डॉ. उदित राज (पूर्व सांसद) समेत कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी का उत्थान अन्य दलों से भिन्न है. शुरुआत इसकी सामाजिकआंदोलन से हुई और बाद में राजनीतिक पार्टी – बहुजन समाज पार्टी बनी और अब इसका भाजपा करण हो गया है. सामाजिक न्याय और समानता कीसोच रखने वाले किसी समुदाय या दल के रहे होंगे. उनकी सहानुभूति इस आंदोलन के साथ रही है.कांग्रेस पार्टी की सहानुभूति कुछ ज़्यादा ही रहीपिछले चार दशक से आरोप पर आरोप कांग्रेस पर लगाते गए लेकिन कांग्रेस पार्टी ने पलट कर जवाब नहीं दिया. कांग्रेस पार्टी ने दलित आदिवासीऔर पिछड़ों को हिस्सेदारी दी और उसी को अंबेडकर विरोधी और दलित विरोधी बताकर हमला बोला जाता रहा अब जब बसपा का भाजपा करण होगया है तो चुप बैठा नहीं जा सकता बसपा का जन्म और ताक़त देने वाले ग़रीब दलित और कर्मचारी थे. इन्हें हुकुमरान बनाने का सपना दिखाया औरइसी भावना और लक्ष्य को देखते हुए कार्यकर्ता अपनी क़ुर्बानी देता रहा. अन्य पार्टियों जैसे उसका व्यवहार न रहा उसने कोई काम कराने और सहयोगकी आकांक्षा नहीं पाली. इन्होंने अपने खून-पसीने से सीचा है.
पहले लोग डर के कारण रखते थे जेब में झंडे
उदिन ने कहा कि गांवों में शुरू के दौर में छुप कर प्रचार और वोट डालते थे जब साइकिल से निकलते थे. तो झंडे को जेब में रखते थे ताकि गाँव केदबंग देख न लें वरना मारेंगे. मजदूरी से निकालकर चंदा देते थे और चुनाव प्रचार के लिए जब निकलते थे. तो घर से रोटी लेकर अमीरों के पैसे से येपार्टी नहीं बनी. जैसे सत्ता मिली अब इसको सब भूल गए कार्यकर्ताओं से मिलना तो दूर की बात हो गई कांशीराम जी द्वारा बढ़ाये गए नेतृत्व काअपमान करना और अंत में बाहर का रास्ता दिखा दिया. जो आंदोलन डॉ अंबेडकर के विचारों के आधार पर खड़ा हुआ आज वही विपरीत दिशा में चलपड़ा है. इसलिए निम्नलिखित सवाल पूछना जरूरी हो गया है. क्या यह सच नही है कि 2022 में उ. प्र. चुनाव के समय सुश्री मायावती ने कहा किसमाजवादी पार्टी नहीं जितनी चाहिए चाहे बीजेपी जीत जाए. यह सच नहीं है कि लोकसभा चुनाव के समय जब आकाश आनंद ने बीजेपी के ख़िलाफ़आक्रामक भाषण दिया तो 24 घंटे के अंदर कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया गया था.
अगर गठबंधन न होता न बनती भाजपा सरकार
उदित राज ने आगे कहा कि अगर लोकसभा चुनाव के दौरान बसपा इंडिया गठबंधन का हिस्सा होती तो बीजेपी केंद्र में सरकार न बना पाती. इस बातको राहुल गांधी जी ने रायबरेली में भी कहा भी था कि आकाश आनंद ने कहा कि कांग्रेस-सपा से आगामी विधान सभा चुनाव में समझौता करनाचाहिए नहीं तो जीरो ही रहेंगे. इससे अंदरूनी रूप से बीजेपी परेशान हो गई. बीजेपी का वोट बैंक और कहीं से बढ़ने वाला नहीं है. मुसलमान की बातउठाकर भी लाभ नहीं मिला. बीएसपी ही रह जाती और आकाश आनंद के रहते यह मुश्किल होता.