Congress Leaders, Including Rahul Gandhi and *Mallikarjun Kharge Raise Alarm Over SIR Process, Accuse BJP of Attempting Vote Manipulation

We held a comprehensive strategy review with AICC General Secretaries, AICC In-Charges, PCCs, CLPs, and AICC Secretaries from the states/UTs where the Special Intensive Revision (SIR) process is underway. The Congress Party is unequivocally committed to safeguarding the integrity of the electoral rolls. Allegiance to the people of IndiaAt a time when public confidence in […]
नीतीश कुमार के इस्तीफे की अटकलों के बीच अध्यक्ष ने साफ की तस्वीर, तेजस्वी को नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी कैसे मिलेगी?

शुक्रवार 14 नवंबर की रात तक यह साफ हो गया कि बिहार में प्रचंड बहुमत वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार बन रही है। रविवार को जबमुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यपाल से मिलने गए तो कहा गया कि वह इस्तीफा देने गए हैं। नहीं दिया इस्तीफा तो कहा गया कि किसी डर के कारणनहीं दिया। इतना ही नहीं, सवाल सामने की कुर्सी पर भी उठ रहा है कि महागठबंधन के 35 विधायकों में राष्ट्रीय जनता दल के पास 25 विधायक हीहैं। बाकी 10 महागठबंधन के दूसरे दलों के पास हैं और छह अन्य के पास। तो क्या तेजस्वी यादव के पास नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी रह जाएगी? जितनी बातें चल रहीं, हर सवाल पर ‘अमर उजाला’ ने मौजूदा विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव से जवाब पूछा। जवाब- मुख्यमंत्री ने 19 नवंबर को विधानसभा भंग करने की सिफारिश की है। अगले दिन 20 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण है। अगर रविवारको इस्तीफा दे देते तो स्वीकार होने के साथ ही वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री रह जाते। अब 19 नवंबर तक वह मुख्यमंत्री हैं और 20 नवंबर से वह नईसरकार के मुख्यमंत्री होंगे, कार्यवाहक की जरूरत नहीं पड़ेगी। विधानसभा भंग होते ही वह कार्यवाहक रह जाएंगे, लेकिन तारीखों में वह पुराने और नएसीएम होंगे। जवाब- 243 सदस्यों की बिहार विधानसभा है। इसमें विपक्षी दलों में से जिसके बाद न्यूनतम 10 प्रतिशत विधायक रहेंगे, वह नेताप्रतिपक्ष का दावेदार होता है। मौजूदा परिणाम में राजद के पास 25 विधायक हैं, इसलिए वह बाकी विपक्षी दलों की मदद के बगैर भी नेता प्रतिपक्षचुन सकता है। बाकी विपक्षी दलों को मिलाकर अलग से 24 या उससे ज्यादा विधायक होते तो भी सबसे बड़े दल के पास अधिकार होता। और, अगर दो दलों के पास अलग-अलग इतनी संख्या होती तो बातचीत के आधार पर रास्ता निकालने का प्रयास किया जाता। वह भी नहीं हो तो एकमतलिया जाता। फिलहाल, जिसे राजद सदन में आकर अपने विधायक दल का नेता घोषित करेगा, उसे ही नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी मिलेगी। जवाब- जहां के विधायक इस्तीफा देंगे, वहां उप चुनाव होगा। विपक्ष की संख्या 10 प्रतिशत से नीचे आते ही नेता प्रतिपक्ष का पद स्वतः खाली होजाएगा और रिक्त सीटों पर उपचुनाव अनिवार्य हो जाएगा। नीतीश कुमार की हर आहट पर सभी की नजर है। वह इस्तीफा दे चुके, यह चर्चा चलनिकली थी। सवाल यह भी उठ रहा कि तेजस्वी यादव के पास नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी रहेगी या नहीं? विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने हरपहलू को समझाया।
बांग्लादेश में कड़ी सेंसरशिप, शेख हसीना के बयान प्रसारित करने पर अंतरिम सरकार की रोक

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने प्रेस सेंसरशिप लागू करने की दिशा में कदम उठा लिया है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना कोविशेष ट्रिब्यूनल की ओर से मौत की सजा सुनाए जाने के बाद यूनुस सरकार ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और ऑनलाइन मीडिया संस्थानों को चेतावनी दी हैकि वे अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के किसी भी बयान का प्रकाशन या प्रसारण न करें। इसके पीछे तर्क देते हुए अंतरिम सरकार ने कहा है कि ऐसेबयानों से राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता है। बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार के मुताबिक, नेशनल साइबरसिक्योरिटी एजेंसी (एनसीएसए) ने सोमवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि हसीना के कथित बयानों में ऐसे निर्देश या अपील हो सकती हैं, जोहिंसा, अव्यवस्था और आपराधिक गतिविधियों को भड़का सकती हैं और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं। नफरत फैलाने वाले भाषणइस निर्देश में कहा गया, “हम मीडिया से राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में जिम्मेदारी से कार्य करने का आग्रह करते हैं।” एजेंसी ने चिंता जताते हुए कहा किकुछ मीडिया संस्थान दोषी और भगोड़ी करार दी जा चुकीं शेख हसीना के कथित बयान प्रसारित या प्रकाशित कर रहे हैं। एनसीएसए ने कहा कि ऐसेव्यक्तियों के बयान प्रकाशित करना साइबर सिक्योरिटी ऑर्डिनेंस का उल्लंघन है। एजेंसी ने चेतावनी दी कि अधिकारी राष्ट्रीय अखंडता, सुरक्षा यासार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करने वाली, जातीय या धार्मिक नफरत फैलाने वाली, या सीधे हिंसा को उकसाने वाली सामग्री को हटाने याप्रतिबंधित करने के लिए अधिकृत हैं। एजेंसी के मुताबिक, फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर या अवैध रूप से किसी सिस्टम तक पहुंचकर नफरत फैलानेवाले भाषण, जातीय उकसावे या हिंसा के लिए नफरत फैलाना दंडनीय अपराध है, जिसकी सजा दो साल तक की जेल और अधिकतम 10 लाखटका जुर्माने (या इनमें से कोई एक) तक हो सकती है। शक्ति से ऊपर नहींविज्ञप्ति में कहा गया कि एजेंसी प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करती है, लेकिन मीडिया संस्थानों से अपील है कि वे किसी भी हिंसक, भड़काऊ या आपराधिक रूप से उकसाने वाले बयान को प्रकाशित करने से बचें और अपनी कानूनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहें। गौरतलब है किबांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने सोमवार को 78 वर्षीय अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई।उनकी सरकार पर पिछले वर्ष छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों पर क्रूर दमन के मामले दर्ज हुए थे। इसके बाद आईसीटी ने उन्हें मानवता के खिलाफअपराध का दोषी ठहराते हुए अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी इसी मामले में मृत्युदंड दिया गया।बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि यह सिद्धांत स्थापित करता है कि कानून के सामनेकोई भी शक्ति से ऊपर नहीं है।
शशि थरूर ने रामनाथ गोयनका लेक्चर में पीएम मोदी की तारीफ की, आर्थिक दृष्टि और सांस्कृतिक मिशन का संयुक्त संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रामनाथ गोयनका लेक्चर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने एक बार पीएम मोदी कीदिल खोलकर तारीफ की है। थरूर ने कहा कि पीएम का पूरा संबोधन देश के लिए एक साथ आर्थिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक मिशन दोनों की तरहसामने आया। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री ने ऐसे समय में यह संदेश दिया, जब भारत को तेज विकास, नई सोच और अपनी विरासत पर गर्व की संयुक्तदिशा की जरूरत है। थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की “रचनात्मक अधीरता” पर जोर दिया और पिछली औपनिवेशिकमानसिकता को पीछे छोड़ने की बात कही। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि पीएम मोदी ने भारत की विरासत, भाषाओं और ज्ञान-परंपराओंपर गर्व बहाल करने के लिए 10 साल के राष्ट्रीय मिशन का आह्वान किया। थरूर के मुताबिक इस समय देश विकास की तेज रफ्तार के साथसांस्कृतिक आत्मविश्वास की ओर भी बढ़ रहा है। खत्म करने पर केंद्रित रहाथरूर ने बताया कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि भारत अब ‘इमर्जिंग मार्केट’ नहीं, बल्कि दुनिया के लिए ‘इमर्जिंग मॉडल’ बन चुका है। उन्होंनेदेश की आर्थिक मजबूती का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का हर कदम लोगों की समस्याओं का समाधान करने की भावनात्मक प्रतिबद्धता सेजुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन पर हमेशा चुनाव मोड में रहने का आरोप लगता है, लेकिन वह दरअसल ‘इमोशनल मोड’ में रहते हैं।अपनी टिप्पणी में थरूर ने कहा कि पीएम मोदी का भाषण मैकाले की 200 साल पुरानी “दास मानसिकता” को खत्म करने पर केंद्रित रहा। उन्होंनेबताया कि प्रधानमंत्री ने भारतीय शिक्षा, भाषाओं और ज्ञान परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्रयास का आह्वान किया।हालांकि, थरूर ने यह भी कहा कि काश प्रधानमंत्री यह भी बताते कि कैसे रामनाथ गोयनका ने अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल भारतीय राष्ट्रवाद की आवाजउठाने के लिए किया। महत्वपूर्ण दृष्टि प्रस्तुत करताथरूर ने यह भी कहा कि वह तेज बुखार और खांसी के बावजूद कार्यक्रम में शामिल हुए क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विमर्श था। उन्होंने कहा किपीएम का संबोधन भारत की आर्थिक दिशा और सांस्कृतिक पहचान दोनों पर एक महत्वपूर्ण दृष्टि प्रस्तुत करता है। थरूर के अनुसार, अलग-अलगविचारों के बावजूद राष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद और बहस लोकतंत्र की ताकत है, और इसी भावना से वह कार्यक्रम में मौजूद रहे। शशि थरूर ने प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के रामनाथ गोयनका लेक्चर को आर्थिक दृष्टि और सांस्कृतिक मिशन का संयुक्त संदेश बताया। उन्होंने कहा कि पीएम ने भारत कीरचनात्मक अधीरता, विरासत, भाषाओं व ज्ञान प्रणालियों को पुनर्जीवित करने के लिए 10 साल के राष्ट्रीय मिशन की अपील की।
भारत जल्द अमेरिका को पीछे छोड़ देगा, मेट्रो नेटवर्क में दुनिया के शीर्ष देशों के करीब पहुंचेगा “बोले केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रीमनोहर लाल खट्टर”

भारत तेजी से मेट्रो नेटवर्क विस्तार की ओर बढ़ रहा है और अब देश दुनिया की सबसे लंबी मेट्रो लाइनों वाले देशों में शामिल होने की तैयारी कर रहाहै। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को कहा कि भारत अगले दो से तीन साल में अमेरिका को मेट्रो नेटवर्क की कुललंबाई में पीछे छोड़ देगा। देश में शहरीकरण बढ़ने के साथ मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं लगातार तेज हुई हैं और इसी कापरिणाम है कि भारत अब वैश्विक स्तर पर अपनी नई पहचान बना रहा है। हैदराबाद में साउथ-वेस्ट राज्यों के शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक मेंमनोहर लाल ने बताया कि भारत का मेट्रो नेटवर्क 1,100 किलोमीटर तक पहुंच चुका है, जबकि अमेरिका 1,400 किलोमीटर पर है। उन्होंने कहा किमेट्रो विस्तार की गति को देखते हुए भारत बहुत जल्द अमेरिका को पीछे छोड़ देगा। 2004-05 में केवल पांच शहरों में मेट्रो चलती थी, लेकिन आज24 शहरों में मेट्रो नेटवर्क सक्रिय है। मंत्री ने कहा कि अमेरिका और चीन ने भारत से काफी पहले मेट्रो पर काम शुरू किया था, लेकिन भारत ने कमसमय में बेहद तेज रफ्तार से नेटवर्क का विस्तार किया है। राज्य के बीच सहयोग को अहम बताया गयामनोहर लाल ने कहा कि देश में शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और अनुमान है कि 2050 तक शहर और कस्बे देश के कुल जीडीपी में 80 प्रतिशतयोगदान देंगे। ऐसे में मेट्रो रेल जैसी आधुनिक और तेज परिवहन व्यवस्था बेहद जरूरी हो गई है। मंत्री ने बताया कि शहरों में आर्थिक गतिविधियों, नौकरी, शिक्षा और आवागमन की बढ़ती जरूरतों के साथ मेट्रो अब आधुनिक शहरी ढांचे का सबसे अहम हिस्सा बन चुकी है और सरकार इस दिशा मेंबड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार तेलंगाना में शहरी विकास परियोजनाओं को पूरा समर्थन देगी। इसमेंहैदराबाद मेट्रो विस्तार, मूसी नदी पुनर्विकास और अन्य शहरी सुधार परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार कीप्राथमिकताओं के अनुसार केंद्र आवश्यक सहयोग देगा। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद को तेजी से विस्तार और निवेश वाली सिटी के रूप मेंविकसित करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच सहयोग को अहम बताया गया। नेटवर्क वाले देशों की सूची में शीर्ष स्थान के करीब होगाइससे पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बैठक में कहा कि राज्य की कई प्रमुख परियोजनाएं केंद्र की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। उन्होंनेफेज-2 मेट्रो विस्तार, मूसी पुनर्विकास, गोदावरी नदी डायवर्जन और रीजनल रिंग रोड जैसी परियोजनाओं पर त्वरित अनुमति मांगी। रेड्डी ने कहा किराज्य सरकार हैदराबाद को दुनिया का सबसे ‘हैपनिंग ग्लोबल सिटी’ बनाने की दिशा में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शुरू कर रही है और इसमें केंद्र कासहयोग जरूरी है। भारत ने 1,100 किलोमीटर से अधिक मेट्रो नेटवर्क तैयार कर लिया है और जिस तेजी से देश में नए मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू हो रहे हैं, उससे सरकार का दावा काफी हद तक व्यावहारिक माना जा रहा है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि कम समय में भारत का शहरी परिवहन ढांचा दुनिया मेंतेजी से उभरता मॉडल बना है। मंत्री के अनुसार, अगले दो-तीन वर्षों में जब भारत अमेरिका को पीछे छोड़ देगा, तब देश दुनिया के सबसे बड़े मेट्रोनेटवर्क वाले देशों की सूची में शीर्ष स्थान के करीब होगा।
मुख्यमंत्री धामी ने नशामुक्त भारत अभियान के 5 वर्ष पूरे होने पर युवाओं से नशे के खिलाफ एकजुट होने की अपील की, प्रतियोगिताओं में भी सम्मानित हुए विजेता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज नशामुक्त भारत अभियान के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं सेअपील की कि वो स्वयं भी नशे को पूरी मजबूती के साथ ना कहें, साथ ही अपने साथियों को भी नशे के लिए ना कहने के लिए प्रेरित करें। मुख्यमंत्री नेनशामुक्त भारत अभियान के पांच वर्ष पूर्ण होने की बधाई देत हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले कर्मवीरों के सहयोगसे आज समाज नशे की भयावह समस्या से मुकाबला करने में सक्षम हो रहा है। उन्होनें कहा कि नशा केवल एक बुरी आदत नहीं, बल्कि समाज कोभीतर से खोखला करने वाली एक भयावह चुनौती है। ये घातक प्रवृत्ति व्यक्ति की चेतना, विवेक और निर्णय लेने की क्षमता को नष्ट कर उसके पूरेभविष्य को विनाश की ओर ले जाती है। भयावह समस्या से मुकाबला करने में सक्षम हो रहाआज नशे का प्रसार वैश्विक स्तर पर एक ‘साइलेंट वॉर’ की तरह हो रहा है, जिसका सबसे बड़ा निशाना हमारी युवा शक्ति है। हमारी युवा पीढ़ी ही नएभारत की ऊर्जा, नवाचार, सामर्थ्य और प्रगति का वास्तविक आधार है। यदि यही ऊर्जा किसी नकारात्मक प्रभाव में फंस जाएगी, तो राष्ट्र के विकासकी गति भी अवरुद्ध हो जाएगी। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2020 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआतकर पूरे देश से इस सामाजिक बुराई के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया और इसे एक व्यापक जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। मुख्यमंत्रीधामी ने उपस्थित युवाओं को नशा मुक्त भारत अभियान की शपथ भी दिलाई। साथ ही स्कूल कॉलेजों में राज्य स्तर पर आयोजित भाषण एवं निंबधप्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने नशामुक्त भारत अभियान के पांच वर्ष पूर्ण होने की बधाई देत हुए कहा कि नशे केखिलाफ लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले कर्मवीरों के सहयोग से आज समाज नशे की भयावह समस्या से मुकाबला करने में सक्षम हो रहा है।
बीबीडी यूनिवर्सिटी का भव्य दीक्षांत समारोह युवा शक्ति और नई संभावनाओं का उत्सव

बीबीडी यूनिवर्सिटी का आयोजित दीक्षांत समारोह न सिर्फ ज्ञान का उत्सव बना, बल्कि युवा ऊर्जा, नवाचार और नई संभावनाओं का प्रतीक भी साबितहुआ। समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, चांसलरअलका दास गुप्ता, प्रो चांसलर विराज सागर दास, बीबीडी एजुकेशनल ग्रुप की वाइस प्रेसिडेंट सोनाक्षी दास और देवांशी दास, विधायक अदिति सिंहऔर योगेश शुक्ला की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। सफलता की दहलीज़ पर खड़े 5746 छात्र–छात्राओं का सम्मानदीक्षांत समारोह में कुल 5746 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें 89 मेधावियों को स्वर्ण पदक और दो छात्रों को कुलाधिपति पदक सेसम्मानित किया गया। हजारों की संख्या में मौजूद अभिभावकों और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण ऊर्जा ने आयोजन को यादगार बना दिया। समारोह केदौरान मुख्यमंत्री ने मेधावी छात्रों को पदक और डिग्रियाँ प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि बीबीडी यूनिवर्सिटी सिर्फ शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि युवाओं केसपनों को पंख देने वाला सशक्त मंच है। उन्होंने बीबीडी की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ खेल सुविधाओं, स्टेडियम और बैडमिंटन एकेडमी की भीसराहना की। समस्याएँ नहीं, समाधान बनें सीएम योगी का प्रेरक संदेशअपने एक घंटे से अधिक चले प्रेरक संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्रों को जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण और निरंतर सीखने की प्रेरणादी। उन्होंने कहा कि जो लोग केवल समस्याओं को गिनाते रहते हैं, वे आगे नहीं बढ़ पाते। सफलता उन्हीं को मिलती है जो समाधान खोजने की हिम्मतरखते हैं। सीएम ने जोर देकर कहा कि टेक्नोलॉजी नौकरियाँ कम नहीं करती, बल्कि नए अवसर प्रदान करती है। इसलिए एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन औरउभरती तकनीकों को अपनाने का सही समय अब है। उन्होंने बीबीडी को उभरती तकनीकों का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में नए प्रयास करने कीसलाह दी। महान विभूतियों को नमन और बीबीडी की विरासत का सम्मानसीएम ने विश्वविद्यालय के नाम से जुड़े स्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास को नमन किया। उन्होंने संस्थापक डॉ. अखिलेश दास गुप्ता के योगदान को याद करते हुए कहा कि यूपी की आज की विकास यात्रा में इन महान व्यक्तियों की सोच और संकल्प की झलकस्पष्ट दिखाई देती है। मोदी सरकार की नीतियों से बदला भारत का भविष्ययोगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में आए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि खेलो इंडिया, फिट इंडिया, डिजिटलइंडिया, डीबीटी और नई शिक्षा नीति ने देश को नई दिशा दी है। डिजिटल भुगतान और पारदर्शी प्रणाली ने भ्रष्टाचार पर गहरा प्रहार किया है। उन्होंनेबताया कि यूपी ने कानून-व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार कर देश के निवेशकों की पहली पसंद बनने का गौरव हासिल किया है। बीबीडी बन रहा है भविष्य की शिक्षा का केंद्र विराज सागर दास का संबोधनबीबीडी यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर विराज सागर दास ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं का मनोबल बढ़ाने वाले ऐसे अवसरछात्रों के लिए जीवनभर प्रेरणा बनते हैं। उन्होंने बताया कि बीबीडी देश-विदेश की संस्थाओं के साथ लगातार नए सहयोग कर रहा है, ताकि छात्रों कोशिक्षा के साथ रोजगार और नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।उन्होंने गर्व से कहा कि बीबीडी के लखनऊ और दिल्ली कैंपस में करीब 30 हजार छात्र पढ़ रहे हैं, जबकि दुनिया भर में डेढ़ लाख से अधिक पूर्व छात्रबीबीडी का नाम रोशन कर रहे हैं। समारोह बना युवा उपलब्धियों का पर्वइस दीक्षांत समारोह ने न केवल छात्रों की सफलता को सम्मानित किया, बल्कि उन्हें भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों के लिए प्रेरित भी किया। मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ का प्रेरक संदेश, विश्वविद्यालय का गौरवशाली इतिहास और मेधावियों का सम्मान—इन सबने इस आयोजन को एक ऐतिहासिकऔर प्रेरणादायी अवसर बना दिया।
पंजाब से सबको चाहिए, पर पंजाब को उसका हक़ कौन देगा?-CM भगवंत मान

नॉर्थ ज़ोन काउंसिल में पंजाब की मज़बूत आवाज़दिल्ली में हुई नॉर्थ ज़ोन काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के हक़ की बात बहुत ही स्पष्ट और प्रभावी तरीके से रखी। बैठक कीअध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह कर रहे थे। CM मान ने कहा कि हर कोई पंजाब से कुछ न कुछ मांगने आता है कभी पंजाब यूनिवर्सिटी देने की बातहोती है, कभी हेडवर्क्स की, तो कभी चंडीगढ़ को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते हैं। लेकिन जब पंजाब अपने अधिकार की बात करता है, तो उसेखाली हाथ लौटा दिया जाता है। उन्होंने साफ कहा कि पंजाब से लेने वाले बहुत हैं, पर देने वाला कोई नहीं। बाढ़ से तबाही, लेकिन 1600 करोड़ रुपये का हक़ आज तक नहीं मिलामुख्यमंत्री ने हाल ही की विनाशकारी बाढ़ का मुद्दा भी जोर से उठाया। उन्होंने बताया कि इस बाढ़ ने पंजाब में पाँच लाख एकड़ से ज्यादा फसलें नष्टकर दीं। पुल, सड़कें, नहरें और कई इंफ्रास्ट्रक्चर टूट गए। किसानों की महीनों की मेहनत एक ही रात में खत्म हो गई। लेकिन इतने बड़े नुकसान केबावजूद केंद्र सरकार ने पंजाब को बाढ़ राहत का 1600 करोड़ रुपये आज तक नहीं दिया। इसके बावजूद पंजाब सरकार ने स्वयं फंड जुटाकर किसानोंको 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया, ताकि किसान इस कठिन समय में फिर से खड़े हो सकें। मुसिबतों के बाद भी पंजाब देश को 150 लाख मीट्रिक टन चावल देगाCM भगवंत मान ने कहा कि केंद्र से सहयोग न मिलने के बावजूद पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। इस बार भी पंजाबदेश को 150 लाख मीट्रिक टन चावल देगा। यह इस बात का प्रमाण है कि पंजाब कठिनाइयों से घिरा होने के बावजूद देश का फूड बाउल बना हुआहै। पंजाब हर संकट में भी देश की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए डटा रहता है। अगर पानी ही नहीं देंगे, तो क्या गमलों में फसलें उगाएँ?पानी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने बेहद तीखा और वास्तविक सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब पंजाब को उसका पानी ही नहीं मिलेगा, तो फसलें कहाँउगेंगी? क्या पंजाब के किसान गमलों में फसलें उगाएँगे? यह सवाल सिर्फ एक वाक्य नहीं है, बल्कि पंजाब की दशकों पुरानी पीड़ा का प्रत्यक्ष चित्रणहै। पंजाब देश को अनाज देता है, लेकिन अपने हिस्से का पानी भी सही से नहीं मिलता, यह स्थिति अत्यंत अन्यायपूर्ण है। पंजाब अपने हक़ के लिए संघर्ष जारी रखेगाआखिर में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब किसी से भीख या कृपा नहीं मांग रहा। पंजाब अपने हिस्से का हक़ मांग रहा है हक़ अपने संसाधनोंका, अपने पानी का, अपनी यूनिवर्सिटी और चंडीगढ़ का।उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब की लड़ाई अब और मजबूती से लड़ी जाएगी, और हर मंच पर पंजाब की आवाज़ पहले से ज्यादा बुलंद होकर गूँजेगी।