महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच मतभेद की खबरें अक्सर सामने आती रही हैं। हालांकि, इन अटकलोंको खारिज करते हुए मंगलवार को एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि सरकार में किसी तरह का विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे बीच कोई कोल्डवार नहीं है, सब कुछ ठंडा-ठंडा, कूल-कूल है।
सरकारी बैठकों में दूरी और समानांतर निर्णयों से बढ़ा तनाव
महायुति सरकार को बने कुछ ही महीने हुए हैं, लेकिन इसकी स्थिरता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस की कई अहमबैठकों में उपमुख्यमंत्री शिंदे की अनुपस्थिति, समानांतर विभागीय समीक्षा बैठकें, वार रूम तैयार करना और मुख्यमंत्री राहत कोष के समान चिकित्साराहत प्रकोष्ठ स्थापित करना—इन सभी मुद्दों को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद की अटकलें तेज हो गई थीं।
महायुति में न कोल्ड वार, न हॉट वार – शिंदे
इन सभी अटकलों को लेकर एकनाथ शिंदे ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महायुति की तीनों पार्टियों के बीच कोई कोल्ड वार नहीं है और नही कोई मतभेद। हमारा मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा करना है, और हम सब मिलकर काम कर रहे हैं। यह महाविकास आघाड़ी नहीं है, जहां मतभेद औरकोल्ड वार हो।
चिकित्सा राहत प्रकोष्ठ पर शिंदे की सफाई
मुख्यमंत्री राहत कोष पहले से ही मौजूद होने के बावजूद उपमुख्यमंत्री कार्यालय में अलग से चिकित्सा सहायता प्रकोष्ठ स्थापित करने पर सवाल उठरहे थे। इस पर शिंदे ने सफाई देते हुए कहा कि हम जनता की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। महायुति की तीनों पार्टियां मिलकर अधिक से अधिकजनसेवा करना चाहती हैं, इसलिए यह पहल की गई है। शिंदे के करीबी सहयोगी मंगेश चिवटे इस नए प्रकोष्ठ का नेतृत्व करेंगे।
फडणवीस ने किया शिंदे के फैसले का समर्थन
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे द्वारा चिकित्सा राहत प्रकोष्ठ शुरू करने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।जब मैं उपमुख्यमंत्री था, तब मैंने भी इसी तरह की पहल की थी। इसका उद्देश्य लोगों की मदद करना है।
राजनीतिक स्थिरता पर बनी रहेंगी निगाहें
हालांकि शिंदे और फडणवीस दोनों ने मतभेदों की खबरों को खारिज किया है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में इन घटनाक्रमों पर लगातार चर्चा बनीरहेगी। महायुति सरकार के समन्वय को लेकर भविष्य में क्या बदलाव देखने को मिलेंगे, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।