
नई दिल्ली।
आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने जगतपुर गांव में ओ-ज़ोन और डिमोलिशन (तोड़फोड़) के मुद्दे पर आयोजित पंचायत के बाद भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंचायत में पहुंचे भाजपा सांसद मनोज तिवारी और रामवीर सिंह बिधूड़ी लोगों को कोई ठोस समाधान नहीं दे पाए। लोगों को सिर्फ आश्वासन दिया गया, जबकि उन्हें अपने घर बचाने के लिए स्पष्ट और स्थायी समाधान चाहिए। संजीव झा ने कहा कि भाजपा हमेशा डबल इंजन सरकार की ताकत की बात करती है, लेकिन आज स्थिति यह है कि भाजपा के सांसद खुद कह रहे हैं कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। इससे साफ पता चलता है कि सरकार और उसके जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर बेबस नजर आ रहे हैं।
लोग सड़कों पर उतरे, तब शुरू हुई बातचीत
संजीव झा ने कहा कि ओ-ज़ोन और डिमोलिशन का मुद्दा कोई नया मामला नहीं है। पिछले कई महीनों से लोगों के घरों पर कार्रवाई हो रही है और लोग परेशान हैं। लेकिन जब तक जनता सड़कों पर नहीं उतरी, तब तक किसी ने उनकी आवाज सुनने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि जब लोगों ने आंदोलन शुरू किया और विरोध जताया, तभी भाजपा नेताओं ने बैठकों और पंचायतों का आयोजन शुरू किया। इससे यह सवाल उठता है कि जब इतने महीनों से लोगों के घर टूट रहे थे, तब जिम्मेदार लोग कहाँ थे।
जनता को भाषण नहीं, न्याय चाहिए
संजीव झा ने कहा कि जनता अब केवल भाषण और आश्वासन नहीं सुनना चाहती। लोगों को अपने घरों और भविष्य की चिंता है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह स्थायी समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सरकार वास्तव में इस मुद्दे को हल करना चाहती है तो उसे अदालत और संसद के माध्यम से कानूनी रास्ता निकालना चाहिए। केवल मंचों से बयान देने और वादे करने से लोगों की समस्या खत्म नहीं होगी।
रामवीर बिधूड़ी की बातों में दिखी बेबसी
संजीव झा ने कहा कि पंचायत में भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और मनोज तिवारी दोनों मौजूद थे। उन्होंने दोनों नेताओं की बातें ध्यान से सुनीं, लेकिन किसी के पास कोई स्पष्ट समाधान नहीं था। उन्होंने कहा कि रामवीर बिधूड़ी की बातों से ऐसा लग रहा था कि वे भी इस मुद्दे को लेकर असहाय हैं। ऐसा महसूस हुआ कि वे चाहते तो हैं कि समस्या का समाधान हो, लेकिन उनकी बात कहीं सुनी नहीं जा रही है।
अगर अधिकारी नहीं सुन रहे तो सरकार का मतलब क्या है?
संजीव झा ने कहा कि यह बात समझ से परे है कि सरकार यह कहे कि अधिकारी उसकी बात नहीं सुन रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार अधिकारी सरकार के अधीन होते हैं और उन्हें सरकार के निर्देशों का पालन करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मुख्यमंत्री, सांसद और सरकार की बात अधिकारी नहीं मान रहे हैं तो फिर सरकार की ताकत का क्या मतलब रह जाता है? भाजपा डबल इंजन सरकार की बात करती है, लेकिन आज ऐसा लग रहा है कि एक विभाग का अधिकारी सरकार से भी ज्यादा शक्तिशाली हो गया है।
छह महीने तक चुप क्यों रहे मनोज तिवारी?
संजीव झा ने कहा कि मनोज तिवारी अब दावा कर रहे हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय पर बात की है। लेकिन उन्होंने यह बातचीत तब की जब जनता सड़कों पर उतर आई। उन्होंने कहा कि पिछले छह महीने से लगातार घर तोड़े जा रहे थे। उस दौरान सांसद ने क्या कदम उठाए, इसका जवाब जनता जानना चाहती है। अगर शुरुआत में ही कार्रवाई की जाती तो शायद लोगों को आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ती।
जनप्रतिनिधि को जनता की बात सुननी चाहिए
संजीव झा ने कहा कि जब लोग अपने जनप्रतिनिधि के घर जाते हैं तो वे अपनी समस्या और फरियाद लेकर जाते हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उन्होंने बताया कि वह भी अपने क्षेत्र के लोगों के साथ उनकी समस्याएं लेकर मनोज तिवारी के घर गए थे। लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई। संजीव झा ने कहा कि वह एक चुने हुए विधायक हैं और जनता की आवाज उठाना उनका कर्तव्य है। अगर जनता की समस्या को सामने रखना अपराध माना जाएगा, तो वह यह काम आगे भी करते रहेंगे।
एफआईआर कराकर भाजपा ने दिखाई ताकत
संजीव झा ने आरोप लगाया कि समस्या का समाधान निकालने के बजाय भाजपा ने पुलिस और प्रशासन की ताकत का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में समाधान की इच्छा होती तो सभी पक्षों को बैठाकर बातचीत की जाती। उन्होंने कहा कि उन्हें और पार्षद को गिरफ्तार कराया गया, जबकि वे केवल प्रभावित लोगों की आवाज उठा रहे थे। इससे लोगों की समस्या का समाधान नहीं होगा।
समाधान संसद और अदालत से ही निकलेगा
संजीव झा ने कहा कि ओ-ज़ोन और डिमोलिशन के मुद्दे का समाधान केवल दो तरीकों से हो सकता है। पहला रास्ता अदालत का है, जहाँ सरकार को पक्ष बनकर लोगों के हित में अपनी बात रखनी चाहिए। दूसरा रास्ता संसद का है, जहाँ कानून बनाकर लोगों को राहत दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सांसद वास्तव में गंभीर होते तो संसद में इस विषय को मजबूती से उठाते और विशेष सत्र बुलाने की मांग करते। लेकिन ऐसा करने के बजाय लोगों को केवल भविष्य के वादे सुनाए जा रहे हैं।
दिल्ली सरकार अदालत में क्यों नहीं जाती?
संजीव झा ने कहा कि भाजपा नेता खुद बता रहे हैं कि पहले भी ऐसे मामलों में अदालत का सहारा लिया गया था। अगर पहले मुख्यमंत्री अदालत जा सकते थे तो आज की सरकार भी अदालत में जाकर लोगों के पक्ष में अपनी बात रख सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री और सरकार इस मामले में सक्रिय भूमिका क्यों नहीं निभा रहे हैं।
आम आदमी पार्टी ने समाधान निकालने की मांग की
संजीव झा ने कहा कि जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब भी ऐसे कई मामलों में अदालत को बताया गया था कि सरकार नीति बना रही है और तब तक कार्रवाई रोकी जानी चाहिए। उसी तरह आज भी सरकार लोगों को राहत देने के लिए कदम उठा सकती है। उन्होंने कहा कि एलजी या मुख्यमंत्री से केवल मुलाकात करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को अदालत और संसद में ठोस कार्रवाई करनी होगी।
“जनता को गुमराह नहीं, न्याय चाहिए
अंत में संजीव झा ने कहा कि आम आदमी पार्टी उम्मीद करती है कि ओ-ज़ोन और डिमोलिशन से प्रभावित लोगों को गुमराह नहीं किया जाएगा। सरकार को जल्द से जल्द ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे लोगों के घर और उनका भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक प्रभावित नागरिक अपनी आवाज उठाते रहेंगे और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।