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भारत की आर्थिक वृद्धि वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ाने की संभावना है. जिसमे एसएंडपी ग्लोबल मार्केटइंटेलिजेंस के नवीनतम पूर्वानुमान में सामने आया है. कि यह अनुमान वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और घरेलू नीतिगत बदलावों के बावजूद भारत कीस्थिर प्रगति को दर्शाता है. यह आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक के 6.6 प्रतिशत के अनुमान के करीब है. लेकिन एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के बदले 6.8 प्रतिशत के पूर्वानुमान से थोड़ा काम है. मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों, मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति और सरकारी खर्च इस वृद्धि को प्रभावित करेंगे. भारतकी आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख कारक आरबीआई और सरकार की नीतियों का सहयोग सहयोगात्मक दृष्टिकोण है.दरअसल फरवरी 2025 मेंआरबीआई ने लगभग 5 वर्षों में पहली बार रेपो दर को 25 आधार अंकों की कटौती के साथ 6.25 प्रतिशत कर दिया. इस कदम का उद्देश्य निवेशको बढ़ावा देना है. जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी. 2025 के केंद्रीय बजट में कर राहत उपायों को शामिल किया गया है. जिसमें आमआदमी की आय में वृद्धि होगी. और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा मिलेगा.

RBI कर सकता है कटौती
इस ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस को उम्मीद है. कि अप्रैल 2025 में आरबीआई 25 आधार अंकों की एक और कटौती कर सकता है. जिससे घरेलू मांगको और बढ़ावा मिलेगा. यह नीतिगत प्रयास वैश्विक अस्थिरता के प्रभाव को कम करने और भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिर वृद्धि सुनिश्चित करने में मददकरेगी. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति बनी हुई है. मौद्रिक और राजकोषीय समर्थन स्थिर होते मुद्रा स्थिति और प्रमुख क्षेत्र मेंवृद्धि की संभावनाओं के साथ देश सतत आर्थिक विस्तार की ओर अग्रसर है. आने वाले वर्ष यह तय करेंगे कि नीतिगत हस्तक्षेप भारत की आर्थिक गतिको लंबे समय तक बनाए रखने में कितने प्रभावित साबित होते हैं.दरअसल ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस ने भारत की जीडीपी को लेकर बढ़ती हुई दरों कोलेकर वित्त वर्ष 2026 में 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. जिसको लेकर आरबीआई ने फरवरी में रेपो दर को 25 के आधार के अंक घटाकर6.25 प्रतिशत कर दिया गया ताकि उधारी और निवेश को प्रोत्साहित किया जा सके.दरअसल इसमें सरकारी उपाय केंद्रीय बजट 2025 में कर राहतभी दी गई है जिसको लेकर लोंगो के आय और मांग में वृद्धि हो सके.

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