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असम की राजनीति में बड़ा बदलाव,कांग्रेस के साथ बढ़ती नई ताकत – जितेंद्र सिंह अलवर और गौरव गोगोई

सरिता साहनी12 दिसंबर 2025 ,नई दिल्ली असम में कांग्रेस को मिली बड़ी राजनीतिक बढ़तअसम में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार तेज़ी से बदल रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा संकेत है कि राज्य के चारप्रभावशाली और वरिष्ठ नेता बुबुल दास, अशोक कुमार, गौतम धनोवर और लोंगकी तोकबी अब कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़ गए हैं। यह कदम न सिर्फकांग्रेस की ताकत बढ़ाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राज्य में लोगों का भरोसा किस दिशा में जा रहा है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस संगठनमहासचिव के.सी. वेणुगोपाल, असम प्रभारी जितेंद्र सिंह अलवर और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई मौजूद थे, जिनकी उपस्थिति ने इस सदस्यताकार्यक्रम को और अधिक महत्त्वपूर्ण बना दिया। वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने से कांग्रेस में नई ऊर्जाकांग्रेस में शामिल होने वाले ये नेता अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बुबुल दास तीन बार विधायक और पूर्व मंत्री रहे हैं, जोउन्हें असम की राजनीति का बड़ा चेहरा बनाते हैं। अशोक कुमार असम गण परिषद के पुराने और अनुभवी नेता हैं। गौतम धनोवर चाय बागान इलाकोंमें काफी प्रभाव रखते हैं, जबकि लोंगकी तोकबी आदिवासी क्षेत्रों की मजबूत आवाज़ माने जाते हैं। इन नेताओं के आने से कांग्रेस को सामाजिक, राजनीतिक और क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत आधार मिला है, जो चुनावी दौर में बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। असम में कांग्रेस के पक्ष में तेज़ हवा चल रही है-जितेंद्र सिंह अलवरपत्रकारों से बातचीत के दौरान असम प्रभारी जितेंद्र सिंह अलवर ने स्पष्ट कहा कि राज्य में जनता अब भाजपा सरकार से परेशान हो चुकी है। उन्होंनेबताया कि हर जिले में हजारों की संख्या में लोग कांग्रेस से जुड़ रहे हैं। अलवर ने असम की मौजूदा भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहाकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनकी टीम राज्य में माफियाराज चला रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जमीनों पर अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं।खासकर छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों में जमीनें हड़पना एक बड़ी समस्या बन चुकी है, जिससे असम की संस्कृति, परंपरा और पहचान को नुकसान हो रहाहै। अलवर के अनुसार, यही वजह है कि कई बड़े नेता भाजपा छोड़कर कांग्रेस की ओर आ रहे हैं। गौरव गोगोई ने दिखाया असम में कांग्रेस का बढ़ता जनाधारअसम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि असम में कांग्रेस का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 10 सितंबर से लेकर अब तक हर महीने की 10 तारीख को दूसरी पार्टियों के दिग्गज नेता कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 10 नवंबरको 11,000 लोग कांग्रेस से जुड़े, जो इस बात का प्रमाण है कि असम के लोग बदलाव चाहते हैं। गोगोई ने इसे कांग्रेस के लिए एक नई ऊर्जा औरनई उम्मीद बताया। बेरोजगारी और आर्थिक संकट को लेकर कांग्रेस का आरोपगौरव गोगोई ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि असम में बेरोजगारी आज सबसे गंभीर समस्या बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्यकी अर्थव्यवस्था केवल मुख्यमंत्री के करीबियों पर निर्भर हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि चाय उद्योग जैसी असम की पहचान बनी परंपराएंलगातार कमजोर हो रही हैं। उनका कहना था कि भाजपा के नेता ही चाय बागानों के मालिक बनते जा रहे हैं, जबकि मेहनतकश मजदूर बदहाली में जीरहे हैं। गोगोई के मुताबिक, कांग्रेस इस स्थिति को बदलने के लिए उद्योगों को बढ़ावा देगी, युवाओं को रोजगार देगी और नफरत की राजनीति कोसमाप्त करेगी। आदिवासी जमीनों पर कब्ज़े का बढ़ता खतरागोगोई ने एक और गंभीर मुद्दे को उठाते हुए कहा कि असम में आदिवासियों की 13,000 एकड़ जमीन बड़े उद्योगपतियों को दी गई है। इससे स्थानीयआदिवासी परिवारों के सामने घर-बार खोने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ जमीन का सवाल नहीं, बल्कि असम की आदिवासीपहचान और सांस्कृतिक विरासत का मुद्दा है। कांग्रेस ने इसे असम के इतिहास में सबसे बड़ा अन्याय बताते हुए इस लड़ाई को आगे ले जाने का संकल्पजताया। कार्यक्रम में कई बड़े नेताओं की मौजूदगीइस अवसर पर सांसद प्रद्युत बोरदोलोई, सांसद रकीबुल हुसैन, राष्ट्रीय सचिव पृथ्वीराज साठे, मनोज चौहान और यूपीपीएल दल के नेता बीरखंग बोरोसमेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गणेश कुटुम के पुत्र शंकर ज्योति कुटुम, गुवाहाटी हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता शाह नवाजऔर कुलदीप राजबोंगशी की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और ज्यादा महत्व दिया। असम में बदलाव की हवा तेज़इन चार बड़े नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने से यह साफ संकेत मिलता है कि असम में राजनीतिक माहौल बदल रहा है। लोग भाजपा सरकार कीनीतियों से निराश हैं और कांग्रेस को नया विकल्प मान रहे हैं।कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह असम में रोजगार, उद्योग, शांति और सम्मान की राजनीति को प्राथमिकता देगी। आने वाले चुनावों में यह माहौलकिस दिशा में जाएगा, यह देखने वाली बात होगी, लेकिन इतना निश्चित है कि बदलाव की हवा अब पहले से कहीं तेज चल रही है।

दिल्ली में शिक्षा सुधार की नई शुरुआत शिक्षा मंत्री आशीष सूद की ऐतिहासिक घोषणा

सरिता साहनी12 दिसंबर 2025 ,नई दिल्ली दिल्ली सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आज एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने बताया कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारणएवं विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम–2025 और इसके नियम अब पूरी तरह लागू हो चुके हैं। यह कानून दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ाबदलाव लाने वाला है। इसे लागू होते ही फीस से जुड़ी कई पुरानी समस्याओं का हल शुरू हो गया है। लंबे समय से रुका हुआ सुधार अब पूरा हुआसूद ने कहा कि यह मुद्दा पिछले 27 वर्षों से लगातार उठता रहा, लेकिन किसी सरकार ने इसे गंभीरता से हल नहीं किया। निजी स्कूलों द्वारा लगातारमनमानी फीस बढ़ोतरी अभिभावकों की बड़ी चिंता रही, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने बहुत कम समयमें एक मजबूत और स्पष्ट कानून बनाकर यह ऐतिहासिक सुधार पूरा किया है। यह कानून अब दिल्ली के शिक्षा क्षेत्र में सुशासन, पारदर्शिता और दक्षप्रशासन का नया मानक स्थापित करेगा। शिक्षा मंत्री का संदेश शिक्षा अधिकार है, व्यवसाय नहींसूद ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की शिक्षा किसी भी रूप में व्यापार नहीं बननी चाहिए। शिक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और हर बच्चे का मौलिकअधिकार। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर छात्र को ईमानदारी, पारदर्शिता और समानता के आधार पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्धकराने के लिए पूरी तरह समर्पित है। नया कानून इस दिशा में एक बड़ा कदम है जो यह सुनिश्चित करेगा कि फीस तय करने की पूरी प्रक्रिया खुली औरनिष्पक्ष रहे। अभिभावकों के सहयोग से कानून और भी मजबूत होगासूद ने अभिभावकों से विशेष अपील की कि वे इस कानून का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि अभिभावकों की जागरूकता और भागीदारी से ही इस सुधारको मजबूती मिलेगी। सरकार ने आवश्यक ढांचा तैयार कर दिया है, लेकिन पारदर्शिता तभी स्थापित होगी जब अभिभावक भी शिक्षा विभाग के साथमिलकर काम करेंगे और किसी भी अनियमितता की सूचना समय पर देंगे। यह कानून अभिभावकों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है, इसलिए उनका सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।कानून से फीस प्रक्रिया अब पूरी तरह पारदर्शी होगीशिक्षा मंत्री ने बताया कि नए अधिनियम और नियमों का उद्देश्य फीस से जुड़ी हर प्रक्रिया को साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाना है। अब स्कूलों कोअपनी फीस बढ़ोतरी या नए शुल्क प्रस्तावों को पूरी प्रक्रिया के साथ प्रस्तुत करना पड़ेगा। स्कूलों को यह भी बताना होगा कि फीस क्यों बढ़ानी है, कितना खर्च होता है, फंड कहाँ उपयोग होता है और किस आवश्यकता के कारण बदलाव जरूरी है। इससे अभिभावकों को सही जानकारी मिलेगी औरस्कूलों को मनमानी करने का अवसर नहीं मिलेगा। फीस बढ़ोतरी से पहले पूरी कानूनी प्रक्रिया अनिवार्यइस अधिनियम के तहत कोई भी निजी स्कूल अचानक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। अगर स्कूल फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे लंबी प्रक्रिया से गुजरनाहोगा, विभाग को दस्तावेज देने होंगे और सरकार से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि हर फीस संशोधनसोच–समझकर, नियमों के अनुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ हो। अभिभावकों के हितों की सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्थानए कानून में कई ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो अभिभावकों को सुरक्षित और विश्वसनीय व्यवस्था प्रदान करते हैं। अब अभिभावकों को फीस से जुड़ीसभी गतिविधियों की जानकारी मिलेगी। अगर किसी अभिभावक को किसी स्कूल की फीस में गड़बड़ी लगे तो वे सीधे शिक्षा विभाग से शिकायत करसकते हैं और विभाग को कार्रवाई करना ही होगा। इस व्यवस्था से अभिभावकों का आत्मविश्वास और बढ़ेगा और स्कूलों को भी हर कदम सोचकरउठाना होगा। शिक्षा व्यवस्था को जवाबदेह और अभिभावक–हितैषी बनाने का संकल्पसूद ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के अपने वादे पर कायम है। वर्षों से अभिभावक निजीस्कूलों की फीस को लेकर परेशान थे और उन्हें किसी ठोस समाधान की उम्मीद नहीं मिल रही थी। अब इस अधिनियम के लागू होने से फीस नियंत्रणसंभव होगा और स्कूलों को अपनी प्रक्रियाएँ खुले तरीके से रखनी होंगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी अनियमितता या मनमानी परतत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता का नया अध्याययह अधिनियम सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि दिल्ली के लाखों अभिभावकों और बच्चों के अधिकारों की रक्षा का मजबूत साधन है। इससे शिक्षाव्यवस्था में लंबी अवधि तक पारदर्शिता और विश्वास कायम रहेगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि दिल्ली के सभी निजी स्कूल नियमों का कड़ाई सेपालन करें ताकि शिक्षा क्षेत्र में न्याय और समानता बनी रहे। परिवर्तन का यह कदम आने वाले वर्षों में शिक्षा को नई दिशा देगाअंत में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह अधिनियम दिल्ली की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने वाला सुधार है। यह कानून अभिभावकों औरछात्रों के हितों की सुरक्षा करेगा और स्कूलों को जिम्मेदारी से काम करने के लिए मजबूर करेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग पूरी तत्परता के साथइस कानून को जमीन पर लागू करेगा ताकि हर परिवार को इसका लाभ मिले और दिल्ली में शिक्षा का स्तर और भी मजबूत व पारदर्शी बने।

14 दिसम्बर की महारैली को लेकर तैयारियों में जोर – देवेन्द्र यादव का बयान

सरिता साहनी12 दिसंबर 2025 ,नई दिल्लीदिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने आज प्रदेश कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें लोकसभा, जिला और विधानसभास्तर के ऑब्जर्वर शामिल हुए। इस बैठक का उद्देश्य 14 दिसम्बर को रामलीला मैदान में होने वाली वोट चोर गद्दी छोड़ महारैली की तैयारियों कोअंतिम रूप देना था। बैठक के दौरान देवेन्द्र यादव ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता तो हर बूथ से रैली में शामिल होंगे ही, इसके अलावा दिल्ली कीजागरूक आम जनता भी ब्लॉक और जिला कांग्रेस कमेटियों से संपर्क कर भारी संख्या में रैली में पहुँचने की इच्छा जता रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दिल्ली की जनता में दिख रहा अभूतपूर्व उत्साहदेवेन्द्र यादव ने कहा कि इस बार रैली को लेकर केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं में ही नहीं, बल्कि दिल्ली की आम जनता में भी असाधारण उत्साह दिखाईदे रहा है। लोग स्वयं ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों और जिला कांग्रेस कमेटियों से संपर्क कर रहे हैं और यह विश्वास दिला रहे हैं कि वे रैली का हिस्सा बनेंगे।उन्होंने बताया कि हर बूथ से कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं और यह रैली एक जन आंदोलन का रूपलेती जा रही है। रैली राजनीतिक नहीं, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का बड़े स्तर का अभियानदेवेन्द्र यादव ने जोर देते हुए कहा कि 14 दिसम्बर की रामलीला मैदान की महारैली किसी राजनीतिक सत्ता या पार्टी की प्रतिस्पर्धा का कार्यक्रम नहींहै। यह रैली देश के नागरिकों के मतदान के संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार चुनाव आयोग के साथमिलकर वोट चोरी कर लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रही है। कांग्रेस पार्टी इस अन्याय के खिलाफ लड़ रही है और राहुल गांधी ने इस पूरे मामलेको देश के सामने लाकर बड़ी जिम्मेदारी निभाई है। उनके अनुसार, लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब हर नागरिक निडर होकर अपने मताधिकार काउपयोग कर सके, और यही उद्देश्य लेकर यह रैली आयोजित की जा रही है। रामलीला मैदान की महारैली को ऐतिहासिक बनाने की पूरी तैयारीबैठक में बताया गया कि रैली को लेकर कांग्रेस ने लगभग एक महीना पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। इसके लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया थाजहाँ से हर वार्ड की टीमों को लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। कंट्रोल रूम से कार्यकर्ता हर क्षेत्र में 70-70 नामों की सूची पर कॉलिंग कर रहे हैं, लोगों से बातचीत कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि रैली मेंअधिक से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचे। देवेन्द्र यादव ने कहा कि इस बार दिल्ली कांग्रेस की उपस्थिति रामलीला मैदान में इतिहास रचेगी, क्योंकि हर क्षेत्र से भारी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होने जा रहे हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी से रैली का महत्व और बढ़ेगाइस महारैली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी इसे और भी महत्वपूर्ण बना देगी। रैली को संबोधित करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुनखड़गे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, और कई वरिष्ठ नेता रामलीला मैदान में मंच साझा करेंगे। उनकीमौजूदगी से न सिर्फ कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ेगा, बल्कि जनता को भी पूरी ताकत से संदेश जाएगा कि वोट चोरी के खिलाफ यह लड़ाई पूरे देश कीलड़ाई है। भाजपा के खिलाफ मजबूत शंखनाद के रूप में देखी जा रही है यह रैलीदेवेन्द्र यादव ने कहा कि रामलीला मैदान की यह महारैली भाजपा सरकार के खिलाफ एक सीधा शंखनाद साबित होगी। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरेदेश में चुनाव आयोग की सांठगांठ से वोट चोरी कर सत्ता पर काबिज होने की कोशिश कर रही है और इससे संविधान की आत्मा को चोट पहुँच रही है।यह रैली भाजपा सरकार को यह संदेश देगी कि जनता अपने मताधिकार के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। दिल्ली कांग्रेस के लिए जनता का भरोसा बड़ी ताकतरैली को लेकर जनता की भागीदारी ने कांग्रेस को नया उत्साह दिया है। देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली के लोग कांग्रेस की इस लड़ाई को अपना मानरहे हैं और बड़ी संख्या में 14 दिसम्बर की रैली में शामिल होने वाले हैं। उनके अनुसार, यह रैली न केवल राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़उठाएगी बल्कि लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बनेगी।