
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने केंद्र की Indian National Congress और Bharatiya Janata Party के बीच चल रही राजनीतिक बहस के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi और मोदी सरकार पर कई बड़े सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, विदेश नीति, अमेरिकी आयात, रुपये की गिरती कीमत और अंतरराष्ट्रीय घोषणाओं को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि अब भारत से जुड़े अहम फैसलों की जानकारी नई दिल्ली से पहले वॉशिंगटन डीसी से सामने आ रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह स्थिति देश की संप्रभुता और विदेश नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है जिनका असर देश के किसानों, उद्योगों और आम लोगों पर पड़ सकता है।
ऑपरेशन सिंदूर के युद्धविराम की घोषणा भी पहले अमेरिका ने की थी
Jairam Ramesh ने कहा कि 10 मई 2025 को भारतीय समयानुसार शाम 5 बजकर 37 मिनट पर अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने सबसे पहले युद्धविराम की घोषणा की थी, जिसके बाद ऑपरेशन सिंदूर अचानक रुक गया था। जयराम रमेश ने कहा कि उस समय मार्को रुबियो ने यह दावा भी किया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हस्तक्षेप के कारण यह युद्धविराम संभव हो पाया। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि भारत की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े इतने बड़े फैसले की जानकारी सबसे पहले अमेरिका की तरफ से क्यों आई। उन्होंने कहा कि देश की जनता को इस तरह की जानकारी भारत सरकार और विदेश मंत्रालय की तरफ से मिलनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति की भारत यात्रा की जानकारी भी पहले अमेरिका से आने पर उठे सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि 21 मई 2026 को फिर एक बार अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति अगले सप्ताह भारत आने वाले हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि उस समय तक भारत सरकार या वेनेजुएला की तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी। उन्होंने कहा कि यह बेहद हैरानी की बात है कि भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े बड़े फैसलों की जानकारी अब लगातार अमेरिका की तरफ से पहले दी जा रही है।
अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की बात पर कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल
जयराम रमेश ने कहा कि अब मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर यह बयान दिया है कि मोदी सरकार अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने की तैयारी कर रही है। इसमें ऊर्जा, तकनीक और कृषि क्षेत्र को प्रमुख बताया गया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि अभी भारत का अमेरिका से वार्षिक आयात लगभग 52.9 अरब डॉलर है। ऐसे में अगर यह आंकड़ा बढ़ता है तो भारत को अमेरिका से अपने आयात को लगभग दोगुना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी आर्थिक प्रतिबद्धता का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था, घरेलू उद्योगों और व्यापार संतुलन पर पड़ेगा। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार बिना देश को भरोसे में लिए बड़े आर्थिक फैसले कर रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों और उद्योगों के लिए खतरा बन सकता है
Jairam Ramesh ने कहा कि संसद में Rahul Gandhi द्वारा उठाए गए मुद्दों और सवालों के दबाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल्दबाजी में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते में भारत की तरफ से अमेरिका को कई बड़ी रियायतें दी गईं, जिनसे देश के किसानों और छोटे उद्योगों को नुकसान पहुंच सकता है। जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद इस समझौते का आधार ही कमजोर पड़ गया है। उन्होंने सवाल किया कि जब मलेशिया जैसे देशों ने ऐसे समझौतों को रद्द कर दिया, तो मोदी सरकार ऐसा कदम क्यों नहीं उठा रही।
रुपये की गिरती कीमत और बढ़ते आयात पर भी कांग्रेस ने जताई चिंता
जयराम रमेश ने कहा कि पिछले एक साल में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 12 प्रतिशत कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका से आयात लगातार बढ़ता है तो इसका दबाव भारतीय मुद्रा पर और ज्यादा पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन की खपत कम करने और विदेश यात्राएं घटाने की अपील कर चुके हैं। लेकिन दूसरी तरफ सरकार खुद अमेरिका से रिकॉर्ड स्तर पर सामान खरीदने की बात कर रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार की यह नीति विरोधाभासी दिखाई देती है और इससे आम जनता के मन में सवाल खड़े हो रहे हैं।
अदानी मामले का जिक्र करते हुए जयराम रमेश ने लगाए गंभीर आरोप
जयराम रमेश ने अपने बयान में उद्योगपति Gautam Adani का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने सौर ऊर्जा मामले में गौतम अदानी के खिलाफ लगाए गए आपराधिक धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि क्या अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक समझौते और अदानी समूह को मिली राहत के बीच कोई संबंध है। उन्होंने कहा कि देश को इस मामले में साफ जवाब मिलना चाहिए।
विदेश नीति पर देश को जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी
जयराम रमेश ने कहा कि विदेश नीति किसी भी देश की पहचान और सम्मान से जुड़ा विषय होता है। ऐसे में भारत सरकार की जिम्मेदारी है कि वह देश की जनता को हर बड़े फैसले की जानकारी दे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज स्थिति यह बन गई है कि भारत से जुड़े अहम फैसलों की जानकारी पहले अमेरिका से आती है और बाद में भारत सरकार प्रतिक्रिया देती है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह स्थिति देश के लिए चिंताजनक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को पूरी सच्चाई बताएं
अंत में जयराम रमेश ने कहा कि देश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि अमेरिका के साथ हुए समझौतों की असली शर्तें क्या हैं और उनका असर भारत पर कैसे पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सामने पूरी सच्चाई रखें और बताएं कि क्या सरकार देशहित को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है या फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव में काम कर रही है।