कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता में शिक्षा, महिला, बाल, युवा, और खेल संबंधी स्थायी समिति ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के लिएअपनी DFG रिपोर्ट जारी की है.इसमें उन्होनें खासतौर पर प्रमुख सिफारिशें और उनके संबंधित सिफारिश संख्या भी दी गई हैं.इसमें इन्होनें
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलने वाले मानदेय को दोगुना करने को लेकर तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कल्याण बोर्ड का गठन की बात कही है.
इस दौरान उन्होनें कहा कि विभिन्न जाति समुदायों में एनीमिया और कुपोषण का पता करने के लिए एक भू-सामाजिक जाति जनगणना कराने कीजरूरत है.इसको लेकर खास तौर पर प्रयास किया जाए.जिससे कि सभी आंगनवाड़ियों को सक्षम आंगनवाड़ी एवं शिशुगृह केंद्र में उन्नत हो सके. जहाँपर 6 माह से 6 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए बाल देखभाल सुविधाएँ पूर्ण रुप से उपलब्ध कराई जाए.दरअसल वर्ष 2025 के अंत तकआंगनवाड़ियों में लगभग 2.13 लाख रिक्त पदों को भरना है.
मातृ वंदना योजना से मिलगा गर्भवती महिलाओं को लाभ
इसमें खासतौर पर प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में संशोधन करके सभी गर्भवती महिलाओं को लाभ प्रदान करने से लेकर महिलाओं को दी जाने वालीराशि को ₹5,000 से बढ़ाकर न्यूनतम ₹6,000 करना है. दरअसल 2032 तक मुख्य उद्देश्य है कि कुपोषण और एनीमिया उन्मूलन के लिए एकराष्ट्रीय मिशन की स्थापना की जाए जिसमें कुपोषण मुक्त भारत हो.आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों द्वारा POSHAN ट्रैकर ऐप का उपयोगकरने में आ रही कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए इसका मूल्यांकन करना जैसे इसके मुख्य उद्देश्य रहेंगें.मणिपुर जैसे स्थानो पर भी मुख्य विचार हैजिसमें मणिपुर में आंतरिक रूप से विस्थापित महिलाओं और बच्चों के लिए एक विशेष समिति का गठन करना है. क्योंकि वहां के लोगों को पिछले21 महीनों में अभूतपूर्व संकट का सामना करना पड़ा है.इसमें NCW से लेकर मणिपुर में कानून-व्यवस्था से संबंधित मुद्दों पर ध्यान देना है क्योंकि वहांके हितधारकों का सिस्टम में भरोसा और आत्मविश्वास खत्म हो गया है.बच्चों की शिक्षा को लेकर इस पर खासतौर जोर दिया जा रहा है. कि बच्चों केकल्याण से जुड़े सभी कानूनों,नीतियों और हितधारकों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए एक समग्र राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना है.