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मणिपुर में जातीय हिंसा की गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों का छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार (22 मार्च, 2025) को राज्य के दौरे पर पहुंचा। इस टीम का नेतृत्व न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने किया। प्रतिनिधिमंडल में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रमनाथ, न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश, न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह शामिल थे।

इंफाल से चुराचांदपुर तक का दौरा
प्रतिनिधिमंडल ने इंफाल पहुंचने के बाद हेलीकॉप्टर से चुराचांदपुर का रुख किया। मणिपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. कृष्णकुमारऔर न्यायमूर्ति गोलमेई गैफुलशिलू ने इंफाल में न्यायाधीशों का स्वागत किया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने 27 असम राइफल्स कैंप में नाश्ता कियाऔर फिर चुराचांदपुर के राहत शिविर का दौरा किया।

जातीय विवाद के चलते एन. कोटिश्वर सिंह का इंफाल में रुकना
न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह, जो मैतेई समुदाय से हैं, ने चुराचांदपुर का दौरा नहीं किया। चुराचांदपुर बार एसोसिएशन ने पहले ही अपील की थी किमैतेई समुदाय के न्यायाधीश जिले में न आएं, जिससे शांति और व्यवस्था बनी रहे। यही कारण था कि मणिपुर हाई कोर्ट के दोनों न्यायाधीशों ने भीदौरे से दूरी बनाए रखी।
लीगल सर्विस कैंप का वर्चुअल उद्घाटन
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने मणिपुर के सभी जिलों में लीगल सर्विस और मेडिकलकैंप का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके साथ ही इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम और उखरूल जिलों में नए लीगल एड क्लीनिक का भी शुभारंभ किया।

जयराम रमेश का पीएम मोदी पर कटाक्ष
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के मणिपुर दौरे पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीमकोर्ट के जज मणिपुर का दौरा कर सकते हैं तो प्रधानमंत्री अब तक क्यों नहीं गए। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा,

राष्ट्रपति शासन लागू करने में देरी पर सवाल
जयराम रमेश ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त, 2023 को कहा थाकि राज्य में संवैधानिक व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। इसके बावजूद राष्ट्रपति शासन लगाने में 18 महीने क्यों लग गए?


गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना
कांग्रेस नेता ने गृह मंत्री अमित शाह की भी आलोचना करते हुए कहा कि संसद में गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा के दौरान मणिपुर की स्थिति परकोई ठोस बयान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री मिजोरम तो गए, लेकिन मणिपुर जाने से क्यों परहेज किया?

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