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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को एक बड़े कानूनी मामले में बड़ी राहत दी है। जस्टिस विक्रम डी चौहान की एकल पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ ‘इंडियन स्टेट’ से लड़ाई वाले विवादित बयान को लेकर दाखिल याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इस मामले में न तो मुकदमा दर्ज होगा और न ही कोई कानूनी कार्यवाही चलेगी। यह मामला पिछले वर्ष कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा है। याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने राहुल गांधी के उस बयान को देशद्रोह की श्रेणी में मानते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि “अब हमारी लड़ाई भाजपा, आरएसएस और खुद ‘इंडियन स्टेट’ से है।” इससे पहले, 7 नवंबर 2025 को संभल की चंदौसी कोर्ट ने इस याचिका को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया था। याची ने निचली अदालत के इसी फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है।

इंदिरा भवन’ के उद्धाटन के दौरान कहा
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 8 अप्रैल को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को ओपन कोर्ट में फैसला सुनाते हुए जस्टिस विक्रम डी चौहान ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की मांग में कानूनी आधार का अभाव है। अदालत के इस रुख से यह साफ हो गया है कि राजनीतिक बयानों में व्यवस्था के विरोध को सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य या देशद्रोह के चश्मे से नहीं देखा जा सकता। संभल की चंदौसी कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल निगरानी याचिका को कमजोर होने के कारण खारिज कर दिया था। सिमरन गुप्ता ने अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश चंदौसी कोर्ट की तरफ से दिए गए फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की थी। 15 जनवरी 2025 को राहुल गांधी ने कांग्रेस के नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्धाटन के दौरान कहा था, “हमारी लड़ाई आरएसएस, बीजेपी और खुद इंडियन स्टेट से है।”

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