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विकसित भारत बनाने में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि युवा ही इसके एक्टर, प्रोड्यूसर, डायरेक्टर होंगे और कई बार वे ही दर्शक भी होंगे। राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) कैडेट को संबोधित करते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कड़ी मेहनत और लगन पर जोर दिया। इसके लिए उन्होंने टेनिस के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर का उदाहरण दिया। साथ ही नैतिक साहस के मूल्य को समझाने के लिए 1971 के युद्ध में सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की बहादुरी और बलिदान को याद किया। उन्होंने युवाओं से आत्म अनुशासन और टीमवर्क को अपनाने की अपील की तथा जोर देकर कहा कि सिर्फ व्यक्तिगत काबिलियत से कोई संगठन या देश आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि अगर आप इस टीम भावना और युवा ऊर्जा को एकता तथा मकसद के साथ इस्तेमाल कर पाते हैं तो यह 2047 तक विकसित भारत बनने की कोशिश में एक प्रेरक शक्ति बन जाएगी।

संगठन के लिए काम कर रहे
उन्होंने कहा कि देश की आबादी में करीब 65 फीसदी युवा हैं और इसलिए उन्हें 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि उस समय तक उनमें से ज्यादातर लोग 30 के दशक के आखिर या 40 की शुरुआत में होंगे। तो अगर मैं विकसित भारत बनने की इस प्रक्रिया को किसी फिल्म बनने जैसा देखूं तो इस सफर में आप इसके एक्टर, एक्ट्रेस, प्रोड्यूसर, डायरेक्टर होंगे और कई बार इसके दर्शक भी होंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय आबादी में 65 प्रतिशत युवा हैं। मैं आप पर नतीजे देने का दबाव नहीं डाल रहा हूं लेकिन आपको काम करना होगा क्योंकि आप आबादी का ज्यादातर हिस्सा हैं। आपको निजी फायदों से ऊपर उठना होगा और यह सोच कि इसमें मेरा क्या फायदा है? इसे अपनी सोच से निकाल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप जिस संगठन के लिए काम कर रहे हैं या देश आगे बढ़ता है तो इससे आपको भी नाम मिलेगा।

दैनिक अनुशासन का परिणाम
एडमिरल त्रिपाठी ने युवाओं को सोशल मीडिया के प्रलोभन से बचने की हिदायत दी। आत्म-अनुशासन का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया सबसे बड़ा भटकाव है। मोबाइल फोन पर लगातार आने वाले नोटिफिकेशन अंतहीन ढंग से आपका ध्यान खींचते हैं। यहीं आपके चरित्र की परीक्षा होती है। एडमिरल त्रिपाठी ने जीवन में आत्म-अनुशासन का महत्व बताते हुए कैडेट्स से कहा कि ऐसे में प्रलोभनों को ना कहने का साहस रखें। ऐसा करना आसान नहीं है, लेकिन अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना सीखें। एक बार संकल्प कर लें तो खुद की भी न सुनें। नौसेना प्रमुख ने युवाओं को सचेत किया कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग जीवन में उनके लक्ष्यों के बीच एक दीवार बन सकता है। किसी निगरानी या नियंत्रण में अनुशासित रहा जा सकता है, लेकिन अनुशासन बनाए रखने की असल परीक्षा तब होती है जब कोई आपको देख न रहा हो। स्व-नियंत्रण आपको अपने जीवन का मालिक बनाता है। बड़ी सफलता छोटी-छोटी आदतों और दैनिक अनुशासन का परिणाम होती है। नौसेना प्रमुख ने कहा, अगर आप में आत्म-अनुशासन नहीं है, तो आपको अपनी मेहनत के अनुपात में सफलता नहीं मिलेगी। यह आप लिख कर ले लीजिए, मैं अपने अनुभव से बोल रहा हूं। अगर आप हर दिन खुद में केवल एक प्रतिशत सुधार करें, तो साल के अंत तक आप खुद को 37 गुना बेहतर पाएंगे।

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