भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता रेखा गुप्ता ने दिल्ली की नौवीं मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। यह समारोह रामलीला मैदान में आयोजितकिया गया, जहां उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने उन्हें शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित थे। इस जीत के साथ भाजपा ने 27 साल बाद दिल्ली कीसत्ता में वापसी की और रेखा गुप्ता राज्य की चौथी महिला मुख्यमंत्री बनीं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ छह अन्य विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इन मंत्रियों में प्रवेश वर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। इनकेअलावा पंकज सिंह, आशीष सूद, रवींद्र इंद्रराज, कपिल मिश्रा और मनजिंदर सिंह सिरसा को भी कैबिनेट में शामिल किया गया है। पंकज सिंह बिहारसे हैं और राजपूत समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि रवींद्र इंद्रराज दलित समुदाय के प्रमुख चेहरे के रूप में माने जाते हैं। भाजपा ने अपनेमंत्रिमंडल में सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।
रेखा गुप्ता के शपथ ग्रहण समारोह में एनडीए के शीर्ष नेता भी उपस्थित रहे। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र केमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, जदयू नेता ललन सिंह और बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी शामिल हुए।इस समारोह को भाजपा की बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी दिल्ली में लंबे समय तक सत्ताबनाए रखने की योजना पर काम कर रही है।
रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग सीट से जीत दर्ज कर दिल्ली विधानसभा में प्रवेश किया। वह पेशे से वकील हैं और भाजपा में महासचिव एवं महिलामोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुकी हैं। उनका जन्म हरियाणा के जींद में हुआ था, लेकिन उनकी शिक्षा दिल्ली में हुई। भाजपाविधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया।
दिल्ली के नए उपमुख्यमंत्री प्रवेश वर्मा राजनीतिक रूप से एक मजबूत चेहरा हैं। वह पश्चिमी दिल्ली से सांसद रहे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंहवर्मा के पुत्र हैं। प्रवेश वर्मा ने अपने राजनीतिक करियर में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और उनकी छवि एक ऊर्जावान और समर्पित नेताके रूप में बनी हुई है।
भाजपा ने 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी की है। 70 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 48 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस पार्टी लगातार तीसरी बार एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। भाजपा कीइस जीत ने आम आदमी पार्टी की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया।
इस चुनाव में भाजपा ने आम जनता को आकर्षित करने के लिए कई बड़े वादे किए थे। पार्टी ने सरकारी स्कूलों के पुनर्निर्माण, मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं, गरीब महिलाओं को मासिक ₹2,500 की सहायता और 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं को जनता के सामने रखा, जिससे मतदाताओंका झुकाव भाजपा की ओर हुआ और चुनाव में उन्हें जीत मिली।
आम आदमी पार्टी (AAP) को इस चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में हारगए। केजरीवाल ने भाजपा की जीत को स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी अब रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी। यह हार आम आदमीपार्टी के लिए एक बड़ा झटका है और पार्टी को अपनी भविष्य की रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत होगी।
दिल्ली में भाजपा की इस जीत का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। यह भाजपा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का प्रमाण है औरपार्टी के लिए एक मनोवैज्ञानिक बढ़ावा है। यह जीत भाजपा को आगामी चुनावों में बढ़त दिला सकती है और पार्टी की स्थिति को और मजबूत बनासकती है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के सामने दिल्ली में कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। वायु और जल प्रदूषण की समस्या, बुनियादी ढांचे का विकास, सरकारी स्कूलोंऔर अस्पतालों में सुधार, महिला सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बनाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा। उन्होंने चुनाव प्रचार केदौरान कई योजनाओं की घोषणा की थी, जिन्हें लागू करने की जिम्मेदारी अब उनकी सरकार पर होगी।
रेखा गुप्ता के नेतृत्व में भाजपा की सत्ता में वापसी दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। भाजपा को 27 साल बाद सत्ता मिली है, जिससे पार्टीका राजनीतिक कद मजबूत हुआ है। नई सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन भाजपा की चुनावी रणनीति और जनता के बीच उसकी पकड़ नेयह जीत सुनिश्चित की। अब देखना होगा कि रेखा गुप्ता सरकार अपने वादों को किस हद तक पूरा कर पाती है और दिल्ली के विकास को नई दिशादेने में कितनी सफल होती है।