महाराष्ट्र में इन दिनों मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को लेकर गहमागहमी बनी हुई है। इसी बीच शिवसेना यूबीटी के मुखपत्र ‘सामना’ में बीजेपी परजोरदार हमला बोला गया है। सामना में लिखा गया है कि देवेंद्र फडणवीस को छत्रपति शिवाजी महाराज से ज्यादा औरंगजेब महत्वपूर्ण लगता है।शिवसेना ने आरोप लगाया कि फडणवीस सिर्फ भाषण देते हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं करते।
नागपुर दंगों पर उठाए सवाल
सामना में नागपुर में हुए दंगों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लेख में कहा गया है कि औरंगजेब की कब्र को लेकर नागपुर में हिंसा भड़क उठी, जिसमें पुलिस पर हमले और आगजनी की घटनाएं हुईं। सवाल किया गया कि अगर ये दंगाई बाहरी थे, तो पुलिस और खुफिया एजेंसियां क्या कररही थीं?
बीड और परभणी में बढ़ते अपराध
शिवसेना यूबीटी ने आगे कहा कि बीड में फिरौती और हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। परभणी में भी सांप्रदायिक तनाव देखागया। कोकण में होली के दौरान नवहिंदुत्ववादी तत्वों ने दंगे भड़काने की कोशिश की।
छत्रपति शिवाजी से ज्यादा औरंगजेब को महत्व
शिवसेना ने आरोप लगाया कि फडणवीस और बीजेपी को छत्रपति शिवाजी महाराज से ज्यादा औरंगजेब महत्वपूर्ण लगता है। लेख में कहा गया किछत्रपति शिवाजी महाराज का राज धर्म पर आधारित था और सबको साथ लेकर चलने का विचार था, जो बीजेपी की विचारधारा से मेल नहीं खाता।
नवहिंदुत्ववादियों ने बिगाड़ा माहौल
सामना में लिखा गया है कि ‘छावा’ फिल्म के प्रदर्शन के बाद से ही कुछ नवहिंदुत्ववादी तत्व औरंगजेब की कब्र के खिलाफ आक्रामक हो गए हैं। इनलोगों ने महाराष्ट्र का माहौल खराब करने का काम किया।
बाबरी मस्जिद से तुलना करना नौटंकी
सामना में कहा गया कि औरंगजेब की कब्र को बाबरी मस्जिद से तुलना करना और उसे हटाने के लिए कारसेवा की घोषणा करना महज एक नौटंकीहै। केंद्र सरकार को कब्र की सुरक्षा हटाकर इस विवाद को खत्म करना चाहिए।
बीजेपी ने दिया नया शिवाजी
शिवसेना ने तंज कसा कि ओडिशा से बीजेपी सांसद प्रदीप पुरोहित ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिवाजी का अवतार बताकर एक नया शिवाजी पेशकर दिया है। इससे यह प्रतीत होता है कि बीजेपी मूल छत्रपति शिवाजी को खत्म कर एक नया प्रतीक खड़ा करना चाहती है।
शिवाजी महाराज के नाम पर राजनीति
सामना में लिखा गया कि बीजेपी की रणनीति छत्रपति शिवाजी और संभाजी महाराज के महत्व को कम करके औरंगजेब की कब्र को मुद्दा बनाकरधार्मिक ध्रुवीकरण करना है। शिवसेना ने आरोप लगाया कि बीजेपी असल में शिवाजी महाराज के सिद्धांतों को नहीं अपनाना चाहती।
शिवाजी महाराज का अपमान
लेख में कहा गया कि छत्रपति शिवाजी महाराज का सम्मान तब ही हो सकता है जब उनके विचारों को अपनाया जाए, न कि सिर्फ उनके नाम काराजनीतिक लाभ उठाया जाए।