महिला वर्ल्ड कप विजेता टीम से मिले PM मोदी, खिलाड़ियों संग हंसी-मजाक, लड्डू और ‘भेल’ ने लूटा दिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को महिला वनडे विश्व कप जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय टीम से मुलाकात की। इसका पूरा वीडियो नरेंद्र मोदीके ट्विटर हैंडल से गुरुवार को जारी किया गया। वीडियो के अंत में पीएम मोदी चैंपियन टीम इंडिया के सभी खिलाड़ियों और कोच को लड्डू बांटतेदिखे। इसका वीडियो खूब वायरल हो रहा है और इस दौरान पीएम मोदी ने जो बात कही उसे लोग खूब पसंद कर रहे हैं। दरअसल, वीडियो के आखिरमें पीएम मोदी ने चैंपियंस को मिठाई खिलाई। लड्डू बांटने के दौरान पीएम मोदी ने डीएसपी दीप्ति शर्मा और जेमिमा को लड्डू लेने के किए कहा। फिरखिलाड़ियों से पूछा कि ‘अभी तो टीम वाले खाने के लिए रोंकेगे तो नहीं?’ इस पर स्मृति मंधाना ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘पहली बार खा रहे हैंमिठाई।’इस पर पीएम मोदी ने कहा, ‘आप सभी के लिए भेल आई है।’ इस पर मंधाना ने कहा, ‘भेल बहुत पसंद है।’ फिर पीएम मोदी ने कहा, ‘दीप्तिके लिए पनीर है। भिंडी के साथ नहीं है।’ इस पर खिलाड़ी हंसने लगे। इसके बाद पीएम मोदी ने भारतीय टीम के स्टाफ और बीसीसीआई अध्यक्षमिथुन मनहास को भी संबोधित किया। लोगों का अभिनंदन स्वीकार करतेफिर स्नेह राणा कहती हैं, ‘जब महत्वपूर्ण मैच होता है तो उससे एक दिन पहले नींद नहीं आती है। हम वही बात कर रहे थे।’ इस पर पीएम मोदी नेचुटकी लेते हुए कहा, ‘परीक्षा में जाने वाले बच्चों का भी यही हाल है।’ इस पर स्नेह और रेणुका हंसने लगीं। फिर मंधाना पीएम मोदी से पूछती हैं, ‘आपको इतना सबकुछ याद कैसे रहता है।’ इस पर पीएम कहते हैं, ‘मैं वर्तमान में जीता हूं।’ इसके बाद पीएम ने खिलाड़ियों को खाना लेने में भी मददकी। प्रतिका खाने में कुछ लेना चाह रही थीं, तो पीएम मोदी वहां पहुंचे और उन्होंने प्रतिका से पूछा- आपको कोई कुछ दे नहीं रहा न? क्या पसंद हैआपको? इसके बाद पीएम वहां मौजूद डिश में से एक डिश उठाकर प्रतिका को देते हैं। प्रतिका उनका आभार भी व्यक्त करती हैं। इस पर पीएमकहते हैं, ‘देखिए मैं दे रहा हूं, लेकिन ये आपको पसंद है कि नहीं है?’ इस पर सब कहते हैं, पसंद है। इसके बाद पीएम सभी लोगों का अभिनंदनस्वीकार करते हैं और वहां से चले जाते हैं। यह वीडियो खूब पसंद किया जा रहा है।
कर्नाटक में विवाद भाजपा सांसद बोले राष्ट्रगान ब्रिटिश स्वागत गीत, प्रियांक खरगे ने बताया बकवास

कर्नाटक में एक भाजपा सांसद ब्रिटिश अधिकारी के स्वागत में लिखा गया था। भाजपा सांसद के इस दावे पर विवाद हो गया है। कांग्रेस नेता औरकर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने भाजपा सांसद के इस बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे पूरी तरह बकवास और आरएसएस का व्हाट्सएपइतिहास का ज्ञान बताया। कर्नाटक से भाजपा सांसद विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने होन्नावर में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य मेंआयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि देश का राष्ट्रगान ब्रिटिश अधिकारी का स्वागत करने के लिए लिखा गया था। उत्तर कन्नड़ से भाजपा सांसदने तर्क दिया कि वंदे मातरम को ज्यादा अहमियत दी जानी चाहिए, और ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ दोनों का दर्जा बराबर है। वंदे मातरम हर किसी तक पहुंचना चाहिएउन्होंने कहा, ‘मैं इतिहास में नहीं जाना चाहता। वंदे मातरम को राष्ट्रगान बनाने की जोरदार मांग थी, लेकिन हमारे पूर्वजों ने तब वंदे मातरम के साथ-साथ जन गण मन को भी रखने का फैसला किया, जिसे ब्रिटिश अधिकारी का स्वागत करने के लिए बनाया गया था। हमने इसे स्वीकार कर लिया हैऔर हम इसका पालन कर रहे हैं।’ कागेरी ने कहा, ‘इस 150वें साल में, वंदे मातरम हर किसी तक पहुंचना चाहिए, यह स्कूलों, कॉलेजों, युवाओं औरआम लोगों तक पहुंचना चाहिए।’ पहला छंद जन गण मन बन गयाइस पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि भाजपा सांसद कागेरी दावा कर रहे हैं कि राष्ट्रगान ब्रिटिश है। यह पूरीतरह बकवास है। उन्होंने एक्स पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘एक और दिन, आरएसएस का एक और व्हाट्सएप इतिहास का ज्ञान। खरगे ने कहाकि रवींद्रनाथ टैगोर ने 1911 में भजन भारतो भाग्य विधाता लिखा था और इसका पहला छंद जन गण मन बन गया। यह राष्ट्रगान पहली बार 27 दिसंबर, 1911 को कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गाया गया था, शाही सम्मान के तौर पर नहीं।’ उन्होंने कहा, “टैगोर ने 1937 और 1939 मेंयह भी साफ किया था कि यह भारत के भाग्य विधाता की जय-जयकार करता है, और यह कभी भी जॉर्ज पंचम, जॉर्ज षष्ठम, या कोई और जॉर्ज नहींहो सकता।’
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं, 2014 से कारोबारी सुधारों की नई कहानी लिखी गई, अब भारत को चाहिए विश्वस्तरीय बैंक

2014 से कारोबार को आसान बनाने के लिए अनगिनत क्रांतिकारी सुधार किए गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय स्टेट बैंक के एककार्यक्रम में यह बात कही है। इस दौरान वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा वैश्विक मूल्य शृंखला विघटनकारी दौर से गुजर रही है। ऐसे में बुनियादी ढांचे केनिर्माण पर सरकार का मुख्य ध्यान है। पिछले कुछ वर्षों में पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एसबीआई के एककार्यक्रम में कहा कि वैश्विक चुनौतियां प्रमुख होती जा रही हैं; वैश्विक संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं। वित्त मंत्री ने कहा, “सरकार ने प्रत्यक्ष लाभहस्तांतरण के माध्यम से 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत की; पिछले दशक में 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकालागया।” वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार प्रौद्योगिकी आधारित विकास पर जोर दे रही है। डेटा की लागत 2014 में 300 रुपये प्रति जीबी सेघटकर 10 रुपये प्रति जीबी हो गई है। इंडिया में एकीकरण कर दिया गयावित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि देश को बड़े और विश्वस्तरीय बैंकों की जरूरत है। इस बारे में रिजर्व बैंक और दूसरेबैंकों से बातचीत चल रही है। 12वें एसबीआई बैंकिंग और इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2025 में बोलते हुए हुए सीतारमण ने ऋणदाताओं से उद्योग केलिए ऋण प्रवाह को गहरा और व्यापक बनाने के लिए कहा। वित्त मंत्री ने भरोसा जताते हुए कहा कि जीएसटी दर में कटौती से बढ़ी मांग एक बेहतरनिवेश का सिलसिला शुरू करेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को बड़ी संख्या में विश्वस्तरीय बैंकों की जरूरत है। उन्होंने कहा, “सरकार इस पर विचारकर रही है और काम शुरू हो चुका है। हम आरबीआई के साथ चर्चा कर रहे हैं। हम बैंकों के साथ चर्चा कर रहे हैं।” निजीकरण की प्रक्रिया के तहतसरकार ने जनवरी 2019 में आईडीबीआई बैंक में अपनी 51 प्रतिशत नियंत्रणकारी हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को बेच दीथी। 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का पंजाब नेशनल बैंक में विलय कर दिया गया; सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में विलय कर दिया गया; इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय कर दिया गया; और आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंकका यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में एकीकरण कर दिया गया। देश में बैंकों की कुल संख्या 2017 के 27 से घटकर 12 हो गईइसके बाद, सरकार और एलआईसी ने आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री की योजना की घोषणा की। अक्तूबर 2022 मेंदोनों शेयरधारकों ने कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के लिए निवेशकों से रुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रितकिए थे। इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। जनवरी 2023 में दीपम को आईडीबीआईबैंक के लिए कई ईओआई प्राप्त हुए। सेबी ने अगस्त 2025 में आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक विनिवेश पूरा होने पर बैंक के प्रमोटर से सार्वजनिकशेयरधारक के रूप में जीवन बीमा निगम के पुनर्वर्गीकरण को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा, सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकरण भीकिया। बैंकिंग क्षेत्र में सबसे बड़े एकीकरण की पहल करते हुए सरकार ने अगस्त 2019 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के चार बड़े विलय की घोषणा कीथी। इससे देश में बैंकों की कुल संख्या 2017 के 27 से घटकर 12 हो गई।
दिल्ली की हवा में ज़हर, सांसों पर भार शशि थरूर बोले, ‘नवंबर में फेफड़ों पर परफॉरमेंस का बोझ बढ़ेगा

सर्दियों का मौसम दिल्ली में दोहरी चुनौती लेकर आता है। इसी मौसम से ठीक पहले दीपावली जैसे त्योहार में होने वाली आतिशबाजी भी दिल्ली कीवायु गुणवत्ता पर नकारात्मक असर डालती है। गत दिनों 20 अक्तूबर को दीपावली पर हुई आतिशबाजी के बाद दिल्ली का एक्यूआई खतरनाक स्तरपर है। वायु गुणवत्ता खराब होने के कारण दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों को सांस से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इस जटिलचुनौती के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तंज कसते हुए कहा, प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारण नवंबर में फेफड़े पर प्रदर्शन का दबाव और बढ़ेगा।आम तौर पर अपनी कठिन अंग्रेजी शब्दावली को लेकर चर्चा में रहने वाले थरूर ने लगातार बिगड़ती दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता को लेकरएक्स हैंडल पर कटाक्ष किया। इस बार हिंदी भाषा में जारी बयान में थरूर ने लिखा, ‘जैसे-जैसे नवंबर का महीना चढ़ेगा, फेफड़ों पर परफॉरमेंस काबोझ बढ़ेगा!’ उन्होंने ये टिप्पणी छह नवंबर की सुबह 10 बजे की एक्यूआई की स्थिति को लेकर की। शिकायत लेकर आ रहेगुरुवार को दिल्ली में धुंध भरी सुबह और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘खराब’ और ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड(CPCB) ने इस पर चिंता जताई है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक शाम तक एक्यूआई खराब होकर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में जाने की आशंकाहै। डॉक्टरों का कहना है कि प्रदूषण के कारण दिल्ली के अस्पतालों में सांसद लेने में तकलीफ की शिकायत करने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।डॉक्टरों ने ब्रोंकाइटिस, अस्थना, साइनसाइटिस के मामलों में 22 से 25 फीसद तक उछाल आने की चेतावनी दी है। वायु प्रदूषण के कारण सेहत परहोने वाले असर को लेकर समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए पीजीआईएमईआर के प्रोफेसर डॉ पुलिन गुप्ता ने बताया, कई मरीज’साइनसाइटिस, नाक बहना, नाक से खून आना, सूखापन, आंखों से पानी आना, आंखों का लाल होना और नजर धुंधली होने’ की शिकायत लेकर आरहे हैं। एहतियातन मास्क का उपयोग करने की सलाह भी दी गईबता दें कि दिल्ली-एनसीआर में बृहस्पतिवार का में एक्यूआई घटने की खबर आई। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक एक्यूआई के आंकड़े में गिरावटदिल्ली की हवा साफ होने का संकेत नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में बीते लगभग ढाई हफ्ते से सांस लेने में हो रही परेशानी को लेकर विशेषज्ञों काकहना है कि वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के ठोस उपाय करने की जगह आंकड़ों का खेल किया जा रहा है। एक्यूआई के आंकड़े भले ही कमदिख रहे हैं, लेकिन दिल्ली की हवा अभी भी जहरीली है। डॉ पुलिन गुप्ता ने कहा, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज(सीओपीडी) या तपेदिक जैसी बीमारियों से पहले से ग्रस्त लोग प्रदूषण से जल्दी प्रभावित होते हैं, क्योंकि इनके अंग अत्यंत संवेदनशील होते हैं।हालात की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर के अधिकारियों ने इन इलाकों में रहने वाले लोगों- विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों से अपील की हैकि घर से बाहर निकलने से परहेज करें। घरों से बाहर निकलते समय एहतियातन मास्क का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है।
सैंडलवुड के दिग्गज अभिनेता हरीश राय नहीं रहे, गले के कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद ली अंतिम सांस

कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में तीन दशक से अपनी दमदार अदाकारी से पहचान बनाने वाले अभिनेता हरीश राय अब इस दुनिया में नहीं रहे। 63 वर्षीय हरीशलंबे समय से गले के कैंसर से जूझ रहे थे। इलाज के दौरान उन्होंने गुरुवार को अंतिम सांस ली। हरीश राय का फिल्मी सफर कन्नड़ सिनेमा के स्वर्णयुग से शुरू हुआ। 1990 के दशक में उन्होंने पहली फिल्म ‘ओम’ में काम किया था। इस फिल्म में उन्होंने ‘डॉन रॉय’ का किरदार निभाया था। वहीभूमिका जिसने उन्हें घर-घर मशहूर कर दिया। इसके बाद उन्होंने तमिल और कन्नड़, दोनों भाषाओं में कई फिल्मों में अलग-अलग किरदारों से अपनीपहचान बनाई। चाहे खलनायक की भूमिका हो या किसी पिता-पुत्र के इमोशनल सीन- हरीश ने हर बार अपनी उपस्थिति से दर्शकों को प्रभावितकिया। चेहरा पूरी तरह से मुरझाने लगापिछले कुछ वर्षों से हरीश गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे। कैंसर की वजह से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। इलाज के लिए उन्हें कई महंगेइंजेक्शन की जरूरत थी, जिनकी कीमत लाखों रुपये थी। आर्थिक तंगी के बीच, शिवराजकुमार, ध्रुव सरजा जैसे सितारों ने उनकी मदद के लिए हाथबढ़ाया। हरीश खुद कहा करते थे- ‘मैं हार नहीं मानूंगा, सबकी दुआओं से ठीक होकर फिर शूटिंग पर लौटूंगा।’ लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूरथा। इलाज के दौरान आईसीयू में भर्ती रहने के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं आया और उन्होंने बेंगलुरु के किदवई अस्पताल में अंतिम सांसली। बता दें आखिरी कुछ समय में हरीश राय का वजन काफी कम हो गया था। बीमारी के चलते उनका शरीर सूखता जा रहा था। उनका चेहरा पूरीतरह से मुरझाने लगा था। सिनेमा के इतिहास में अमर हो चुकेहरीश राय अपने पीछे पत्नी और एक बेटे को छोड़ गए हैं। उनके निधन की खबर ने पूरे सैंडलवुड को स्तब्ध कर दिया। सोशल मीडिया पर प्रशंसकोंऔर फिल्मी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। फैंस को विश्वास ही नहीं हो पा रहा है कि अब हरीश इस दुनिया में नहीं रहे। लंबे संघर्ष के बाद हरीश रायको फिर से लोकप्रियता मिली ‘केजीएफ: चैप्टर 1’ और ‘केजीएफ: चैप्टर 2’ के जरिए। निर्देशक प्रशांत नील और अभिनेता यश की इस ब्लॉकबस्टर मेंउन्होंने निभाया था ‘चाचा’ का किरदार- एक मजबूत, वफादार और संवेदनशील इंसान, जो रॉकी भाई के बेहद करीब था। यह भूमिका उनके करियर कीदूसरी पारी साबित हुई और दर्शकों ने उन्हें खुले दिल से अपनाया। करीब 30 वर्षों तक हरीश ने 60 से अधिक फिल्मों में काम किया। ‘राज बहादूर’, ‘भूगत’, ‘नन्ना कनसिना हुवे’, ‘संजू वेड्स गीता’, ‘स्वयंवर’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों को खूब सराहा गया। हर भूमिका में उन्होंने अपनी सहजताऔर सच्चाई से जान डाल दी। आज जब हरीश राय हमारे बीच नहीं हैं, तो उनके निभाए किरदार उनकी सबसे बड़ी विरासत हैं। ‘ओम’ का वो डॉन और‘केजीएफ’ का चाचा- दोनों अब सिनेमा के इतिहास में अमर हो चुके हैं।