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तियानजिन एससीओ सम्मेलन में आतंकवाद पर सख्त रुख, दोहरे मापदंड की निंदा

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की सोमवार को कड़ी निंदा की और भारत के इस रुख से सहमतिजताई कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह का ‘दोहरा मापदंड’ स्वीकार नहीं किया जा सकता. एससीओ के संयुक्त घोषणापत्र मेंआतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की गई। यह घोषणापत्र चीन के तटीय शहर तियानजिन में दो दिन तक चले वार्षिक शिखर सम्मेलन के अंत में जारीकिया गया. इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुति और कई अन्य वैश्विकनेताओं ने हिस्सा लिया.आतंकवाद से निपटने के लिए कड़ी चुनौतीएससीओ के सदस्य देशों ने इस्राइल की ओर से गाजा पर किए हमलों की भी निंदा की, क्योंकि इन हमलों में बड़े पैमाने पर आम नागरिकों की मौतहुई है और गाजा पट्टी में गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है. संयुक्त घोषणापत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उपायों का जिक्र किया गयाऔर आतंकवाद से निपटने को एक बड़ी चुनौती बताया गया. घोषणापत्र में कहा गया, सदस्य देशों ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमलेकी कड़े शब्दों में निंदा की है. एससीओ के सदस्य देशों ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में खुझदार और जाफर एक्सप्रेस पर हुए आतंकी हमलों कीभी निंदा की. घोषणापत्र में आगे कहा गया, उन्होंने (सदस्य देशों ने) मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की. साथ ही यह भी कहा कि ऐसे हमलों के अपराधियों, योजनाकारों और समर्थकों को सजा मिलनी चाहिए. संगठनों के खिलाफ मिलकर कार्रवाईएससीओ ने आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के खिलाफ अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराई और इस बात पर जोर दिया कि इन तत्वों का निजीस्वार्थों के लिए इस्तेमाल करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है. घोषणापत्र में कहा गया कि सदस्य देश मानते हैं कि आतंकवाद और चरमपंथ के खतरों सेनिपटने में संप्रभु देशों और उनकी सक्षम एजेंसियों की भूमिका सबसे अहम है. सदस्य देश हर प्रकार के आतंकवाद की निंदा करते हैं और इस बात परबल देते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए. वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान करते हैं कि आतंकवाद, विशेषकर सीमापार आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई की जाए. एससीओ ने यह भी कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में संयुक्तराष्ट्र की भूमिका बेहद अहम है और सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति को पूरी तरह लागूकरना चाहिए, ताकि सभी आतंकी संगठनों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जा सके.

शांति वार्ता में शामिल थाडौ नेता की हत्या, शव नदी में फेंके जाने का आरोप “पांच संदिग्ध गिरफ्तार”

असम में थाडौ जनजाति के एक शीर्ष नेता की कथित तौर पर हत्या कर दी गई है. पुलिस ने बताया कि जिन नेता की हत्या की गई है, वे मणिपुर मेंशांति वार्ता का हिस्सा रहे थे बताया जा रहा है कि हत्या के बाद शव को नदी में फेंक दिया गया और अभी तक शव बरामद नहीं हुआ है पुलिस ने इसमामले में पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने बताया कि थाडौ जनजाति के नेता नेहकाम जोहाओ असम के कार्बी आंगलोंग जिले के मांजाइलाके में कुकी बस्ती में रहते थे. जोमहाओ की कथित तौर पर शनिवार रात धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई और हत्या के बाद शवको जमुना नदी में फेंक दिया गया. मैतई समुदाय के बीच जातीय हिंसापुलिस ने बताया कि शव की तलाश रविवार से जारी है, लेकिन अभी तक शव बरामद नहीं हो सका है. पुलिस ने इस मामले में पांच संदिग्धों कोगिरफ्तार किया है और कई अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, फोरेंसिक विशेषज्ञ और एक सीआईडी टीम नेघटनास्थल का दौरा किया और हत्या के कारणों की जांच की. जोमहाओ बीते महीने इंफाल में मैतई समुदाय के साथ हुई शांति पहल में शामिल थेऔर दावा किया जा रहा है कि उसी के चलते उनकी हत्या हुई है. हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है और जांच की बात कही है मणिपुर में लंबेसमय तक कुकी और मैतई समुदाय के बीच जातीय हिंसा हुई. की गई शांति की पहलबीते दिनों थाडौ इनपी मणिपुर (टीआईएम) के एक प्रतिनिधिमंडल ने, जो थाडौ समुदाय का प्रतिनिधित्व करता है, विभिन्न मैतेई नागरिक समाजसंगठनों (सीएसओ) और छात्र निकायों के साथ बातचीत की और शांति की पहल की. दोनों समुदायों के बीच संवाद और आपसी समझ को बढ़ावादेने की दिशा में ये पहल काफी महत्वपूर्ण साबित हुई. जोमहाओ बीते महीने इंफाल में मैतई समुदाय के साथ हुई शांति पहल में शामिल थे और दावाकिया जा रहा है कि उसी के चलते उनकी हत्या हुई है हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है और जांच की बात कही है.

मराठा आरक्षण पर मनोज जरांगे की भूख हड़ताल तेज, पानी भी छोड़ा, मुंबई में ट्रैफिक जाम और जनजीवन प्रभावित

डॉक्टरों ने सोमवार को मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे की सेहत की जांच की. जरांगे ने चौथे दिन पानी पीना भी बंद कर दिया था. दक्षिणमुंबई के आजाद मैदान में उनकी भूख हड़ताल चौथे दिन में प्रवेश कर गई है। मराठा समुदाय के सैकड़ों लोग आरक्षण की मांग करते हुए छत्रपतिशिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) और दक्षिण मुंबई के अन्य इलाकों में एकत्र हुए, जिससे ट्रैफिक जाम और यात्रियों को परेशानी हुई. अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस ने सीएसएमटी की ओर जाने वाले ट्रैफिक को दूसरे मार्गों पर मोड़ दिया, जबकि बृहन्मुम्बई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंडट्रांसपोर्ट (बीईएसटी) ने भी सीएसएमटी जाने वाली सभी बसों को रोक दिया या मार्ग बदल दिया. पानी पीना भी करेंगे बंदइस गतिरोध के बीच महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि सरकार मराठा आरक्षण मुद्दे का ऐसा समाधान निकाल रही है जो कोर्ट मेंटिक सकेगा. जरांगे ने सोमवार से पानी पीना भी बंद कर दिया. उनके समर्थकों ने कहा कि वह अपनी मांग पूरी होने तक यहां से नहीं हटेंगे. उनकी मांगहै कि मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत 10 फीसदी आरक्षण दिया जाए राज्य के जे जे अस्पताल की एक डॉक्टरों की टीमआजाद मैदान पहुंची और उसने जरांगे का ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल चेक किया. पास में स्थित सीएसएमटी पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी नारेलगाते और नाचते दिखे, जिससे रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ जमा हो गई. कई प्रदर्शनकारी महापालिका मार्ग, जे जे मार्ग और डी एन रोड की ओर जानेवाली सड़क पर जमा हुए, जिससे कुछ समय के लिए ट्रैफिक जाम हो गया. आजाद मैदान क्षेत्र में भारी पुलिस तैनाती थी, लेकिन प्रदर्शनकारी सुरक्षाकर्मियों की बात नहीं मान रहे थे. रोका सुरक्षा कर्मियों नेकुछ समूह बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) की इमारत के परिसर में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोका. इसके बादप्रदर्शनकारियों ने वहां बाहर ‘एक माराठा लाख माराठा’ और ‘आरक्षण आमचा हक्का आहे’ जैसे नारे लगाए. सुबह के समय कई प्रदर्शनकारीसीएसएमटी और पास के बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे. यात्रियों, खासकर कार्यालय जाने वाले लोगों को ट्रेनों मेंभीड़ की वजह से परेशानी हुई. इस बीच, जरांगे ने यह भी चेतावनी दी कि अगर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मराठा समुदाय की आरक्षण मांगेंनहीं सुनते हैं तो पांच करोड़ से अधिक मराठा मुंबई आ जाएंगे. जरांगे ने फडणवीस पर मुद्दे पर जानबूझकर फैसला टालने का आरोप लगाया.

बंगाल में 69% बच्चे एनीमिक, भाजपा ने ममता के ‘फूड सिक्योरिटी’ दावे को बताया ढोंग दुआरे राशन’ योजना पर भाजपा का हमला “गरीबों से मजाक”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के दावे पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने कहा कि यहगरीबों के साथ क्रूर मजाक है और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के आंकड़े ममता सरकार के दावों को पूरी तरह गलत साबितकरते हैं. भाजपा आईटी सेल के प्रमुख और पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने सोमवार को कहा कि सर्वे के मुताबिक बंगाल के 6 से 59 महीने की आयु वाले 69 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि चौथे सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 54 प्रतिशत था. इसी तरह, 71 प्रतिशत महिलाएंऔर 39 प्रतिशत पुरुष भी एनीमिया से प्रभावित पाए गए.अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘ममता बनर्जी का फूड सिक्योरिटी भाषण गरीबों के साथ क्रूर मजाक है. सहयोगियों की मिटा रही है भूखराष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 ने उनके सारे बड़े-बड़े दावों की पोल खोल दी है. उन्होंने बताया कि राज्य के कई जिलों में बच्चों में कुपोषण और ऊंचाईके मुकाबले कम वजन की समस्या बढ़ी है. इस मामले में कोलकाता में 11.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी, दार्जिलिंग में 9.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी, दक्षिणदिनाजपुर में 5.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी और हावड़ा में 6.7 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई हैं. भाजपा नेता ने ममता की ‘खाद्यसाथी’ और ‘दुआरे राशन’ योजनाओंको भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि ये योजनाएं असल में लोगों के लिए नहीं, बल्कि उनके भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के लिए दावतबन गई हैं. उन्होंने आरोप लगाया, ‘ममता केवल अपने भ्रष्ट सहयोगियों की भूख मिटा रही हैं, आम जनता की नहीं. कर्ज होने का है अनुमानबता दें कि ममता बनर्जी ने हाल ही में एक्स पर लिखा था कि उनकी सरकार ने राज्य में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की है और कई कल्याणकारी योजनाओंके तहत लोगों के घर-घर राशन और खाद्यान्न पहुंचाए जा रहे हैं भाजपा का आरोप है कि जब राज्य पर 2026 तक 7.72 लाख करोड़ रुपये का कर्जहोने का अनुमान है, तब ममता सरकार लोगों को भूखा रख रही है अमित मालवीय ने कहा, ‘2026 में भाजपा इस तमाशे को खत्म करेगी और बंगालको असली खाद्य सुरक्षा देगी.

धर्मस्थल विवाद में भाजपा की CBI-NIA जांच की मांग, CM सिद्धारमैया बोले राजनीति का पाखंड

कर्नाटक में इन दिनों धर्मस्थल मामले की खूब चर्चा है अब भाजपा ने दावा किया है कि इस मामले में बहुत बड़ी साजिश हुई है और एनआईए यासीबीआई द्वारा इसकी जांच की जाए. हालांकि सीएम सिद्धारमैया ने भाजपा के दावों को सिरे से खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि भाजपा इसमामले में सिर्फ राजनीति कर रही है. कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने धर्मस्थल मामले में सनातन धर्म के प्रमुख धर्मस्थल को बदनाम करनेकी साजिश रचने का आरोप लगाया. बीवाई विजयेंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक और अन्य भाजपा विधायक सोमवार को धर्मस्थलचलो रैली में भाग लेंगे, जिसमें धर्मस्थल के खिलाफ कथित साजिश और इसे बदनाम करने की कोशिशों की निंदा की जाएगी. रैली से पहले, भाजपानेताओं ने मंजूनाथ मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की. उन्होंने मंदिर के धर्माधिकारी (संरक्षक) वीरेंद्र हेगड़े से भी मुलाकात की विजयेंद्र ने कहा, ‘यहां मुद्दा यहहै कि जाति, पंथ और धर्म से परे, हर कोई सीबीआई या एनआईए द्वारा गहन जांच की मांग कर रहा है भगवान मंजूनाथ के सभी भक्तों की यही मांगहै. संलिप्पता की ओर इशाराउन्होंने कहा कि ‘राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी द्वारा जांच के दौरान काफ़ी झूठा प्रचार किया गया राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह सेझूठा प्रचार किया गया है, उससे करोड़ों भक्त परेशान हैं भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं. धर्मस्थल के खिलाफ इसे एक बड़ी साजिश बताते हुए, भाजपा अध्यक्ष ने बताया कि दक्षिण कन्नड़ जिले के प्रभारी मंत्री दिनेश गुंडू राव ने दावा किया था कि जांच के लिए राज्य सरकार पर वामपंथी समूहोंका काफी दबाव था, और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने खुद कहा है कि धर्मस्थल प्रकरण में एक बड़ी साजिश है. उन्होंने कहा कि सब कुछउजागर होना जरूरी है धर्मस्थल मंदिर के ख़िलाफ़ एक बहुत बड़ी साज़िश रची गई है इसलिए, हम एनआईए या सीबीआई से गहन जांच की मांग कररहे हैं मुझे उम्मीद है कि राज्य सरकार बिना किसी देरी के जल्द से जल्द जांच का आदेश देगी.एक शिकायतकर्ता, जिसकी बाद में पहचान सी एन चिन्नैया के रूप में हुई, उसने दावा किया था कि पिछले दो दशकों में धर्मस्थल में कथित यौनउत्पीड़न की शिकार महिलाओं सहित कई शवों को दफनाया गया इस खुलासे के बाद विवाद खड़ा हो गया. इस मामले में स्थानीय मंदिर के प्रशासकोंकी संलिप्तता की ओर इशारा किया गया. मिलेगा राजनीति का लाभहालांकि अभी तक की जांच में शिकायतकर्ता का दावा झूठा पाया गया है, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. कर्नाटक के मुख्यमंत्रीसिद्धारमैया ने सोमवार को भाजपा की धर्मस्थल चलो रैली को राजनीति करार देते हुए कहा कि विपक्षी दल को इससे कोई राजनीतिक लाभ नहींमिलेगा. धर्मस्थल मुद्दे पर भाजपा के आचरण को पाखंड बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें लगता है कि इस मुद्दे पर हिंदू उनके साथ एकजुट होजाएंगे, लेकिन वे गलत हैं.भाजपा की रैली को लेकर सिद्धारमैया ने कहा, ‘उन्हें (भाजपा को) करने दीजिए, वे राजनीति के लिए ऐसा कर रहे हैं. उन्हें लगता है कि इससे उन्हेंराजनीतिक फायदा होगा, लेकिन उन्हें कोई फायदा नहीं होगा. हम (कांग्रेस) धर्मस्थल और भगवान मंजूनाथ का बहुत सम्मान करते हैं. लेकिन वेराजनीति कर रहे हैं उन्होंने आगे कहा, ‘मैं भी हिंदू हूं…क्या हमने अपने गांव में राम मंदिर नहीं बनवाया? यह राजनीति, झूठा प्रचार और उनके नाम परझूठ बोलने का मामला नहीं है इंसानियत होनी चाहिए, चाहे वह कोई भी हो अगर किसी में इंसानियत नहीं है और उसका व्यवहार अमानवीय है, तो वहइंसान नहीं है.

भारत ने नहीं तोड़ा कोई नियम, रूसी तेल पर वैश्विक बाजार को स्थिर किया- बोले हरदीप पुरी

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की ‘लॉन्ड्रोमैट’ वाली टिप्पणी को सिरे से खारिज किया. उन्होंने साफ कहा कि भारत ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल खरीदने में कोई नियम नहीं तोड़ा है और भारत की ऊर्जा व्यापार नीति ने वैश्विक बाजार कोस्थिर रखने और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद की है. यहां लॉन्ड्रोमैट का मतलब संदिग्ध चीजो को वैध दिखाने की प्रक्रिया या जगह है पुरी ने एकअंग्रेजी अखबार में लेख में लिखा कि भारत ने कोई मुनाफाखोरी नहीं की है उन्होंने बताया कि रूस की ओर से फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले सेबहुत पहले से ही भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक रहा है और युद्ध के बाद भी भारत का निर्यात और मुनाफा लगभगसमान बना हुआ है उन्होंने लिखा, कुछ आलोचक आरोप लगाते हैं कि भारत रूसी तेल के लिए ‘लॉन्ड्रोमैट’ बन गया है। इससे ज्यादा गलत बात कुछनहीं हो सकती. भारत को सस्ती मिलती है ऊर्जाभारत की ओर से रूसी तेल का आयाद यूक्रेन युद्ध के बाद एक फीसदी से बढ़कर करीब 40 फीसदी पहुंचा, क्योंकि पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाएगए प्रतिबंधों के बाद भारत को भारी छूट पर तेल मिलने लगा. इससे भारत को सस्ती उर्जा मिलती रही, लेकिन अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशास नेइसकी आलोचना की और भारत पर आरोप लगाया कि वह रूसी तेल को रिफाइन करके उसे यूरोप के देशो में निर्यात कर रहा है और मुनाफा कमा रहाहै.पिछले हफ्ते पीटर नवारो ने एक्स पर कई पोस्ट में यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ बताया और कहा कि भारत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ‘युद्धमशीन’ को फंड कर रहा है. उन्होंने भारत को एक ‘तेल लॉबी के हाथों में पड़ी लोकतांत्रिक लॉन्ड्री’ बताया और प्रधानमंत्री मोदी की भगवा वस्त्रों मेंतस्वीर भी पोस्ट की. भारत ने नहीं तोड़ा कोई नियमपुरी ने इसका जवाब दिया कि ईरान या वेनेजुएला की तरह रूसी तेल पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं है उन्होंने लिखा, रूसी तेल पर जी-7 और यूरोपीयसंघ की ओर से एक मूल्य सीमा व्यवस्था लागू की गई है, जिसका उद्देश्य तेल की आपूर्ति को चालू रखना और रूस की आय सीमित करना है. ऐसे 18 पैकेज लाए गए हैं और भारत ने सभी का पालन किया है.पुरी ने जोर देकर कहा कि भारत का हर लेन-देन वैध है उन्होंने बताया कि भारत ने कानूनी जहाजरानी (शिपिंग), बीमा, प्रमाणित व्यापारियों और जांचे-परखे चैनलों के जरिए ही व्यापार किया है भारत ने कोई नियम नहीं तोड़ा है, बल्कि वैश्विक बाजार को स्थिर किया है और कीमतों को बढ़ने से रोका है.

दिल्ली विधानसभा में पहले अध्यक्ष चरती लाल गोयल की 98वीं जयंती पर श्रद्धांजलि सभा

दिल्ली विधानसभा में एक खास कार्यक्रम का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम दिल्ली विधानसभा के पहले अध्यक्ष चरती लाल गोयल की 98वीं जयंतीपर उनकी याद में रखा गया। इस मौके पर कई बड़े नेता, मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक और सामाजिक कार्यकर्ता एकत्रित हुए। सभी ने मिलकरगोयल जी को श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्श जीवन को याद किया। किरेन रिजिजू ने क्या कहा?केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आजकल संसद और विधानसभा में बहस का स्तर गिर गया है। कईबार नेता केवल राजनीति का फायदा लेने के लिए भाषण देते हैं, जिससे चर्चा की गुणवत्ता खराब हो जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में चरतीलाल गोयल जैसे नेताओं को याद करना बहुत ज़रूरी है। गोयल जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि लोकतंत्र में संवाद, ईमानदारी और सम्मान हमेशाटकराव और अविश्वास से ऊपर होना चाहिए। रिजिजू जी ने यह भी बताया कि गोयल जी ने अपनी सादगी और मेहनत से राजनीति में सम्मान पाया।उन्होंने अनुशासन और निष्पक्षता से दिल्ली विधानसभा को 1993 में सफलतापूर्वक चलाया। सबसे बड़ी बात यह थी कि उन्होंने चुनावी राजनीति सेखुद ही दूरी बना ली और सिर्फ लोकसेवा में लगे रहे। यह आज की राजनीति में बहुत दुर्लभ उदाहरण है। स्मारिका का विमोचनकार्यक्रम के दौरान चरती लाल गोयल के जीवन पर आधारित एक विशेष स्मारिका (पुस्तक) भी जारी की गई। इस किताब में उनके जीवन, विचारोंऔर कामों का उल्लेख किया गया है। हर्ष मल्होत्रा की यादेंकेंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि गोयल जी जनता की समस्याओं को बहुत ध्यान से सुनते थे। उन्होंने 1995-96 की एकघटना बताई, जब वे दिल्ली प्रिंटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष थे। उस समय छोटे उद्योगों का मुद्दा उठाया गया था। गोयल जी ने तुरंत उनकी बात सुनीऔर संबंधित मंत्री से मीटिंग कराई। इसके बाद बवाना इंडस्ट्रियल एरिया की स्थापना हुई। मल्होत्रा ने कहा कि यह उनकी दूरदर्शिता और जनसेवा कीभावना थी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का संदेशदिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी गोयल जी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि गोयल जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि विधानसभा या संसदको चलाते समय शिष्टाचार, सम्मान और रचनात्मक संवाद ज़रूरी है। उन्होंने कहा, गोयल जी का आचरण ऐसा था कि उनके विरोधी भी उनका सम्मानकरते थे। हमें भी राजनीति में ऐसा ही आचरण अपनाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता का संबोधनविधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि गोयल जी को याद करना केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह अवसर हमें जनसेवा और लोकतांत्रिकमूल्यों को दोहराने का मौका देता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली विधानसभा का इतिहास बहुत पुराना है। पहले 1912 में केंद्रीय विधान परिषद थी औरउसमें गोपालकृष्ण गोखले, मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय और बिपिनचंद्र पाल जैसे नेता शामिल थे। 1993 में जब दिल्ली विधानसभाबनी, तब गोयल जी इसके पहले अध्यक्ष बने और उन्होंने इसे सम्मान और अनुशासन के साथ चलाया। विजय गोयल की भावनाएँपूर्व केंद्रीय मंत्री और गोयल जी के बेटे विजय गोयल ने अपने पिता को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता का जीवन सादगी, अनुशासन औरनिस्वार्थ सेवा का प्रतीक था। उन्होंने कई किस्से सुनाए –जैसे चुनाव टिकट से जुड़े हास्यपूर्ण और भावनात्मक अनुभव। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम हमेंमाता-पिता और उनके मूल्यों को हमेशा याद रखने की प्रेरणा देता है। अन्य नेताओं की श्रद्धांजलिइस मौके पर कई वरिष्ठ नेताओं ने भी अपनी श्रद्धांजलि दी। इनमें लाल बिहारी तिवारी, आलोक कुमार, राम भज, किरण वालिया, रमाकांत गोस्वामीऔर मुकेश शर्मा शामिल थे। सभी ने कहा कि गोयल जी की ईमानदारी और सादगी आज भी प्रेरणा देती है। चरती लाल गोयल की 98वीं जयंती कायह कार्यक्रम वास्तव में एक लोकतांत्रिक उत्सव था। इसमें नेताओं ने उनकी ईमानदारी, सादगी, अनुशासन और जनसेवा की भावना को याद किया। सभी ने मिलकर यह संकल्प लिया कि दिल्ली विधानसभा को हमेशा मर्यादा, सम्मान और रचनात्मक संवाद की भावना से चलाया जाएगा। ताकिजनता का विश्वास लोकतंत्र पर हमेशा बना रहे।

दिल्ली चुनाव में कांग्रेस ने BJP को जिताने के लिए लड़ा चुनाव – सौरभ भारद्वाज

दिल्ली की राजनीति को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने कांग्रेस और बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहाकि दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पूरी ताक़त अपनी जीत पर नहीं लगाई, बल्कि उसकी पूरी रणनीति इस बात पर केंद्रित थी कि कैसे आमआदमी पार्टी को हराया जाए और बीजेपी को फ़ायदा पहुँचाया जाए। वोट कटवाने और फ़र्ज़ी वोट जोड़ने का आरोपसौरभ भारद्वाज ने कहा कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में हजारों वोटर लिस्ट से नाम कटवा दिए गए और बड़ी संख्या में फ़र्ज़ी वोट भी जोड़ दिए गए।इस मामले पर आम आदमी पार्टी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की, सबूत दिखाए और चुनाव आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई। लेकिन कांग्रेस की ओर से न तोकोई बयान आया और न ही इस गड़बड़ी पर सवाल उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को इस गड़बड़ी से कोई दिक़्क़त नहीं थी, क्योंकिइसका फ़ायदा बीजेपी को हो रहा था। राहुल गांधी की चुप्पी पर सवालAAP नेता ने राहुल गांधी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने वोट चोरी को लेकर बाद में प्रेस कॉन्फ़्रेंस की, लेकिन आम आदमीपार्टी इस मुद्दे को दिसंबर से ही उठा रही थी। जब दिल्ली के चुनाव चल रहे थे, तब राहुल गांधी चुप रहे और कांग्रेस ने कोई आवाज़ नहीं उठाई। इससेसाफ़ है कि कांग्रेस का इरादा वोट की धांधली रोकने का नहीं था। चंदे और चुनावी फंड का अंतरसौरभ भारद्वाज ने चुनावी चंदे के मामले में भी कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी को नकद चंदे में सिर्फ ₹2000 मिले, जबकि कांग्रेस को चुनाव के दौरान करीब ₹44 करोड़ का चंदा मिला। नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति से केवल ₹2000 तक नकद चंदा लिया जासकता है। इसके बावजूद कांग्रेस ने करोड़ों रुपये जुटा लिए और सरकार ने इसकी कोई जांच नहीं कराई। उन्होंने सवाल किया कि आख़िर इतनी बड़ीरकम कांग्रेस तक कैसे पहुँची और सरकार ने इसे नज़रअंदाज़ क्यों किया? कांग्रेस का असली मक़सद – AAP को रोकनाAAP नेता ने दावा किया कि कांग्रेस ने चुनाव में अपना लक्ष्य साफ़ कर लिया था AAP को हराना है, चाहे इसके लिए बीजेपी को जिताना पड़े।उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने दिल्ली कांग्रेस को साफ़ निर्देश दिया था कि किसी भी हाल में आम आदमी पार्टी को जीतने से रोकना है।सौरभ भारद्वाज के अनुसार, कांग्रेस का मक़सद सत्ता में आना नहीं था। वह केवल इस बात पर ध्यान दे रही थी कि बीजेपी को मज़बूती मिले औरAAP कमजोर हो। करोड़ों खर्च लेकिन नतीजा शून्यउन्होंने बताया कि कांग्रेस ने दिल्ली चुनाव प्रचार पर ₹46 करोड़ से ज़्यादा खर्च किया। पोस्टर, रैलियाँ, विज्ञापन – हर जगह पैसा लगाया गया।लेकिन नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला और पार्टी शून्य सीटों पर सिमट गई।सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जनता समझ गई थी कि कांग्रेस चुनाव लड़ भी रही है तो सिर्फ दिखावे के लिए, असल में उसका मक़सद बीजेपी कोफ़ायदा पहुँचाना था। कांग्रेस और बीजेपी की मिलीभगत का आरोपसौरभ भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस जिस तरह से चुनाव लड़ी, उससे साफ़ दिखता है कि उसकी असली लड़ाई AAP से थी। बीजेपी को रोकने का नामलेने वाली कांग्रेस, असल में बीजेपी को ही मज़बूत करने में लगी थी। उन्होंने दावा किया कि यह मिलीभगत दिल्ली की जनता के सामने खुल चुकी हैऔर यही कारण है कि लोग कांग्रेस से पूरी तरह दूर हो गए सौरभ भारद्वाज के इन बयानों से दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर बहस छिड़ गई है।उन्होंने साफ़ कहा है कि कांग्रेस अब जनता की पार्टी नहीं रह गई, बल्कि उसका पूरा ध्यान बीजेपी को फ़ायदा पहुँचाने और आम आदमी पार्टी कोरोकने पर है।