नई दिल्ली: मणिपुर में लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शनिवार को मैतेई और कुकीसमुदायों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य पारस्परिक समझ और विश्वास को बढ़ाकर शांति की दिशामें ठोस योजना बनाना था।
विश्वास और सहयोग पर केंद्रित रही बैठक
इस बैठक का मुख्य फोकस दोनों समुदायों के बीच विश्वास की बहाली और मणिपुर में सामान्य स्थिति लौटाने की रणनीति तैयार करना रहा। सरकार नेविशेष रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपसी समरसता को बढ़ावा देने पर बल दिया।
प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी
मीटिंग में ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (AMUCO) और फेडरेशन ऑफ सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन (FOCS) के प्रतिनिधियोंसहित 6 सदस्यीय मैतेई दल ने हिस्सा लिया। वहीं कुकी समुदाय की ओर से 9 प्रतिनिधि बैठक में शामिल हुए। केंद्र की ओर से पूर्व खुफिया ब्यूरोअधिकारी ए.के. मिश्रा भी मौजूद रहे।
गृह मंत्री अमित शाह ने पहले दी थी संकेत
गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में संसद में मणिपुर मुद्दे पर चर्चा के दौरान जानकारी दी थी कि सरकार दोनों समुदायों के साथ अलग-अलग बैठकें कररही है और जल्द ही संयुक्त बैठक की योजना है। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हिंसा का अंत कर शांति स्थापित करना है। शाह नेयह भी बताया कि बीते चार महीनों में कोई मृत्यु नहीं हुई है, लेकिन राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की स्थिति को देखते हुए इसे पर्याप्त नहींमाना जा सकता।
राष्ट्रपति शासन और राजनीतिक परिवर्तन
मणिपुर में राजनीतिक अस्थिरता के चलते 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जो मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे केबाद आया। मणिपुर में मई 2023 से चली आ रही जातीय हिंसा में अब तक करीब 260 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों नागरिकों को अपनेघरों से विस्थापित होना पड़ा है।
राज्यपाल की सक्रिय भूमिका
पूर्व गृह सचिव अजय कुमार भल्ला को मणिपुर का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उन्होंने 3 जनवरी को पदभार संभालने के बाद से लगातार जनतासे संवाद किया और शांति की अपील की है। थानों से लूटे गए हथियारों को लौटाने की उनकी अपील के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं, जिससे प्रशासन को राहत मिली है।