दिल्ली में जीत दर्ज करने के बाद अब बीजेपी की नजरें बिहार पर टिकी हैं। पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन मेंसोशल इंजीनियरिंग पर काम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में, बिहार में नीतीश कैबिनेट का विस्तार होने जा रहा है, जिसमें सातों खाली पद बीजेपीकोटे में दिए गए हैं।
कैबिनेट विस्तार में बीजेपी को पूरा समर्थन
शुरुआत में चर्चा थी कि कैबिनेट में बीजेपी से तीन और जेडीयू से दो नए चेहरों को शामिल किया जाएगा। हालांकि, अब यह साफ हो गया है कि सभीसात सीटें बीजेपी को दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले यह बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।
कैबिनेट में बीजेपी का बढ़ता प्रभाव
वर्तमान में, नीतीश सरकार में कुल 29 मंत्री हैं। इनमें 14 बीजेपी, 13 जेडीयू, 1 HAM और 1 निर्दलीय मंत्री शामिल हैं। अब कैबिनेट विस्तार केबाद बीजेपी के मंत्रियों की संख्या 21 हो जाएगी, जबकि जेडीयू के 13 मंत्री बने रहेंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार में बीजेपी की भूमिकापहले से अधिक प्रभावशाली हो गई है।
सियासी समीकरण: कौन कितना मजबूत?
विश्लेषकों का मानना है कि इस विस्तार के जरिए एनडीए सरकार में शक्ति संतुलन स्पष्ट रूप से बीजेपी के पक्ष में झुकता दिख रहा है। भले हीमुख्यमंत्री नीतीश कुमार जेडीयू से हैं, लेकिन मंत्रिमंडल में सबसे अधिक संख्या बीजेपी की होगी। दो उपमुख्यमंत्री (सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा) और 21 मंत्रियों के साथ बीजेपी सरकार में प्रमुख भूमिका निभा रही है।
कैसे बनी सहमति?
बीजेपी और जेडीयू के शीर्ष नेताओं के बीच हुई बैठक में यह तय किया गया कि जेडीयू का मंत्री कोटा पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि बीजेपी केपास अब भी विस्तार की गुंजाइश थी। इसी वजह से खाली सातों सीटें बीजेपी के हिस्से में आईं।
बीजेपी ने फिर बनाया नीतीश को ‘बड़ा भाई’
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 125 सीटें जीती थीं, जिसमें बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बावजूद, गठबंधन धर्मनिभाते हुए बीजेपी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी