दरअसल ये बात बस दो साल पहले की है पूरे देश में शाहरुख खान की ताजा ताजा रिलीज फिल्म ‘पठान’ का हल्ला मचा हुआ था. फिल्म की रिलीजको अभी हफ्ता भर भी नही हुआ था और इसी बीच उन्हें पुणे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का न्यौता देने महाराष्ट्र के तत्कालीन सांस्कृतिक मंत्री सुधीरमुनगंटीवार पहुंच गए साथ में मीडिया के कुछ गिनती के लोग भी गए और इसी मौके पर उनका शायद आखिरी फोटो भी प्रेस के लोग खींच सके. इसदौरान उनसे मौजूदा दौर की फिल्मों पर बात चली. बात शाहरुख की फिल्म ‘पठान’ तक पहुंची तो वह तुरंत बोले, “मत भूलिए, अजय देवगन कीफिल्म ‘दृश्यम 2’ भी तो हिट हुई है.कम लोग ही जानते होंगे कि अजय देवगन के पिता वीरू देवगन को स्टंट निर्देशक बनाने में मनोज कुमार का बड़ाहाथ रहा है. फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में मनोज कुमार ने वीरू देवगन को बतौर स्टंट निर्देशक लॉन्च किया. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के एकहाथ से मोटरसाइकिल चलाने वाले सीन में अमिताभ के डुप्लीकेट का काम वीरू देवगन ने ही किया है. भारत सरकार की तरफ से मिलने वाले सिनेमाके सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित हो चुके अभिनेता, लेखक, निर्माता, निर्देशक मनोज कुमार आखिर तक शाहरुखखान को माफ नहीं कर सके.उस दिन भी उनकी बातों से लगा कि फिल्म ‘ओम शांति ओम’ में उड़ाए गए अपने मजाक को वह भूले नहीं है.
85 साल की उम्र में याददाश्त थी जबरदस्त
85 साल की उम्र में भी उनकी याददाश्त तब तक ठीक ही थी बातचीत के दौरान जैसे ही शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ की रिकॉर्डतोड़ कामयाबीका जिक्र चला, वह अजय देवगन का नाम बाचतीत ले आए. जब उनके ये पूछा गया कि आखिरी फिल्म उन्होंने सिनेमाघर में कौन सी देखी तो वहबोले “मैंने आखिरी बार आमिर खान की फिल्म ‘थ्री इडियट’ ही सिनेमाघर में देखी थी.आज के दौर की फिल्मों के बारे में मनोज कुमार का कहना थाआज की फिल्में ठीक वैसी बन रही हैं जिस तरह से गुलाब जामुन के नाम में तो जामुन होता है लेकिन उसमें जामुन का स्वाद नहीं मिलता 21वें पुणेइंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में मनोज कुमार को सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया जाना था लेकिन स्वास्थ्य कारणों की वजहसे मनोज कुमार वह इस कार्यक्रम में जाने की हालत में नहीं थे. इसीलिए महाराष्ट्र के तत्कालीन सांस्कृतिक मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने 31 जनवरी कोउन्हें उनके घर पहुंचकर ही सम्मानित कर दिया.
रोज पढ़ते थे अखबार
मनोज कुमार को जब तक होश रहा वह अखबार रोज पढ़ते रहे. टेलीविजन देखना उन्होंने कई साल पहले ही पूरी तरह बंद कर दिया था अखबार में भीवह राजनीति से जुड़ी खबरें ही पढ़ते रहे. उस दिन बातों बातों में अभिनेता धर्मेंद्र का किस्सा भी निकल आया उनका नाम सुनते ही मनोज जोर से ठहाकालगाकर हंसने की कोशिश करने लगे. कम लोगों को ही पता है कि जब फिल्मों में अपना काम न बनते देख धर्मेंद्र ने एक बार बंबई (अब मुंबई) छोड़नेकी तैयारी कर ली थी. पंजाब वापस जाने का टिकट ले लिया था और ट्रेन पकड़ने के लिए वह निकल भी चुके थे कि मनोज कुमार को इसका पताचल गया. मनोज कुमार ही धर्मेंद्र को ट्रेन से उतारकर वापस ले आए थे इस किस्से का जिक्र चला तो मनोज कुमार के चेहरे का नूर देखने लायक था.