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नई दिल्ली, 14 जुलाई 2026।

दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा वित्तीय समितियों और विभाग-संबंधित स्थायी समितियों (डीआरएससी) के नवनियुक्त अध्यक्षों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य समिति अध्यक्षों को उनके संवैधानिक, प्रक्रियात्मक और कार्यात्मक दायित्वों से अवगत कराना तथा विधानसभा की निगरानी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना था। इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि स्थायी समितियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक मजबूत आधार हैं और इनके माध्यम से सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि समितियां केवल सरकारी कामकाज की समीक्षा ही नहीं करतीं, बल्कि बेहतर शासन और जनहित में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी देती हैं।

स्थायी समितियां लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था हैं
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि समिति प्रणाली लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है। उन्होंने कहा कि सदन में होने वाली बहसें लोकतंत्र की पहचान होती हैं, लेकिन वास्तविक और विस्तृत काम स्थायी समितियों के माध्यम से होता है। यही समितियां सरकारी योजनाओं, विभागों के कामकाज, बजट खर्च और नीतियों का गहराई से अध्ययन करती हैं और तथ्यों के आधार पर अपनी अनुशंसाएं देती हैं। उन्होंने नवनियुक्त समिति अध्यक्षों को बधाई देते हुए कहा कि उनका दायित्व केवल बैठकों की अध्यक्षता करना नहीं है, बल्कि जनता के हितों की रक्षा करना, सरकार की जवाबदेही तय करना और पारदर्शी शासन सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि समिति अध्यक्षों के नेतृत्व से ही समितियां प्रभावी ढंग से कार्य कर सकती हैं।

जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने में समितियों की बड़ी भूमिका
अपने संबोधन में विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि आज के समय में शासन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यापक और जटिल हो गई है। स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, परिवहन, पर्यावरण, शहरी विकास और जनसेवाओं जैसे विषय आपस में जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों की नियमित समीक्षा और गहन अध्ययन आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि आज जनता केवल अपने प्रतिनिधियों से उम्मीद नहीं करती, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं की भी अपेक्षा रखती है। इन अपेक्षाओं को पूरा करने में स्थायी समितियां सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दिल्ली विधानसभा की नवगठित समितियां जनता के मुद्दों पर गंभीरता से काम करेंगी और शासन व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी बनाएंगी।

समितियों के माध्यम से सरकार की जवाबदेही होती है मजबूत
विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि स्थायी समितियां सरकारी विभागों के कामकाज, योजनाओं के क्रियान्वयन और बजटीय व्यय की विस्तृत समीक्षा करती हैं। इन समितियों की अनुशंसाएं सरकार को नीतियों में सुधार करने और कमियों को दूर करने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि समिति प्रणाली ऐसी व्यवस्था है जहां सदस्य राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर जनहित में गंभीर चर्चा करते हैं और शासन को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देते हैं।

संसदीय कार्य विशेषज्ञ वी. सतीश ने समिति अध्यक्षों को दिए महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में संसदीय कार्य विशेषज्ञ श्री वी. सतीश ने समिति अध्यक्षों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपरा बहुत समृद्ध रही है और मजबूत समितियां लोकतंत्र की मजबूती का आधार होती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में संसदीय कार्यवाही में व्यवधान और विधायी मानकों में आई गिरावट ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे विधानमंडलों की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखें। उन्होंने समिति अध्यक्षों से कहा कि वे बैठकों से पहले सभी दस्तावेजों का अध्ययन करें, विशेषज्ञों और संबंधित हितधारकों को आमंत्रित करें तथा सभी पक्षों को सुनने के बाद तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अनुशंसाएं तैयार करें। उन्होंने संसद और अन्य राज्य विधानसभाओं की अच्छी कार्यप्रणालियों से सीख लेने की भी सलाह दी।

मोहन सिंह बिष्ट ने बताया समितियों को लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ
दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि स्थायी समितियां विधायी परीक्षण और कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि समिति की सफलता उसके अध्यक्ष और सदस्यों की सक्रिय भागीदारी, नियमित बैठकों और गंभीर विचार-विमर्श पर निर्भर करती है। उन्होंने सभी समिति अध्यक्षों से पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

कार्यशाला में कई समिति अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस कार्यशाला में विधानसभा सचिव डॉ. युमनाम अरुण कुमार ने संस्थागत सहयोग के प्रभावी उपयोग पर अपने विचार रखे। वहीं सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च एंड गवर्नेंस के निदेशक डॉ. रामानंद ने जवाबदेही और जनविश्वास को मजबूत बनाने पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में लोक लेखा समिति के अध्यक्ष अजय कुमार महावर, सरकारी उपक्रम समिति के अध्यक्ष राज कुमार भाटिया, प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह यादव, स्वास्थ्य संबंधी विभागीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय गोयल, विकास संबंधी विभागीय स्थायी समिति के अध्यक्ष श्याम शर्मा, वित्त एवं परिवहन संबंधी विभागीय स्थायी समिति के अध्यक्ष रविंदर सिंह नेगी, प्राक्कलन संबंधी विभागीय स्थायी समिति के अध्यक्ष चंदन कुमार चौधरी तथा लोक उपयोगिताएं एवं नागरिक सुविधाएं संबंधी विभागीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संदीप सेहरावत सहित अन्य समिति अध्यक्षों ने भाग लिया।

समिति कार्यों के लिए बनेगा आधुनिक डिजिटल पोर्टल
कार्यशाला के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि दिल्ली विधानसभा समिति अध्यक्षों और सदस्यों के लिए एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित कर रही है। इस पोर्टल के माध्यम से समिति के कार्यपत्र, कार्यसूची, प्रतिवेदन और शोध सामग्री एक ही मंच पर उपलब्ध होगी। इससे समिति सदस्यों को बैठकों की बेहतर तैयारी करने, विषयों का गहराई से अध्ययन करने और अधिक प्रभावी निर्णय लेने में सुविधा मिलेगी।

विधायी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
दिल्ली विधानसभा द्वारा आयोजित यह कार्यशाला नवनियुक्त समिति अध्यक्षों को उनकी जिम्मेदारियों से परिचित कराने के साथ-साथ विधायी निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। विधानसभा अध्यक्ष श्री विजेन्द्र गुप्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि मजबूत और सक्रिय स्थायी समितियां लोकतंत्र को और सशक्त बनाएंगी तथा दिल्ली के नागरिकों के हितों की रक्षा करते हुए सुशासन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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