बचा रही है। मोदी के दौरे और अडानी के प्रोजेक्टउन्होंने कहा कि कई बार देखा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरे के बाद अडानी को वहां बड़े प्रोजेक्ट मिलते हैं। कीनिया में मोदी के मिलने केबाद अडानी को 1.85 बिलियन डॉलर का एयरपोर्ट और 736 मिलियन डॉलर का पावर प्रोजेक्ट मिला, जिसे विरोध के बाद रद्द करना पड़ा। श्रीलंकाऔर बांग्लादेश में भी मोदी के दौरे के बाद अडानी को बड़े प्रोजेक्ट मिले। भारत की छवि को नुकसानसौरभ भारद्वाज ने कहा कि 6 महीने बाद भी समन न सौंपना यह साबित करता है कि सरकार अडानी को बचा रही है। इससे दुनिया में भारत की छविखराब हो रही है और देश की साख पर बुरा असर पड़ रहा है।
राहुल गांधी और कांग्रेस – हार के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने की परंपरा

भारतीय राजनीति में हार और जीत दोनों ही एक स्वाभाविक प्रक्रिया हैं। किसी भी लोकतांत्रिक देश में चुनाव में सभी पार्टियों के पास बराबर का मौकाहोता है, लेकिन हर बार जीतना किसी के लिए भी संभव नहीं है। ऐसे में आमतौर पर हारने वाले दल अपनी कमियों पर विचार करते हैं और अगली बारबेहतर तैयारी के साथ मैदान में उतरते हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार के इतिहास को देखें तो यहां एक अलग ही पैटर्न दिखाई देता है। गांधी परिवार का पुराना रवैयाकांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार का एक लंबा इतिहास है, जिसमें चुनाव हारने के बाद वे बार-बार चुनाव आयोग, मतदाताओं या चुनाव प्रणाली परसवाल उठाते रहे हैं। इंदिरा गांधी का विवादित बयानपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बार कहा था कि मतदाता मूर्खों का समूह हैं। यह बयान उस समय काफी विवाद में आया और कई लोगों ने इसेमतदाताओं का अपमान माना। राजीव गांधी का आरोपजब राजीव गांधी चुनाव हार गए, तो उन्होंने बैलेट पेपर को दोषी ठहराया। उनका मानना था कि बैलेट पेपर में गड़बड़ी की गई है। वोटिंग सिस्टम पर उलझनदिलचस्प बात यह है कि राजीव गांधी के समय जब वोटिंग मशीन (EVM) का विचार आया, तो उन्होंने कहा था कि चुनाव मशीन से कराए जाएंताकि गड़बड़ी कम हो। लेकिन आज उनके बेटे राहुल गांधी कहते हैं कि बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं, क्योंकि उन्हें मशीन पर भरोसा नहीं है। राहुल गांधी के आरोप और व्यवहारराहुल गांधी कई बार चुनाव आयोग और EVM पर सवाल उठाते हैं। उनका कहना है कि मशीनों में गड़बड़ी होती है और इसका फायदा भाजपा कोमिलता है। लेकिन अब तक उन्होंने इसके कोई ठोस सबूत चुनाव आयोग या अदालत में पेश नहीं किए। न तो वे इस मामले में शपथपत्र देते हैं और नही औपचारिक शिकायत दर्ज करवाते हैं। शपथपत्र और सबूत की कमीअगर राहुल गांधी के पास सच में ऐसे सबूत हैं, जो यह साबित कर सकें कि चुनाव में धांधली हुई है, तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए। ऐसा नकरने से उनके आरोप केवल बयानबाजी लगते हैं, जिन्हें जनता भी गंभीरता से नहीं लेती। किस बात का डर?यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि आखिर राहुल गांधी सबूत पेश करने से बचते क्यों हैं। क्या उन्हें डर है कि उनके पास ठोस प्रमाण नहींहैं? या फिर यह डर है कि मामला कानूनी रूप से कमजोर पड़ जाएगा और उनकी राजनीतिक साख को नुकसान होगा? कुछ लोग कहते हैं कि कांग्रेसपार्टी इस तरह के आरोप लगाकर अपनी हार का दोष खुद पर नहीं आने देना चाहती, ताकि अपने समर्थकों के बीच यह संदेश जाए कि हार सिस्टम कीवजह से हुई, न कि उनकी गलतियों से। लोकतंत्र में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना गलत नहीं है, लेकिन यह तभी सार्थक है जब आरोपों के साथपुख्ता सबूत हों। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी को चाहिए कि अगर वे EVM या चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हैं, तो उसके लिए ठोस प्रमाण भीपेश करें। बिना सबूत के बार-बार सिस्टम पर आरोप लगाने से न केवल जनता का भरोसा चुनाव प्रणाली पर कम होता है, बल्कि यह भी लगता है कियह सिर्फ राजनीतिक खेल है। लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब नेता हार और जीत दोनों को ईमानदारी से स्वीकार करेंगे।
दिल्ली विश्वविद्यालय का नया नियम छात्र संघ चुनाव लड़ने के लिए 1 लाख रुपये का बॉन्ड – एसैप का विरोध, कुलदीप बिधुड़ी बोले ये तुगलकी फरमान है

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) प्रशासन ने एक नया और हैरान करने वाला नियम बनाया है। अब अगर कोई छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ(DUSU) का चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे 1 लाख रुपये का बॉन्ड जमा करना होगा। इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के छात्र संगठनएसोसिएशन ऑफ स्टूडेंट्स फॉर अल्टरनेटिव पॉलिटिक्स (एसैप) ने इस नियम का जोरदार विरोध किया है। उनका कहना है कि यह फैसला गरीब औरमध्यम वर्ग के छात्रों को चुनाव से दूर करने के लिए लिया गया है।मिडिल क्लास को चुनाव से दूर करने की कोशिश – कुलदीप बिधुड़ीएसैप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप बिधुड़ी ने कहा कि यह नियम 8 अगस्त को जारी किया गया है। इसके मुताबिक चुनाव में खड़े होने वाले छात्रको 1 लाख रुपये का बॉन्ड देना होगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई छात्र चारों पदों के लिए चुनाव लड़ेगा, तो उसे 4 लाख रुपये देने होंगे। यह साफ हैकि डीयू प्रशासन चाहता है कि सिर्फ अमीर छात्र ही चुनाव लड़ें। मिडिल क्लास और गरीब छात्रों को इस तरह बाहर कर दिया जाएगा। छात्र संघ चुनाव सेवा का मंच है, पैसों का खेल नहीं – प्रवीण चौधरीएसैप के नेता प्रवीण चौधरी ने कहा कि हर छात्र के लिए 1 लाख रुपये जुटाना आसान नहीं है। छात्र संघ का चुनाव सेवा करने का मौका होता है, लेकिन डीयू प्रशासन ने इसे पैसे का खेल बना दिया है। मिडिल क्लास का छात्र यह रकम कहां से लाएगा? छात्रों के मुद्दों पर हमेशा साथ – पाश शेरवानीएसैप के दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष पाश शेरवानी ने कहा कि संगठन हमेशा छात्रों के हक के लिए आवाज उठाता रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसेउन्होंने लाइब्रेरी शुल्क बढ़ने, मेट्रो किराया महंगा होने और छात्र सेवा केंद्र (SSC) जैसी समस्याओं पर आंदोलन किए। हमने पहले भी छात्रों कीपरेशानी को दूर करवाया है। अगर यह बॉन्ड वाला नियम वापस नहीं लिया गया, तो हम फिर से बड़ा आंदोलन करेंगे। क्या यूनिवर्सिटी सीटों का ठेका दे रही है? – शैलेश यादवजाकिर हुसैन कॉलेज यूनिट के अध्यक्ष शैलेश यादव ने सवाल उठाया कि क्या डीयू प्रशासन चुनावी सीटों का ऑक्शन कर रहा है? 1 लाख रुपये देकरही चुनाव लड़ने की अनुमति मिल रही है। यह छात्रों की यूनिवर्सिटी है, यहां ठेकेदारी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि डीयू प्रशासन पहले ही फीस बढ़ाचुका है, लाइब्रेरी शुल्क ज्यादा कर दिया है, हॉस्टल की सुविधा कम है, और अब यह बॉन्ड सिस्टम लगाकर छात्रों के अधिकारों पर हमला किया जारहा है। एसैप की चेतावनीएसैप ने साफ कहा है कि अगर डीयू प्रशासन यह नियम वापस नहीं लेता, तो वे छात्रों के साथ मिलकर बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे और आंदोलन को तबतक जारी रखेंगे, जब तक यह आदेश रद्द न हो जाए।