
नई दिल्ली, 19 जुलाई 2026।
दिल्ली सरकार ने जनकपुरी स्थित एक निजी विद्यालय के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गंभीर सुरक्षा कमियों, बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद के निर्देश पर शिक्षा निदेशालय ने विद्यालय प्रबंधन से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो विद्यालय के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इसमें विद्यालय का सरकारी अधिग्रहण और भूमि की लीज रद्द कराने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद बोले- बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार बच्चों की सुरक्षा और उनकी गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यालय को बच्चों की सुरक्षा के मामले में लापरवाही करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। आशीष सूद ने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान नहीं होता, बल्कि वहां बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी भी विद्यालय प्रबंधन की होती है। यदि कोई संस्था बच्चों के साथ हुई गंभीर घटना को छिपाती है, अवैध रूप से शाखा चलाती है या विद्यालय के धन का गलत इस्तेमाल करती है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सरकार विद्यालय का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है और विद्यालय को आवंटित भूमि की लीज रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
सात दिन में देना होगा जवाब
शिक्षा निदेशालय ने विद्यालय प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि विद्यालय का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
जांच में सामने आई कई गंभीर अनियमितताएं
शिक्षा विभाग की विभिन्न समितियों द्वारा किए गए निरीक्षण में विद्यालय के संचालन से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कई नियमों का पालन नहीं किया गया।
बाल यौन उत्पीड़न की घटना छिपाने का आरोप
जांच में सामने आया कि 30 अप्रैल 2026 को प्री-प्राइमरी शाखा में नर्सरी की एक छात्रा के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना हुई थी। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन ने कानून के अनुसार इस घटना की जानकारी शिक्षा निदेशालय को नहीं दी। सरकार ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही माना है।
64 सीसीटीवी कैमरे बंद मिले
पुलिस जांच के दौरान विद्यालय परिसर में लगे 64 सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए। जांच रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय ने कैमरों के रखरखाव का अनुबंध भी नहीं कराया था। सरकार का कहना है कि इससे बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई।
अवैध भवन में चल रही थी नर्सरी और केजी की कक्षाएं
जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय बिना किसी सरकारी अनुमति के नारंग कॉलोनी स्थित एक निजी आवासीय भवन से नर्सरी और केजी की कक्षाएं चला रहा था। इतना ही नहीं, भवन के बेसमेंट का उपयोग छोटे बच्चों की गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, जिसे सरकार ने सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है।
बाल सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नदारद
रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं भी मौजूद नहीं थीं। वहां चाइल्ड प्रोटेक्शन पॉलिसी, चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी और पॉक्सो अधिनियम के तहत प्रशिक्षित नोडल अधिकारी नियुक्त नहीं थे। इसके अलावा सुरक्षा कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया गया था।
पेयजल और अग्नि सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी कमी
निरीक्षण के दौरान विद्यालय में पेयजल की गंभीर कमी पाई गई। बताया गया कि अभिभावकों को बच्चों के साथ रोजाना दो से तीन पानी की बोतलें भेजनी पड़ रही थीं। इसके अलावा विद्यालय का फायर एनओसी वर्ष 2020 में ही समाप्त हो चुका था और उसे अब तक नवीनीकृत नहीं कराया गया था। सरकार ने इसे बच्चों की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ बताया है।
वित्तीय अनियमितताओं के भी लगे गंभीर आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभ के लिए रखे गए लगभग छह करोड़ रुपये दूसरी शाखा को तथाकथित “लोन सेटलमेंट” के नाम पर भेज दिए गए। इसके अलावा विद्यालय की निधि से प्रबंधक और ट्रस्टियों को कथित रूप से अनधिकृत प्रोफेशनल फीस का भुगतान भी किया गया। सरकार ने इन मामलों को गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है।
शिक्षकों का वेतन रोका, फिर भी बढ़ाई फीस
रिपोर्ट के अनुसार विद्यालय में शिक्षकों और कर्मचारियों को चार-चार महीने तक वेतन नहीं दिया गया। कई कर्मचारियों को पुराने वेतनमान के अनुसार भुगतान किया गया। दूसरी ओर विद्यालय ने वर्ष 2025-26 में उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद 15 प्रतिशत फीस बढ़ा दी, जिसे सरकार ने नियमों का उल्लंघन बताया है।
सरकार ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
इन सभी मामलों को गंभीर मानते हुए शिक्षा निदेशालय ने विद्यालय से पूछा है कि उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों न की जाए। सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 20(1) के तहत विद्यालय का प्रबंधन अपने अधीन लिया जा सकता है। साथ ही रियायती दर पर मिली भूमि की लीज रद्द करने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को भी अनुशंसा भेजी जा सकती है। इसके अलावा बाल सुरक्षा में लापरवाही और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने के आरोप में विद्यालय प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम तथा किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम के तहत आपराधिक कार्रवाई की भी संस्तुति की जा सकती है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि, सरकार का सख्त संदेश
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राजधानी का हर बच्चा सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करे। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही करने वाले संस्थानों के खिलाफ सरकार पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई करेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।