संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक अभियानों में खतरा है और शांति सैनिकों को अब नॉन स्टेटएक्टर्स, आतंकियों और सशस्त्र बलों से खतरा है. साथ ही उन्होंने कहा कि आज जब वैश्विक संघर्ष बढ़ गए हैं और शांति सैनिकों के खिलाफ हमले भीबढ़े हैं.ऐसे वक्त में शांति सैनिकों के खिलाफ अपराध करने वाले लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एकअहम बैठक में पी हरीश ने ये बात कही.संयुक्त राष्ट्र में शांति सैनिक अभियानों को आधुनिक बनाने के मुद्दे पर हुई बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधिपी हरीश ने कहा कि ‘संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिक अभियानों को अब कई खतरों का सामना करना पड़ता है.जिनमें सशस्त्र बलों की मौजूदगी, आतंकियों और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क का खतरा शामिल है. साथ ही तकनीक के विकास ने चुनौतियों को और बढ़ा दिया है. जिसमें घृणाअपराध, नए आधुनिक हथियार, ड्रोन्स, आईईडी आदि शामिल हैं.
शांति सैनिकों को पढ़ेगा जूझना
शांति सैनिकों को अब इन सभी चीजों से जूझना पड़ता है. पी हरीश ने कहा कि ‘शांति सैनिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए. इससमय जटिल संघर्षों के समय में हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे शांति सैनिकों को पर्याप्त सुरक्षा मिले और शांति सैनिकों के खिलाफअपराध करने वालों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए.उन्होंने कहा कि ‘भारत अपने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना केंद्रों में आधुनिक चुनौतियों केअनुसार अपने पाठ्यक्रमों को तैयार करने का इच्छुक है. ये केंद्र दो दशकों से अधिक समय से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों को प्रशिक्षण दे रहेहैं. हरीश ने कहा कि शांति सैनिक अभियानों के लिए आधुनिक सर्विलांस, संचार और डेटा एनालिटिक टूल्स की जरूरत है.साथ ही त्वरित प्रतिक्रियाक्षमताओं को भी बेहतर करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि शांति सैनिक अभियानों को पर्याप्त फंडिंग भी मिलनी चाहिए और शांति अभियानों में सबसेज्यादा अपने सैनिकों को भेजने वाले वैश्विक दक्षिण के देश इसे लेकर बेहद चिंतित हैं. बता दें कि शांति सैनिक अभियानों में भारत के 5384 सैनिकतैनात हैं और भारत सबसे बड़े योगदानकर्ता देशों में शामिल है.
अभियानों को बनाने के मुद्दे
संयुक्त राष्ट्र में शांति सैनिक अभियानों को आधुनिक बनाने के मुद्दे पर हुई बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि ‘संयुक्त राष्ट्र केशांति सैनिक अभियानों को अब कई खतरों का सामना करना पड़ता है, जिनमें सशस्त्र बलों की मौजूदगी, आतंकियों और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्कका खतरा शामिल है. साथ ही तकनीक के विकास ने चुनौतियों को और बढ़ा दिया है. जिसमें घृणा अपराध, नए आधुनिक हथियार, ड्रोन्स, आईईडीआदि शामिल हैं. शांति सैनिकों को अब इन सभी चीजों से जूझना पड़ता है. पी हरीश ने कहा कि ‘शांति सैनिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताहोनी चाहिए. इस समय जटिल संघर्षों के समय में हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारे शांति सैनिकों को पर्याप्त सुरक्षा मिले और शांति सैनिकोंके खिलाफ अपराध करने वालों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए.