दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, लेकिन चुनावी माहौल में हलचल बढ़ गई है। इस बार चुनावी तकरार के केंद्रमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल आ गए हैं। उनका एक हालिया बयान, जिसमें उन्होंनेयमुना नदी के पानी में ‘जहर’ मिलने की बात कही थी, अब चुनाव आयोग के लिए चिंता का विषय बन गया है। चुनाव आयोग ने इस बयान को लेकरकेजरीवाल से सवाल पूछे हैं और उन्हें जवाब देने के लिए अंतिम तिथि शुक्रवार, 31 जनवरी तक का समय दिया है।
चुनाव आयोग ने क्यों भेजा नोटिस?
अरविंद केजरीवाल का बयान दिल्ली में 2020 विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सामने आया था, जब उन्होंने यमुना नदी में ‘जहर’ मिलाने काआरोप लगाया था। इस बयान को लेकर चुनाव आयोग ने उन्हें दूसरा नोटिस जारी किया है। आयोग का कहना है कि इस बयान के जरिए केजरीवाल नेन केवल झूठी सूचना फैलाने का काम किया, बल्कि इससे विभिन्न समूहों के बीच तनाव पैदा हो सकता है। इसके साथ ही, आयोग ने यह भी कहा हैकि इस बयान से चुनावी प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि यह किसी विशेष पार्टी के खिलाफ भ्रामक आरोपों को हवा देने जैसा होसकता है।
चुनाव आयोग ने इस नोटिस में खासतौर पर केजरीवाल से सवाल किया है कि आखिर उन्होंने यह आरोप क्यों लगाया कि यमुना में जहर मिलाया जारहा है? आयोग ने यह भी पूछा है कि यमुना में जहर मिलाने का स्थान और तरीका क्या था, और यह कैसे साबित किया गया कि पानी में जहर था? इनसवालों का जवाब केजरीवाल को शुक्रवार तक देने का निर्देश दिया गया है।
चुनाव आयोग के सवाल:
1. पानी में कहां जहर मिलाया गया था?
2. कौन सा जहर था, जो पानी में मिलाया गया?
3. जहर के बारे में पता लगाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई?
4. क्या इस आरोप को आधार बनाकर कोई कार्रवाई की गई?
5. इस तरह के बयान से किसी विशेष समुदाय या वर्ग के बीच वैमनस्य क्यों बढ़ सकता है?
चुनाव आयोग का कड़ा रुख
चुनाव आयोग ने केजरीवाल से यह भी पूछा है कि उनके बयान से चुनावी माहौल पर क्या असर पड़ा है और इसे क्यों नहीं माना जाना चाहिए कि उनकेबयान से समाज में विभाजन हो सकता है। आयोग ने कहा कि यदि ऐसे बयान जारी होते रहे, तो यह चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है औरएक विशेष पार्टी या नेता के खिलाफ मनगढ़ंत आरोपों को फैलाया जा सकता है। चुनाव आयोग ने अपने पत्र में यह भी कहा कि केजरीवाल को इसमुद्दे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके बयान से किसी प्रकार का सार्वजनिक असंतोष उत्पन्न नहीं हुआ हो।
केजरीवाल का पहले दिया गया जवाब
इससे पहले, बुधवार को अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग को एक लंबा जवाब दिया था। इस जवाब में उन्होंने अपने बयान को पूरी तरह से स्पष्टकिया। उन्होंने कहा था कि उनका बयान दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से संबंधित था, खासतौर पर उस समय जब शहर के पानी की गुणवत्तापर सवाल उठ रहे थे। केजरीवाल ने दावा किया था कि उनके बयान का मकसद केवल यह था कि भाजपा शासित राज्य से आने वाले कच्चे पानी मेंअत्यधिक विषाक्तता और संदूषण का मुद्दा उजागर किया जाए, ताकि दिल्ली के लोगों को सुरक्षित पेयजल मिल सके। उन्होंने यह भी कहा था कियह बयान उनके सार्वजनिक कर्तव्य के तहत था, जिसे उन्होंने राष्ट्रीय हित में किया था।
केजरीवाल ने आगे कहा कि उनका उद्देश्य किसी को बदनाम करना या चुनावी प्रचार में किसी पक्ष का समर्थन करना नहीं था, बल्कि यह बयान केवलएक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे को उजागर करने के लिए था। उनका कहना था कि यह बयान दिल्ली की जनता के लिए स्वास्थ्य के दृष्टिकोणसे आवश्यक था, ताकि लोगों को सुरक्षित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
क्या था केजरीवाल का बयान?
अरविंद केजरीवाल ने यमुना में अमोनिया की बढ़ी हुई मात्रा का जिक्र करते हुए यह आरोप लगाया था कि दिल्ली को जो कच्चा पानी भाजपा शासितराज्यों से मिलता है, उसमें जहर मिलाया गया है। उनका कहना था कि यह पानी पीने के लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त हो चुका था और इसके कारणदिल्ली की जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा था कि यमुना नदी में जहरीला पदार्थ डालने से न केवलपर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो सकता है, बल्कि यह दिल्लीवासियों के लिए एक तत्काल खतरा भी बन सकता था।
चुनाव आयोग की भूमिका और निर्देश
चुनाव आयोग की भूमिका इस मुद्दे में काफी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि आयोग का काम केवल चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाएरखना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि कोई पार्टी या उम्मीदवार चुनावी प्रचार में भ्रामक या दुर्भावनापूर्ण बयान नहीं दे। आयोग ने यहसुनिश्चित करने के लिए कि चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाले ऐसे बयान न दिए जाएं, केजरीवाल से स्पष्टीकरण मांगा है।
चुनाव आयोग ने केजरीवाल से यह भी पूछा है कि उनका यह बयान चुनावी प्रचार के दौरान क्यों दिया गया, जबकि यह विषय चुनावी मुद्दों से संबंधितनहीं था। आयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि ऐसे बयान जारी किए जाते रहे तो यह निर्वाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, और समाज मेंअस्थिरता भी पैदा कर सकते हैं।
क्या यह मामला चुनावी प्रचार में मुद्दा बनेगा?
अरविंद केजरीवाल के बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह मामला चुनावी प्रचार के दौरान कोई बड़ा मुद्दा बनेगा। आम आदमी पार्टीऔर भाजपा के बीच इस वक्त दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर तीखी टक्कर चल रही है। ऐसे में भाजपा यह मुद्दा उठाने का मौका नहीं छोड़नाचाहेगी कि केजरीवाल ने चुनावी माहौल में क्या बयान दिए हैं और इसके चलते आम आदमी पार्टी को चुनावी नुकसान हो सकता है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने केजरीवाल से जवाब मांगा है, और इस मामले में यदि केजरीवाल सही साबित नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई कीजा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और भविष्य के कदम
इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह निर्भर करेगा कि केजरीवाल चुनाव आयोग को किस तरह का जवाब देते हैं। चुनाव आयोग काफैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि वे केजरीवाल के बयान को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या यह बयान चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने केलिए था। यदि केजरीवाल का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो चुनाव आयोग उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
इस मामले में भविष्य में राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रह सकता है, लेकिन यह भी देखा जाएगा कि क्या चुनाव आयोगके फैसले से दिल्ली विधानसभा चुनाव में कोई खास बदलाव आता है।