बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत कईवरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। यह आरएसएस की पांचवीं बैठक थी, जिसमें विभिन्न हिंदू संगठनों और इस्कॉन जैसे प्रमुख धार्मिक समूहों के प्रतिनिधियों नेभी भाग लिया। बैठक में देश को मजबूत बनाने और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
महान विभूतियों को दी श्रद्धांजलि
बैठक की शुरुआत में हाल ही में दिवंगत हुए कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दी गई। इनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, प्रसिद्ध तबलावादकज़ाकिर हुसैन, सुप्रसिद्ध गायक श्याम बेनेगल, अर्थशास्त्री बिबेक देवरॉय, केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस. एम. कृष्णाशामिल थे।
मणिपुर में शांति प्रयासों का जिक्र
आरएसएस के सरकार्यवाह सीआर मुकंदा ने मणिपुर में किए गए शांति प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मणिपुर में स्थिति गंभीर थी औरसरकार के साथ-साथ आरएसएस ने भी शांति स्थापित करने के लिए प्रयास किए। मुकंदा ने कहा कि मणिपुर के घावों को भरने में अभी समय लगेगा, लेकिन संघ लगातार सकारात्मक बदलाव के लिए प्रयासरत है।
परिसीमन पर विचार
सीआर मुकंदा ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) के मुद्दे पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट कर दिया है कि सीटों केविस्तार का अनुपात वर्तमान स्थिति के आधार पर ही होगा। मुकंदा ने कहा कि इस विषय को लेकर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह सेराजनीति से प्रेरित लगते हैं। उन्होंने आगाह किया कि आपसी विवाद देशहित में नहीं है।
स्थानीय भाषा को सर्वोपरि मानने की बात
भाषा विवाद पर सीआर मुकंदा ने कहा कि आरएसएस मातृभाषा को सर्वोपरि मानता है। उन्होंने कहा कि तीन-भाषा नीति को लेकर संघ ने कभी कोईप्रस्ताव पारित नहीं किया है। उनके अनुसार, मातृभाषा के साथ-साथ रोजगार और कामकाज के लिए अन्य भाषाओं का ज्ञान भी आवश्यक है। उन्होंनेनागरिक पहचान और पंजीकरण को लेकर भी जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
स्थानीय भाषा में रुपये का प्रतीक
सीआर मुकंदा ने सुझाव दिया कि रुपये के प्रतीक को स्थानीय भाषा में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सामाजिक नेताओं कोचर्चा करनी चाहिए, न कि राजनीतिक दलों को।
बैठक का समापन भारतीय संस्कृति और सामाजिक एकता को सुदृढ़ बनाने के संकल्प के साथ हुआ। आरएसएस ने देश को मजबूत बनाने औरसामाजिक एकता को बनाए रखने के अपने प्रयासों को दोहराया।