सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर उत्तर पश्चिम दिल्ली में निकलेगा यूनिटी मार्च , सांसद योगेन्द्र चंदोलिया ने की घोषणा

दिल्ली भाजपा के महामंत्री और उत्तर पश्चिम दिल्ली से सांसद श्री योगेन्द्र चंदोलिया ने आज एक प्रेस कॉन्फ़्रेन्स के माध्यम से उत्तर पश्चिम लोक सभाक्षेत्र में सदर वल्लभ भाई पटेल के जन्म जयंती के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में निकाले जाने वाले यूनिटी मार्च की जानकारी दी। प्रेस कांफ्रेंस मेंमुख्य रूप से जिलाध्यक्ष श्री विनोद सहरावत और जिला उपाध्यक्ष श्री मेवा राम राठौर और दिल्ली भाजपा प्रवक्ता श्री शुभेन्दू शेखर अवस्थी आदिसम्मलित हुए। योगेन्द्र चंदोलिया ने कहा कि खेल मंत्रालय के निर्देशानुसार और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में यूनिटी मार्च का आयोजनकिया गया है। हर लोकसभा के अंतर्गत तीन पद यात्राओं का प्रावधान भारत सरकार द्वारा किया गया है जिसमे अधिकारी, स्कूल के बच्चों औरएनसीसी कैडेट के साथ अन्य लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। पदयात्रा निकाली जाएगीउत्तर पश्चिम लोकसभा क्षेत्र में तीन पदयात्रा निकाली जाएगी उसमे दो पदयात्रा उत्तर पश्चिम जिला में और एक पदयात्रा बाहरी दिल्ली जिले मेंआयोजित की जाएगी। 15 नवंबर को नरेला और 16 नवंबर को बाहरी दिल्ली में पदयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इन यात्राओं के माध्यम से देशमें हम सब एक यूनिट है इसका संदेश हम देंगे। इस यात्रा के माध्यम से पटेल जी का संदेश घर घर पहुँचाने का काम करेंगे। चंदोलिया ने कहा किआत्मनिर्भर भारत की बातचीत भी हम स्टूडेंट्स से बातचीत के माध्यम से करेंगे। स्वच्छता अभियान और पौधा रोपण का कार्यक्रम भी किया जाएगा। हुए दोहरा मापदंड के शिकार को उजागर करतेयोगेन्द्र चंदोलिया ने कहा कि देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के साथ हुए दोहरा मापदंड के शिकार को उजागर करते हुए कहा किवास्तव में सरदार वल्लभ भाई पटेल को उस वक्त का प्रधानमंत्री होना चाहिए लेकिन राजनीतिक के वे शिकार हो गए। उन्होंने कहा कि सरदार पटेलगृहमंत्री के नाते अपने सम्पूर्ण योग्यता का परिचय दिया। 500 से अधिक रियासतें जो भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के साथ अलग रहना चाहते थेलेकिन अपनी कूटनीति की दक्षता के कारण सरदार वल्लभभाई पटेल ने उन रियासतों को अपने साथ जोड़ने का काम किया।
AAP MP Sanjay Singh Launches 13-Day ‘Rozgar Do, Samajik Nyay Do’ Padyatra from Ayodhya to Prayagraj, Demands Jobs and Justice for All

Resounding call of “Rozgar Do, Samajik Nyay Do,” AAP Rajya Sabha MP and Uttar Pradesh Prabhari Sanjay Singh on Wednesday embarked on a padyatra from the banks of the Saryu in Ayodhya to the Sangam in Prayagraj. The march, beginning with the aarti of Maa Saryu at the sacred Naya Ghat, marks a powerful campaign […]
दिल्ली कार ब्लास्ट जांच में बड़ी सफलता, लखनऊ से परवेज अंसारी के ठिकाने पर छापेमारी, मोबाइल और डिजिटल सबूत बरामद

दिल्ली के लालकिले के पास हुआ भयानक विस्फोट, दरअसल आतंक की एक बड़ी साज़िश के ढहने की आखिरी आवाज थी। जिसने सबको हिलाकररख दिया. अभी भी लोग देहशत में है. लोगों के मन में तमाम तरह के सवाल है लेकिन फिलहाल इस हादसे को लेकर दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच मेंराष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अब बड़ी सफलता हासिल की है। जांच के दायरे को और व्यापक बनाते हुए एजेंसियों ने लखनऊ में संदिग्ध परवेजअंसारी के ठिकाने पर छापेमारी की है। लखनऊ में हुई इस छापेमारी में परवेज अंसारी के घर से 6 मोबाइल फोन, एक इंटरनेशनल कार्ड, सिग्नलट्रेसिंग से बचने के लिए खास सिस्टम, कंप्यूटर और सीक्रेट डिस्क बरामद हुए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि इन मोबाइल फोन और डिजिटलउपकरणों के जरिए परवेज अंसारी देश के बाहर सक्रिय संपर्क में था। जांच अधिकारियों का मानना है कि बरामद डिस्क और कंप्यूटर में कई ऐसे अहमसबूत मौजूद हो सकते हैं, जो दिल्ली कार ब्लास्ट की साजिश और इसके पीछे काम कर रहे आतंकियों के नेटवर्क को उजागर कर सकते हैं। एजेंसियांइन डिजिटल उपकरणों का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क को पकड़ा जा सके। नए सुराग को गंभीरता से लेकर जांच कर रहीसुरक्षा एजेंसियां इस मामले में लगातार सतर्क हैं। दिल्ली और आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। शुरुआती जांच में यह भी पताचला है कि परवेज अंसारी ने सिग्नल ट्रेसिंग से बचने के लिए विशेष तकनीकी सिस्टम का इस्तेमाल किया था, ताकि उसकी बातचीत और गतिविधियोंको पकड़ना मुश्किल हो। जांच के दौरान बरामद मोबाइल, कंप्यूटर और डिस्क से मिलने वाले सबूत इस मामले की गुत्थी सुलझाने में अहम साबित होसकते हैं। इसके अलावा, इंटरनेशनल कार्ड से यह संकेत भी मिलता है कि परवेज अंसारी और उसका नेटवर्क देश-विदेश में सक्रिय था। दिल्ली कारब्लास्ट की जांच अभी जारी है और एजेंसियां हर नए सुराग को गंभीरता से लेकर जांच कर रही हैं। जैसे ही इस मामले में नई जानकारी सामने आती है,
बिहार विधानसभा चुनाव 2025, तेजस्वी यादव ने महागठबंधन की जीत का दावा किया, बदलाव के पक्ष में मतदान को बताया निर्णायक

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर जारी एग्जिट पोल भले ही अलग-अलग नतीजे दिखा रहे हों, लेकिन महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरातेजस्वी यादव ने सरकार बनने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने इस बार पूरी मजबूती से बदलाव के पक्ष में मतदान किया है औरमहागठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने जा रहा है। तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘बिहार की जनता का आशीर्वाद हमें मिल चुका है।आप लोग मेरी बात लिख लीजिए, 14 नवंबर को मैं मुख्यमंत्री बनने जा रहा हूं।’ उन्होंने आगे कहा कि इस बार लोगों का उत्साह और समर्थन 1995 से भी बेहतर देखने को मिला है। जनता ने भारी मतदान कर मौजूदा सरकार के खिलाफ वोट दिया है। यह जनता का स्पष्ट जनादेश है कि अब बिहार मेंबदलाव तय है। महागठबंधन के नेता ने कहा कि वे सबसे पहले सभी सहयोगी दलों, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का दिल से आभार व्यक्त करते हैंजिन्होंने लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर भाग लिया। तेजस्वी ने कहा कि लोगों ने बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट दिया हैऔर आने वाला परिणाम बिहार की नई दिशा तय करेगा। स्पष्ट रूप से बदलाव के पक्ष में मतदान कियातेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल पर कहा, “हमने पहले भी कहा था कि 14 तारीख को नतीजे होंगे और 18 को शपथ ग्रहण होगा। यह निश्चित तौर परहोने जा रहा है, भाजपा और NDA के पसीने छूट रहे हैं। वे लोग बौखलाहट में हैं और बेचैन हैं। कल वोटिंग के दौरान लोग बड़ी कतारों में खड़े थे।लोग खड़े रहे और एग्जिट पोल आता है यानी मतदान अभी खत्म नहीं हुआ कि एग्जिट पोल आ गया। इस तरह के सर्वे को लेकर हम न किसीखुशफहमी में रहते हैं और न ही गलत फहमी में रहते हैं। ये सर्वे केवल मनोवैज्ञानिक तौर पर जितने भी अधिकारी चुनाव में लगे हुए हैं, उनके दबाव मेंलाया गया है।” तेजस्वी यादव ने आगे कहा, “2020 की अगर तुलना इस बार से की जाए तो 72 लाख लोगों ने ज्यादा मतदान किया है। यह काफीबड़ा आंकड़ा है और हर विधानसभा में वोट बढ़े हैं। यह मत बदलाव के लिए पड़े हैं। सरकार बदलने जा रही है।” बिहार विधानसभा चुनाव 2025 कोलेकर महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि जनता ने इस बार स्पष्ट रूप से बदलाव के पक्ष में मतदान कियाहै।
दिल्ली लाल किला धमाका, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, ब्लास्ट वेव से मृतकों के फेफड़े और आंतें फटे, कानों के पर्दे भी हुए नुकसान

दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार धमाके में मारे गए लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है। मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिलदहलाने वाली है। रिपोर्ट में सामने आया है कि मृतकों के फेफड़े और आंतें तक फट गईं। इसके अलावा कानों के पर्दे भी फटे मिले हैं। बताया तो यहांतक भी जा रहा है कि मृतक उड़कर दीवार में टकरा गए थे। ब्लास्ट में मारे गए लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने झकझोर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई शवों में हड्डियां टूटने, फेफड़ों, पेट के अंदरूनी हिस्सों में ब्लास्ट वेव से नुकसान हुआ है। कई के सिर पर गहरी चोट भी मिली है। धमाके से मृतकोंके कान के पर्दे फट गए। रिपोर्ट से साफ है कि धमाका बेहद भीषण हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाकेकी तीव्रता इतनी अधिक रही कि ब्लास्ट वेव से कई लोगों के कान के पर्दे, फेफड़े और आंतें फट गईं। दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज केफोरेंसिक विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ शवों में फेफड़ों, कान और पेट के भीतर ब्लास्ट वेव से नुकसान के संकेत मिले हैं, जोयह दर्शाते हैं कि धमाका अत्यंत नजदीक से हुआ। किसी भी विस्फोट के समय अत्यधिक दाब और तापमान से उत्पन्न गैसीय लहर को ब्लास्ट वेवकहते हैं। गहरे घावों या अत्यधिक रक्तस्त्रावफोरेंसिक विशेषज्ञ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिल रहे हैं कि धमाके में संभवत कोई नया या संशोधित विस्फोटक इस्तेमाल किया गया है।विशेषज्ञ के मुताबिक छर्रे से पेनेट्रेटिंग, लेंसरेटिंग घाव और हेमोरेजिक शॉक पैटर्न पर ज्यादा जोर नहीं है लेकिन घाव दर्शाते हैं कि धमाका उच्च तीव्रताका था। विशेषज्ञ ने कहा कि अमोनियम नाइट्रेट से अलग चोटें नहीं होती। फर्क बस फोरेंसिक रेसिड्यू और रसायन शास्त्रीय विश्लेषण से आता है।विशेषज्ञ ने कहा कि लाल किले के पास हुआ धमाका सामान्य है या किसी विस्फोटक से जुड़ा है, इसकी थ्योरी कई हैं, लेकिन अंतिम रिपोर्ट जांचएजेंसियों पर निर्भर है। हालांकि फोरेंसिक स्तर पर मौत का प्राथमिक कारण ब्लास्ट वेव यानी विस्फोट की लहर से हुईं आंतरिक चोटें, छरें या धातु केटुकड़ों से हुए गहरे घावों या अत्यधिक रक्तस्त्राव, शॉक या फिर जलने के आधार पर जांचा जाता है। हालांकि कुछ शवों की स्थिति ऐसी थी कि सभीअंगों की विस्तृत जांच संभव नहीं हो पाई। आईईडी का इस्तेमाल नहीं किया गयाएजेंसियां जांच पूरी होने तक इसे आत्मघाती हमला नहीं मान रही। अधिकारियों ने बताया, आशंका है कि उमर गिरफ्तारी के डर से भागा था, बौखलाहट व घबराहट में विस्फोट हुआ। हालांकि यह जांच के बाद ही पता चलेगा कि पूर्वनियोजित आत्मघाती हमला था या दुर्घटनावश ऐसा हुआ।उमर कार में विस्फोटक, संभवतः अमोनियम नाइट्रेट ले जा रहा था। पुलिस की शुरुआती जांच में विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट, ईंधन तेल औरडेटोनेटर के इस्तेमाल की आशंका है। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, एनसीआर से लेकर जम्मू-कश्मीर में पुलिस ने आतंकी मॉड्यूलपर कार्रवाई की थी, जिससे उमर डर गया था। सुरक्षा एजेंसियों के धमाके को आत्मघाती हमला नहीं मानने के पीछे तर्क है कि उमर ने कार से सीधेटक्कर नहीं मारी, जैसा कि आत्मघाती हमलावर करते हैं। बम भी पूरी तरह विकसित नहीं था। धमाके से मौके पर कोई गड्ढा भी नहीं हुआ। कोई छर्रे याधातु की कोई अन्य वस्तु भी नहीं बरामद हुई। धमाके के समय कार चल रही थी। आईईडी का इस्तेमाल नहीं किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी का भूटान दौरा भारत-भूटान साझेदारी मजबूत, 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-2 जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन

प्रधानमंत्री मोदी भूटान दौरे पर हैं और बुधवार को उनके भूटान दौरे का दूसरा दिन है। बुधवार को पीएम मोदी ने भूटान के चौथे राजा द्रुक ग्यालपो जिग्मेसिंग्ये वांगचुक के साथ द्विपक्षीय बैठक में शिरकत की और दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत करने पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने बुधवार को थिम्फू मेंभूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के साथ ‘कालचक्र अभिषेक’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने मुलाकात के बाद सोशलमीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि ‘नेपाल के चौथे राजा द्रुक ग्यालपो के साथ एक अद्भुत बैठक हुई। भारत-भूटान संबंधों को और मजबूत करनेके लिए पिछले कुछ वर्षों में उनके व्यापक प्रयासों की सराहना की। ऊर्जा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी में सहयोग पर चर्चा हुई। गेलेफूमाइंडफुलनेस सिटी परियोजना की प्रगति की सराहना की, जो हमारी एक्ट ईस्ट नीति के अनुरूप है। विकसित सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाभूटान के राजा ने आधिकारिक बयान जारी कर दिल्ली विस्फोट में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जाहिर की है। साथ ही घटना में घायल हुएलोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। भारत सरकार ने भूटान सरकार के इस समर्थन और एकजुटता की तारीफ की। प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिकप्रोत्साहन कार्यक्रम सहित भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना के प्रति भारत के समर्थन की पुष्टि की और भूटान को उसकी प्रमुख विकास प्राथमिकताओंको हासिल करने और सभी क्षेत्रों में सतत विकास को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से मदद करने का आश्वासन दिया।प्रधानमंत्री मोदी और भूटान नरेश ने मंगलवार को 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-2 जलविद्युत परियोजना का भी उद्घाटन किया। भूटान सरकार नेकहा कि यह परियोजना जलविद्युत के क्षेत्र में भूटान और भारत के बीच दोस्ती और सहयोग का सबूत है। उन्होंने पुनात्सांगछू-2 से भारत को बिजली केनिर्यात की शुरुआत का स्वागत किया। भारत और भूटान के बीच 1200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना के मुख्य बांध ढांचे पर कामफिर से शुरू करने के संबंध में सहमति बनी है। पूरा होने पर, पुनात्सांगछू-I दोनों सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित सबसे बड़ी जलविद्युतपरियोजना होगी। विकास को आगे बढ़ाने में सक्रियप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूटान का अपना दो दिवसीय दौरा पूरा कर थिम्फू से भारत के लिए रवाना हो गए हैं। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्यालवांगचुक और भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोग्बे ने एयरपोर्ट पर पीएम मोदी को विदाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक प्रोत्साहन कार्यक्रम सहित भूटानकी 13वीं पंचवर्षीय योजना के प्रति भारत के समर्थन की पुष्टि की और भूटान को उसकी प्रमुख विकास प्राथमिकताओं को हासिल करने और सभीक्षेत्रों में सतत विकास को आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से मदद करने का आश्वासन दिया।
ट्रंप का सख्त रुख नरम, अमेरिका को विदेशी कुशल कर्मियों की जरूरत, H-1B वीज़ा पर नई सोच

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अब तक के सख्त रुख से पीछे हटते हुए कहा है कि देश को विदेशी कुशल लोगों की जरूरत है। उन्होंने मानाकि अमेरिका केवल लंबे समय से बेरोजगार बैठे लोगों पर निर्भर रहकर अपनी इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी को आगे नहीं बढ़ा सकता। एक समाचार चैनलको दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अपने उद्योगों और रक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञता वाले लोगों की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘मैं सहमत हूं किहमें अमेरिकी मजदूरों की तनख्वाह बढ़ानी चाहिए, लेकिन हमें यह टैलेंट भी लाना होगा। अमेरिका को दुनिया में आगे बनाए रखने के लिए ये जरूरी है।’ इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने सितंबर महीने में एक आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद एच-1बी वीजा आवेदन की फीस में बड़ा इजाफाकिया गया। अब नए वीजा के लिए 1,500 डॉलर की जगह 1 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) फीस देनी होगी। यह नियम 21 सितंबर के बाद दाखिल किए गए सभी नए आवेदन या 2026 की वीजा लॉटरी में शामिल होने वालों पर लागू होगा। हालांकि, जो लोग पहले सेवीजा पर हैं या जिनके आवेदन पहले दिए गए हैं, वे इस नए नियम से प्रभावित नहीं होंगे। अमेरिकी कर्मचारियों को सिखा रहेजब इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि अमेरिका में पहले से काफी प्रतिभाशाली लोग हैं, तो ट्रंप ने कहा, ‘नहीं, ऐसा नहीं है। कुछ खास स्किल्स ऐसी हैं जोहमारे पास नहीं हैं। आप बेरोजगारों को सीधा नहीं कह सकते कि ‘चलो, अब मिसाइल बनाना सीखो।’ उन्हें ट्रेनिंग और अनुभव चाहिए।’ राष्ट्रपति ट्रंप नेजॉर्जिया राज्य का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां एक ह्युंडई बैटरी फैक्ट्री में जब दक्षिण कोरिया से आए कुशल मजदूरों को वापस भेजा गया, तोउत्पादन में भारी दिक्कतें आईं। उन्होंने कहा, ‘बैटरियां बनाना बहुत जटिल और खतरनाक काम है। कई विस्फोट की घटनाएं होती हैं। कोरिया से आएलोग इस काम में माहिर थे और वहीं से अमेरिकी कर्मचारियों को सिखा रहे थे। जब उन्हें भेज दिया गया, तो पूरी व्यवस्था ठप हो गई।’ अमेरिका को दुनिया में आगे बनाए रखने के लिए ये जरूरीअमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान उनके पुराने रुख से बिल्कुल अलग माना जा रहा है। पहले ट्रंप विदेशी कामगारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते रहे हैंऔर कहते थे कि इससे अमेरिकी नौकरियां छिनती हैं। लेकिन अब उन्होंने खुद कहा है कि ‘देश में ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां स्थानीय लोगों को प्रशिक्षितकरने में कई साल लगेंगे। तब तक हमें विशेषज्ञों को लाना ही होगा।’ एच-1बी वीजा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख दो महीने बाद नरमपड़ने लगा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि उनके देश को विदेशी कुशल लोगों की जरूरत है। जॉर्जिया का उदाहरण देते हुए ट्रंप ने कहा किअमेरिका को दुनिया में आगे बनाए रखने के लिए ये जरूरी है।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दिल्ली डिफेंस डायलॉग में साझा की सेना की नई तकनीकी, टेक्नोलॉजी इंसान की मदद करे, उसे रिप्लेस नहीं

दिल्ली डिफेंस डायलॉग में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आज भारतीय सेना की भविष्य की दिशा, तकनीकी बदलावों और मानव-केंद्रितदृष्टिकोण पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ‘तकनीक और भूगोल का मेल’ यानी टेक्नोलॉजी और जमीन दोनों का संतुलनबेहद जरूरी है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जमीन ही विजय की मुद्रा बनी रहेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुएकहा, ‘जब ट्रंप और पुतिन की मुलाकात अलास्का में हुई थी, तब भी चर्चा जमीन पर ही हुई थी। तकनीक हमें जमीन पर ही लाभ देनी चाहिए, चाहेवह विनाश हो, कब्जा हो या बेदखली।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम जिस स्थिति की कल्पना कर रहे हैं, उसमें ‘स्मार्ट बूट्स ऑन ग्राउंड’ और ‘बॉट्स’ दोनोंसाथ होंगे। यानी सैनिक और मशीनें मिलकर काम करेंगी, ‘माइंड इन द क्लाउड, आइज इन द स्काई’। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध के दौरानकभी-कभी तकनीक विफल भी हो सकती है, इसलिए सैनिकों को बिना तकनीक के भी लड़ने में सक्षम होना चाहिए। उन्होंने इसे ‘क्लाउड-सेंट्रिक औरनेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर’ का मिश्रण बताया।’ गेम कनसोल और 7-नैनोमीटर माइक्रोचिप शामिलसेना प्रमुख ने आगे कहा कि अब दुनिया इंडस्ट्री 4.0 से आगे बढ़कर इंडस्ट्री 5.0 की ओर जा रही है। उन्होंने समझाया, ‘इंडस्ट्री 4.0 में एआई, क्वांटमटेक्नोलॉजी जैसी चीजों पर बात होती थी। लेकिन 5.0 ने यह महसूस किया कि तकनीक को इंसान की जगह नहीं लेनी चाहिए, बल्कि उसकी मददकरनी चाहिए। यही भारतीय सेना के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम मानव-केंद्रित तकनीकी अपनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। हमें ‘ह्यूमनएम्प्लीफाइड बाय एआई’ की दिशा में सोचना होगा।’ उन्होंने कहा कि रचनात्मकता, संवेदनशीलता और समस्या समाधान जैसी मानवीय क्षमताएंहमेशा नियंत्रण में रहनी चाहिए। इस दौरान जनरल द्विवेदी ने नई तकनीक की बात करते हुए कहा कि अब दुनिया टेक्नोलॉजी जेनरेशन-7की ओर बढ़रही है, जिसमें मोबाइल, कंप्यूटर, गेम कनसोल और 7-नैनोमीटर माइक्रोचिप शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘इन सभी तकनीकों को हमें एक साथ जोड़करदेखना होगा, ताकि भारतीय सेना को इनसे अधिकतम लाभ मिल सके।’ हम इसे सुधारने की दिशा में काम कर रहेसेना प्रमुख ने कहा कि पुराने यानी ‘लेगेसी सिस्टम्स’ अभी खत्म नहीं होंगे। ‘कम से कम अगले पांच-सात साल तक ये बने रहेंगे, इसलिए हमें इन्हेंसुधारकर सक्षम बनाना होगा।’ उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में अभी भी कमी है।’नेटवर्क स्पेक्ट्रम पूरी तरह परिपक्वनहीं हुआ है। सैटेलाइट प्रोजेक्ट्स भी सभी तीनों सेनाओं में समय ले रहे हैं।’उन्होंने कहा कि 2027 तक एआई से जुड़ी लगभग 23 लाख नौकरियां होंगी, लेकिन कुशल जनशक्ति सिर्फ आधी यानी 12 लाख के करीब होगी।’अगर ऐसा हुआ, तो सेना को एआई सेवाएं आउटसोर्स करनी पड़ेंगी और यह महंगा सौदा होगा। इसलिए हमें आज से ही तैयारी करनी होगी, स्कूलों मेंएआई विशेषज्ञता लानी होगी और सेना में भी एआई विशेषज्ञ तैयार करने होंगे।’जनरल द्विवेदी ने कहा कि रक्षा खरीद प्रणाली में हाल ही में बड़ा सुधार किया गया है। ‘नई डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर तेजी से आगे बढ़ रही है औरदिसंबर तक इसे अंतिम रूप देकर अगले वित्त वर्ष से लागू किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि ‘आयात पर निर्भरता फिलहाल बनी रहेगी क्योंकि कुछ अहमतकनीकें अभी देश में विकसित नहीं हुई हैं। आने वाले चार से पांच साल तक कुछ महत्वपूर्ण घटक बाहर से ही आयात करने होंगे।’ साथ ही उन्होंनेसाइबर और डेटा कमजोरियां को बड़ी चुनौती बताया। ‘यह हमें सहयोगी कामकाज में बाधा डालती है और हमें अलग-अलग खेमों में काम करने परमजबूर करती है। लेकिन हम इसे सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं।’