नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करतेहुए लोकसभा में इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से मांगे सुझाव
चुनाव आयोग (ECI) ने मतदाता सूची से जुड़ी समस्याओं और अन्य चुनावी मुद्दों के समाधान के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों सेसुझाव मांगे हैं। आयोग ने इन सुझावों को देने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल तय की है। इसके अलावा, चुनाव आयोग पार्टी अध्यक्षों और वरिष्ठ सदस्योंके साथ भी संवाद करेगा।
चुनाव प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पिछले हफ्ते एक सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिलानिर्वाचन अधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को राजनीतिक दलों के साथ नियमित बातचीत करने का निर्देशदिया। उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को और मजबूत बनाना है।
कानूनी प्रावधानों के तहत समाधान
मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सभी सुझावों और शिकायतों का समाधान कानूनी दायरे में ही किया जाएगा। इसके लिए आयोग ने राजनीतिकदलों को पत्र भेजकर उनके विचार मांगे हैं। सुझाव मुख्य रूप से ERO, DEO या CEO स्तर पर लंबित मुद्दों पर केंद्रित होंगे।
कानूनी दस्तावेजों का संदर्भ
ECI ने पत्र में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, मतदाता पंजीकरण नियम 1960 और चुनाव आचार संहिता 1961 का भी उल्लेखकिया है। इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का भी हवाला दिया गया है। ये सभी दस्तावेज ECI की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्धहैं।
सुझावों के समाधान की समय सीमा
मुख्य चुनाव आयुक्त ने निर्देश दिया है कि राजनीतिक दलों से प्राप्त सुझावों पर 31 मार्च 2025 तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इस रिपोर्ट में समाधानसे संबंधित सभी जानकारी और की गई कार्रवाई का ब्यौरा शामिल होगा।
राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील
चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि वे इस व्यवस्था का अधिकतम उपयोग करें और चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी औरविश्वसनीय बनाने में अपना सहयोग दें।