Delhi Metro Fare Hike Unaffordable for Common People, DTC in Shambles, Devender Yadav Slams BJP Govt

Delhi Pradesh Congress Committee president Shri Devender Yadav said that with the DTC bus service in a dilapidated condition, common people of Delhi have been depending more and more on the metro train service for their daily commute, even though the old minimum fare of Rs 10 was also unaffordable for common people. He said […]
भाजपा ने किया छात्रों से वादा, अब बढ़ाया मेट्रो किराया ‘आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने किया हमला

आम आदमी पार्टी ने मेट्रो का किराया बढ़ाकर लाखों छात्रों पर आर्थिक बोझ डालने को लेकर भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया है. “आप” केदिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा जारी संकल्प में छात्रों को फ्री मेट्रो पास दिलाने की याद दिलाई है. उन्होंने कहाकि चुनाव से पहले संकल्प पत्र में भाजपा का वादा था कि छात्रों के लिए मेट्रो फ्री करेंगे. लेकिन चुनाव के बाद मेट्रो के किराए में 10 फीसद कीबढ़ोतरी कर दी गई. भाजपा ने झूठ, धोखाधड़ी और वोट चोरी कर दिल्ली में सरकार तो बना ली, मगर प्राइवेट स्कूल के पैरेंट्स,गरीब झुग्गी वाले, दुकानदार, डॉक्टर, वकील, स्टूडेंट्स, मिडिल क्लास समेत कोई ऐसा कोई वर्ग नहीं है जिसको परेशान ना किया हो. लड़ाई में है फायदासौरभ भारद्वाज ने कहा कि मेट्रो किराए में वृद्धि को अगर भाजपा के चश्मे से देखें, तो वे कहेंगे कि किराया बढ़ना ही था, केजरीवाल ने रोक रखा था, हमने बढ़ाकर देश का भला किया. लेकिन गरीब आदमी से पूछो, तो वे कहेंगे कि केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में रेजोल्यूशन लाकर, लड़करकिराया नहीं बढ़ने दिया. केजरीवाल ने लड़कर स्कूलों की फीस, बिजली के दाम और मेट्रो किराया नहीं बढ़ने दिया. लेकिन भाजपा की दोस्ती मेंप्राइवेट स्कूलों, बिजली कंपनियों और मेट्रो का फायदा है और दिल्ली वालों का नुकसान अब दिल्ली वाले तय करें कि दोस्ती में फायदा था याकेजरीवाल की लड़ाई में फायदा है.
शुभांशु शुक्ला बने पहले भारतीय, जिन्होंने एक्सिओम-4 मिशन में निभाई अहम भूमिका बताया अंतरिक्ष यात्रा का रोमांच

अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बताया एक्सिओम-4 मिशन से पहले उन्हें कई तैयारियों से गुजरना पड़ा। इनमें कृत्रिम वातावरण में जीवन की रक्षा कापरीक्षण, अंतरिक्ष में अपने अनुभव को संजोने के लिए फोटोग्राफी का प्रशिक्षण और टीम भावना को मजबूत करने के लिए मैक्सिको के समुद्री तट परकायकिंग जैसी गतिविधियां शामिल थीं. शुक्ला ने रविवार को एक्सिओम-4 मिशन और उसके लिए दिए गए प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए. यहमिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए था. ग्रुप कैप्टन शुक्ला को उनके सांकेतिक नाम ‘शक्स’ से भी जाना जाता है. एक्सिओम-4 मिशन को कई बार टाला गया था इसके बाद 25 जून को अमेरिका के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से ड्रैगन अंतरिक्षयान लॉन्च किया गया. जिसमें शुक्ला औरतीन अन्य अंतरिक्ष यात्री सवार हुए थे। शुक्ला ने बताया कि यह इतना शक्तिशाली होता है कि आपके शरीर की हर हड्डी को हिला देता है. बने पहले भारतीयआप 0 से 28,500 किलोमीटर प्रति घंटी की रफ्तार तक केवल 8.5 मिनट में पहुंचते हैं इससे इसकी ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है. जबअंतरिक्षयान लॉन्च हुआ तो भारत और दुनियाभर में लोगों ने इस मिशन की कामयाबी के लिए तालियां बजाईं और जब 15 जुलाई को उनकी धरतीपर वापसी हुई तो फिर से जश्न मनाया गया लखनऊ में जन्मे शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय बने. उन्होंने इस अनुभवको बेहद रोमांचक बताया. भारतीय वायुसेना की ओर से नई दिल्ली के सुब्रतो पार्क में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जहां शुक्ला ने 20 दिनों के अंतरिक्ष मिशन की कुछ दिलचस्प बातें साझा कीं. इस मिशन से पहले उन्हें कई महीनों तक कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा था. उन्होंनेबताया कि जब आप आईएसएस पर जाते हैं, तो यह बिल्कुल ऐसे है जैसे आप किसी नए घर में रह रहे हैं. वहां के अपने नियम होते हैं, जैसे खाना कैसेखाओगे सोओगे या शौचालय कैसे जाओगे. सबसे कठिन काम वास्तव में अंतरिक्ष में वॉशरूम जाना होता है. 40 साल के हो जाएंगे शुभांशूशुक्ला 2006 में भारतीय वायु सेना में शामिल हुए थे वह 10 अक्तूबर को 40 साल के हो जाएंगे. वह एक अनुभवी टेस्ट पायलट हैं, जिन्होंनेसुखोई-30 एमकेआई, मिग-29, जगुआर और डोर्नियर-228 जैसे लड़ाकू विमान 2,000 घंटे से अधिक समय तक उड़ाए हैं. ग्रुप कैप्टन शुक्ला नेबताया कि वह बचपन में एक शर्मीले और शांत इंसान थे और राकेश शर्मा की 1984 मं अंतरिक्ष यात्रा की कहानियां सुनते हुए बड़े हुए. आज वहींशुक्ला अब स्कूल के बच्चों को ऑटोग्राफ दे रहे हैं और वायु सेना के उनके साथ साथी उसे फोटो खिंचवाने की लाइन में लगे हैं. जब उनसे पूछा गयाकि यह बदलाव कैसा लगता है, तो उन्होंने कहा, अद्भुत लगता है ये देखना कि आज के बच्चे अंतरिक्ष और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर कितनेउत्साहित हैं. एक्सिओम-4 मिशन में उनकी भूमिका मिशन पायलट की थी। उनके साथ अमेरिका की कमांडर पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोस्जउजनांस्की और हंगरी के टिबोर कापु मिशन विशेषज्ञ थे.
18 पूर्व न्यायाधीशों का बयान सलवा जुडूम फैसले पर अमित शाह की टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण, न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान

सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक समूह ने सलवा जुडूम फैसले को लेकर विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी पर गृह मंत्री अमित शाहके बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है. उन्होंने कहा कि इससे बचना ही समझदारी होगी. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ, मदन बी. लोकुर और जे. चेलमेश्वर सहित 18 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के समूह ने यह भी कहा कि एक उच्च राजनीतिक पदाधिकारी की ओर से शीर्ष अदालत केफैसले की पूर्वाग्रहपूर्ण गलत व्याख्या से न्यायाधीशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. दरअसल, शाह ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रेड्डी परनक्सलवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया था कि सलवा जुडूम फैसले के बिना वामपंथी उग्रवाद 2020 तक समाप्त होगया होता. विचारधारा का करता है समर्थन18 पूर्व न्यायाधीशों द्वारा हस्ताक्षरित बयान में कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सलवा जुडूम मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले कीसार्वजनिक रूप से गलत व्याख्या करना दुर्भाग्यपूर्ण है. यह फैसला कहीं भी, न तो स्पष्ट रूप से और न ही इसके पाठ के किसी भी निहितार्थ के माध्यमसे, नक्सलवाद या उसकी विचारधारा का समर्थन करता है. इस बयान पर हस्ताक्षर करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एके पटनायक, अभय ओका, गोपाल गौड़ा, विक्रमजीत सेन, कुरियन जोसेफ, मदन बी. लोकुर और जे. चेलमेश्वर हैं. सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने कहा, ‘भारत केउपराष्ट्रपति पद के लिए प्रचार अभियान वैचारिक हो सकता है, लेकिन इसे शालीनता और गरिमा के साथ चलाया जा सकता है. किसी भी उम्मीदवारकी तथाकथित विचारधारा की आलोचना से बचना चाहिए. किसी उच्च राजनीतिक पदाधिकारी की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की पूर्वाग्रहीगलत व्याख्या का सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को हिला सकता है. फर्जी बयान पर किए हस्ताक्षरसेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने कहा कि भारत के उपराष्ट्रपति के पद के सम्मान में नाम-निंदा से बचना ही समझदारी होगी. सुप्रीम कोर्ट के सात सेवानिवृत्तन्यायाधीशों के अलावा उच्च न्यायालयों के तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों गोविंद माथुर, एस. मुरलीधर और संजीव बनर्जी ने भी बयान पर हस्ताक्षर किए. पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीश अंजना प्रकाश, सी. प्रवीण कुमार, ए. गोपाल रेड्डी, जी. रघुराम, के. कन्नन, के. चंद्रू, बी. चंद्रकुमार और कैलाश गंभीर शामिल हैं। प्रोफेसर मोहन गोपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने भी बयान पर हस्ताक्षर किए हैं. शुक्रवारको केरल में बोलते हुए शाह ने कहा था, ‘सुदर्शन रेड्डी वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने नक्सलवाद को बढ़ावा दिया. उन्होंने सलवा जुडूम का फैसला सुनाया. अगर सलवा जुडूम का फैसला नहीं सुनाया गया होता, तो नक्सली आतंकवाद 2020 तक समाप्त हो गया होता. वह वह व्यक्ति हैं, जो सलवा जुडूमका फैसला देने वाली विचारधारा से प्रेरित थे. रेड्डी ने शनिवार को कहा था कि वह गृह मंत्री के साथ किसी भी मुद्दे पर बहस नहीं करना चाहते. उन्होंनेजोर देकर कहा कि यह फैसला उनका नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट का है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर शाह ने पूरा फैसला पढ़ा होता, तो वे ऐसी टिप्पणीनहीं करते.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गांधी को बताया ‘आदतन झूठा’, वोट चोरी के आरोपों को बताया बेबुनियाद; ठाकरे और मनसे ने भी उठाए सवाल

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को आदतन झूठा कहा और भाजपा पर लगे ‘वोट चोरी’ के आरोपों कोखारिज कर दिया. फडणवीस ने कहा कि विपक्षी नेताओं का यह झूठ केवल खुद को तसल्ली देने के लिए हैं. उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, मैं पहले भी कह चुका हूं कि राहुल गांधी आदतन झूठ बोलने वाले हैं. वह लगातार झूठ फैलाते रहते हैं दुख होता है जब कुछ महाराष्ट्र के नेता भी यहमानने लगते हैं कि राहुल गांधी सच बोल रहे हैं। राहुल गांधी के इस आरोप पर कि भाजपा ने वोट चुराए, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि झूठ कीकोई बुनियाद नहीं होती.उन्होंने कहा, झूठ पर खड़ा किया गया किला टिकता नहीं है. जब तक उन्हें यह समझ नहीं आएगा कि जनता का विश्वास जीतने के लिए जनता के बीचजाना पड़ता है. तब तक उनका झूठ सिर्फ खुद को बहलाने के लिए होगा. मनसे के बीच हो सकता है गठबंधनराहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में वोट चुराए गए और अब बिहार में भी वोट चोरी की कोशिश की जा रहीहै.उनका आरोप है कि यह सब केंद्र की भाजपा सरकार और चुनाव आयोग की मिलीभगत से हो रहा है. कई अन्य विपक्षी दलों ने भी ‘वोट चोरी’ कामुद्दा उठाया है। महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे ने ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाया है औरअपने-अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे मतदाता सूची को ठीक से जांचें और फर्जी मतदाताओं की पहचान करें. ठाकरे भाइयों का यह बयानऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी दल भी मतदाता सूची में हेराफेरी के आरोप लगा चुके हैं. पिछले सालमहाराष्ट्र की 288 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और शरद पवार की राकांपा (शरदचंद्र पवार) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ी थी और 20 सीटें जीती थीं. वहीं, राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को एक भी सीट नहीं मिलीथी. अटकलें हैं कि आगामी नगर निगम चुनावों, खासकर प्रभावशाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव के लिए शिवसेना (यूबीटी) औरमनसे के बीच गठबंधन हो सकता है. गड़बड़ी की दी जानकारीउद्धव ठाकरे ने रविवार को दावा किया कि लोकसभा चुनाव के बाद 40 से 42 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं. उन्होंनेअपने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपने-अपने इलाके में मतदाता सूची की जांच करें और फर्जी नामों की पहचान करें. उद्धव ने कहा, देखो किकहीं आपके वार्ड में वोट चोरी तो नहीं हो रही है. मतदाता सूची की अच्छी तरह से जांच करो और यह सुनिश्चित करो कि हर व्यक्ति का नाम सिर्फ एकबार ही हो. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदान वाले दिन फर्जी वोटिंग होती है. कुछ जगहों पर एक ही व्यक्ति के नाम पर दो बार या तीन बारवोट डाला जाता है. वहीं, मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने शनिवार को कहा था कि वह 2016 से वोट चोरी का मुद्दा उठाते आ रहे हैं. राज ठाकरे ने कहा किजब राहुल गांधी और भाजपा नेता अनुराग ठाकुर दोनों ने मतदाता सूची में गड़बड़ी की बात की थी, तभी चुनाव आयोग को जांच करनी चाहिए थी. मनसे प्रमुख ने भी अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मतदाता सूची की ध्यान से जांच करें और किसी भी गड़बड़ी की जानकारी दें.
अमित शाह ने धनखड़ के इस्तीफे पर विपक्ष के आरोपों को बताया फर्जी, बोले– स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को विपक्ष के सभी दावों कोखारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है. विपक्ष के वो दावे बेबुनियाद और फर्जी हैं कि वे नजरबंद हैं. एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘धनखड़ साहब का इस्तीफा अपने आप में स्पष्ट है। उन्होंने अपने इस्तीफे के लिएस्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री, अन्य मंत्रियों और सरकार के सदस्यों के अच्छे कार्यकाल के लिए उनका हार्दिक आभार भीव्यक्त किया है. कुछ विपक्षी नेताओं की ओर से धनखड़ के नजरबंद होने के दावे के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि सच और झूठ की व्याख्याकेवल विपक्ष के बयानों पर आधारित नहीं होनी चाहिए. धनखड़ के ठिकाने पर भी उठाए सवालउन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि सच और झूठ की आपकी व्याख्या विपक्ष के बयानों पर आधारित है. हमें इस सबका बतंगड़ नहीं बनाना चाहिए. धनखड़ एक संवैधानिक पद पर थे और उन्होंने संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया. उन्होंने व्यक्तिगत स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफादिया इस मुद्दे पर ज्यादा विचार-विमर्श नहीं करना चाहिए. यह टिप्पणी विपक्षी नेताओं की ओर से अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाए जाने के बादआई है, जिसमें दावा किया गया था कि सरकार ने धनखड़ को खामोश कर दिया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि देश के इतिहास में यहपहली बार है कि किसी उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के साथ-साथ उन्हें खामोश भी किया गया है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकारकी आलोचना की थी और धनखड़ के ठिकाने पर सवाल उठाए थे. वापस ले जाने का लगाया था आरोपउन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर देश को मध्ययुगीन काल में वापस ले जाने का आरोप लगाया था. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नेसोमवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के एनडीए के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यहस्वाभाविक ही है कि इस पद पर भारत के दक्षिणी हिस्से से आने वाला कोई व्यक्ति हो. ऐसा इसलिए, क्योंकि राष्ट्रपति पूर्वी भारत से और प्रधानमंत्रीपश्चिम और उत्तर भारत से हैं. शाह ने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि राधाकृष्णन के चयन का 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले तमिलनाडुमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से लाभ उठाने की कोशिश से कोई लेना-देना है. उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 9 सितंबर को होना है औरउसी दिन मतगणना भी होगी.