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दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के साथ ही एक बड़ा फैसला लिया गया है जिससे अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कुछ कम होगा. रेखा गुप्ता के नेतृत्ववाली दिल्ली सरकार ऐसे सभी मुकदमों को वापस लेने जा रही है जो आम आदमी पार्टी ने नेतृत्व वाली पूर्व सरकार और उसके तत्कालीन मंत्रियों द्धाराएलजी,केंद्र और ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ दायर किए गए.इसके लिए प्रक्रिया शुरु कर दी गई है एक हफ्ते के भीतर, संबधित अदालतों के जजों केसामने अर्जी दायर की जाएगी.अलग-अलग मामलों में अलग-अलग तारीख पर सुनवाई होनी है इसलिए अलग से अर्जी दायर कर संबधित अदालत सेउनमें जल्द सुनवाई की मांग की जाएगी.अदालतों में संबंधित सरकारों को प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों ने भी इस बात की पुष्टि की.एक वकील नेकहा अभी ऐसा कोई औपचारिक आदेश तो नहीं मिला है पर हां तय जरुर हुआ है कि मिलकर चलना है और ऐसा कोई काम नहीं करना है जिससेजनहित से जुड़े कामों में बाधा पैदा हो.ऐसा बयान एक दूसरे वकील ने भी दिया. उन्होनें कहा कि ये ऐसे मामले है जिनकी न पहले कोई जरुरत थी. और न अब सस्ता बदलने के बाद उन्हें जारी रखने की कोई वजह बची है उन्होनें कहा,ये मामले न केवल संसाधनों की बर्बादी है बल्कि राजनीति से भीप्रेरित है जिनका मकसद दिल्ली सरकार की योजनाओं और परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाना है.हालांकि सरकारी सूत्रों ने दावा किया है कि कानूनविभाग ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा उसमें की इस तरह के मुकदमे न केवल ब्यूरोक्रेसी के लिए मुश्किल पैदा की,बल्कि प्रशासन को भी पंगु बनादिया.जिससे नीतिगत फैसले लेने में और परियोजनाओं पर काम करने में भी देरी हुई है.

एलजी सचिवालय से मिली गई है मंजूरी
प्रस्ताव को एलजी सचिवालय से मंजूरी मिल गई है और केस वापस लेने और कार्यवाही शुरु कर दी गई है.स्वास्थ्य विभाग ने अर्जी दायर कर अपने पूर्वमंत्री सौरभ भारद्धाड द्धारा दायर केस को वापस लेने की अदालत से इजाजज मांगी है इन सब में से आठ से नौ मामले AAP मंत्रियों द्धारा ही दाखिलकिए गए है.विधि विभाग के इंटरनल नोट में इसका जिक्र है.उसके मुताबिक,2014 में सत्ता में आने के बाद,तत्कालीन सरकार ने प्रभारी मंत्री द्धारा भारतसरकार के खिलाफ बड़ी संख्या में अदालती मामले दायर किए गए थे.जिसमें संविधान के अनुच्छेद 239 और 239AA और GNCTD एक्ट,1991 के प्रावधानों के दायरे से बाहर उसके अधिकार पर सवाल उठाया गया था.इनमें से कुछ मामले दिल्ली विघुत नियामक आयोग के चेयरमैन, दिल्लीजल बोर्ड के लिए फंडिग,दिल्ली दंगो के मामलों में वकीलों की नियक्ति,विदेश में शिक्षकों का प्रशिक्षण और यमुना प्रदूषण पर हाई लेवस कमिटीआदि से जुड़े है.वर्तमान में लंबित कानूनी चुनौतियों में सबसे अहम दिल्ली सरकार अधिनियम 2023 को चुनौती देने वाली याचिका है जिसने राष्ट्रीयराजधानी में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग को संभालने के लिए एक नया वैधानिक प्रधिकरण बनाया है.याचिका में एलजी को सरकारीवकीलों की नियुक्ति का अधिकार देने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी गई है. मार्च 2023 में दायर एक याचिका में एलजी के उस फैसले को चुनौतीदी गई थी.जिसमें स्कूली शिक्षकों को कुछ शर्तों के साथ प्रशिक्षण के लिए फिनलैंड भेजने की अनुमति दी गई थी.

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